भारी उद्योग मंत्रालय

भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय


वर्षांत समीक्षा 2018 - भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय

भारत में गतिशीलता के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री के '7 सी' सूत्र

सीपीएसई के लिए तीन मंत्र - कल्पना, प्रोत्साहन और संस्थान निर्माण

उच्च सुरक्षा वाले फीचर्स के साथ आईकैट प्रमाणन

प्रविष्टि तिथि: 03 JAN 2019 2:07PM by PIB Delhi

 

वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलनः

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल सितंबर में नई दिल्ली में हुए वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलन में भारत में गतिशीलता के भविष्य के लिए अपना विजन रेखांकित किया। इसमें उन्होंने सात 'सी' के महत्व पर जोर दिया - कॉमन, कनेक्टेड, कनवीनियंट, कंजेशन-फ्री, चार्ज्ड, क्लीन और कटिंग एज।

 

  • भारत की गतिशीलता पहलों की आधारशिला सार्वजनिक परिवहन को होना चाहिए।
  • इसे परिवहन के अलग माध्यमों और भौगोलिकताओं के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
  • ये गतिशीलता सुरक्षित, किफायती और समाज के सभी वर्गों तक सुलभ होनी चाहिए।
  • संकुलन यानी कंजेशन की आर्थिक और पर्यावरणीय लागतों पर एक नियंत्रण होना चाहिए।
  • बैटरियों और स्मार्ट चार्जिंग से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण तक सभी मूल्य श्रंखलाओं में निवेश किए जा रहे हैं।
  • गतिशीलता स्वच्छ ऊर्जा द्वारा संचालित होनी चाहिए जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत का सबसे ताकतवर हथियार है।
  • ये ऐसा क्षेत्र है जिसमें नवाचार और विकास के लिए असीम अवसर हैं जिससे सार्वजनिक हित के लिए समस्याओं के समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।  

 

फेम - भारत योजना

राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना 2020 का अनावरण फेम-इंडिया योजना (भारत में [हाइब्रिड एवं] विद्युत वाहनों का शीघ्र अंगीकरण और विनिर्माण) के हिस्से के तौर पर 2013 में किया गया था। इस योजना को छह साल की अवधि में 2020 तक कार्यान्वित किया जा रहा है। ये यहां हाइब्रिड और विद्युत वाहनों के बाजार के विकास और उनके विनिर्माण वाले पारिस्थितिकी तंत्र को मदद करेगा ताकि इस अवधि के अंत तक आत्म-निर्भरता प्राप्त की जा सके। भारत सरकार इस उद्योग में विश्वास भरने और उन्हें जरूरी निवेशों की योजना बनाने व आवश्यक क्षमताओं का निर्माण करने की अनुमति देने को लेकर प्रतिबद्ध है। इससे इस योजना को सरकार की मेक इन इंडिया पहल के साथ पंक्तिबद्ध होने में सक्षम किया जा सकेगा। ये योजना चार क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती हैः

 

  • प्रौद्योगिकी विकास
  • मांग का सृजन
  • पायलट परियोजनाएं
  • बुनियादी ढांचे को चार्ज करना

 

इस योजना का पहला चरण 1 अप्रैल 2015 में आरंभ हुआ और उसे 31 मार्च 2018 तक विस्तार दिया गया।

 

फेम (भारत में [हाइब्रिड एवं] विद्युत वाहनों का शीघ्र अंगीकरण और विनिर्माण) इंडिया योजना का दूसरा चरण अब कार्यान्वित किया जा रहा है। इसमें पांच वर्षों की अवधि में 5,500 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है जिससे हर तरह के विद्युत वाहनों को आर्थिक अनुदान मुहैया करवाया जाएगा।

 

हरित वाहनों को प्रोत्साहित करने और प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए हर श्रेणी के विद्युत वाहनों के लिए आर्थिक अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।

 

  • ये योजना प्रौद्योगिकी के हिसाब से बैटरी से चलने वाले स्कूटर और मोटरसाइकिलों को 1,800 रुपये से लेकर 29,000 रुपये तक के वर्गों में आर्थिक मदद प्रदान करेगी।

 

  • तिपहिया वाहनों के लिए ये प्रोत्साहन राशि 3,300 रुपये से 61,000 रुपये के बीच में होगी।

 

  • इन वाहनों का निर्माण करने वाले लोग हर महीने के आखिर में प्रोत्साहन राशि का दावा सरकार से कर सकेंगे।

 

भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड (एनएबी) के मुताबिक 24 अगस्त 2018 तक करीब 264 करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन दिया गया और इस योजना से कुल 226,557 वाहनों को लाभ पहुंचा।

 

ये योजना भारत सरकार की हरित पहलों में से एक है, जो निकट भविष्य में सड़क परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण को घटाने के सबसे बड़े सहायकों में से एक साबित होगी। इस योजना का लक्ष्य दुपहिया, तिपहिया, चौपहिया वाहनों, हल्के कमर्शियल वाहनों और बसों जैसी सभी वाहन श्रेणियों में प्रोत्साहन देना है।

