विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
वर्षांत समीक्षाः वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय)
प्रविष्टि तिथि:
18 DEC 2018 2:16PM by PIB Delhi
वैज्ञानिक और प्रौदयोगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) आज दुनिया के सबसे बड़े सरकार की ओर से वित्त पोषित विकास एवं अनुसंधान संगठनों में से एक है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बड़े क्षेत्र को कवर करता है। इसकी 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 आउटरीच सेंटर और पांच इकाइयां हैं। सीएसआईआर की विकास एंव अनुसंधान (आर एंड डी) विशेषज्ञता और अनुभव लगभग 4000 सक्रिय वैज्ञानिकों में सन्निहित हैं और इसमें लगभग 7000 वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मी सहयोग करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री सीएसआईआर के प्रमुख होते हैं।
सीएसआईआर के लिए वर्ष 2018 बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष की कुछ प्रमुख उपलब्धियां निम्नानुसार हैं:
सीएसआईआर ऊष्मायन केंद्र (Incubation Centres)
सीएसआईआर विश्व स्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है और उष्मायन केंद्रों की स्थापना करने में जुटा हुआ है, जो चिन्हित ज्ञानक्षेत्रों में काम कर रहे हैं। सीएसआईआर इनक्यूबेशन सेंटर में बहुत तरह की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
- फूड और फूड प्रोसेसिंग उद्योग के लिए काम करने वाले सीएसआईआर-एसएफटीआरआर को टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर “Nutra-Phyto Incubation Centre” को कर्नाटक सरकार के सहयोग से स्थापित किया गया है। यह उद्योग को स्थापित करने और उसे व्यापारिक लिहाज से आग बढ़ाने की दिशा में काम करता है ताकि उन्हें कामर्शियल उद्यम के रूप में स्थापित किया जा सके।
- सीएसआईआर की घटक प्रयोगशाला सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलूयूर बॉयोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद ने अटल इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जो स्टार्ट-अप के लिए वैज्ञानिक विशेषज्ञता, आधारभूत संरचना और व्यापार प्रबंधन को बढ़ावा देने का काम करता है। अभी यहां 15 कंपनियों को विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
भारत की पहली जैव ईंधन संचालित उड़ान: विमानन ग्रेड बायोफ्यूल के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकी
सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून की पेटेंट प्रौद्योगिकी पर आधारित स्वदेशी विमानन जैव ईंधन द्वारा संचालित एक विमान ने 27 अगस्त, 2018 को देहरादून से दिल्ली के लिए ऐतिहासिक उड़ान भरी। इस सफलता के साथ ही भारत उन देशों के क्लब में शामिल हो गया जो उड्डयन के क्षेत्र में जैव ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। जैन ईंधन के इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 15 फीसदी, सल्फर ऑक्साइड (SOx) के उत्सर्जन में 99 फीसदी में कमी आएगी। इससे उम्मीद की जा सकती है कि विमान ईंधन की आपूर्ति, संभावित कीमत किफायती होगी। इस संदर्भ में अभी तक जितना भी फीडबैक मिला है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि विमान ऑपरेटर के लिए इंजन का रखरखाव किफायती होगा।
सरस पीटी1एन फ्लाइट का सफल उद्घाटन
सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज (सीएसआईआर-एनएएल) ने 14 सीट वाले सरस पीटी1एन (SARAS PT1N) विमान का निर्माण किया है। इस विमान ने 21 फरवरी 2018 को सफलतापूर्वक उड़ान भरी। पीटी1एन का शुरुआती उद्देश्य इसके 20 विमानों के परफार्मेंस का मूल्यांकन करना है। इससे एकत्रित जानकारियों के बाद 19 सीटों वाले सरस एमकेआईआई वर्जन का विमान तैयार किया जाएगा।
