संचार मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2018 : संचार मंत्रालय


देश में दूरसंचार से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और सेवाओं पर सरकारी खर्च में छह गुना इजाफा

शुल्‍क दरों में कटौती से देश भर में उपभोक्‍ता लाभान्वित हो रहे हैं, औसत डेटा शुल्‍क दर में 96 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय कमी

प्रविष्टि तिथि: 09 JAN 2019 7:30PM by PIB Delhi

 

  • देश में दूरसंचार से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और सेवाओं पर सरकारी खर्च में छह गुना इजाफा – वर्ष 2009-14 के 9,900 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2014-19 में 60,000 करोड़ रुपये (वा‍स्‍तविक एवं नियोजित)
  • शुल्‍क दरों (टैरिफ) में कटौती से देश भर में उपभोक्‍ता लाभान्वित हो रहे हैं।
    • औसत कॉल (वॉयस) दर में 67 प्रतिशत की कमी – जून 2014 में 51 पैसे की औसत प्रति मिनट दर से घटकर जून 2018 में सिर्फ 11 पैसे के स्‍तर पर आ गई।
    • औसत डेटा शुल्‍क दर में 96 प्रतिशत की कमी – वर्ष 2014 में 269 रुपये प्रति जीबी से घटकर जून 2018 में सिर्फ 12 रुपये प्रति जीबी रह गई।
  • वर्ष 2015 और वर्ष 2016 में स्‍पेक्‍ट्रम की सुव्‍यवस्‍थि‍त एवं पारदर्शी नीलामी के जरिए सरकार और नागरिकों के बीच विश्‍वास बहाल किया गया – 1382 मेगाहर्ट्ज से भी अधिक की बिक्री की गई, इससे लगभग 65,000 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान हासिल हुआ।
  • अक्‍टूबर 2016 में हुई स्‍पेक्‍ट्रम नीलामी के लिए दूरसंचार विभाग (डॉट) को नवंबर 2017 में सीवीसी से उत्‍कृष्‍टता पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ, यह पुरस्‍कार ‘वर्ष 2016 में स्‍पेक्‍ट्रम की ई-नीलामी में पारदर्शिता’ के लिए दिया गया।
  • टेलीकॉम सेवाप्रदाताओं के पास अब अपनी सेवाओं की पेशकश के लिए पर्याप्‍त स्‍पेक्‍ट्रम उपलब्‍ध है, स्‍पेक्‍ट्रम की किल्‍लत का दौर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है।
  • भारतनेट नेट परियोजना के तहत अक्‍टूबर 2018 तक देश में कुल 2.5 लाख ग्राम पंचायतों (जीपी) में से लगभग 50 प्रतिशत को हाई-स्‍पीड ओएफसी नेटवर्क के जरिए आपस में कनेक्‍ट कर दिया गया है, जबकि जून 2014 में यह आंकड़ा सिर्फ 59 ग्राम पंचायतों का ही था, शेष ग्राम पंचायतों को भी मार्च 2019 तक कनेक्‍ट करने की योजना है। भारतनेट परियोजना से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड का युग शुरू होने की आशा है।
  • रक्षा के लिए ‘नेटवर्क फॉर स्‍पेक्ट्रम (एनएफएस)’ परियोजना – इसे जुलाई 2012 में मंजूरी दी गई थी, लेकिन मई 2014 तक कोई भी केबल नहीं बिछाई गई थी, पिछले चार वर्षों में 51,000 किलोमीटर लंबी ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई गई है।
  • भारतनेट और एनएफएस परियोजनाओं के तहत प्रतिदिन 800 किलोमीटर की सर्वोच्‍च दर के साथ ओएफसी बिछाई गई। इसके तहत औसत प्रतिदिन 200 किलोमीटर से ज्‍यादा रहा – यह अपने-आप में एक रिकॉर्ड है।
  • भारतनेट परियोजना में अपनी भूमिका के परिणामस्‍वरूप आईटीआई लिमिटेड वर्ष 2017-18 में 102 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा (अनुदान के बिना) अर्जित करने में समर्थ रही थी।
