सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
वर्षांत समीक्षा 2018 - एमएसएमई मंत्रालय
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया एमएसएमई सहयोग एवं संपर्क कार्यक्रम पीएमईजीपी की सफलता की कहानी है
खादी - ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद
प्रविष्टि तिथि:
31 DEC 2018 2:35PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 नवंबर 2018 को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए एक सहयोग एवं संपर्क कार्यक्रम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने 12 प्रमुख घोषणाएं की जो देश भर में एमएसएमई के विकास और विस्तार के साथ-साथ उन्हें सहूलियतें देने में मदद करेंगी।
- एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 59 मिनट के भीतर 1 करोड़ रुपये तक का ऋण।
- सभी जीएसटी पंजीकृत एमएसएमई के लिए ताजा या वृद्धिशील ऋणों पर 2% की ब्याज रियायत।
- 500 करोड़ रुपये से अधिक के कुल कारोबार वाली सभी कंपनियों को टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी अनिवार्य होगी ताकि उद्यमियों को उनकी आगामी प्राप्तियों के आधार पर बैंकों से ऋण लेने में समर्थ बनाया जा सके। इस प्रकार इससे नकदी चक्र की समस्या दूर होगी।
- सभी सार्वजनिक उपक्रमों के लिए कुल खरीद का 20 प्रतिशत के बजाय 25 प्रतिशत खरीद एमएसएमई से करना अनिवार्य होगा।
- एमएसएमई से प्राप्त 25 प्रतिशत खरीद में से 3 प्रतिशत महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित।
- सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को अनिवार्य रूप से जीईएम पोर्टल के माध्यम से खरीद करना होगा।
- 6000 करोड़ रुपये की लागत से 100 प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- फार्मा क्लस्टर की स्थापना के लिए लागत का 70 प्रतिशत वहन भारत सरकार करेगी।
- साल में एक बार 8 श्रम कानूनों और 10 केंद्रीय नियमों के तहत रिटर्न दाखिल करना होगा।
10) प्रतिष्ठानों का दौरान करने वाले निरीक्षक कम्प्यूटरीकृत रेंडम आवंटन के जरिये निर्णय लेंगे।
11) वायु और जल प्रदूषण कानूनों के तहत एकल सहमति। स्व-प्रमाणन के माध्यम से रिटर्न स्वीकार किए जाएंगे और केवल 10 प्रतिशत एमएसएमई इकाइयों का निरीक्षण किया जाएगा।
12) कंपनी अधिनियम के तहत मामूली उल्लंघनों के लिए उद्यमियों को अब अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ेगा, बल्कि वे उन्हें सरल प्रक्रियाओं के जरिये सही कर सकते हैं।
प्रधान मंत्री ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र की सुविधा के पांच प्रमुख पहलू हैं:
• ऋण तक पहुंच
• बाजार तक पहुंच
• प्रौद्योगिकी उन्नयन
• कारोबारी सुगमता
• कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की भावना।
एसएमई क्षेत्र के लिए बजट आवंटन
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पिछले पांच दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अत्यधिक जीवंत और गतिशील क्षेत्र बन गया है। एमएसएमई रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एमएसएमई बड़े उद्योगों के पूरक हैं और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बहुत योगदान करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए और एमएसएमई क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और योगदान को रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बजट, जिसे संसद में वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी 2018 को प्रस्तुत किया गया था, ने बजटीय आवंटन बढ़ाकर इस क्षेत्र पर काफी जोर दिया। एमएसएमई क्षेत्र के लिए 2017-18 में 6,481.96 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन हुआ था जिसे बढ़ाकर 2018-19 में 6,552.61 करोड़ रुपये कर दिया गया।
• व्यक्तिगत योजनाओं (सीजीटीएमएसई के अलावा) के लिए आवंटन 59% बढ़कर 2018-19 में 5,852.61 करोड़ रुपये कर दिया गया जो 2017-18 में 3,680 करोड़ था।
• राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम के लिए आवंटन 2017-18 के लिए 506 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2018-19 के लिए 1,006 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस योजना से एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकी उन्नयन में मदद मिलेगी।
• प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत आवंटन बीई 2017-18 में 1,024.49 करोड़ रुपये था जिसे बढ़ाकर बीई 2018-19 में 1,800 करोड़ रुपये कर दिया गया ताकि गैर-कृषि क्षेत्र में लगभग 88,000 सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना से स्वरोजगार का सृजन और लगभग 7 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
• क्रेडिट गारंटी फंड को पहले ही 2,500 करोड़ से बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस योजना में अन्य संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ एमएसई क्षेत्र में ऋण वृद्धि और रोजगार सृजन को व्यापक तरीके से बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
• बीई 2017-18 में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना के लिए आवंटन तीन गुना से अधिक बढ़ाकर 550 करोड़ रुपये कर दिया गया जो बीई 2018-19 में 150 करोड़ रुपये था।
• खादी अनुदान के तहत आवंटन को बीई 2017-18 के लिए 265.10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर बीई 2018-19 के लिए 415 करोड़ रुपये कर दिया गया।