सीएसआईआर-एनएएल को एचएएल से एलसीए तेजस का निर्माण करने के लिए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर मिला है
कम्पोजिट टेक्नोलॉजी उन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में से एक है, जो एलसीए को चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाती है। सीएसआईआर-एनएएल का एलसीए कार्यक्रम के साथ समझौता हुआ है। इसके तहत मूल रूप में 2 विमान तैयार किए जाएंगे। इस तकनीकी के जरिये 5 विमान तैयार होंगे और उसके 8 विमान निर्मित किए जाएंगे। इसमें एसपी1 से लेकर एसपी20 वाले विमान शामिल होंगे। शुरुआती तौर पर देखा जाए तो आईओसी 20 सेट तैयार करने के करीब है। सीएसआईआर-एनएएल द्वारा विकसित इस स्वदेसी प्रौद्योगिकी का उपयोग फिन, रूडर, विंग स्पर्स और फेयरिंग्स, सेंटर फ्यूजलेज और मेन लैंडिंग गियर घटकों जैसे एलसीए के प्राथमिक वायु-फ्रेम घटकों को साकार करने में किया गया है।
दृष्टी ट्रांसमीसोमीटरः भारतीय हवाई अड्डे पर स्थापित
दृष्यता मापने वाला दृष्टी एक स्वदेशी और प्रभावी सिस्टम है। सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (सीएसआईआर-एनएएल) देश में इस तकनीक को विकसित करने वाला एकमात्र संगठन है। यह हवाई अड्डे के संचालन के लिए उपयोगी है। रनवे पर यह पायलटों की दृश्यता की जानकारी देता है। देश भर में कई हवाई अड्डों पर Drishti Transmissometers को स्थापित किया गया है।
सिकल सेल एनीमिया को लेकर सीएसआईआर मिशन
सिकल सेल एनीमिया को लेकर सीएसआईआर काम कर रहा है। इस परियोजना में सिकल सेल एनीमिया के आनुवांशिक आधार को समझने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए हाइड्रोक्साइरा थेरेपी, दवा और विकास के लिए आनुवंशिक आधार को समझने की योजना है। एससीए के उपचार के लिए जीनोम और स्टेम सेल शोध दृष्टिकोण, विकास और जमीन पर कार्यान्वयन एक किफायती, सटीक और त्वरित डायग्नोस्टिक किट है।
सीएसआईआर के नए पेटेंट क्लॉट बस्टर, पेगिलेटेड स्ट्रेटोकोकिनस स्ट्रोक के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव
सेरेब्रल धमनियों में एंबोली, थ्रोम्बस या एथेरोस्क्लेरोसिस के चलते मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में आने वाली दिक्कतों की वजह से होने वाले अघात को इस्कीमिक स्ट्रोक कहते हैं। आश्चर्य की बात है कि पश्चिमी देशों की तुलना में मस्तिष्क आघात की समस्या अधिक है और भारत में मामले 87 फीसदी इस्कीमिक स्ट्रोक के होते हैं। सीएसआईआर-इमटेक और इपीजेन ने इस्कीमिक स्ट्रोक के इलाज के लिए पीजीलेटेड स्ट्रेप्टोकीनासे विकसित करने के लिए करार किया है।
सीएसआईआर-आईजीआईबी और डॉ लाल पथ लैब्स में प्रचलित आनुवंशिक रोगों के निदान के लिए समझौता
आनुवंशिक बीमारियां, हालांकि व्यक्तिगत रूप से दुर्लभ हैं, लेकिन 70 मिलियन से अधिक भारतीयों को संचयी रूप से प्रभावित करती हैं। सीएसआईआर-आईजीआईबी ने 27 आनुवांशिक बीमारियों की जांच के लिए लाइसेंस की खातिर डॉ लाल पाथलैब्स के साथ एक समझौता किया ताकि वाणिज्यिक लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा सके। ये परीक्षण साल भर में शुरू होने की संभावना है।
नॉन वैस्क्यूलर सेल्फ एक्सपेंडेबल स्टेंट