  • नागरिकों के कल्‍याण के लिए अत्‍यंत सक्रिय सहभागिता, नियोजन और नई तकनीकों से लाभ उठाने के लिए निवेश – 5जी के लिए उच्‍चस्‍तरीय फोरम (एचएलएफ) का गठन किया गया जिसने अपनी रिपोर्ट अगस्‍त 2018 में सौंपी, उद्योग जगत एवं अकादमिक क्षेत्र के बीच साझेदारी और सरकारी सहयोग से अनेक 5जी परीक्षण उपकरणों (टेस्‍ट बेड) की स्‍थापना की गई, अगले 12 महीनों के दौरान 5जी के क्षेत्रीय परीक्षण कराए जाएंगे।
  • आंकड़ों में मुख्‍य बातें
    • देश में समग्र दूरसंचार घनत्‍व में वृद्धि – जून 2014 के 75 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2018 में 93 प्रतिशत के स्‍तर पर पहुंच गया, 305 मिलियन नए ग्राहक बने
    • मोबाइल इंटरनेट की खरीदारी दोगुनी से भी अधिक हो गई – मार्च 2014 के 233 मिलियन से बढ़कर जून 2018 में 491 मिलियन के स्‍तर पर पहुंच गई
    • इंटरनेट कवरेज में 107 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि – जून 2014 के 251 मि‍लियन उपयोगकर्ताओं (यूजर) से बढ़कर जून 2018 में 512 मिलियन के स्‍तर पर पहुंच गई
    • मोबाइल बेस ट्रांससीवर स्‍टेशनों (बीटीएस) की संख्‍या दोगुनी से भी अधिक हो गई – मई 2014 के 7.9 लाख से बढ़कर मई 2018 में 20 लाख से भी अधिक हो गई
    • देशव्‍यापी ओएफसी कवरेज दोगुनी हो गई – मई 2014 के 7 लाख किलोमीटर से बढ़कर मई 2018 में 14 लाख किलोमीटर हो गई
    • प्रति सदस्‍य औसत मोबाइल डेटा उपयोग 51 गुना बढ़ गया – प्रति माह 62 एमबी से बढ़कर प्रति माह 3.2 जीबी के स्‍तर पर पहुंच गया।
    • विश्‍व भर में सबसे सस्‍ती डेटा शुल्‍क दर – वर्ष 2014 के प्रति जीबी 300 रुपये से घटकर जून 2018 में प्रति जीबी सिर्फ 12 रुपये रह गई, शुल्‍क दरों में 96 प्रतिशत की कमी
    • विश्‍व भर में सर्वाधिक मोबाइल डेटा खपत, इसका आंकड़ा प्रति माह 3.4 अरब जीबी है
    • ब्रॉडबैंड तक पहुंच में सात गुना इजाफा – मार्च 2014 के 61 मिलियन ग्राहकों से बढ़कर जून 2018 में 447 मिलियन ग्राहकों के स्‍तर पर पहुंच गई
    • मोबाइल के जरिए डिजिटल भुगतान से जुड़े लेन-देन में चार गुना इजाफा – नवंबर 2016 के 168 मिलियन से बढ़कर अब यह 600 मिलियन के आंकड़े को छू गया है।
    • दूरसंचार क्षेत्र में एफडीआई की आवक या प्रवाह में पांच गुना इजाफा – वर्ष 2015-16 के 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 6.2 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को छू गया
    • देश में बगैर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को कनेक्‍ट करना :
    • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र – 4781 करोड़ रुपये के कुल परिव्‍यय से पहले चरण में 2335 मोबाइल टावर लगाए गए, 7330 करोड़ रुपये के कुल परिव्‍यय के साथ दूसरे चरण में लगाये जाने के लिए 4072 टावरों को मंजूरी दी गई
    • पूर्वोत्तर क्षेत्र में दूरसंचार क्षेत्र पर अब तक का सर्वाधिक व्‍यय – 10,800 करोड़ रुपये से भी अधिक के कुल परिव्‍यय वाली मौजूदा परियोजनाएं सीमावर्ती क्षेत्रों, राजमार्गों और अब तक कनेक्‍ट न हो पाए गांवों को कनेक्‍ट कर रही हैं।
