ग्रामीण विकास मंत्रालय
वर्षांत समीक्षा: दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (ग्रामीण विकास मंत्रालय)
अक्टूबर 2018 तक 588 अतिरिक्त ब्लॉकों को इस मिशन की ‘गहन’ कार्यान्वयन रणनीति के दायरे में लाया गया
2018-19 के दौरान अब तक 73 लाख से भी अधिक परिवारों को 6.75 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है
स्वयं सहायता समूहों को 743.29 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता दी गई है
प्रविष्टि तिथि:
03 JAN 2019 6:40PM by PIB Delhi
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) का उद्देश्य 8-9 करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों तक पहुंच सुनिश्चित करना और ग्रामीण स्तर तथा उच्च स्तरों पर कार्यरत रिश्तेदारी आधारित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और संघों में प्रत्येक परिवार की एक महिला सदस्य को संगठित करना है।
प्रगति :
- वर्ष 2018-19 के दौरान (अक्टूबर 2018 तक) 588 अतिरिक्त ब्लॉकों को दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘गहन’ कार्यान्वयन रणनीति के दायरे में लाया गया है। इसके साथ ही इस तरह के ब्लॉकों की संख्या बढ़कर 5054 के आंकड़े को छू गई है।
- वर्ष 2018-19 के दौरान अब तक 73 लाख से भी अधिक परिवारों को 6.75 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है।
- स्वयं सहायता समूहों को 743.29 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता भी दी गई है।
- वर्ष 2018-19 के दौरान अब तक 1.63 लाख स्वयं सहायता समूहों को कुल मिलाकर 24082 लाख रुपये की राशि परिक्रामी निधि (रिवॉल्विंग फंड या आरएफ) के रूप में वितरित की गई है, जबकि 92765 एसएचजी और उनके महासंघ को 50247 लाख रुपये की राशि समुदाय निवेश कोष (सीआईएफ) के रूप में वितरित की गई है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एसएचजी-बैंक संपर्क कार्यक्रम में वार्षिक आधार पर उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। चालू वित्त वर्ष के दौरान अक्टूबर 2018 तक लगभग 17.57 लाख एसएचजी की पहुंच 27911 करोड़ रुपये तक संभव हुई है।
कृषि से जु़ड़ी आजीविका
- इस वर्ष दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देश भर में महिला एसएचजी सदस्यों के जरिये जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम शुरू किया गया है। जैविक खेती से जुड़ी पहल के तहत 28 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मिलाकर 1646 जैविक ग्रामीण क्लस्टरों की पहचान की गई है। इसी तरह कुल मिलाकर 23,679 गांवों की पहचान की गई है। चालू वर्ष के दौरान 25 प्रतिशत जैविक ग्रामीण क्लस्टरों में जैविक खेती से जुड़ी गतिविधियां शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में पहले कदम के रूप में जैविक खेती शुरू करने के लिए 5816 स्थानीय समूहों के जरिये कुल मिलाकर 57270 महिला किसानों को पंजीकृत किया गया है।
- एसआरएलएम- एएपी और उप-कार्यक्रम एमकेएसपी (महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना) के तहत वर्ष 2018-19 के दौरान कुल मिलाकर 14.03 लाख महिला किसानों की पहचान की गई है।
- वर्ष के दौरान समर्पित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पहल के तहत कुल मिलाकर 7283 आजीविका सीआरपी को प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही आजीविका सीआरपी की कुल संख्या बढ़कर 31889 (कृषि सखी- 17812 और पशु सखी- 14077) के आंकड़े को छू गई है। यह कैडर ग्रामीण स्तर पर चौबीसों घंटे आवश्यक विस्तार सेवाएं मुहैया करा रहा है।
- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना कृषि आजीविका से जुड़े समस्त उपायों के उद्देश्यों में से एक है। इस उद्देश्य की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महिला किसानों के घरों में कृषि-पोषक उद्यानों (एग्री-न्यूट्री गार्डन) को बढ़ावा दिया जा रहा है। चालू वर्ष के दौरान 10.86 लाख महिला किसानों के घरों में कृषि-पोषक उद्यानों को बढ़ावा दिया गया है।
- महिला किसानों के कठिन परिश्रम में कमी लाने और समय पर कृषि उपकरणों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कस्टम हायरिंग सेंटरों (किराये पर कृषि मशीनरी मुहैया कराने वाला केंद्र) को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2018-19 के दौरान कुल मिलाकर 806 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
- चूंकि छोटे एवं सीमांत उत्पादकों को बाजार से जोड़ना एक कठिन कार्य है, इसलिए उत्पादकों के समूहों को बढ़ावा देकर मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) का विकास करना कृषि आजीविका के तहत कार्यान्वयन रणनीति का एक अहम घटक है। कुल मिलाकर 1.16 लाख महिला किसानों को कृषि, एनटीएफपी एवं डेयरी जिन्सों से जुड़े वैल्यू चेन संबंधी उपायों के दायरे में लाया गया है। वर्ष 2018-19 के दौरान मध्य प्रदेश और बिहार में 3 महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों (एमएमपीसी) में परिचालन शुरू किया गया है। मध्य प्रदेश में दो एमएमपीसी की औसत दैनिक खरीद 3000-5000 लीटर प्रति दिन है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में डेयरी वैल्यू चेन के विकास और बुंदेलखंड क्षेत्र में तिल एवं दालों से जुड़ी वैल्यू चेन के विकास के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
गैर- कृषि आजीविका
- आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (एजीईवाई) ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, किफायती एवं समुदाय नियंत्रित परिवहन सेवाएं मुहैया कराने वाला एक विशेष कार्यक्रम है। इसके तहत वाहनों का स्वामित्व स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के नेटवर्कों के सदस्यों के पास होता है और इनका परिचालन भी यही नेटवर्क उन क्षेत्रों में करते हैं जहां नियमित परिवहन सेवाएं सुलभ नहीं होती हैं। वर्तमान में आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत देश भर में 624 रूटों या मार्गों पर सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की एक उप-योजना ‘स्टार्ट-अप ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी)’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कारोबारियों को आवश्यक सहयोग देने के लिए एक उपयुक्त माहौल विकसित किया जाता है। इस अनुकूल माहौल या परिवेश में कारोबार से जुड़ी सहायक सेवाएं, मार्गदर्शन, प्रारंभिक पूंजी, कारोबार संबंधी प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण और तकनीकी पहलुओं तथा विपणन संबंधी सहायता मुहैया कराने के घटक होते हैं। एसवीईपी के तहत किसी भी ब्लॉक में ये सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं ताकि छोटे कारोबारियों को आवश्यक सहयोग मिल सके। यह कार्यक्रम देश भर में 131 ब्लॉकों में कार्यान्वित किया जा रहा है। वर्ष के दौरान एसवीईपी के तहत 9282 उद्यमों का गठन किया गया है।
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आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/एनआर-23
(रिलीज़ आईडी: 1558528)
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