कई पित्त संबंधी बीमारियों के उपचार में स्टेंट का उपयोग किया जाता है। दो प्रकार के बिलियरी स्टेंटों का व्यापक उपयोग मिलता है। दो तरह के स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है। पहला प्लास्टिक स्टेंट होता है जबकि दूसरा सेल्फ एक्सपेंडेबल मेटेलिक मेलिग्नेंट स्ट्रिकचर्स वाला होता है। इनमें में से सेल्फ एक्सपेंडेबल मेटेलिक मेलिग्नेंट स्ट्रिकचर्स स्टेंट महंगा होता है। सीएसआईआर-एससीएल की साझेदारी में एक स्टार्टअप शुरू किया गया है जो कि नए तरह का सेल्फ एक्सपेंडेबल स्टेंट विकसित कर रहा है। यह बहुत ही सामान्य तरीके का स्टेंट होता है जिसकी लागत मौजूदा स्टेंट से बेहद किफायती होगी। इस संदर्भ में टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
नेत्रहीन लोगों के लिए सीएसआईआर का दिव्य नयन
नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल ऑर्गनाइजेशन ने एक पर्सनल रीडिंग मशीन विकसित की है जिसका नाम है- दिव्या नयन है। इसकी मदद से हिंदी और अंग्रेस में उपलब्ध प्रिंटेड और डिजिटल किताबों को पढ़ा जा सकता है। दिव्य नयन का विभिन्न आयु समूह के कई नेत्रहीन व्यक्तियों पर परीक्षण किया गया है। इसे काफी लोकप्रियता मिलेगी।
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2018: इंजीनियरिंग/प्रौद्योगिकी छात्रों के बीच नॉन-स्टॉप 36-घंटे की डिजिटल प्रतियोगिता
सीएसआईआर ने स्मार्ट इंडिया हैकथॉन-2018-सॉफ़्टवेयर संस्करण में सक्रिय रूप से भाग लिया और सीएसआईआर-एनसीएल, पुणे में सफलतापूर्वक 36-घंटे का ग्रैंड फिनाले आयोजित किया था। इस पहल का सीएसआईआर प्रमुख हिस्सेदार है। कई दौरों की जद्दोजहद के बाद, आखिरकार, देश के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के 318 छात्रों और 75 शिक्षक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद चयनित टीमों में तीन टीमों को पुरस्कार मिले। पहला पुरस्करा 1,00,000 रुपये - (विजेता), दूसरा पुरस्कार 75,000 रुपये और तीसरा पुरस्कार 50,000 रुपये का था। इसके अलावा तीन टीमों को “प्रेसिडेंट इंस्पेरेशन अवार्ड”, “केपीआईटी अवॉर्ड” और “डेलॉइट इनोवेशन अवार्ड” के लिए चुना गया।
सीमा सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए आर्टिफिशियल आधारित मुवमेंट डिटेक्शन सिस्टम तैयार
सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़ ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो आतंकवाद, ड्रग की तस्करी की जांच करने और फुल-प्रूफ सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते वाहनों और मवेशियों गतिविधियों को पहचान सकती है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित हैं और एक तरह का वार्निंग सिस्टम है। यह अलार्म देता है और ईमेल और टेक्सट मैसेज के जरिये रजिस्टर्ड यूजर्स को सूचनाएं मुहैया कराता है।
किफायती जल कीटाणुशोधन प्रणाली का लाइसेंस
सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ ने "पेयजल कीटाणुशोधन प्रणाली" के लिए तकनीक विकसित की है जिसका व्यावसायिक नाम ओनियरTM है। यह लगातार जल शोधन में सक्षम है। “पेयजल कीटाणुशोधन प्रणाली” की तकनीक को मेसर्स ब्लूबर्ड वाटर प्यूरीफायर, नई दिल्ली को स्थानांतरित किया गया है। सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित मशीन से प्रति लीटर 2 पैसे की कीमत पर सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल प्रदान हासिल किया जा सकता है। सामुदायिक स्तर का मॉडल 450 एलपीएच क्षमता का है। इससे 5000 से 1 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है।
सीएसआईआर और डीओटी की साझेदारी में एक राष्ट्रव्यापी टाइम स्टैम्पिंग और टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन नेटवर्क के लिए टाइम सिग्नल की ट्रेसबिलिटी की स्थापना
आईएसटी टाइम स्टैम्प के साथ टेलीकॉम नेटवर्क को सिंक्रनाइज़ करने का प्राथमिक उद्देश्य दूरसंचार एजेंसियों की (2 जी से 3 जी से 3 जी से 5 जी तक) के साथ नेटवर्क की गति को बढ़ाने के इस युग में साइबर घटनाओं के विश्लेषण और तमाम कठिनाई को दूर करने के वास्ते सुरक्षा एजेंसियों को सक्षम करना है। इस परियोजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा।