 

2017-18 के दौरान फेम-इंडिया योजना में निम्नलिखित संशोधन किए गएः

  • इस योजना के पहले चरण को छह महीने बढ़ाकर 30.09.2017 तक विस्तार दिया गया और फेम-इंडिया योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ से "माइल्ड हाइब्रिड" प्रौद्योगिकी को बाहर कर दिया गया।
  • इलेक्ट्रिक 3डब्ल्यू (जिसकी अधिकतम गति 25 किमी/प्रति घंटा से अधिक न हो) को इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन देने के लिए शामिल किया गया है।
  • एल5 को रेट्रो फिटमेंट श्रेणी में शामिल किया गया है।
  • इस योजना के अंतर्गत पूरी तरह, विद्युत बस को प्रोत्साहन मांग के लिए शामिल किया गया है।

 

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 175 करोड़ रुपये की राशि इस योजना के लिए आवंटित की गई जिसमें से करीब 85.49 करोड़ रुपये को अब तक उपयोग किया जा चुका है। इस योजना के माध्यम से 1 अप्रैल 2015 को इसके आरंभ से लेकर 30 सितंबर 2017 तक, मांग प्रोत्साहनों (कुल प्रोत्साहन राशि 202.72 करोड़ रुपये) के रास्ते 1,54,000 विद्युत और हाइब्रिड वाहनों को सीधा सहयोग दिया गया है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 1 अप्रैल 2017 से लेकर 30 सितंबर 2017 तक करीब 16,000 वाहनों को डिमांड प्रोत्साहन के जरिए सहायता दी गई। इसके अलावा वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान इस विभाग ने 17.50 करोड़ रुपये लागत वाली तकनीकी विकास की परियोजना और आधारभूत ढांचे को चार्ज करने की पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी। स्वीकृत की गई कुछ परियोजनाएं इस प्रकार हैं:

 

    • दिल्ली, जयपुर और चंडीगढ़ में 200 (150-एसी और 50-डीसी) चार्जिंग स्टेशन
    • एनसीआर में 75-एसी स्मार्ट चार्जर
    • आधारभूत ढांचे के लिए 60 डीसी चार्जिंग
    • इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पांच इलेक्ट्रिक बसों के लिए पायलट परियोजना
    • एसी-डीसी संयुक्त सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का डिजाइन और विकास

 

 

बेचे गए वाहनों की कुल संख्याः 262776

 

38096145

लीटर ईंधन की बचत हुई

 

52390

लीटर ईंधन की प्रतिदिन बचत

 

129870

किलो कार्बन डाइऑक्साइड की प्रतिदिन कटौती

 

95142481

किलो कार्बन डाइऑक्साइड की कटौती

 

 

 

ऑटोमोटिव नीति

भारी उद्योग विभाग ने भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ऑटोमोटिव नीति मसौदा तय कर लिया है। इस नीति में प्रस्तावित है किः

 

  • बीएस-5 से आगे के उत्सर्जन मानकों के लिए दीर्घकालीन रूपरेखा अपनाई जाए और इसी को 2028 तक वैश्विक मानकों के अनुकूल किया जाए।
  • साल 2025 तक और बाद में सीएएफई के नियमों को लाया जाए और प्रोत्साहन व दंड निर्धारित किए जाएं।
  • अलग-अलग कराधान प्रयोजनों के लिए वाहनों का वर्गीकरण करने हेतु उनके आकार और कार्बन उत्सर्जन के आधार पर समग्र मापदंड अपनाया जाए।
  • डब्ल्यूपी-29 की तर्ज पर अगले 5 वर्षों में ऑटोमोटिव मानकों को अनुरूप किया जाए।
  • कौशल विकास और प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारा जाए, एएसडीसी की जवाबदेही बढ़ाई जाए और एक श्रम बाजार सूचना प्रणाली कार्यान्वित की जाए।
  • मजबूत ऑडिट नियंत्रण के साथ अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) व्यय के विभिन्न स्तरों पर कर छूट को बनाए रखें।
  • व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नवाचारों के साथ देशज आरएंडडी को बढ़ाया जाए।
  • अगले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण हिस्सों की सुरक्षा पर एआईएस और बीआईएस मानकों को अनुरूप किया जाए।
  • भारत नए वाहन सुरक्षा आकलन कार्यक्रम को तेजी से अपनाया जाए।

 

ऑटोमोटिव उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का एक स्तंभ है और वृहद आर्थिक विकास व प्रौद्योगिक उन्नति का एक प्रमुख चालक हैः

    • पूरी जीडीपी में इसका योगदान 7.1 प्रतिशत है और प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से ये 3.2 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
    • मजबूत घरेलू मांग और साथ ही मददगार सरकारी नीतियों की वजह से भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग वैश्विक नेतृत्व में शुमार होने के पायदान चढ़ रहा है।
    • भारत दुनिया में दुपहिया, तिपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है।
    • भारत दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा वाहन निर्माता है।