    • अंडमान एवं निकोबार द्वीपों के लिए पनडुब्‍बी केबल कनेक्‍ट‍िविटी, इसके अलावा द्वीपों के भीतर और लक्षद्वीप में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है – 2250 करोड़ रुपये के परिव्‍यय से इसे सुनिश्चित किया जा रहा है।
    • 10,000 करोड़ रुपये के परिव्‍यय से ग्रामीण क्षेत्रों में वाई-फाई परितंत्र का व्‍यापक विस्‍तार – ग्रामीण एक्‍सचेंजों में बीएसएनएल द्वारा 25,000 हॉट-स्‍पॉट, साझा सेवा केन्‍द्रों (सीएससी) द्वारा 7,000 हॉट-स्‍पॉट (ई-चौपाल), मार्च 2019 तक एक मिलियन और हॉट-स्‍पॉट स्‍थापित करने की योजना
    • एक सुदृढ़, प्रतिस्‍पर्धी और टिकाऊ दूरसंचार क्षेत्र के परिचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण सुधार
    • स्‍पेक्‍ट्रम को साझा करने के साथ-साथ इसकी ट्रेडिंग करने की अनु‍मति – प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देना मुख्‍य उद्देश्‍य
    • स्‍पेक्‍ट्रम में सामंजस्‍य स्‍थापित करना – इसके परिणामस्‍वरूप नीलामी के लिए स्‍पेक्‍ट्रम उपलब्‍ध हुआ है
    • निष्क्रिय (फाइबर, टावर इत्‍यादि) और सक्रिय (बीटीएस इत्‍यादि) बुनियादी ढांचे को साझा करना
    • स्‍थगित भुगतान से जुड़ी देनदारियां – इसका उद्देश्‍य इस क्षेत्र में वित्तीय समस्‍याओं को कम करना है
    • मार्ग के अधिकार (आरओडब्‍ल्‍यू) से जुड़े नियमों और प्रभार को आसान बनाना – कारोबार करने में सुगमता
    • मोबाइल नंबर की पूर्ण पोर्टेबिलिटी
    • वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटरों (वीएनओ) के लिए लाइसेंस की शुरुआत – इसका उद्देश्‍य बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का कारगर उपयोग सुनिश्चित करना है
    • वीएनओ लाइसेंसधारकों के लिए इनपुट क्रेडिट की अनुमति दी गई, ताकि कर बोझ कम हो सके
    • राष्‍ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी) 2018 – हमारी आकांक्षाओं और दृढ़संकल्‍प का सार पेश किया गया :
    • मिशन – एनडीसीपी 2018
  • कनेक्‍ट इंडिया – 50 एमबीपीएस की दर से सार्वभौमिक (‍यूनिवर्सल) ब्रॉडबैंड कवरेज
  • प्रोपेल इंडिया – 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित करना
  • सिक्‍योर इंडिया – एक मजबूत, लचीला एवं सुदृढ़ संचार बुनियादी ढांचा और डेटा संरक्षण व्‍यवस्‍था
    • उद्देश्‍य – एनडीसीपी 2018
  • वर्ष 2022 तक सभी को ब्रॉडबैंड मुहैया कराना
  • इस सेक्‍टर में 4 मिलियन रोजगारों को जोड़ना या सृजित करना
  • डिजिटल संचार क्षेत्र वर्ष 2022 तक बढ़कर भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) के 8 प्रतिशत को छू जाएगा (वर्तमान में यह 6 प्रतिशत है)
  • भारत को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ के आईसीटी विकास सूचकांक में शीर्ष 50 रैंक में शुमार किया जाएगा, वर्तमान में इसकी रैंकिंग 134वीं है।
  • इस सेक्‍टर में शुद्ध सकारात्‍मक अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार – स्‍थानीय विनिर्माण के साथ-साथ निर्यात में भी वृद्धि और आयात में कमी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा
  • देश की डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना।

