रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय- वर्षांत समीक्षा- 2018


दिनांक 31 दिसम्बर 2018 को पीआईबी दिल्ली द्वारा प्रविष्ट

प्रविष्टि तिथि: 31 DEC 2018 4:12PM by PIB Delhi

 

यह रक्षा मंत्रालय के लिये एक घटनाप्रद वर्ष रहा । भारत सरकार ने दो रक्षा उत्पादन कॉरिडोर, एक उत्तर प्रदेश और दूसरा तमिलनाडु में, बनाने का नीतिगत निर्णय लिया । यह कॉरिडोर भारत को ‘मेक इन इण्डिया’ पहल के माध्यम से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे । यह वर्ष देश में महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से भी मील का पत्थर रहा- जब इतिहास में पहली बार समूची महिलाओं से सुसज्जित दल ने भारतीय नौसेना के 56 फुट लंबे जलयान ‘आईएनएस तारिणी’ में पूरे विश्व की परिक्रमा की । इस उपलब्धि का इस बात से गहराई से अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने उद्बोधन की शुरुआत इस उपलब्धि का ज़िक्र कर की थी । उन्होंने स्वष्टतः कहा, “हम स्वतंत्रता दिवस का यह त्यौहार ऐसे समय मना रहे हैं जब उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश से हमारी बेटियां सात समंदर की यात्रा पूरी कर वापस आई हैं । वह सात समंदर के रंगों को हमारे तिरंगे के रंग में रंग कर (सात समंदर में तिरंगा फहराकर) हमारे बीच लौटी हैं ।”

 

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 11 से 14 अप्रैल, 2018 तक द्विवार्षिक ‘डेफएक्सपो’ का दसवां संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया । इसका उद्घाटन  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 12 अप्रैल, 2018 को किया । इस आयोजन का सूत्रवाक्य ‘इण्डियाः द इमर्जिंग डिफेंस मैन्यूफेक्चरिंग हब’ था यानी ‘भारतः उभरता रक्षा निर्माण केंद्र’ । दिनांक 10 सितम्बर 2018 को भारतीय वायुसेना के आईएल-76 वायुयान से भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में हवा-से-हवा में 1,900 किलो ईंधन भरने के सफल ट्रायल के साथ ही भारत उन प्रतिष्ठित देशों के समूह में शामिल हो गया जिन्होंने सैन्य श्रेणी के विमानों में हवा-से-हवा में ईंधन भरने की प्रणाली को विकसित कर लिया है ।  रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 27 नवम्बर, 2018 को ‘मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति’ शुरू किया । इसके पीछे मुख्य विचार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये विदेशी स्रोतों से तकनीक का हस्तानांतरण (टीओटी) चाहने की संस्कृति बदलकर भारत में ही बौद्धिक सम्पदा का सृजन करना है ।   

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी दिनांक 28 सितम्बर को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन में आयोजित संयुक्त कमांडर सम्मेलन में उपस्थित हुए एवं उन्होंने वहां ‘पराक्रम पर्व’ की शुरुआत भी की । रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों द्वारा निर्णय लेते समय अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिये तीनों सेवाओं (सेना, वायुसेना, नौसेना) के उप प्रमुखों की वित्तीय विषयों में निर्णय लेने की शक्तियों में पांच गुना बढ़ोतरी कर इसको 500 करोड़ रुपये कर दिया । रक्षा मंत्री ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सैन्य बलों के हथियार एवं गोलाबारूद के भंडार में बढ़ोतरी करने के लिये लिया ताकि सैन्य कार्रवाई की उनकी तैयारी में बढ़ोतरी हो पाए । 6 सितम्बर, 2018 को नई दिल्ली में  विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज एवं रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के सचिव श्री माइकल पॉम्पियो एवं रक्षा सचिव श्री जेम्स माटिस ने भारत और अमेरिका के बीच दो+दो मंत्रिस्तरीय वार्ता का शुभारंभ किया ।     

 

पुराने फिरोज़पुर-लाहौर राजमार्ग पर सतलुज नदी (हुसैनीवाला बैरेज) पर बने अस्थायी पुल, जो हुसैनीवाला एन्क्लेव फिरोजपुर से जोड़ता है, के चार स्पैन को नये पुल का निर्माण कर बदल दिया गया है । इस पुल को दिनांक 12 अगस्त, 2018 को रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने राष्ट्र के नाम समर्पित कर दिया । हुसैनीवाला वह स्थान है जहां अपनी मातृभूमि के सर्वोच्च बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव का अंतिम संस्कार किया गया था ।