मेक इन इंडिया के तहत जयपुर स्थित आरईआईएल को दूध परीक्षण का लाइसेंस दिया गया है
दूध में मिलावट का पता लगाना डेयरी उद्योग की जरूरत है, जिसे तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से रेखांकित किया जा सकता है। यह तकनीकों उपयोग करने के लिए FSSAI द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह दूध में मिलावट की जांच करने में मदद करेगा और साथ ही दूध और उससे बने उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करेगा
सीएसआईआर अरोमा मिशन
सीएसआईआर अरोमा मिशन को वांछित हस्तक्षेपों के माध्यम से सुगंध क्षेत्र में परिवर्तन लाने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य बेहतर किस्मों की सुगंध वालों फसल और उनके कृषि-प्रौद्योगिकियों के विकास और विशिष्ट कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेती के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन करना है; परियोजना शुरू होने के बाद से 15 महीनों में, परियोजना के तहत देश भर में लगभग 2119 हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित पौधों की खेती की गई है।
सीएसआईआर फाइटोफर्मास्यूटिकल्स मिशन
सीएसआईआर फाइटोफर्मास्यूटिकल मिशन पर विचार चल रहा है जिसके तहत चयनित औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से औषधीय पौधों के क्षेत्र में परिवर्तन लाया जा सके ताकि दुर्लभ प्रजातियों, गुणवत्ता रोपण सामग्री का उत्पादन और क्षेत्र विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके। जीएमपी ग्रेड के औषधीय पौधे के अर्क के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी पैकेज, और महत्वपूर्ण औषधीय पौधों से फाइटोफर्मास्यूटिकल विकास किया जाएगा। यह अभी परिकल्पना के स्तर पर है।
परियोजना को लागू करने के पहले साल में गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री का द्रव्यमान गुणा और विभिन्न राज्यों/जिलों में 120 हेक्टेयर क्षेत्र तक लक्षित पौधों की प्रजातियों की खेती की गई है। इसके अलावा, इस परियोजना के तहत 25 दुर्लभ प्रजातियों के पौधों (आरईटी) का जीन बैंक तैयार किया गया है।
सतत विकास (सीएसडी) मिशन के लिए उत्प्रेरण
भारतीय रासायनिक उद्योग एशिया में कुल रासायनिक उद्योग में तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है और दुनिया भर में 8वां सबसे बड़ा रसायन उत्पादक है, जो अनुमानित 100 अरब अमेरिकी डॉलर का भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में 6.7% योगदान देता है। दुनिया भर में रासायनिक उद्योग जीवाश्म कच्ची सामग्री पर निर्भर करता है। भूगर्भीय कारणों से, इन कच्चे माल की कीमत में सीमित उपलब्धता और कीमत में उतार-चढ़ाव और भविष्य की जरूरतों के लिहाज से उन निर्भर होने की वजह से ये बहुमूल्य हैं। इस प्रकार, रासायनिक संश्लेषण के लिए वैकल्पिक और नवीकरणीय सामग्री पर ध्यान देना आवश्यक है। यह मिशन महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित करता है और परंपरागत जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय कच्चे माल ( खाद्य बायोमास, कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2), पानी और शेल (प्राकृतिक) गैस) का उपयोग करने वाले रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का विकास करना चाहता है। सीएसआईआर मिशन मोड प्रोजेक्ट जिसका शीर्षक है "सतत विकास के लिए उत्प्रेरण (सीएसडी)" 3 साल की अवधि के लिए लॉन्च किया गया है।
इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एंड एग्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज (इंप्रोक्टिक्स) के लिए अभिनव प्रक्रियाएं और तकनीके
सीएसआईआर ने "इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एंड एग्रोकेमिकल सेक्टर इंडस्ट्रीज (इंफ्रास्ट्रिक्स-फार्मा एंड एग्रो) के लिए अभिनव प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों पर एक मिशन मोड प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इस परियोजना का उद्देश्य प्रमुख दवाओं और एग्रो केमिकल के लिए प्रभावी लागत, लाभप्रद प्रक्रियाओं का विकास करना है। फार्मास्यूटिकल्स के मामले में, नई या गैर-उल्लंघनकारी प्रक्रियाएं जो संचालित करने के लिए स्वतंत्र हैं, विकसित की जाएंगी। इस प्रकार यह प्रस्ताव देश में 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को बढ़ावा देने और सभी भारतीयों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की दिशा में देश की सेवा करना चाहता है।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और संरक्षा' पर सीएसआईआर मिशन
सीएसआईआर ने हाल ही में 'महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और संरक्षा' पर एक मिशन लॉन्च किया है जिसमें निम्नलिखित मुद्दों को हल करने की परिकल्पना की गई है: उत्तराखंड में भूकंप के खतरे का अध्ययन; एनडब्ल्यू हिमालयी बेल्ट की पहाड़ों में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए भूस्खलन के खतरों को कम करने के कुशल ढलान स्थिरीकरण उपायों के डिजाइन और विकास पर काम करना; विशेष रूप से भूकंप संभावित क्षेत्रों में अस्पतालों की सुरक्षा; एक निर्दिष्ट खतरे के लिए स्तरित विन्यास के साथ हार्डनेड एयरक्रॉफ्ट शेल्टर और प्रभावी प्रतिरोधी डिजाइन को विकसित करने के लिए; स्मार्ट वीडियो कैमरा सिस्टम, स्मार्ट वीडियो निगरानी प्रणाली, बाहरी लोगों की पहचान के लिए वास्तविक समय प्रणाली सहित अभिनव समाधानों के माध्यम से संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी (एसएचएम); इंटेलिजेंट बहु-सेंसर सेंसर के आधार पर सीमा सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली; और अस्पताल के लिए अनुकूलित अग्नि सुरक्षा और सुरक्षा समाधान के डिजाइन और विकास के लिए सक्रिय अग्नि सुरक्षा प्रणाली। सीएसआईआर ने देहरादून शहर के भूकंप जोखिम सूचकांक मानचित्र को पहले ही तैयार कर लिया है। इसका उपयोग इसके बाद के अपेक्षित भूकंप का सामना करने के लिए तैयार किया जा सकता है।
त्वरित, टिकाऊ और ऊर्जा कुशल सामूहिक हाउसिंग स्कीम का विकास
मिशन का उद्देश्य बड़े पैमाने पर त्वरित, टिकाऊ, ऊर्जा कुशल और किफायती आवास के निर्माण के लिए प्रीफैब प्रौद्योगिकियों के हितधारकों की साझेदारी को बढ़ाना है। विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके प्रीकास्ट स्ट्रक्चरल पैनलों का कुशल डिज़ाइन विकसित किया जाएगा ताकि हल्के वजन (50% की कमी), बेहतर अग्नि रेटिंग (न्यूनतम 2घंटे), स्थायित्व (70-80 वर्ष), प्रभावी लागत (न्यूनतम से कम की तुलना में 25% कम) उपलब्ध) मौजूदा 16-19 दिनों की तुलना में 5-7 दिनों के कम चक्र समय के साथ विकसित करना है। सामूहिक आवास योजनाओं को देश भर के विभिन्न भू-जलवायु क्षेत्रों में सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करने की योजना बनाई गई है।
चमड़ा प्रौद्योगिकी
इलेक्ट्रो-ऑक्सीकरण (ईओ) पर आधारित एक शून्य अपशिष्ट निर्वहन प्रक्रिया वाली प्रौद्योगिकी तैयार की गई है जो चमड़े के निर्माण की प्रक्रिया का सरल और प्रदूषण रहित बनाएगी। इससे टेनरियों से चमड़ा बनाने के दौरान अपशिष्ट नहीं निकलेगा, लागत में कमी आएगी क्योंकि टेनरियों से निकलने वाले पानी को संशोधित नहीं करना पड़ेगा। इस तकनीक को कानपुर के मेसर्स लियान ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स रॉयल टैनर्स कानपुर और एएन लेदर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा को स्थानांतरित किया गया है।