• स्कीम फॉर रीजेनरेशन ऑफ ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज (एसएफयूआरटीआई) के तहत बजटीय आवंटन बीई 2017-18 में 10 करोड़ रुपये था जिसे बढ़कर बीई 2018-19 में 125 करोड़ रुपये कर दिया गया। इससे पारंपरिक एवं ग्रामीण उद्योगों में रोजगार सृजन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
• एएसपीआईआरई (नवाचार, ग्रामीण उद्योग एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए योजना) के तहत आवंटन बीई 2017-18 में 50 करोड़ रुपये था जिसे बढ़ाकर बीई 2018-19 में 232 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके तहत 100 आजीविका व्यवसाय इन्क्यूबेटरों और 20 प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटरों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इससे उद्यमिता एवं रोजगार सृजन में तेजी आएगी।
• राष्ट्रीय एससी/ एसटी हब के लिए आवंटन को 60 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 93.96 करोड़ रुपये कर दिया गया है ताकि एससी/ एसटी उद्यमियों के कारोबार में वृद्धि को रफ्तार मिल सके। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विभिन्न एससी/ एसटी योजनाओं के तहत कुल आवंटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली अन्य योजनाएं इस प्रकार हैं:
• 50 करोड़ रुपये से कम कुल कारोबार वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत रियायती दर का दायरा फिलहाल उन कंपनियों तक बढ़ा दिया गया है जिनका कुल कारोबार वित्त वर्ष 2016-17 में 250 करोड़ रुपये तक रहा।
• सरकार द्वारा नए कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष तक कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में 8.33% का योगदान।
• लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले फुटवियर, चमड़ा और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में सरकार द्वारा तीन साल के लिए ईपीएफ में 12% का योगदान।
पीएमईजीपी की सफलता की कहानी
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम- 2019-20 तक जारी रहेगा
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है जिसे एमएसएमई मंत्रालय द्वारा 2008-09 से लागू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक कारीगरों एवं बेरोजगार युवाओं की मदद करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना करते हुए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पीएमईजीपी को 5,500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 12वीं योजना के इतर 2017-18 से 2019-20 तक तीन वर्षों के लिए जारी रखने के लिए 28 फरवरी 2018 को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना इन तीन वित्त वर्षों के दौरान करीब 15 लाख लोगों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
• बजट अनुमान 2018-19 में पीएमईजीपी के तहत आवंटन को पहले ही बढ़ाकर 2018-19 के लिए 1,800 करोड़ रुपये कर दिया गया है जो इससे पिछले वर्ष के लिए 1,024.49 करोड़ रुपये था।
• पीएमईजीपी के तहत पिछले तीन वर्षों यानी 2015-16 से 2017-18 के दौरान 11,13,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
• कुल 4.55 लाख सूक्ष्म उद्यमों को 9,564.02 करोड़ रुपये की मार्जिन रकम सब्सिडी के साथ सहायता की गई जिससे 31.01.2018 तक 37.98 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
• वर्ष 2018 के दौरान मंत्रालय ने पीएमईजीपी के तहत मार्जिन रकम के तौर पर 1,760.64 करोड़ रुपये जारी किए जिसमें से 1,007.52 करोड़ रुपये बैंकों द्वारा पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।
• पीएमईजीपी योजना के तहत लाभान्वित 35,796 नए उद्यमों ने 2,86,368 लोगों को रोजगार प्रदान किया।
• बैंकों द्वारा वितरित रकम, रकम हासिल करने वाली परियोजनाओं की संख्या और रोजगार सृजन में पिछले वर्ष के मुकाबले 60% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
समावेशी विकास को हासिल करने के लिए देश के सभी जिलों को प्रति जिले कम से कम 75 परियोजनाएं आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, एससी/ एसटी, ओबीसी, दिव्यांग जनों, एनईआर आवेदकों के लिए सब्सिडी की उच्च दर (25% से 35%) लागू होगी। निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य निर्धारितकिए गए हैं:
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- राज्य में अत्यधिक पिछड़ापन,
- अत्यधिक बेरोजगारी,
- पिछले वर्ष के लक्ष्यों को पूरा करने की स्थिति,
- राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की जनसंख्या और
- पारंपरिक कौशल एवं कच्चे माल की उपलब्धता।
पीएमईजीपी के तहत 266 जिलों ने 2016-17 के दौरान 75 परियोजनाओं का लक्ष्य हासिल किया है।
- लक्ष्य के समान वितरण और समावेशी विकास को हासिल करने के उद्देश्य से सभी जिलों को प्रति परियोजना (8-10 लाख रुपये परियोजना लागत) 2 लाख रुपये के औसत मार्जिन के साथ रकम आवंटित।
- प्रत्येक जिले के लिए 75 इकाइयों के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है और राज्य सरकारों के प्रधान सचिव योजना की निगरानी कर रहे हैं।
- जिलों के सांसद की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय सलाहकार समितियां भी इस योजना की निगरानी कर रही हैं।
- यदि कहीं कम उपलब्धि देखी गई हो तो उसके लिए राज्य स्तर पर समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं।
- राज्यस्तरीय निगरानी समिति की बैठक (एसएलएमसी) के दौरान वित्त पोषण करने वाली राज्य की बैंक शाखाओं को सलाह दी जाती है ताकि वे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों में अधिक पीएमईजीपी परियोजनाओं को मंजूरी दें।