डाक विभाग - प्रमुख बातें एवं उपलब्धियां

  • स्‍पीड पोस्‍ट से जुड़ा औसत वार्षिक राजस्‍व दोगुने से भी अधिक हो गया - वर्ष 2006-14 के 788 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2014-18 के बीच 1682 करोड़ रुपये के औसत राजस्‍व के स्‍तर पर पहुंच गया।
  • वर्ष 2017-18 में ई-कॉमर्स व्‍यवसाय से 415 करोड़ रुपये का राजस्‍व अर्जित हुआजो पिछले वित्‍त वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
  • एक अलग पार्सल निदेशालय खोला गया, ताकि तेजी से बढ़ते इस कारोबारी खंड (सेगमेंट) पर फोकस किया जा सके। विभिन्‍न खेपों की बढ़ती संख्‍या के सुव्‍यवस्थित संचालन के लिए 42 पार्सल केन्‍द्र और 242 प्रमुख डिलीवरी केन्‍द्र पहले ही स्‍थापित किये जा चुके हैं।
  • आईपीपीबी विभिन्‍न चैनलों में समस्‍त वित्‍तीय सेवाओं की पेशकश करेगा, ताकि बैंकिंग सुविधाओं से वंचित एवं कम बैंकिंग सुविधाएं प्राप्‍त कर रहे लोग लाभान्वित हो सकें।
  • आईपीपीबी से जुड़े आंकड़े (1 सितंबर, 2018 और 1 जनवरी, 2019 के बीच)
  • खोले गए कुल खातों की संख्‍या : 20.11 लाख
  • लेन-देन का कुल मूल्‍य : 562 करोड़ रुपये
  • लेन-देन की कुल संख्‍या : 12.87 लाख
  • डाक विभाग के 995 एटीएम का अब अन्‍य बैंकों के साथ अंतर-संचालन हो रहा है।
  • सुकन्‍या समृद्धि योजना : कुल 1.52 करोड़ नामांकनों में से 1.31 करोड़ नामांकन डाकघरों के जरिए कराए गए हैं।
  • देश भर में अब तक 13,352 डाकघरों में आधार नामांकन एवं अद्यतन केन्‍द्रों को परिचालन में लाया गया है। इन केन्‍द्रों में 8 लाख से भी अधिक नामांकनों और 29 लाख अद्यतन (अपडेट) का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
  • विदेश मंत्रालय के सहयोग से देश भर में 254 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों (पीओपीएसके) को चालू किया गया है - इसका उद्देश्‍य हर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में पीओपीएसके/पीएसके के जरिए पासपोर्ट सेवाएं मुहैया कराना है, इन पीओपीएसके में 17.5 लाख से अधिक पासपोर्ट संबंधी नियोजित भेंट की प्रोसेसिंग पहले ही हो चुकी है।
  • डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) - ये डाक विभाग की ओर से पेश किए गए बीमा उत्‍पाद हैं, जिनमें 'कम प्रीमियम, अधिक बोनस' की अनोखी खूबी है। देश में वित्‍तीय समावेश को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से इन उत्‍पादों के लाभ का दायरा बढ़ाने के लिए नये सिरे से अभियान चलाया गया।
  • मार्च 2014 और सितंबर 2018 के बीच पीएलआई और आरपीएलआई से संबंधित एयूएम या प्रबंधन अ‍धीन कुल परिसंपत्तियां (भारत सरकार की विशेष प्रतिभूतियों/फ्लोटिंग रेट बांडों सहित) काफी बढ़ गईं - 25,856 करोड़ रुपये से बढ़कर 93,068 करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गईं।
  • डाक जीवन बीमा (पीएलआई) से जुड़े लाभ अब केवल सरकारी और अर्द्ध सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं हैं, यह सुविधा अब प्रोफेशनलों (शिक्षक, वकील, इंजीनियर, डॉक्‍टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट) और नेशनल एवं बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंजों (एनएसई व बीएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों के कर्मचारियों के लिए भी उपलब्‍ध है।
  • 'संपूर्ण बीमा ग्राम योजना' के तहत देश भर के 2,529 गांवों में रहने वाले प्रत्‍येक परिवार के कम से कम एक व्‍यक्ति का बीमा कराया गया है, मार्च 2019 तक 10,000 गांवों को लक्षित किया गया है।
  • 'दीनदयाल स्‍पर्श (शौक के रूप में टिकटों में रूझान और शोध को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति)' के नाम से डाक टिकट संग्रह छात्रवृत्ति योजना नवम्‍बर 2017 में शुरू की गई थी, ताकि बच्‍चों में डाक टिकट संग्रह को बढ़ावा दिया जा सके। इस योजना के तहत प्रत्‍येक वर्ष उन स्‍कूली बच्‍चों को 920 छात्रवृत्तियां दी जाएंगी, जो डाक टिकट संग्रह में विशेष रु‍चि दिखाएंगे। इस वर्ष अब तक 83,861 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन किया है।  
  • डाक विभाग जन केन्द्रित विषयों (थीम) पर टिकट जारी करता रहा है। हाल ही में इन विषयों पर टिकट जारी किए गए हैं - रामायण, महाभारत, भारतीय व्‍यंजन, सौर प्रणाली, सफदरजंग अस्‍पताल इत्‍यादि।
  • महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती से जुड़े समारोहों के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 2 अक्‍टूबर, 2018 को गोलाकार डाक टिकट जारी किये गये। स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार गोलाकार डाक टिकट जारी किये गये हैं।
  • डाक विभाग में तकनीक संबंधी निवेश वर्ष 2010-14 के 434 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2014-18 के दौरान (सितंबर, 2018 तक) लगभग 1087 करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गया है।
  • डाक विभाग के शाखा कार्यालयों में ग्रामीण डाक सेवकों द्वारा 1.29 लाख से भी अधिक सिम आधारित हैंडहेल्‍ड डिवाइस या उपकरणों को उपयोग में लाया जा रहा है।
  • दिसंबर 2016 से अब तक नेशनल ऑटोमेटेड क्‍लीयरिंग हाउस (एनएसीएच) प्‍लेटफॉर्म पर 5.21 करोड़ लेन-देन की प्रोसेसिंग सफलतापूर्वक की गई है, 3904 करोड़ रुपये से भी अधिक धनराशि का संचालन किया गया है।
  • डिलीवरी पर नकदी (कैश) देने सहित महत्‍वपूर्ण डाक पहुंचाने से जुड़ी सूचनाओं को वास्‍तविक समय पर अपडेट करने के लिए पोस्‍टमैन मोबाइल एप लांच किया गया है।

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आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/वीके/वाईबी  –

 

 

 


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