कोयले की धूल इकट्ठा करना और ब्रिकेटिंग सिस्टम
कोयला खदानों से निकलने वाली धूल को एकत्रित किए जाने से न केवल वायु प्रदूषण में कमी लाई जा सकेगी बल्कि स्थानीय जनता के स्वास्थ्य में भी सुधार किया किया जा सकेगा। कोयला खदानों से निकलने वाले धूल कणों को एकत्रित करने का सिस्टम विकसित किया जा चुका है। CSIR-CIMFR ने पेटेंट प्रौद्योगिकी को मैसर्स टाटा मोटर्स लिमिटेड, मुंबई को हस्तांतरित कर दिया है।
स्मार्ट बिजली मीटर
सीएसआईआर-सीएसआईओ चंडीगढ़ ने स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटर विकसित किया है जो अपनी तरह का पहला स्वदेशी और स्व-निगरानी वाला यंत्र है। नया मीटर मौजूदा मीटर की तुलना में पांच गुना किफायती है। यह भारतीय जलवायु के लिए सबसे उपयुक्त है। यह मीटर वास्तविक रूप से प्रति घंटा बिजली की खपत को पढ़ने में सक्षम है। इस तकनीक को मेसर्स अत्सुया टेक्नोलॉजीज, मुंबई को स्थानांतरित कर दिया गया है।
रक्षा कार्मिकों के शूटिंग कौशल को तेज करने के लिए प्रशिक्षण
सीएसआईआर-एनएएल बेंगलुरु ने इलेक्ट्रॉनिक टारगेट सिस्टम (ETS) डिज़ाइन किया है, जो पुलिस, अर्धसैनिक और रक्षा कर्मियों के लिए तकनीकी रूप से बेहतर और लागत प्रभावी है। यह हथियार से शार्प शूटिंग स्किल हासिल करने में मददगार है।
बेहतर व्हील चेयर का निर्माण
सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने बुजुर्गों और शारीरिक रूप से असक्षम लोगों के बेहतर पुनर्वास को देखते हुए एक व्हील चेयर विकसित किया है। इस व्हील चेयर को इस तरह से विकसित किया गया है जिससे गतिशीलता, स्थायित्व और उनकी क्षमता में वृद्धि होगी। इस तकनीक को भारतीय उद्योगों को स्थानांतरित कर दिया गया है।
सीएसआईआर-एनपीएल ने खराब प्लास्टिक को रिसाइकल करने के लिए तकनीक विकसित की
भारत में रोजना 15, 000 टन खराब प्लास्टिक का उत्पादन होता है जिसका निपटान किया जाना एक चुनौती है जोकि पर्यावरण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। लेकिन नई तकनीक के इजाद किये जाने से इस चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी और इस तरह एक सामाजिक समस्या से राहत पाई जा सकती है।
सीएसआईआर की कौशल विकास पहल
CSIR ने विशिष्ट उद्योग उन्मुख कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से अपने अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों के लाभकारी उपयोग के लिए एक एकीकृत कौशल विकास पहल शुरू की है। वर्ष 2018 के दौरान सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के कुछ प्रमुख आकर्षण इस प्रकार हैं:
· सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में करीब 19,000 उम्मीदवारों को एकीकृत कौशल विकास पहल के तहत 2018 के दौरान प्रशिक्षण मुहैया कराया गया।
· सीएसआईआर-सीएलआरआई ने अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी) जैसे संस्थानों की वित्तीय सहायता से विभिन्न चमड़े के ट्रेड पैन इंडिया में लगभग 3000 कारीगरों को कुशल बनाया है।
· CSIR-CSMCRI ने आंध्र प्रदेश के नौ जिलों के 12500 मछुआरों को प्रशिक्षित करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (APSSDC) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षए किए हैं।
· सीएसआईआर-एनईआईएसटी एकीकृत कौशल पहल को नाबार्ड के संयुक्त देयता समूह बैंक ऋणों के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत चुना गया है।