 

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2016 के बीच यहां के ऑटोमोटिव क्षेत्र ने 16.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया।

 

    • वर्ष 2023 तक यह क्षेत्र करीब 8 से 10 अरब डॉलर का स्थानीय व विदेशी निवेश और आकर्षित करेगा।
    • 1990 के आरंभ के बाद से भारत में ऑटोमोटिव उद्योग की जो तरक्की हुई है वो इस बात का चमकता उदाहरण है कि प्रगतिशील नीतियों और राष्ट्रीय आर्थिक विकास के सहयोग मिले तो कैसे औद्योगिक तरक्की सभी साझेदारों को पुरस्कृत कर सकती है।
    • ऊंची घरेलू मांग की उत्प्रेरणा के साथ-साथ भारतीय ऑटोमोटिव कंपनियों के पास अनुभव, आकार और विशेषज्ञता जैसी चीजें हैं जो घरेलू उद्योग को ऐसा विशेष अवसर प्रदान करती है जिससे विनिर्माण और इंजीनियरिंग दोनों में और खासकर उभरते हुए क्षेत्रों में वो वैश्विक नेतृत्व बन सकता है।
    • इस उद्योग का हाथ सरकार ने थामा हुआ है ताकि एक स्वच्छ और स्थिर गतिशीलता पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सके।
    • विभिन्न वैश्विक और घरेलू मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) और पुर्जे निर्माता अब इस देश में संचालित होते हैं जिससे उपभोक्ताओं को प्रौद्योगिकी, फीचर और गुणवत्ता के वैश्विक स्तरों वाले वाहनों की लगातार विस्तृत होती श्रंखला मिलती है।

 

भारत सरकार और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग ने ऑटोमोटिव मिशन योजना 2016-26 (एएमपी 2026) के माध्यम से इस उद्योग के भविष्य के लिए अपने उद्देश्यों को स्पष्ट किया है। इस योजना के अनुसार 2026 तक भारत वाहनों और ऑटो पुर्जों की इंजीनियरिंग, विनिर्माण और निर्यात के मामले में चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर होगा।

 

भारत सरकार ने फेम योजना (भारत में [हाइब्रिड एवं] विद्युत वाहनों का शीघ्र अंगीकरण और विनिर्माण) और 2020 में ही भारत स्टेज-6 को लाने जैसे नियामक उपायों, जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों के माध्यम से वाहनजनित प्रदूषण पर नियंत्रण करने को लेकर अपना इरादा प्रदर्शित कर दिया है। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) व कंप्रेस्ड प्राकृतिक गैस (सीएनजी) यात्री वाहनों के लिए अप्रैल 2017 में ईंधन खपत के मानक प्रभाव में आ गए। ये मानक कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई) प्रणाली पर आधारित हैं और 2012 के मुकाबले 2022 तक यात्री वाहनों की ईंधन खपत में करीब 18 प्रतिशत सुधार लाने का लक्ष्य रखते हैं।

 

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसईए)

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल अप्रैल में नई दिल्ली में हुए सीपीएसई सम्मेलन-विजन 2022 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष नेतृत्व को संबोधित किया। 75 वर्षों में ये पहला मौका था जब सभी सीपीएसई के लिए एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सम्मेलन सीपीएसई को मुनाफे और सामाजिक लाभ उत्पन्न करने वाले उद्यमों में तब्दील करने की एक नई शुरुआत होगी।

 

इस परिवर्तन को लाने के लिए प्रधानमंत्री ने सब सीपीएसई के लिए ये तीन मंत्र रेखांकित किए - प्रोत्साहन, कल्पना और संस्थान निर्माण। उन्होंने कहा कि सीपीएसई इस मुल्क की संपदा हैं और 2022 तक नए भारत का सपना साकार करने में महत्वपूर्ण उत्प्रेरक साबित होंगे।

 

    • विशेष प्रोत्साहन जो जरूरी नहीं कि वित्तीय ही हों, वो सार्वजनिक उद्यमों में नई ऊर्जा भरेंगे।
    • कल्पना से तकनीकी बदलाव आएंगे जिसके लिए नेतृत्व क्षमता जरूरी है।
    • संस्थान निर्माण से सार्वजनिक उद्यम महारत्न से नए भारत रत्न उद्यमों में तब्दील हो जाएंगे।

 

प्रधानमंत्री ने पांच 'पी' - परफॉर्मेंस (प्रदर्शन), प्रोसेस (प्रक्रिया), परसोना (व्यक्तित्व), प्रोक्योरमेंट (प्राप्ति) और प्रिपेयर्डनेस (तैयारी) - का सूत्र दिया जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कंपनियों से मुकाबला करने के लिए सीपीएसई को तैयार कर करेगा। सभी सीपीएसई के सामूहिक प्रयासों से भारत को अगले पांच वर्षों में 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मदद मिलेगी और ये सीपीएसई भारत की जीडीपी के लिए राजस्व पैदा करने वाली तीसरी बांह होंगे।