- सूक्ष्म उद्योगों के विकास के लिए पीएमईजीपी योजना का प्रचार करने के लिए जिला स्तर और राज्य स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
- पीएमईजीपी के तहत सामान्य श्रेणी के लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए परियोजना लागत का 25% सब्सिडी मार्जिन और शहरी क्षेत्रों के लिए 15% सब्सिडी मार्जिन का लाभ उठा सकते हैं।
- अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ ओबीसी/ अल्पसंख्यकों/ महिलाओं, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग जनों, एनईआर, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्र जैसी विशेष श्रेणियों से संबंधित लाभार्थियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी मार्जिन 35% और शहरी क्षेत्रों में सब्सिडी मार्जिन 25% है।
- 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति इसके लिए पात्र है।
- विनिर्माण क्षेत्र में 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाएं स्थापित करने और व्यवसाय/ सेवा क्षेत्र में 5 लाख रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाएं स्थापित करने के लिए लाभार्थियों के पास कम से कम आठवीं कक्षा पास की शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए।
- विनिर्माण क्षेत्र में परियोजनाओं की अधिकतम लागत 25 लाख और सेवा क्षेत्र में परियोजनाओं की अधिकतम लागत 10 लाख होगी।
- पीएमईजीपी के तहत केवल नई इकाइयों की स्थापना के लिए ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
पीएमईजीपी योजना के तहत लाभ लेने के इच्छुक लोगों के लिए 1 जुलाई 2016 से एक ऑनलाइन पोर्टल https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/pmegphome/index.jsp शुरू किया गया है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और वास्तविक समय आधारित है। आवेदक को पोर्टल पर आवेदन करना होगा और वह पीएमईजीपी-ई-पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। लाभार्थियों द्वारा प्रतिपुष्टि देने के लिए एक ऑनलाइन प्रतिपुष्टि ढांचा भी तैयार किया गया है।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर नोडल कार्यान्वयन एजेंसी है। राज्य/ जिला स्तर पर केवीआईसी के राज्य कार्यालय, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआईबी) और जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) कार्यान्वयन एजेंसियां हैं।
पीएमईजीपी के तहत महिला उद्यमियों को सहायता
• सरकार ने देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन के उद्देश्य से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 2016-17 में 14,768 परियोजनाएं स्थापित करने में महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
• असम में सबसे अधिक 1,484 परियोजनाएं और उसके बाद उत्तर प्रदेश में 1,387 परियोजनाएं, तमिलनाडु में 1,248 परियोजनाएं, ओडिशा में 942 परियोजनाएं और बिहार में 915 परियोजनाएं स्थापित हुईं। इसके अलावा अन्य राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में परियोजनाओं की संख्या अलग-अलग थी।
• पीएमईजीपी योजना के तहत महिला उद्यमियों को शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना स्थापित करने के लिए क्रमश: 25% और 35% सब्सिडी प्रदान की जाती है।
आयुष के साथ एमओयू
एमएसएमई मंत्रालय और आयुष मंत्रालय ने जून 2018 में नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू ने देश में आयुष उद्यमों के विकास के लिए दोनों मंत्रालयों के संस्थानों और योजनाओं के माध्यम से तालमेल स्थापित किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत को 'समग्र स्वास्थ्य सेवा' में एक विश्व नेता के रूप में स्थापित करना है।
आयुष एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसमें निवारक, उपचारात्मक एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं और यह भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है। आयुष उद्योग में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी दवा विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के स्वास्थ्य सेवा वितरण केंद्र शामिल हैं। इसमें अनिवार्य तौर पर एमएसएमई का वर्चस्व है। इनके विकास और आयुष की बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए उद्यमिता विकास, क्षमता निर्माण एवं वित्तीय सहायता के क्षेत्रों में सहयोग करने की आवश्यकता है।
आयुष क्षेत्र के लिए घरेलू बाजार पिछले एक दशक से लगातार बढ़ रहा है। दुनिया भर में पारंपरिक दवाओं की भी स्वीकृति है। आयुष उत्पादों जैसे खाद्य पूरक, न्यूट्रास्यूटिकल और हर्बल अर्क के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका फायदा उठाने और इस क्षेत्र में उद्यमों के विकास के लिए एमएसएमई मंत्रालय और आयुष मंत्रालय ने हाथ मिलाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों मंत्रालय आयुष क्षेत्र में उद्यमिता के विकास के लिए क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं और एमएसएमई मंत्रालय ने आयुष उद्योगों को सिडबी का लाभ दिलाने के लिए नई योजनाएं तैयार की हैं।
संयुक्त राष्ट्र महिला दिवस - 2018
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने 8 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत की महिला उद्यमियों के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया: www.udyamsakhi.org.