· सीएसआईआर-सीएसआईओ के इंडो-स्विस ट्रेनिंग सेंटर ने भारत कौशल चंडीगढ़ 2018 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में पहला पुरस्कार जीता है।
· सीएसआईआर और आंध्र प्रदेश अनुसूचित जाति सहकारी वित्त निगम लिमिटेड (APSCCFC) ने चमड़ा क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल से आंध्र प्रदेश के अनुसूचित जाति के 10,000 उम्मीदवारों को लाभ मिलना है। इससे घरों में आय बढ़ी है। इस प्रकार इससे सामाजिक और आर्थिक विकास सुनिश्चित हो रहा है। अगले 2-3 वर्षों में APSCCFC द्वारा 30 करोड़ की कमाई किए जाने की संभावना है।
सीएसआईआर के वैज्ञानिक स्कूली छात्रों से जुड़ रहे हैं
सीएसआईआर ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सहयोग से जिज्ञासा नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है। कार्यक्रम में सीएसआईआर के 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के साथ 1151 केंद्रीय विद्यालयों को जोड़ने की परिकल्पना की गई थी। वर्ष 2018 में सीएसआईआर ने पहले से ही 27,000 छात्रों और 2,500 शिक्षकों को केंद्रीय विद्यालय में 200 से अधिक कार्यक्रमों को लागू किया था।
पूर्वोत्तर में सीएसआईआर की पहुंच
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीएसआईआर-उद्योग मुलाकातः गुवाहाटी में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मझोले और सुक्ष्म उद्योग और स्टार्ट-अप बनाने के लिए सीएमआईआर ने टेक्नोलॉजीज और ज्ञान का आधार बनाया है। पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योग घरानों और सीएसआईआर के 50 वैज्ञानिकों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर और पूर्वोत्तर के उद्योग घरानों के बीच करीब 8 करार हुए।
- सीएसआईआर-एनआईआईएसटी ने मशरूम की खेती के तौर तरीकों को 30,000 लाभार्थियों के साथ-साथ 20 उद्यमियों/ गैर-सरकारी संगठनों को स्पॉन उत्पादन तकनीक में स्थानांतरित कर दिया है। इससे 5000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। मशरूम की खेती से लाभार्थियों को हर महीने 10 हजार से 15 हजार रुपये का लाभ मिल रहा है। इसका कारोबार अक्टूबर से मार्च तक चलता है।
अंतरराष्ट्रीय मामले
द्विपक्षीय सहयोग
सीएसआईआर के अंतर्राष्ट्रीय एसएंडटी संबंधों को नई सहयोग व्यवस्था शुरू करने और विदेशों में अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ मौजूदा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के माध्यम से आगे बढ़ाया गया तथा विस्तारित किया गया है। सहयोग प्राथमिकताओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सीएसआईआर और कोरिया गणराज्य, जर्मनी, चीनी ताइपे, जापान, बांग्लादेश, इथियोपिया समेत तमाम भागीदार देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों के बीच कई उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। प्रशिक्षण और उन्नत प्रदर्शन के लिए बांग्लादेश (समुद्र विज्ञान) के शोधकर्ताओं और अधिकारियों के साथ क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किया गया। जर्मनी के साथ "सस्टेनेबल वाटर सप्लाई एंड वेस्टवाटर मैनेजमेंट (निपटान और पुनः उपयोग) पर एक संयुक्त कार्यशाला- सस्टेनेबल, अफोर्डेबल सॉल्यूशन के लिए अनुसंधान" दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसके अलावा संस्थानिक स्तर पर सहयोग के लिए छह कार्यक्रम को लेकर समझौता पर हस्ताक्षर किए गए।
सीएसआईआर लैब स्तरीय साझेदारी की पहल
