आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2018 – 7


‘रेरा’ के तहत 34893 अचल संपत्ति परियोजनाएं और 27073 अचल संपत्ति एजेंट पंजीकृत किए गए, 28 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने रेरा के तहत नियम अधिसूचित किए  

28 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण की स्‍थापना की गई, 21 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अचल संपत्ति अपीलीय न्यायाधिकरण की स्‍थापना की

पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के छह राज्‍यों अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम और नगालैंड जल्‍द ही रेरा नियम अधिसूचित करेंगे, जम्‍मू-कश्‍मीर ने रेरा अधिसूचित किया

10 शहरों में 536 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल लाइनें चालू हो चुकी हैं, 68021 करोड़ रुपये की लागत वाली 248 किलोमीटर लम्‍बी 13 नई मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी 

वर्ष 2018 में 16408 करोड़ रुपये की लागत वाली 66 किलोमीटर लम्‍बी तीन नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, लगभग 650 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं, 750 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल प्रणालियों और 373 किलोमीटर लम्‍बे आरआरटीएस पर विचार किया जा रहा है

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा एवं विभिन्‍न मेट्रो रेल प्

प्रविष्टि तिथि: 28 DEC 2018 7:56PM by PIB Delhi

    आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने अनेक पहलों के जरिए भारतीय शहरों के कायाकल्‍प एवं बदलाव के लिए शहरी पुनरुत्‍थान के लिए विश्‍व का एक अत्‍यंत महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है। नागरिक अनुकूल शहरी क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए 685758 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि लगाया जाना भी इन पहलों में शामिल है। महत्‍वपूर्ण शहरी सुधारों पर अमल और नई मेट्रो लाइनों के जरिए शहरी परिवहन में बढ़ोतरी सहित शहरी कायाकल्‍प से जुड़ी परियोजनाओं के माध्‍यम से यह बदलाव शुरू किया जा रहा है। मंत्रालय देश के सभी हिस्‍सों में रेरा का कार्यान्‍वयन सुनिश्चित कर घर खरीदने वालों के हित में अचल संपत्ति (रियल एस्‍टेट) क्षेत्र में विभिन्‍न सुधारों को अत्‍यंत सक्रियता के साथ लागू कर रहा है।

रेरा (अचल संपत्ति (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016)

मार्च, 2016 में पारित किये गये अचल संपत्ति (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के जरिए प्रभावशाली ढंग से अचल संपत्ति क्षेत्र का नियमन एवं संवर्धन सुनिश्चित करने और घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए एक परिवर्तनकारी कानून सामने आया। रेरा की ताजा स्थिति कुछ इस प्रकार से है :

28 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने रेरा के तहत नियमों को अधिसूचित किया है (जम्‍मू-कश्‍मीर, 6 पूर्वोत्‍तर राज्‍यों यथा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम को छोड़कर)। पश्चिम बंगाल ने अपना स्‍वयं का अधिनियम आवास एवं उद्योग नियमन अधिनियम (हीरा) लागू किया है। हालांकि, इस राज्‍य को अचल संपत्ति (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत नियमों को अधिसूचित करने की सलाह दी गई है।

28 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण (नियमित-15, अंतरिम-13) की स्‍थापना की है। 21 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अचल संपत्ति अपीलीय न्‍यायाधिकरण (नियमित-09, अंतरिम-12) की स्‍थापना की है। 23 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के नियामकीय प्राधिकरणों ने रेरा के प्रावधानों के तहत अपनी-अपनी वेबसाइटें चालू कर दी हैं। देश भर में कुल मिलाकर 34893 अचल संपत्ति परियोजनाएं और 27073 अचल संपत्ति एजेंट रेरा के तहत पंजीकृत किए गए हैं।

अचल संपत्ति (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) पर क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन देश के पश्चिमी (पुणे), दक्षिणी (चेन्‍नई),  उत्‍तरी (दिल्‍ली) और पूर्वी (रांची) क्षेत्रों में किया गया जिनमें घर खरीदारों, अचल संपत्ति के डेवलपरों, वित्‍तीय संस्‍थानों, अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरणों और अचल संपत्ति अपीलीय न्‍यायाधिकरणों सहित सभी हितधारकों को शामिल किया गया। इन कार्यशालाओं ने विचार-विमर्श करने, सर्वोत्‍तम तौर-तरीकों को सिखाने और आगे की राह सुझाने के लिए एक उपयुक्‍त प्‍लेटफॉर्म मुहैया कराया।