 

पांच चुनौतियों को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने 2022 तक नए भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में काम करने के लिए 100 दिनों में गौर करने लायक लक्ष्यों के साथ रूपरेखाएं बनाने के लिए कहा। ये पांच चुनौतियां हैं:

 

    • सीपीएसई अपने भू-रणनीतिक दायरे को कैसे बढ़ाएंगे?
    • सीपीएसई भारत के आयात खर्च को कैसे घटाएंगे?
    • नवाचार और अनुसंधान के लिए सीपीएसई एक-दूसरे के साथ समन्वय से कैसे काम करेंगे?
    • उन 115 आकांक्षी जिलों के लिए सीएसआर फंड का उपयोग सीपीएसई कैसे करेंगे जिन्हें राष्ट्रीय सूचकांकों के बराबर लाया जाना है?
    • नए भारत के विकास के लिए सीपीएसई कौन सा नया मॉडल प्रस्तुत करेंगे?

 

भारी उद्योग विभाग के अंतर्गत सीपीएसईः

 

1. हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड

 

2. इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड

 

3. भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)

सहायक कंपनियां:

क) भारत हैवी प्लेट एंड वेसल्स लिमिटेड

ख) भेल इलेक्ट्रिकल मशीन्स लिमिटेड

संयुक्त उपक्रमः

क) एनटीपीसी भेल पावर प्रोजेक्ट्स (प्राइवेट) लिमिटेड

 

4. एचएमटी लिमिटेड

सहायक कंपनियां:

क) एचएमटी (बियरिंग) लिमिटेड

ख) एचएमटी (इंटरनेशनल) लिमिटेड

ग) एचएमटी (मशीन टूल्स) लिमिटेड

घ) एचएमटी (वॉचेज़) लिमिटेड

ड.) एचएमटी (चिमार वॉचेज़) लिमिटेड

 

5. स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड

 

6. एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड

सहायक कंपनियां:

क) हूगली प्रिटिंग कंपनी लिमिटेड

ख) यूल इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड

ग) यूल इंजीनियरिंग लिमिटेड

 

7. भारतीय सीमेंट निगम लिमिटेड

 

8. हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड

 

9. हिंदुस्तान पेपर निगम लिमिटेड

सहायक कंपनियां:

क) नागालैंड पल्प एंड पेपर कंपनी लिमिटेड

ख) हिंदुस्तान न्यूज़प्रिंट लिमिटेड

ग) जगदीशपुर पेपर मिल्स लिमिटेड

 

10. हिंदुस्तान फोटो फिल्म्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

 

11. हिंदुस्तान सॉल्ट्स लिमिटेड

सहायक कंपनीः

क) सांभर सॉल्ट्स लिमिटेड

 

12. इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड

सहायक कंपनीः

क) राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड

 

13. नेपा लिमिटेड

 

14. भारतीय टायर निगम लिमिटेड

 

15. भारत भारी उद्योग निगम लिमिटेड

सहायक कंपनीः

क) ब्रेथवेट, बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड

 

16. त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लिमिटेड

17. तुंगभद्रा स्टील उत्पाद लिमिटेड

18. भारत पंप्स एंड कंप्रैशर्स लिमिटेड

19. रिचर्डसन एंड क्रूडास (1972) लिमिटेड

20. ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड

 

सीपीएसई / परिसमापन या समापन या बंद होने या अन्य विभागों या संगठनों में स्थानांतरण के अंतर्गत सीपीएसई की सहायक कंपनियां:

 

1. भारत ऑप्थेलमिक ग्लास लिमिटेड

2. भारत लेदर कॉरपोरेशन लिमिटेड

3. टैनरी एंड फुटवियर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड

4. पुनर्वास उद्योग निगम

5. भारत यंत्र निगम लिमिटेड

6. नेशनल बाइसाइकल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड

7. राष्ट्रीय औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड

8. खनन एवं संबद्ध मशीनरी निगम लिमिटेड

9. भारतीय साइकल निगम लिमिटेड

10. जेसप एंड कंपनी लिमिटेड

11. लगन जूट मशीनरी कंपनी लिमिटेड

12. रेरोल बर्न लिमिटेड

13. वेबर्ड (इंडिया) लिमिटेड

14. भारत ब्रेक्स एंड वाल्व्ज़ लिमिटेड

15. भारत प्रोसेस एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स लिमिटेड

16. मंड्या राष्ट्रीय पेपर मिल लिमिटेड

 

स्वायत्त निकायः

 

1. तरल पदार्थ नियंत्रण अनुसंधान संस्थान (एफसीआरआई)

2. भारतीय ऑटोमोटिव अनुसंधान संघ (एआरएआई)

3. नैटरिप (एनएटीआरआईपी) इम्पलीमेंटेशन सोसायटी (राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण और अनुसंधान एवं विकास ढांचा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए)

4. केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएमटीआई)

 

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)

 

भारतीय बिजली संयंत्र उपकरण निर्माताओं के बीच भेल निर्विवाद रूप से अव्वल कंपनी है, एक ऐसा नाम जिसे भारतीय उद्योग में गंभीरता से लिया जाता है और जो विश्व में भारत का औद्योगिक राजदूत है। अपनी 55 वर्षों की यात्रा में इसने भारतीय उद्योग के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक का रुतबा प्राप्त कर लिया है। हमारी अर्थव्यवस्था के केंद्रीय क्षेत्रों में भेल अपनी सेवाएं देती है और बिजली, ट्रांसमिशन, परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल, रक्षा एवं एयरोस्पेस, तेल एवं गैस और उद्योग क्षेत्र के ग्राहकों को विस्तृत श्रंखला के उपाय प्रदान करती है।

 

भेल कई उद्योगों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का ध्यान रखते हुए एक विस्तृत श्रंखला के ऊंची गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय उत्पादों का निर्माण करती है। इसके 17 विनिर्माण संयंत्र, 2 रिपेयर इकाइयां, 4 क्षेत्रीय कार्यालय, 8 सेवा केंद्र, 1 सहायक कंपनी, 3 सक्रिय संयुक्त उपक्रम, 15 क्षेत्रीय मार्केटिंग केंद्र, 3 विदेशी कार्यालय और भारत व विदेशों में 150 से ज्यादा परियोजना स्थलों पर मौजूदा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अब तक भेल ने विदेशी बाजारों में 11 गीगावाट के करीब बिजली पैदा करने वाली क्षमताएं इंस्टॉल की हैं और अतिरिक्त 6 गीगावाट पर काम चल रहा है।

 

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीमार और घाटे में जा रहे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) को तय समय सीमा में बंद करने और चल व अचल संपत्ति के निपटारे को लेकर लोक उद्यम मंत्रालय (डीपीई) के संशोधित दिशा निर्देशों को मंजूरी दे दी है। इन संशोधित दिशा निर्देशों से बीमार और घाटे में जा रहे सीपीएसई को बंद करने के कार्यान्वयन में देरी को घटाया जा सकेगा।

 

    • संबंधित सीपीएसई उद्यमों को बंद करने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं और कार्यवाहियों को शीघ्र पूरा करने के लिए ये दिशा-निर्देश व्यापक रूपरेखा प्रदान करते हैं। इनमें, इस प्रक्रिया के सिलसिले में संबंधित मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसई की जिम्मेदारियों को रेखांकित करना और सही समय-सीमा के साथ बंद करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मील के पत्थर बिछाना शामिल है।
    • इन दिशा निर्देशों में प्रशासकीय मंत्रालय, विभाग व सीपीएसई के द्वारा की जाने वाली अग्रिम तैयारी कार्रवाई और बंद होने वाले सीपीएसई के लिए बंद करने का प्रस्ताव तैयार करने, वैधानिक व अन्य देनदारियों का निपटारा करने और समयसार तरीके से ऐसे सीपीएसई की चल व अचल संपत्तियों के निपटान के तौर-तरीकों के बारे में बताया गया है।

 

इन दिशा निर्देशों में पहली प्राथमिकता बंद होने वाले सीपीएसई की भूमि के उपयोग को दी गई है जिसे आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों के मुताबिक किफायती आवासों के लिए बरता जाएगा। ये दिशा निर्देश सभी बीमार और घाटे में जाने वाले सीपीएसई पर लागू होंगे, जहां:

    • बंद करने की मंजूरी या सिद्धांत रूप में अनुमोदन प्रशासकीय मंत्रालय और मंत्रिमंडल या सीसीईए के विभाग द्वारा प्राप्त किया गया है; या
    • प्रशासकीय मंत्रालय और विभाग द्वारा संबंधित सीपीएसई को बंद करने का फैसला लेने के बाद किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

 

नेपा लिमिटेड के लिए वित्तीय पैकेजः

 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्य प्रदेश के नेपानगर में स्थित एक सार्वजनिक क्षेत्र की न्यूज़प्रिंट कंपनी नेपा लिमिटेड की पुनरुद्धार और मिल विकास योजना (आरएमडीपी) के लिए 469.41 करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज की घोषणा की। आरएमडीपी को पूरा करने के लिए इस पैकेज में कंपनी में हिस्सेदारी के तौर पर 277 करोड़ रुपये का संचार करना शामिल है जिससे उत्पादन क्षमता मौजूदा 83,000 एमटी सालाना से बढ़कर 1 लाख एमटी प्रतिवर्ष हो जाएगी, उत्पादन में विविधता लाई जाएगी, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारी जाएगी और नेपा लिमिटेड में उत्पादन को फिर जारी रखने में मदद मिलेगी। ये आरएमडीपी एक साल के अंदर पूरी होने जाने का अनुमान है।

 