लगभग 80 लाख महिलाओं ने भारत में अपना व्यवसाय स्थापित किया है और एमएसएमई मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत में महिलाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहें।
यह पोर्टल महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए कम लागत वाले उत्पादों एवं सेवाओं के लिए कारोबारी मॉडल तैयार करने और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए एक नेटवर्क है।
यह पोर्टल अपने प्लेटफॉर्म के जरिये उद्यमिता लर्निंग टूल्स, इनक्यूबेशन सुविधा, रकम जुटाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, संरक्षक उपलब्ध कराने, एक-एक निवेशक के साथ मुलाकात करने, बाजार सर्वेक्षण की सुविधा और तकनीकी सहायता के लिए सहायता प्रदान करता है।
एमएसएमई मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों, राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से खादी, ग्राम एवं कोइर उद्योगों सहित इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देते हुए एक जीवंत एमएसएमई क्षेत्र तैयार कर रहा है।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग
सौर चरखा मिशन

सौर चरखा पर सूत कातती एग ग्रामीण महिला
भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने 27 जून 2018 को नई दिल्ली में एक समारोह में सौर चरखा मिशन का शुभारंभ किया। यह मिशन वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट के साथ देश भर में 50 क्लस्टरों को कवर करता है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग एक लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार का सृजन करेगी और हरित अर्थव्यवस्था में भी योगदान करेगी। सौर चरखा इकाइयों को ग्रामोद्योगों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। सौर चरखा मिशन योजना को केंद्रीय बजट 2018-19 में गैर-पारंपरिक सौर ऊर्जा को आगे बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए प्रस्तावित किया गया था।
'मीठी क्रांति' में केवीआईसी ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
शहद के उत्पादन को बढ़ाने के लिए केवीआईसी ने शहद मिशन शुरू किया है। मधुमक्खी पालन ग्रामीण क्षेत्रों एवं उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के अनुकूल है और केवीआईसी ग्रामीणों के लाभ के लिए इन संसाधनों का उपयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
केवीआईसी ने मुंबई में मधुमक्खी पालन निदेशालय के नाम से एक अलग विभाग और पुणे में केंद्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की है। साथ ही उसने आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन शुरू किया।
राष्ट्रपति भवन की मधुवाटिका ने पैदावार देना शुरू कर दिया है और इस साल मार्च में राष्ट्रपति भवन के बागानों से 186 किलोग्राम शहद निकाला गया था। राष्ट्रपति भवन में प्रचुर मात्रा में वनस्पति एवं जीव हैं जिसमें आम के हरे-भरे पेड़, भारतीय ब्लैकबेरी (जामुन), नीम और ड्रमस्टिक्स (अमलतास) शामिल हैं।
केवीआईसी ने पहले राष्ट्रपति भवन के बागवानों के लिए एक कृषि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया था जिसमें उन्हें वनस्पतियों और जीवों को बनाए रखने में मधुमक्खी पालन की देखभाल और मूल्य के टिप्स दिए गए थे। केवीआईसी ने राष्ट्रपति भवन में विभिन्न चरणों में कई मधुमक्खी-बक्से स्थापित किए। इस शहद एवं संबंधित उत्पादों का उपयोग राष्ट्रपति भवन में आने वाले विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए उपहार के रूप में करने की योजना है।
राष्ट्रपति भवन में केवीआईसी के मधुमक्खी पालन कार्यक्रम में 16,000 फूलों एवं पौधों को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति भवन परिसर में पेड़ों की पर्याप्त संख्या है जो परागण के लिए उपयुक्त हैं। ये पेड़ आसपास के क्षेत्रों में उपज में व्यापक तौर पर वृद्धि करेंगे।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर इस साल 21 मई को काजीरंगा वन क्षेत्र में 100 मिसिंग असमिया जनजाति के बीच 1,000 मधुमक्खी के बक्से वितरित किए।
केवीआईसी ने इस साल जून में कश्मीर के कुपवाड़ा में जंगेली आर्मी क्षेत्र में भी मधुमक्खी के बक्से वितरित किए। जंगेली आर्मी क्षेत्र में 233 लाभार्थियों के बीच दो हजार तीन सौ तीस मधुमक्खी के बक्से भी वितरित किए।

कश्मीर के कुपवाड़ा में जंगेली आर्मी क्षेत्र में केवीआईसी मधुमक्खी के बक्से
कुपवाड़ा में यह कार्यक्रम भारतीय सेना के साथ उसके सद्भावना कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया ताकि घाटी में शांति एवं सद्भाव स्थापित हो सके।
भारतीय सेना ने प्रशिक्षण देने में मदद की और मधुवाटिका स्थापित करने के लिए 10 प्रतिशत वित्तीय सहायता भी प्रदान किया। इससे लाभार्थियों को आजीविका कमाने के लिए केवीआईसी मंच तक पहुंचने में मदद मिली है।
कैटवॉक पर खादी