वर्ष 2018 में 2709.90 करोड़ रुपये के नगर निगम बांड जारी किए गए। इसके तहत हैदराबाद (200 करोड़ एवं 195 करोड़ रुपये की श्रृंखला), इंदौर (139.90 करोड़ रुपये), अमरावती (2000 करोड़ रुपये) और भोपाल (175 करोड़ रुपये) ने नगर निगम बांड जारी किए। इससे शहरों को अपनी वित्‍त पोषण आवश्‍यकताएं पूरी करने में मदद मिलने और स्‍वयं के पास उपलब्‍ध बजटीय संसाधनों के पूरक के तौर पर काम आने की आशा है।  

 

शहरी परिवहन

मेट्रो लाइनें शुरू/चालू की गईं

वर्तमान में लगभग 536 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल लाइनें 10 शहरों यथा दिल्‍ली एवं एनसीआर, बेंगलुरू, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्‍नई, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई और गुरुग्राम में चालू हो चुकी हैं। मई, 2014 से लेकर अब तक लगभग 287 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल लाइनें दिल्‍ली एवं एनसीआर, बेंगलुरू, चेन्‍नई, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई, जयपुर, हैदराबाद और गुरुग्राम में चालू की गई हैं। वर्ष 2018 (जनवरी से लेकर अब तक) के दौरान लगभग 110 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल लाइनें दिल्‍ली एवं एनसीआर (राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र), हैदराबाद और चेन्‍नई में चालू की गई हैं।

मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी

मई, 2014 से लेकर अब तक 68021 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली लगभग 248 किलोमीटर लम्‍बी 13 नई मेट्रो परियोजनाओं को नागपुर, अहमदाबाद, गुरुग्राम, लखनऊ, चेन्‍नई एक्‍सटेंशन, पुणे, दिल्‍ली मेट्रो एक्‍सटेंशन, नोएडा-ग्रेटर नोएडा, भोपाल और इंदौर के लिए स्‍वीकृ‍त किया गया है। अकेले वर्ष 2018 में 16408 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली लगभग 66 किलोमीटर लम्‍बी तीन नई परियोजनाओं को भोपाल, इंदौर और नोएडा सिटी सेंटर से लेकर नोएडा सेक्‍टर 62 तक दिल्‍ली मेट्रो एक्‍सटेंशन के लिए मंजूर किया गया है।

मेट्रो का उद्घाटन

मई, 2014 से लेकर अब तक नागपुर, पुणे और मुंबई में 4 लाइनों के लिए 6 मेट्रो परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है। मई, 2014 से लेकर अब तक दिल्‍ली, हैदराबाद और कोच्चि में अनेक नई मेट्रो लाइनों का उद्धाटन किया गया है। वर्ष 2018 के दौरान मुंडका से ब्रिगेडियर होशियार सिंह (11.18 किलोमीटर लम्‍बी) तक दिल्‍ली मेट्रो एक्‍सटेंशन और एस्‍कॉर्ट मुजेसर से राजा नाहर सिंह बल्‍लभगढ़ (3.205 किलोमीटर लम्‍बी) तक दिल्‍ली मेट्रो एक्‍सटेंशन का उद्घाटन किया गया। लगभग 650 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल परियोजनाएं दिल्‍ली एवं एनसीआर, कोलकाता, बेंगलुरू, चेन्‍नई, कोच्चि, जयपुर, मुंबई (एमएमआरडीए की राज्‍य पहलों सहित), हैदराबाद, नागपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, पुणे, नोएडा, भोपाल और इंदौर में कार्यान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं। लगभग 750 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो रेल प्रणालियां और 373 किलोमीटर लम्‍बी त्‍वरित रेल पारगमन प्रणालियां (आरआरटीएस) विभिन्‍न शहरों में विचाराधीन हैं।

मेक इन इंडियाऔर विभिन्‍न मेट्रो रेल प्रणालियों के स्‍वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रोलिंग स्‍टॉक, सिग्‍नलिंग प्रणाली, विद्युत एवं इलेक्‍ट्रोमैकेनिकल मेट्रो रेल अवयवों और सिविल इंजीनियरिंग ढांचों के लिए मानक विनिर्देश जारी किये जा चुके हैं। इसके अलावा रोलिंग स्‍टॉक की खरीद के लिए पात्रता पैमाना भी जारी किया जा चुका है। आई-मेट्रो (भारतीय मेट्रो रेल संगठनों की सोसायटी) को मार्च 2018 में लांच किया गया। यह अपने प्रदर्शन में उत्‍कृष्‍टता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मेट्रो रेल कंपनियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान, ज्ञान के संयोजन एवं अनुभवों, सर्वोत्‍तम तौर-तरीकों और नवाचारों को साझा करने इत्‍यादि का एक उपयुक्‍त प्‍लेटफॉर्म है।