वेतन और मजदूरी के भुगतान के लिए 101.58 करोड़ रुपये का ऋण भी मंजूर किया गया है। इससे संबंधित कंपनी के कर्मचारियों द्वारा झेली जा रही मुश्किलें कम होंगी। कंपनी के 400 कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के लिए 90.83 करोड़ रुपये की राशि को मंजूर किया गया। इस आरएमडीपी के पूरा होने के बाद एक उचित समय आने पर नेपा लिमिटेड के रणनीतिक विनिवेश को भी मंजूर किया गया है। इस आरएमडीपी के पूरा होने से नेपा लिमिटेड को अपना उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में रोजगार को भी सहारा होगा।

 

अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी केन्द्र

 

अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी केन्द्र (आईकैट) ने मैसर्स वोल्वो आयशर कमर्शियल व्हीकल लिमिटेड के एक हैवी ड्यूटी इंजन मॉडल के लिए पहला बीएस-6 प्रमाणीकरण पूरा कर लिया। इस इंजन को वोल्वो आयशर ने भारत में ही पूरी तरह स्वदेशी ढंग से विकसित और निर्मित किया है। कार्यान्वयन तिथि 1 अप्रैल 2020 से काफी पहले ही इस इंजन की कंप्लायंस जांच के सफलतापूर्वक पूरा होने पर उत्पाद स्थिरीकरण के लिए पर्याप्त समय मिल गया है ताकि अंतिम उपभोक्ताओं के लिए इसे ज्यादा सस्ता और ज्यादा मजबूत बनाया जा सके।

 

भारत सरकार के सक्रिय रवैये ने, देश को पारंपरिक बीएस-4 उत्सर्जन मानक से सीधे छलांग लगाते हुए बीएस-6 उत्सर्जन मानक को भारत में नियामक ढांचे के अगले स्तर के लिहाज से प्रत्यक्ष तौर पर अपनाने में मदद की है। ये बीएस-6 उत्सर्जन मानक मौजूदा उत्सर्जन मानकों में ठोस बदलावों को शामिल करते हैं ताकि उपभोक्ताओं को ज्यादा स्वच्छ उत्पाद सुनिश्चित किए जा सकें। गैसीय उत्सर्जन घटकों पर ज्यादा कठोर सीमाएं लगाने के अलावा पार्टिकल नंबर (पीएन) सीमाओं के लाए जाने के साथ ही, पार्टिक्युलेट मैटर (पीएम) सीमाओं को भी महत्वपूर्ण ढंग से कम किया गया है।

 

आईकैट दरअसल राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण और अनुसंधान एवं विकास ढांचा परियोजना (नैटरिप) के अंतर्गत स्थापित नए विश्वस्तरीय केंद्रों में पहला है और इसका मुख्य उद्देश्य ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग के क्षेत्र में होमोलोगेशन सुविधाएं देने के अलावा अनुसंधान और विकास करना है। ये ऑटोमोटिव उद्योग के एक व्यापक तकनीकी साथी के तौर पर उभरा है।

 

आईकैट भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सबसे प्रमुख परीक्षण एजेंसियों में से एक है। ये केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत अधिकृत 'टाइप अप्रूवल व होमोलोगेशन' एजेंसियों में एक है। इसके अलावा इसे फरवरी 2010 के बाद से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन (एसआईआरओ) के तौर पर, टायर परीक्षण व सेफ्टी ग्लासेज़ के लिए बीआईएस द्वारा, और जनरेटर सेटों के उत्सर्जन व शोर परीक्षण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा भी मान्यता दी गई है।

 

राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण और अनुसंधान एवं विकास ढांचा परियोजना (नैटरिप) का उद्घाटन भारी उद्योग एवं लोक उद्यमों के केंद्रीय मंत्री अनंत गीते द्वारा हरियाणा के मानेसर स्थित अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी केंद्र (आईकैट) में किया गया। आईकैट 2006 से इस उद्योग को ऑटोमोटिव परीक्षण और प्रमाणीकरण की सेवाएं देता आ रहा है।

 

नैटरिप दरअसल भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण पहल है जो देश में एक अत्याधुनिक परीक्षण, सत्यापन और अनुसंधान व विकास बुनियादी ढांचा बनाने के लिए भारत सरकार, कई राज्य सरकारोँ और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग के बीच सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है।

 

हरियाणा के मानेसर में आईकैट केंद्र-2 पर संवर्धित सुविधाओं को पूरा कर लिया गया है।

 

यहां नई खुली प्रयोगशालाओं में निम्नलिखित सुविधाएं हैं:

 

    • शोर कंपन और हार्शनेस (एनपीएच) लैब
    • विद्युतचुंबकीयता संगतता (ईएमसी) लैब
    • निष्क्रिय सुरक्षा लैब (पीएसएल)
    • टायर परीक्षण लैब (टीटीएल)

 

जाली प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल को रोकने के लिए आईकैट प्रमाणीकरणः

 

अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी केंद्र (आईकैट) ने जाली प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल को रोकने के लिए उच्च सुरक्षा फीचर्स से युक्त प्रमाणीकरण शुरू किया है।

 

भारत में किसी भी ऑटोमोटिव प्रमाणीकरण एजेंसी द्वारा लिया गया ये इस तरह का पहला कदम है ताकि सीएमवीआर प्रमाण पत्रों की सुरक्षा को ज्यादा बढ़ाया जा सके जिसमें वाहनों, इंजन, पुर्जों के कनफॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन (सीओपी) प्रमाण पत्र और टाइप अप्रूवल प्रमाण पत्र (टीएसी) वगैरह शामिल हैं।

 

आईकैट के इस नए प्रमाण पत्र के प्रारूप में नौ नए और विशिष्ट सुरक्षा फीचर हैं। इस प्रमाण पत्र में ये सुरक्षा फीचर इस तरह हैं:

    • उच्च सुरक्षा वाला कागज
    • अल्ट्रावॉयलेट स्याही से इस्तेमाल से हुई प्रिटिंग
    • ट्रॉयमार्क
    • माइक्रोप्रिंट
    • पैंटोग्राफ
    • रिवर्स पैंटोग्राफ
    • सिक्योर कोड
    • प्रिंट कोड
    • आईकैट की डिजिटल तरीके से छापी गई सील और स्टांप

 

जहां कुछ सुरक्षा फीचर सभी प्रमाण पत्रों के लिए एक की तरह के हैं, वहीं कुछ फीचर हर प्रमाण पत्र के लिए विशिष्ट हैं, जैसे इन फीचर के जरिए कवर होने वाली सूचना और विषय-वस्तु उस संबंधित प्रमाण पत्र के लिए ही खासतौर पर होगी। एक विशिष्ट अंतर ये भी है कि इसके कुछ फीचर सिर्फ अल्ट्रावॉयलेट रोशनी के माध्यम से ही देखे जा सकते हैं। इन प्रमाण पत्रों की छपाई विशेष तरह के प्रिंटरों के जरिए की जाएगी जिन्हें सिर्फ इसी उद्देश्य के लिए आईकैट आयात करेगा।

 

इन नए उच्च सुरक्षा फीचर्स की वजह से आईकैट के प्रमाण पत्र की जाली या नकली प्रतिलिपि बनाना मुश्किल हो जाएगा।

 

आईकैट भारत की प्रमुख प्रमाणन एजेंसी है जिसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने भारत और बाहर स्थित वाहनों व पुर्जों के निर्माताओं को परीक्षण व प्रमाणीकरण की सेवाएं देने के लिए अधिकृत किया है। प्रमाणीकरण सेवाओं के अलावा आईकैट उत्पाद विकास और सत्यापन के लिए व्यापक परीक्षण सेवाएं भी प्रदान करती है।

 

ई-चार्जिंग स्टेशन

 

भारी उद्योग एवं लोक उद्यमों के केंद्रीय मंत्री अनंत गीते ने इस साल नई दिल्ली में उद्योग भवन और द्वारका में चार्जिंग स्टेशनों का उद्घाटन किया। 

 

ई-वाहनों की चार्जिंग करने की सुविधा के लिए उद्योग भवन के परिसर में आठ चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं। इन आठ चार्जिंग स्टेशनों में से दो तेज गति के चार्जिंग स्टेशन भेल द्वारा इंस्टॉल किए गए हैं और छह धीमी गति के चार्जिंग स्टेशन एनर्जी एफीशियंसी सर्विसेज़ लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा लगाए गए हैं।

 

द्वारका में चार्जिंग ढांचे को राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (आरईआईएल) द्वारा विकसित किया गया है जहां 18 चार्जिंग स्टेशन हैं। इन स्टेशनों से 400 ई-रिक्शा चार्ज किए जा सकते हैं।

 

आरईआईएल अलग-अलग शहरों में पहले ही 45 चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर चुकी है। इस कंपनी द्वारा लगाए जाने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए धन भारी उद्योग विभाग देता है।

 

स्वच्छ भारत मिशन के हिस्से के तौर पर और देश में विद्युत गतिशीलता को प्रोत्साहित करने के भारत सरकार के स्थिर प्रयासों को जारी रखने के लिए भारी उद्योग विभाग ने रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के माध्यम से हाल ही में चुनिंदा शहरों और विशेष श्रेणी के राज्यों को 455 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की हैं। इस विभाग ने अहमदाबाद, हिमाचल प्रदेश और नवी मुंबई को भी 130 इलेक्ट्रिक बसों के लिए वित्त स्वीकृत किया है।

 

प्रदूषण स्तरों को घटाने और शहरों को स्वच्छ व पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए भारत सरकार फेम-2 योजना पर काम कर रही है जिसमें ध्यान विद्युत पावरट्रेन पर आधारित जन और साझा सार्वजनिक परिवहन पर केंद्रित है। देश में विद्युत गतिशीलता के निर्बाध प्रसार के लिए चार्जिंग ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता को फेम योजना के चरण-2 में संबोधित किया जा रहा है।