 

जब भी देश ने विपदाओं का सामना किया है, सशस्त्र बल कठिन समय में दृढ़ता से सहायता के लिये तैयार रहे हैं । यह वर्ष भी कुछ अलग नहीं था । सशस्त्र बलों ने ‘तितली’ चक्रवात, केरल की बाढ़ और ‘गाजा’ चक्रवात समेत प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अनेक लोगों एवं पशुओं की जान बचा कर तथा सम्पत्ति की रक्षा कर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) में केंद्रीय भूमिका निभाई ।  

 

रक्षा उत्पादन विभाग

 

 

  1. भारत सरकार ने एक उत्तर प्रदेश (यूपी) तथा एक तमिलनाडु में रक्षा उत्पादन गलियारों की स्थापना करने का निर्णय लिया है । दिनांक 21-22 फरवरी, 2018 को आयोजित उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी ऐसा ही गलियारा बनाने की घोषणा की । उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित गलियारे की स्थापना के लिये छह मुख्य बिंदुओं की पहचान की गई है यथा अलीगढ़, आगरा, चित्रकूट, झांसी, कानपुर एवं लखनऊ । तमिलनाडु में प्रस्तावित गलियारे होंगेः चेन्नई, कोयम्बटूर, होसुर, सालेमंड, तिरुचिरापल्ली । योजना के अंतर्गत प्रयोगशाला की आवश्यकता के आधार पर कुल 400 करोड़ रुपये की सहायता से 6 से 8 रक्षा परीक्षण अवसंरचना (डीटीआई) की स्थापना की परिकल्पना की गई है । योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत डीटीआई के लिये सहायता, परियोजना के लिये स्वीकृत मूल्य का 75 प्रतिशत होगी । योजना का कार्यान्वयन एक विशेष उद्देश्य वाहन (स्पेशल परपज़ व्हीकल) के माध्यम से होगा जो कि एक सरकारी एजेंसी के माध्यम से रक्षा परीक्षण अवसंरचना (डीटीआई) की स्थापना, प्रचालन एवं रखरखाव का कार्य करेगा ।   

 

  1.  ‘डेफएक्सपो 2018’ का दसवां संस्करण दिनांक 11 अप्रैल, 2018 से 14 अप्रैल, 2018 तक तमिलनाडु के चेन्नई में आयोजित किया गया । प्रधानमंत्री ने दिनांक 12 अप्रैल, 2018 को डेफएक्सपो 2018 का औपचारिक उद्घाटन किया । रक्षा प्रदर्शनी ने पहली बार भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत किया । यह एक्सपो के सूत्रवाक्य ‘इंडियाः द इमर्जिंग मैन्युफेक्चरिंग हब’ से भी प्रतिबिम्बित हुआ ।

 

  1. रक्षा उत्पादन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिये स्टार्टअप लाने, सुरक्षा बलों के लिये आवश्यक नयी प्रौद्योगिकियों की खोज करने एवं आयातित प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से स्टार्टअप इण्डिया एवं अटल नवाचार मिशन के सहयोग से तैयार रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) की एक योजना रक्षा उत्कृष्टता में नवाचार (आई-डैक्स) का दिनांक 12 अप्रैल, 2018 को प्रधानमंत्री ने डेफएक्सपो 2018 के दौरान उद्घाटन किया । आई-डैक्स का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमइ), स्टार्ट-अप, निजी अन्वेषकों, शोध एवं विकास संस्थानों एवं अकादमिक क्षेत्र के विद्वानों समेत उद्योगों को जोड़कर तथा शोध एवं अनुसंधान के लिये उनको अनुदान राशि और अन्य मदद मुहैया करवाकर रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में नवाचार एवं तकनीकी विकास को गति देने वाले पारितंत्र का निर्माण करना है ।

 