दिल्‍ली प्रभाग

मौजूदा सीलिंग अभियान से नागरिकों को राहत देने के उद्देश्‍य से दिल्‍ली-2021 के लिए मास्‍टर प्‍लान को 21 जून, 2018 को अधिसूचित किया गया। इसका उद्देश्‍य दुकान सह आवासीय प्‍लॉटों और गैर-अनुरूप क्षेत्रों में मौजूद गोदाम संबंधी क्‍लस्‍टरों से जुड़े विकास नियंत्रण मानकों में संशोधन करना है। इन संशोधनों ने उपयुक्‍त समझे जाने वाले मामलों में अतिरिक्‍त ‘एफएआर’ की व्‍यवस्‍था करके विभिन्‍न परिसरों के उपयोग के नियमतीकरण का मार्ग प्रशस्‍त कर दिया है। इसके साथ ही पार्किंग स्‍थल, हरित क्षेत्र, अग्नि शमन सेवाओं तक पहुंच, बुनियादी ढांचागत संबंधी आवश्‍यकताओं और निवासियों की सुविधा से जुड़े मुद्दों पर भी गौर किया गया।

दिल्‍ली के राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र कानून (विशेष प्रावधान) द्वितीय अधिनियम, 2011 की वैधता बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2020 कर दी गई है। इसके तहत अनधिकृत विकास कार्यों के कुछ स्‍वरूपों को दंडात्‍मक कार्रवाई से निरंतर संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार, शहरी स्‍थानीय निकायों और अन्‍य संबंधित संगठनों को इन अनधिकृत विकास कार्यों से जुड़ी योजनाओं के सुचारू क्रियान्‍वयन के लिए नीतियां, मानक और रणनीतियां तैयार करने हेतु संतुलित और अच्‍छी तरह से विचार करने के लिए अतिरिक्‍त समय मिल गया है।

वर्ष 2018 के दौरान यूडीएफ से वित्‍त पोषण वाली कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई (लागत का 80 प्रतिशत आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय वहन करता है)। इन परियोजनाओं में 162.79 करोड़ रुपये की लागत से नेहरू प्‍लेस स्थित जिला केंद्रों का उन्‍नयन, 72.54 करोड़ रुपये की लागत से भीकाजी कामा स्थित जिला केन्‍द्र का उन्‍नयन, 236.44 करोड़ रुपये की लागत से दिल्‍ली के तीन नगर निगमों (उत्‍तरी, दक्षिणी एवं पूर्वी) के लिए ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन परियोजना इत्‍यादि शामिल हैं। वर्ष के दौरान आईटीओ क्रॉसिंग पर स्‍काईवाक/एफओबी का उद्घाटन भी किया गया।  

सम्‍पदा

‘सम्‍पदा 21’ को कार्यान्वित किया गया है, जिसके तहत निदेशालय द्वारा पेशकश की जा रही 21 सेवाओं को पूरी तरह से कम्‍पयूटरीकृत कर दिया गया है और इस तरह के सभी आवेदनों को ऑनलाइन प्राप्‍त किया जाता है। सम्‍पदा निदेशालय की एक नई वेबसाइट विकसित की गई है, ताकि विज्ञान भवन/5 अशोका रोड के लिए ‘कोई डिमांड सर्टिफिकेट नहीं/प्रतिधारण/आवंटन’ को कम्‍प्‍यूटरीकृत ढंग से जारी किया जा सके। आवंटियों द्वार डेबिट कार्डों के जरिए लाइसेंस शुल्‍क एवं क्षतिपूर्ति के ऑनलाइन भुगतान की व्‍यवस्‍था शुरू की गई है।