 

भारतीय ऑटोमोटिव अनुसंधान संघ (एआरएआई)

 

वर्ष 1966 में स्थापित एआरएआई दरअसल ऑटोमोटिव उद्योग द्वारा स्थापित एक प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान एवं विकास संगठन है जो भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम मंत्रालय से संबद्ध है और उसे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग द्वारा मान्यता मिली हुई है। एआरएआई यहां की प्रमुख परीक्षण और प्रमाणीकरण एजेंसियों में से एक है और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग के लिए नियमनों का निर्माण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एआरएआई को परीक्षण एवं कैलिब्रेशन प्रयोगशालाओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त है और ये आईएसओ 9001, 14001, 27001 और ओएचएसएएस 18001 से प्रमाणित संगठन है।

 

उत्सर्जन मूल्यांकन, शोर कंपन एवं कर्कशता, संरचनात्मक गतिशीलता, इंजन डिजाइन व विकास, कंप्यूटर समर्थित इंजीनियरिंग, वाहन मूल्यांकन, पुर्ज़ा सुरक्षा मूल्यांकन, सामग्री मूल्यांकन, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और कैलिब्रेशन जैसे क्षेत्रों में एआरएआई अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है।

 

वर्ष 2018-19 के दौरान भारतीय ऑटोमोटिव अनुसंधान संघ (एआरएआई) की महत्वपूर्ण उपलब्धियां:

 

पुरस्कार और मान्यताएं:

- टीआरआईएएस 31 परीक्षणों के लिए जापान की राष्ट्रीय यातायात सुरक्षा एवं पर्यावरण प्रयोगशाला (एनटीएसईएल) द्वारा मान्यता।

- एआरएआई के निदेशक 'ई-मोबिलिटी + लीडरशिप पुरस्कार 2018' से सम्मानित।

- भारत सरकार के पेटेंट कार्यलय द्वारा "घरेलू उपकरणों के लिए बायोडीजल उत्पादन के लिए सुधरी हुई प्रक्रिया और उपकरण" हेतु पेटेंट को स्वीकृति मिली।

- एफआईएसआईटीए 2018 में उत्कृष्ट पेपर पुरस्कार (दो पुरस्कार)।

- सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ/आईईसी 27001-2013 के अनुसार आधारित) के लिए प्रमाण पत्र से नवाजा गया।

-  कैलिब्रेशन स्कोप्स का सफलतापूर्वक एनएबीएल पुनर्मूल्यांकन और एआरएआई-कोथरूड व एआरएआई-एचटीसी के मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कैमिकल एवं फ़ोटोमेट्री परीक्षण स्कोप्स का एनएबीएल मूल्यांकन।

- एआरएआई-कोथरूड और एआरएआई-एफआईडी के आईएसओ9001-2015 / आईएसओ4001-2015 और ओएचएसएएस 18001-2007 के नए संस्करणों के मुताबिक पुन: प्रमाणन ऑडिट का सफलतापूर्वक समापन और एचटीसी-चाकन का आईएसओ9001-2015 / आईएसओ4001-2015 और ओएचएसएएस 18001-2007 के अनुसार नए प्रमाणन ऑडिट।

 

महत्वपूर्ण परियोजनाएं जो पूरी हुईं:

 

- एआईएसः052 पर खरा उतरने वाले एल्युमिनियम महाढांचे के साथ लो-फ्लोर और सेमी-लो फ्लोर बसों के प्रोटोटाइप, बस बॉडी कोड आवश्यकताएं डीएचआई द्वारा वित्तपोषित परियोजना में डिजाइन व निर्मित किए गए।

- डीएचआई द्वारा वित्तपोषित परियोजना के अंतर्गत ऊर्जा कुशल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए स्मार्ट ढांचा प्रणाली वाले कॉन्सेप्ट।

- ऑफलाइन परीक्षण के दौरान वाहन वातावरण और स्थितियों के सिम्युलेशन के लिए सिम्युलेटर और घरेलू तौर पर विकसित किए गए बीईवीसी डीसी-001 चार्जिंग स्टेशनों का सत्यापन।

- सीपीसीबी मानकों पर खरा उतरने के लिए उच्च क्षमता वाले डीजी सेट एनक्लोजर का डिजाइन अनुकूलन।

- फॉर्जिंग प्रक्रिया सिम्युलेशन के जरिए छाप घिसने (डाई वियर) का पूर्वानुमान।

- नवीनतम अधिसूचना के अनुसार एक्सेल्स का थकान परीक्षण।

- इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण (ईएससी) सिस्टम मूल्यांकन: स्टीयरिंग रोबोट इस्तेमाल करने वाले एम1 श्रेणी के वाहन।

- ऑफ-रोड वाहन संचालक सीट की अर्गोनॉमिक्स और आराम आकलन।  

 

आरकेमीणा/एएम/जीबी

 


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