इस साल पहली बार केवीआईसी ने लक्मे फैशन वीक के साथ मिलकर खादी को सतत विकास वाले कपड़े के तौर पर प्रदर्शित किया। इस साल मुंबई के लैक्मे फैशन वीक में चार डिजाइनर लेबलों द्वारा निर्मित हैंड-स्पन एवं हैंड-वुवन खादी कपड़े के संग्रह ने रैंप पर धूम मचाई। एलगंडल (तेलंगाना), कंजरपुर (मध्य प्रदेश), बस्तर (छत्तीसगढ़), होशियारपुर (पंजाब), मालदा, बर्दवान एवं मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) के क्लस्टर क्षेत्रों ने फैशन शो के लिए इंडिया खादी के बेहतरीन कपड़े का योगदान दिया।

लैक्मे फैशन वीक के लिए खादी परिधान में कैटवॉक पर मॉडल्स
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने की घोषणा
- केवीआईसी ने महात्मा गांधी के स्वच्छता एवं खादी के सपने को साकार करने के लिए पटना नगर निगम (पीएमसी) को उसके 4,000 बेहतरीन सफाई कर्मचारियों के लिए खादी की वर्दी की बिक्री की।
- अप्रैल 2018 में केवीआईसी ने स्टोर-लोकेटिंग मोबाइल ऐप लॉन्च किया। यह ऐप 4,000 से अधिक खादी इंडिया के आउटलेट को कनेक्ट करेगा और मोबाइल फोन पर महज एक क्लिक के साथ खरीदारों को दुकानों के बारे में विस्तृत जगरह और उत्पादों की उपलब्धता प्रदान करेगा।
- खादी को इस साल 7 जून को दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शित किया गया था जहां गांधीजी को 125 साल पहले 1893 में प्रथम श्रेणी के डिब्बे में अपनी सीट छोड़ने से इनकार करने के लिए एक ट्रेन से फेंक दिया गया था।
- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसी साल 7 जून को पेंट्रिच से पीटरमारित्जबर्ग के लिए ट्रेन यात्रा की। महात्मा गांधी के साथ भारत के पर्याय बने सैकड़ों मीटर खादी, हैंड-स्पन और हाथ से बुने हुए उमदा कपड़ों से ट्रेन के सभी डिब्बे और इंजन से सजे थे जिसे उस घटना को याद करने के लिए चलाया गया था।
- सुषमा स्वराज ने चरखा कातते महात्मा गांधी की अर्धप्रतिमा का भी अनावरण किया।
खादी को लोकप्रिय बनाना
रेमंड खादी
- इस कंपनी ने अपने कुलीन मेहमानों की उपस्थिति में खादी फैशन शो का आयोजन करते हुए रेमंड खादी के लिए रिटेल मार्केटिंग की शुरुआत की थी।

भारत का खादी कपड़ा
- केवीआईसी 13 जुलाई 2018 को नई दिल्ली में भारत में मोंटेनेग्रो के राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम में शामिल हुआ। भारतीय खादी के साथ इस कार्यक्रम का नाम ट्रेंडी मोंटेनेग्रो रखा गया। इस अवसर पर राजनयिकों ने हाथ से काता हुआ और हाथ से बुना हुआ प्राकृतिक कपड़ा पहना।
- खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने 2 अगस्त 2018 को त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायोग को खादी उत्पादों की पहली खेप भेजी।
बीमारू खादी संस्थानों का पुनरुद्धार
बीमार खादी संस्थानों को पुनर्जीवित करने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने 'वर्तमान कमजोर खादी संस्थानों के बुनियादी ढांचे का सुदृढीकरण एवं विपणन बुनियादी ढांचा सहायता' योजना लागू की है।
यह योजना उन बीमार खादी संस्थाओं को जरूरत के आधार पर मदद देने के लिए है जिनमें सामान्य होने की संभावना है। खादी एवं ग्रामोद्योग के तहत पूरे क्षेत्र का बिक्री प्रदर्शन 2015-16 में 41,894.56 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017-18 में 60,451.28 करोड़ रुपये हो गया।
देश की विभिन्न पंचायतों में बंद खादी ग्रामोद्योग केंद्रों को फिर से खोलने की कोई योजना नहीं है।
तकनीकी केंद्र प्रणाली कार्यक्रम (टीसीएसपी)
एमएसएमई मंत्रालय 2,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर तकनीकी केंद्र प्रणाली कार्यक्रम (टीसीएसपी) लागू कर रहा है। इसमें विश्व बैंक से 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता भी शामिल है। इसके तहत 15 नए टूल रूम और तकनीकी विकास केंद्र (टीसीएस) स्थापित किए जाएंगे और देश भर में मौजूदा 18 टीसीएस को उन्न्त बनाया जाएगा।
निम्नलिखित 10 प्रौद्योगिकी केंद्रों पर काम चल रहा है:
• रोहतक
• भिवाड़ी
• बद्दी
• बेंगलूरु
• दुर्ग
• पुडुचेरी
• विशाखापत्तनम
• सितारगंज
• भोपाल
• कानपुर
- इन प्रौद्योगिकी केंद्रों पर काम पहले से ही शुरू हो गया है और ये जल्द ही काम करना शुरू कर देंगे।
- एर्नाकुलम और इंफाल में प्रौद्योगिकी केंद्रों के लिए अनुबंध पर मार्च 2018 में हस्ताक्ष्ार किए गए थे।
- मौजूदा 3 प्रौद्योगिकी केंद्रों- भुवनेश्वर, मुंबई और औरंगाबाद के उन्नयन के लिए निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई गई है जिसके तहत तिनसुकिया (असम), दीमापुर (नागालैंड) और अगरतला (त्रिपुरा) में प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी गई है और कार्य प्रगति पर है।
एसएमई एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
• एमएसएमई मंत्रालय ने 22 से 24 अप्रैल 2018 तक नई दिल्ली में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय एसएमई कॉन्वेंशन का आयोजन किया। इसमें 39 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
• इस सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, फ्रांस, इंडोनेशिया, इटली, केन्या, कोरिया, मलेशिया, मोरक्को, नाइजीरिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, स्पेन, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।