सीएसआईआर और मेटल्स इंडस्ट्री डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MIDI) के बीच ट्विनिंग प्रोजेक्ट, इथियोपिया के साथ मार्च 2018 में शुरू हुआ था। मेटल्स इंडस्ट्री डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट समृद्ध बनाने के वास्ते इथियोपिया एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम को कार्यान्वित कर रहा है जिसकी लागत 6,806,000 डॉलर है। इसके तहत तीन वर्षों के लिए सीएसआईआर में MIDI शोधकर्ताओं को क्षमता निर्माण के लिए मदद मुहैया कराई जा रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद धातु और इंजीनियरिंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों में भाग लेने और अपने स्वयं के साझेदारी कार्यक्रमों को विकसित करने के अलावा, सीएसआईआर संस्थानों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों, जिसमें डीएसटी/डीबीटी/ आईसीएमआर द्वारा प्रशासित हैं, अंतर-सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया।
जर्मनी (6), रूस (6), ब्रिटेन (5), फ्रांस (4), जापान (4), जापान (4), कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रिया, हंगरी, वियतनाम, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और मलेशिया जैसे देशों के साथ कार्यान्वयन के लिए सीएसआईआर संस्थानों की 32 सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएं वित्त पोषित की गईं है। या कहें इन संस्थानों को वित्त मदद मुहैया कराई गई है।
क्षमता निर्माण कार्यक्रम
- 19-20 अप्रैल, 2018 को लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) के कार्यकारी सत्र के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री ने यह ऐलान किया कि, “कॉमनवेल्थ के माध्यम से भारत क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाएगा, जिससे स्माल आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स (SIDS) की मदद की जा सके। दूरदराज के संवेदन या मल्टी बीम हाइड्रोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए अपने सागर आधारित राष्ट्रीय धन का बेहतर प्रबंधन करने की क्षमता हासिल की जा सकेगी। इसके लिए सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोलॉजी (सीएसआईआर-एनआईओ) ने एमईए (आईटीईसी के तहत) से फंडिंग के साथ चार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
- दुनियाभर के केंद्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए सात युवा और उज्ज्वल सीएसआईआर वैज्ञानिकों को रमन रिसर्च फैलोशिप से सम्मानित किया गया है।
- सीएसआईआर संस्थानों में अनुसंधान को आगे बढाने के लिए विकासशील देशों के शोधार्थियों को अनुसंधान के लिए द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (TWAS), बारह डॉक्टोरल फैलोशिप और सात पोस्ट-डॉक्टोरल फैलोशिप की पेशकश की गई है।
उल्लेखनीय है कि सीएसआईआर ऊर्जा, इंजीनियरिंग, खनन, खनिज, जेनेरिक दवाओं, रसायन, एयरोस्पेस और रणनीतिक जैसे विज्ञान के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में अनुसंधान का संचालन कर रहा है। दवाओं और फार्मा खंड में सीएसआईआर का योगदान बहुमूल्य है। स्वतंत्र भारत में विकसित 14 नई दवाओं में से ग्यारह सीएसआईआर की हैं।
भारत में बौद्धिक संपदा मामले में अग्रणी सीएसआईआर का पेटेंट पोर्टफोलियो एसएंडटी के माध्यम से आम जनता के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने पर केंद्रित है। दूसरी ओर चुनिंदा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के लिए वैश्विक स्तर पर रास्ता तैयार कर रहा है। वर्ष 2017-18 में सीएसआईआर को 171 भारतीय और 376 विदेशी पेटेंट प्रदान किए गए।
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आरकेमीणा/एएम/वीएस
(रिलीज़ आईडी: 1557145)
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