‘जीपीआरए’ हेतु भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों के लिए पात्रता को मंजूरी देने हेतु ऑनलाइन आवेदन करने के लिए एक मॉडयूल 2 जुलाई, 2018 को लांच किया गया। अप्रैल 2018 में लांच किए गए ‘जीपीआरए (एम-आवास) के मोबाइल एप’ की मदद से उपयोगकर्ता (यूजर) स्‍वयं को सम्‍पदा निदेशालय में पंजीकृत करा सकते हैं और अपनी पसंद के मकानों के लिए अपनी मांग पेश कर सकते हैं तथा इसके साथ ही आवंटन/प्रतीक्षा सूचियों में अपनी ताजा स्थिति से अवगत हो सकते हैं। इलाहाबाद में नए जीपीओए भवन का निर्माण किया गया है और 37636 वर्ग फीट का कार्यालय स्‍थल 8 कार्यालयों को आवंटित किया गया है। भुवनेश्‍वर और जैसलमेर में नये हॉलिडे होम का निर्माण कार्य पूरा हो गया है और इन्‍हें सम्‍पदा निदेशालय के वेब पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग के लिए डाल दिया गया है। नकद प्राप्तियों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए सम्‍पदा निदेशालय के अधीनस्‍थ 64 हॉलिडे होम/अतिथि गृहों/टूरिंग ऑफिसर हॉस्‍टल में पीओएस टर्मिनल लगाए गए हैं।

पीएफएमएस के कार्य (ई-एमबी) मॉडयूल की वास्‍तविक प्रगति का डिजिटलीकरण

सरकार के प्रमुख निर्माण निकाय यथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने पिछले वर्ष प्रमुख डिजिटल बदलाव सुनिश्चित किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से करना संभव हो पाया। यह डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने वाले पीएफएमएस पोर्टल के विशेष एकीकृत सीडीडीओ मॉडयूल के जरिए देश भर में सीपीडब्‍ल्‍यूडी के सभी 400 क्षेत्रीय कार्यालयों की नेटवर्किग से सम्‍भव हो पाया। इसके साथ ही सीपीडब्‍ल्‍यूडी किसी भी असैन्‍य मंत्रालय का ऐसा प्रथम संगठन बन गया है, जो क्षेत्रीय स्‍तर पर डिजिटल हो गया है। पीएफएमएस के कार्य (ई-एमबी) मॉडयूल की भौतिक प्रगति के डिजिटलीकरण के लिए वर्ष 2018 में एक व्‍यापक अभियान शुरू किया गया, ताकि देश भर में सीपीडब्‍ल्‍यूडी के किसी भी प्रभाग द्वारा शुरू किए गए किसी भी कार्य/परियोजना की वास्‍तविक प्रगति की सही समय पर ऑनलाइन मॉनीटरिंग की जा सके।

मंत्रालय में अधिक से अधिक डिजिटल एवं कैशलेस लेन-देन सुनिश्चित करने और भुगतानों के शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण की ओर अग्रसर होने के लिए 13 अप्रैल, 2018 से स्‍मार्ट कार्ड इस्‍तेमाल में लाए जा रहे हैं। विशेषकर अग्रिम भुगतान के लिए यह व्‍यवस्‍था की गई है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीनस्‍थ विभिन्‍न विभागों को कुल मिलाकर 1364 कार्ड जारी किए गए हैं। प्राप्तियों का अधिकतम डिजिटल संग्रह सुनिश्चित करने के लिए वित्‍त वर्ष 2018-19 के दौरान आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में इस मंत्रालय के तीन प्रत्‍यायित बैंकों यथा भारतीय स्‍टेट बैंक, आईडीबीआई और एक्सिस बैंक द्वारा पीओएस मशीनें लगाई गई हैं।  

सीपीडब्ल्यूडी को आईआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम और आईआईएसईआर की आगामी परियोजनाओं के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित 5749 करोड़ रुपये के कार्य सौंपे गए हैं। 1472 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रधानमंत्री स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना से जुड़े कार्य भी सीपीडब्ल्यूडी को सौंपे गए हैं। इसके अलावा गया, बादामी, अमृतसर और वाराणसी में ‘हृदय’ से संबंधित कार्य भी सीपीडब्ल्यूडी को सौंपे गए हैं।  

निर्माण की नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सीपीडब्ल्यूडी ने अधिसूचना जारी कर 10 नई भवन निर्माण तकनीकों को अपनाया है और इसके साथ ही नई तकनीकों के लिए अनुसूचित दरें जारी की हैं।

राष्‍ट्रपति भवन के अग्रभाग के साथ-साथ वाराणसी के घाटों के निकट स्थित भवनों की भव्‍य लाइटिंग भी सीपीडब्ल्यूडी की एक और उल्‍लेखनीय उपलब्धि है।

आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/वाईबी-   

 

 

 


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