• इन देशों के 160 एसएमई ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा, सामरिक रक्षा प्रशिक्षण, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल मनोरंजन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अपने देशों के छोटे उद्यमों का प्रतिनिधित्व किया।
• 15 एसएमई के साथ पोलैंड का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल था जिसके बाद 8 एसएमई के साथ उज्बेकिस्तान और 7 एसएमई के साथ घाना का स्थान रहा। इसमें भारत के चार सौ एसएमई भी शामिल हुए।
• इस सम्मेलन के दौरान भारत, फिनलैंड, इटली, रूस और कंबोडिया की महिला उद्यमियों के लिए 'वूमेन एंटरप्रेन्योर- सस्टेनेबल लाइवलीहुड्स टु सक्सेसफुल बिजनेस' विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें उन्होंने अपनी सफलता और चुनौतियों का अनुभव साझा किया।
• एमएसएमई मंत्रालय महिलाओं को कारोबार स्थापित करने में प्रोत्साहित करने के लिए एक मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है।
भारत के एसएमई और ब्रिटेन, रूस, उज्बेकिस्तान, पोलैंड, भूटान, ऑस्ट्रिया, चेक गणराज्य, कैमरून एवं श्रीलंका के एसएमई के बीच तेईस समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते निम्नलिखित 12 क्षेत्रों में हैं:
• खाद्य प्रसंस्करण
• कृषि
• वस्त्र
• रक्षा
• गोला बारूद
• कचरा प्रबंधन
• डेयरी उत्पाद
• कोयला
• आभूषण
• स्वास्थ्य देखभाल
• शिक्षा
• चार विदेशी एसएमई ने भी भारत सरकार के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए अभिरुचि पत्र पर हस्ताक्षर किए।
• मंत्रालय भारत एवं अन्य देशों के एसएमई के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और डेटा के आदान-प्रदान के उद्देश्य से एक डिजिटल व्यापार डेस्क स्थापित कर रहा है।
• अगले सम्मेलन में भाग लेने के लिए 79 देशों ने दिलचस्पी दिखाई है और इसके साथ ही अब एसएमई कॉन्वेंसन वार्षिक आयोजन होगा।
• 2018 कॉन्वेंशन के दौरान भारत और विदेश के लगभग 150 प्रतिभागियों ने अपने कारोबार एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए स्टाल लगाए थे।
• उद्घाटन समारोह के दौरान भारत के 35 लघु दिग्गजों को एमएसएमई मंत्रालय के मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। ये कंपनियां लॉजिस्टिक्स, बायो-टेक्नोलॉजी, फार्मा, सेमी-कंडक्टर, टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, सुरक्षा और रसायन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
• दो दिवसीय एसएमई कॉन्वेंशन के दौरान 'ट्रांससीडिंग बाउंड्रीज' नाम से एक खादी फैशन शो का भी आयोजन किया गया। इस शो को फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया के सुनील सेठी ने तैयार किया और रोहित बल, अंजू मोदी, पायल जैन और पूनम भगत द्वारा खादी कपड़े से तैयार डिजाइन इसका मुख्य आकर्षण रहा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
भारत- कोरिया प्रौद्योगिकी विनिमय केंद्र का उद्घाटन
भारत-कोरिया प्रौद्योगिकी विनिमय केंद्र का उद्घाटन एमएसएमई राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गिरिराज सिंह और कोरिया गणराज्य के एसएमई एवं स्टार्ट-अप मंत्री हॉन्ग जॉन्ग हक ने 10 जुलाई 2018 को नई दिल्ली में किया था।
प्रौद्योगिकी विनिमय केंद्र के उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- भारत और कोरिया के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए एक मंच बनाना जहां उन्हें उत्पाद विकास के लिए नवीनतम तकनीकों की पहचान, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रबंधन विशेषज्ञता, उत्पाद विकास और प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को साझा करने में मदद की जा सके।
- प्रौद्योगिकी केंद्र अंतरिक्ष, सौर ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकियों एवं अन्य विकासशील प्रौद्योगिकी में विश्वसनीय गठजोड़ बनाने की दिशा में काम करेगा।
- कई कोरियाई संगठनों ने दोनों देशों के बीच एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुरू करने में रुचि दिखाई है और यह केंद्र उन्हें प्रभावी व्यापार गठबंधन बनाने के लिए भरोसेमंद भागीदार उपलब्ध कराएगा।
भारत और मोरक्को के बीच बेहतर सहयोग
भारत और मोरक्को ने दोनों देशों के एमएसएमई क्षेत्र के बीच सहयोग को बेहतर बनाने के लिए इसी साल मोरक्को के राबट में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू पर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के सीएमडी श्री रविंद्रनाथ और मोरक्को पीएमई के महानिदेशक श्री राब्रीबराजुकाओं ने 26 सितंबर 2018 से हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से एनएसआईसी और मोरक्को पीएमई दोनों के एमएसएमई के लिए सहयोग के संभावनाओं को बेहतर करने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह भारतीय प्रौद्योगिकियों और उत्पादों को मोरक्को में स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करेगा।
एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और मोरक्को के बीच कई द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गईं। दोनों देशों के एमएसएमई क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुभव साझा करने, लिंकेज बनाने के लिए व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, संयुक्त उद्यम और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के संदर्भ में बेहतर तालमेल के उपायों और साधनों पर दोनों पक्षों ने चर्चा की।
एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग पर भारत और रूस के बीच एमओयू
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय गणराज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अधीन सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) और रूस के जेएससी- रसियन स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस कॉरपोरेशन (आरएसएमबी कॉरपोरेशन) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है। इस एमओयू पर अक्टूबर 2018 में रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों देशों के लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
- यह दोनों देशों के एमएसएमई क्षेत्र की ताकत, बाजार, प्रौद्योगिकी और नीतियों को समझने को समझने के लिए एक ढांचा और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगा।
- इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यम और व्यापार साझेदारी के संदर्भ में उद्यमों के बीच सहयोग बढ़ाने और स्थायी व्यापार गठबंधन शुरू करने में मदद करना है।
- इस एमओयू के तहत क्षमता निर्माण, उद्यमिता विकास के लिए त्वरित इनक्यूबेशन, प्रदर्शनियों में भागीदारी के साथ एक-दूसरे के बाजार में निवेश के क्षेत्र में सहयोग की भी परिकल्पना की गई है।
- इस सहयोग से भारतीय एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए बाजारों, संयुक्त उपक्रमों, सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकी साझेदारी के संदर्भ में नई संभावनाओं के द्वार खुलने की उम्मीद है।
भारतीय एसएमई प्रतिनिधिमंडल ने पोलैंड में 8वें यूरोपीय एसएमई कांग्रेस में भाग लिया
पोलैंड के कोटेवाइस में 17 से 19 अक्टूबर 2018 के दौरान आयोजित 8वें यूरोपीय एसएमई कांग्रेस में 32 भारतीय एसएमई के एक प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने और सहायक के रूप में कार्य करने की क्षमता है। ये एमएसएमई 10 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका उपलब्ध कराते हैं और पूरे वैश्विक समुदाय के लिए मूल्य सृजित करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंध स्थापित करते हुए भारतीय एसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना आवश्यक है। भारतीय एसएमई के लिए अवसरों को भुनाने के लिए वह कांग्रेस यूरोपीय एवं भारतीय एसएमई के बीच प्रत्यक्ष व्यापार संबंध बनाने का एक अवसर था।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 50 देशों के लघु एवं मध्यम उद्यमों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य विषय था 'बिजनेस- सेल्फ- गवर्नमेंट टुगेदर फॉर इकनॉमी' यानी अर्थव्यवस्था के लिए एक साथ व्यवसाय एवं स्वशासन एक साथ।
भारत और भारतीय एसएमई के साथ व्यापार एवं व्यापार के अवसरों के बारे में चर्चा के लिए आयोजकों ने डेढ़ घंटे का एक विशेष सत्र आवंटित किया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस एक्सपो में भारतीय पेवेलियन में भारतीय उत्पादों एवं सेवाओं को प्रदर्शित किया।
भारत- ताइवान एसएमई डेवलपमेंट फोरम
ताइवान के ताइपेई में 13 नवंबर से 17 नवंबर 2018 तक भारत- ताइवान एसएमई डेवलपमेंट फोरम का आयोजन किया गया।
- भारत में एमएसएमई क्षेत्र एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति में है।
- वर्तमान में विभिन्न उद्योगों में 6.3 करोड़ से अधिक एमएसएमई हैं जहां 11.1 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं। ये एमएसएमई 8,000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन करते हैं जिनमें पारंपरिक वस्तुओं से लेकर हाइटेक मूल्यवान वस्तुएं हैं।
- भारत में एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार सृजन करने वाला क्षेत्र है।
- उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। परिणामस्वरूप 26,000 से अधिक स्टार्टअप के साथ भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहनों के कलपुर्जे, कपड़ा, वाहन, बांस उद्योग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने वाले ताइवान ने भारत के लिए विशेष रुचि दिखाई है।
- सामान्य इंजीनियरिंग, वाहनों के कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्लास्टिक के क्षेत्र में भारत के 20 उद्यम अपने ताइवानी समकक्षों के साथ संबद्ध क्षेत्र में लिंकेज के उद्देश्य से इस फोरम में भाग लिया।
- एमएसएमई मंत्रालय ने तकनीकी निवेश एवं उन्न्यन और निर्यात संवर्द्धन एवं आधुनिकीकरण के उद्देश्य से भारतीय एमएसएमई के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना शुरू की है।
एमएसएमई कॉन्वेंसन
उद्यम संगम- 2018
27 जून 2018 को संयुक्त राष्ट्र एसएमई दिवस मनाने के लिए एमएसएमई मंत्रालय ने देश में एमएसएमई क्षेत्र के लिए कॉन्वेंसन- उद्यम संगम- 2018 का आयोजन किया। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में इसका उद्घाटन किया।