  1. भूमि आधारित हथियारों के संदर्भ में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) ने 155 एमएम गुणा 52 कैलिबर माउण्टेड गन सिस्टम (एमजीएस) का अनावरण किया साथ ही चलाकर प्रदर्शन किये जाने वाले हथियार के रूप में अपना प्रमुख उत्पाद 155 एमएम गुणा 45 कैलिबर ‘धनुष’ आर्टिलियरी तोप, टी-90 टैंक तथा टी-72 ब्रिज लेयर टैंक का प्रदर्शन भी किया । आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) ने गोलाबारूद तथा अन्य साज़ोसामान के साथ अपनी अनेक हथियार प्रणालियों को दिखलाया । आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) पैवेलियन के अन्य आकर्षण एके-630 नेवल गन, सीआरएन-91, 20 एमएम की एंटी मटेरियल राइफल “विध्वंसक”, 7.62 गुणा 51 एमएम असॉल्ट राइफल, 7.62 गुणा 39 एमएम असॉल्ट राइफल “घातक”, जेवीपीसी, 12 बोर पंप एक्शन गन, इंसास 5.56 एमएम असॉल्ट राइफल, .32 रिवॉल्वर एवं विशेष सुरक्षा वस्त्रों समेत उच्च, मध्यम तथा लघु क्षमता वाले गोलाबारूद थे ।

 

  1. रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) में एक रक्षा निवेशक सेल को क्रियाशील बनाया गया है । यह रक्षा उत्पादन से संबंधित सभी प्रकार के प्रश्नों के तुरंत समाधान    की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी । सभी प्रश्नों के विषयवार जवाब देने के लिये इसके प्रमुख अधिकारियों को निर्दिष्ट कर दिया गया है ।  

 

  1. रक्षा उपकरणों की स्वदेशी डिज़ाइन तैयार करने, उनका विकास एवं निर्माण करने के लिये सरकार एवं निजी भारतीय उद्योगों के बीच सहयोग के सरलीकरण के लिये जनवरी 2018 में एक नवीन एवं सरलीकृत मेक-II प्रक्रिया की शुरुआत की गई है ।

 

  1. दिनांक 31 जनवरी 2018 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने हल्के लड़ाकू विमान (एलसीएच) पर एकीकृत स्वदेश निर्मित ऑटोमैटिक फ्लाइट कण्ट्रोल सिस्टम (एएफसीएस) की सर्वप्रथम उड़ान सफलतापूर्वक संचालित की । यह 20 मिनट की कालावधि की उड़ान थी एवं उड़ान की संपूर्ण अवधि में इस प्रणाली का व्यवहार त्रुटिहीन रहा ।

 

  1. दिनांक 10 जनवरी 2018 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित डिज़ाइन वाले एचटीएफइ-25 (कोर-2) इंजन का कामयाब संचालन किया गया । एचटीएफइ-25 कोर-2 का संचालन पहली बार में ही त्रुटीहीन रहा । आने वाले ट्विन-स्पूल फुल इंजन के विकास की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए इसके इंजन में उन्नत एचपी कम्प्रैसर स्पूल विन्यास है । 

 

  1. दिनांक 31.01.2018 को प्रोजेक्ट-75 की तीसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘करंज’ का मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा अनावरण किया गया । 

 

  1. रक्षा उत्पादन विभाग ने आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) द्वारा निर्मित 236 आइटम्स को दो चरणों में नॉन-कोर घोषित कर दिया है । दिनांक 16 जनवरी, 2018 को यह जारी रखते हुए सूची में 39 और आइटम जोड़े गए हैं । इसलिये अब हमारे पास ऐसे 275 आइटम हैं जो नॉन-कोर घोषित किये गए हैं एवं यह आइटम अब भारतीय रक्षा बलों द्वारा आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिये बग़ैर सीधे उद्योग से अधिगृहीत किये जा सकते हैं ।  

 

  1. भारतीय रक्षा उद्योग से 7.44 लाख असॉल्ट राइफल, 3.64 लाख क्लोज़ क्वार्टर कार्बाइन एवं 0.41 लाख लाइट मशीन गन के अधिग्रहण के लिये एओएन (आवश्यकता की स्वीकार्यता) की अनुमति प्राप्त हो गई है । इस मात्रा में से 25 प्रतिशत आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के लिये संरक्षित कर दी गई है तथा शेष 75 प्रतिशत भारतीय रक्षा उद्योग से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से अधिगृहीत की जाएंगी जिसमें आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) को भाग लेने की अनुमति प्रदान की जाएगी ।  

 