एमएसएमई मंत्रालय के 'संपर्क' पोर्टल का भी राष्ट्रपति द्वारा अनावरण किया गया। यह पोर्टल प्रतिभाओं और प्रशिक्षित श्रमबल की मांग करने वाले उद्यमों के बीच एक पुल का काम करता है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मंत्रालयों एवं विभागों, स्वायत्त निकायों, एमएसएमई संगठनों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, वेंचर कैपिटलिस्ट, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के करीब 3 हजार प्रतिनिधियों ने इस एक दिवसीय सम्मेलन में भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किए गए जिनमें एमएसएमई को ऋण, आकांक्षी समूहों एवं क्षेत्रों की उद्यमिता, कृषि-कारोबार उपक्रम, सेवा की चुनौतियां, ज्ञान एवं विनिर्माण क्षेत्र, महिला उद्यमी, बाजार तक बेहतर पहुंच, स्वास्थ्य सेवा और आयुष उद्यमों शामिल हैं। सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता के लिए एक व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से संचार एवं मीडिया पर भी एक सत्र का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन का आयोजन एमएसएमई जगत के विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद एवं भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया ताकि एमएसएमई से संबंधित मुद्दों पर नवाचार एवं ज्ञान साझेदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाना और भारत सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र में जमीनी स्तर पर ज्ञान, विपणन, तकनीकी एवं वित्तीय सहायता के लिए विशेष उपायों की घोषणा के जरिये आश्वासन देना है।
'उद्यम संगम 2018' एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित सभी सरकारी गतिविधियों में तालमेल बिठाने और उसे मजबूती देने की दिशा में उठाया गया एक कदम है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 6 अप्रैल 2017 को आयोजित अपने 74वें पूर्ण अधिवेशन में 27 जून को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की ताकि सतत विकास लक्ष्य हो हासिल करने और सभी के लिए नवाचार, रचनात्मकता एवं सतत कार्य को बढ़ावा देने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के महत्व को मान्यता मिल सके।
उद्यम संवाद
एमएसएमई मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में 16 से 17 अप्रैल 2018 उद्यम संवाद नाम से विकास संस्थानों, प्रौद्योगिकी केंद्रों और टूल रूम का दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य क्लस्टर एवं टूल रूम जैसे एमएसएमई मंत्रालय के सफल उपक्रमों का व्यापक प्रचार- पसार करना था ताकि देश में ऐसे कई अन्य उपक्रम स्थापित किए जा सकें।
सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों में एमएसएमई के लिए योजनाओं के बारे में जानकारी का अधिक से अधिक प्रसार करना था। इस सम्मेलन के माध्यम से मंत्रालय ने ग्राम स्तर तक पहुंचने के लिए काम किया जिसके लिए विकास संस्थानों को जिला अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए कहा गया था।
जानकारी एवं जागरूकता
एमएसएमई मंत्रालय के लिए ई-न्यूजलेटर
एमएसएमई मंत्रालय ने 19 सितंबर 2018 को नई दिल्ली में 'एमएसएमई इनसाइडर' नाम से एक मासिक ई-न्यूजलेटर को लॉन्च किया।

एमएसएमई राज्य मंत्री श्री गिरिराज सिंह ई-न्यूजलेटर एमएसएमई इनसाइडर को लॉन्च करते हुए
- यह ई-न्यूजलेटर मंत्रालय द्वारा शुरू की गई गतिविधियों के बारे में जानकारी देता है। यह देश भर के हजारों एमएसएमई के साथ मंत्रालय का संपर्क भी स्थापित करता है।
- यह ई-न्यूजलेटटर एमएसएमई क्ष्ोत्र के बारे में सूचनाओं के नियमित प्रवाह में सहायता करता है। साथ ही यह मंत्रालय और इसके हितधारकों के बीच दोतरफा संवाद स्थापित करने में मदद करता है।
- मंत्रालय की योजनाओं के बारे में एमएसएमई एवं आम जनता को जानकारी देने के अलावा यह ई-न्यूजलेटर महीने के दौरान प्रौद्योगिकी में ताजा नवाचारों, आगामी कार्यक्रमों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। साथ ही यह प्रासंगिक विषयों और मंत्रालय की योजनाओं से लाभान्वित उद्यमियों की सफलता की कहानियों पर रोचक लेख भी देता है।
- यह ई-न्यूजलेटर मंत्रालय की वेबसाइट www.msme.gov.in पर उपलब्ध है। साथ ही यह सबद्ध संगठनों की वेबसाइटों पर भी उपलब्ध है। इसके अलावा उद्योग आधार मेमोरेंडम पोटर्टल पर पंजीकृत लगभग 50 लाख एमएसएमई को भी यह वितरित किया गया है।
ई-पहल
भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने 27 जून 2018 को संयुक्त राष्ट्र एसएमई दिवस पर नई दिल्ली में 'संपर्क' नाम से एमएसएमई मंत्रालय के एक पोर्टल का अनावरण किया। यह पोर्टल प्रतिभाओं और प्रशिक्षित श्रमबल की मांग करने वाले उद्यमों के बीच एक सेतु का काम करता है।
पुरस्कार एवं सम्मान
इस साल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के की समाप्ति पर 27 नवंबर को प्रगति मैदान में एमएसएमई मंत्रालय ने रजत पदक हासिल किया। जबकि केवीआईसी ने मंत्रालयों एवं विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और कमोडिटी बोर्ड श्रेणी में अपने पवेलियन के लिए कांस्य पदक जीता।
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आरके मीणा/एएम/एसकेसी
(रिलीज़ आईडी: 1557894)
आगंतुक पटल : 1474