  1. रक्षा मंत्री एवं तेलंगाना के सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री श्री के टी रामा राव ने एएच-64 अपाचै लड़ाकू हेलिकॉप्टर के ढांचे के निर्माण के लिये बोइंग कॉर्पोरेशन और टाटा समूह की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (टीएएसएल) के संयुक्त उपक्रम टाटा बोइंग एयरोस्पेस सुविधा का दिनांक 1 मार्च, 2018 को हैदराबाद में शुभारंभ किया । कंपनी अपनी नयी नवेली शाखा से वर्ष के अंत तक वाणिज्यिक आपूर्ति की आशा करती है । 

 

  1. स्कॉर्पीन/ प्रोजेक्ट-75 (करंज) की तीसरी पनडुब्बी का मंझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने दिनांक 31 जनवरी, 2018 को उद्घाटन किया ।

 

  1. श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित ‘एसएलएनएस सिंदुराला’ को कोलम्बो बंदरगाह में दिनांक 19 अप्रैल 2018 को श्रीलंकाई नौसेना में शामिल किया । दिनांक 22 मार्च 2018 को इसकी आपूर्ति के साथ ही जीएसएल ने श्रीलंकाई नौसेना के लिये दो बड़े आकार वाले अत्याधुनिक ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (एओपीवी) के निर्माण की इस प्रतिष्ठित परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है । 

 

  1. रक्षा में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) ने अपनी वेबसाइट डॉट-कॉम से बदलकर डॉट-इन पर स्थानांतरित कर दी है ।

 

  1. रक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं आयुध निर्माणी कारखानों में नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिये डीजीक्यूए में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) तथा रक्षा क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) से सदस्य लेकर एक बौद्धिक सम्पदा अधिकार सुगमता सेल का गठन किया गया है । इसकी स्थापना एक संरचनात्मक प्रणाली की रचना करने एवं आईपी (बौद्धिक सम्पदा) संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये की गई है जिससे बौद्धिक सम्पदा में वृद्धि होगी, मसलन यह इन संस्थाओं में आंतरिक शोध एवं विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा । बौद्धिक सम्पदा अधिकार सुगमता सेल (आईपीएफ) की कुछ भूमिकाएं एवं उत्तरदायित्व बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) के बारे में सामान्य सलाह मुहैया कराना जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन एवं कॉपीराइट इत्यादि । शुरुआत करने के लिये बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) प्रशिक्षण एवं व्याख्यान संचालित किये जा रहे हैं ।

 

  1. अस्थायी आंकड़ों के अनुसार आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) तथा रक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के संदर्भ में  वित्तीय वर्ष 2017-18 में उत्पादन का मूल्य पिछले वित्तीय वर्ष के 55,357 करोड़ रुपये से  8.21 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ा कर 58,759 करोड़ रुपये कर दिया गया है ।

 

(करोड़ रुपये)

 

क्रम संख्या

डीपीएसयू

2016-17

2017-18

सीएजीआर

1

ओएफबी

14825

14,829

9.28%

2

एचएएल

17104

17,200

1.83%

3

बीइएल

9244

10,667

17.01

4

बीइएमएल

2624

3,196

7.12%

5

बीडीएल

4661

4,584

18.28%

6

एमडीएल

3523

4,250

5.76%

7

जीआरएसइ

928

1,343

-5.92%

8

जीएसएल

1030

1,370

33.95%

9

एचएसएल

618

590

27.90%

10

एमआईडीएचएएनआई

800

730

4.48%

कुल

55357

58,759

8.21%

 

  1. रक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिसकाउंटिग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म में पंजीकरण करवाया है जो खरीददारों को सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्यम (एमएसएमइ) विक्रेताओं के साथ बेहतर शर्तों पर बातचीत करने में समर्थ बनाता है एवं एमएसएमइ के प्राप्य उद्योगों के वित्तीयन की सुविधा प्रदान करता है । 

 

  1. रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा विभाग एवं इसके अधीन संस्थाओं के भीतर एक सुदृढ़, ठोस एवं लचीले साइबर सुरक्षा वातावरण को सुनिश्चित बनाने के लिये एक विस्तृत साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क का निर्माण किया गया है । यह फ्रेमवर्क एक विस्तृत जोखिम प्रबंधन रवैये पर एवं साइबर सुरक्षा ख़तरों को देखते हुए इसके संचालन पर आधारित है । एक क्षमता निर्माण गतिविधि के रूप में रक्षा उत्पादन विभाग के विभिन्न कार्यालयों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) के लिये दिनांक 19 नवम्बर, 2018 को नयी दिल्ली में एक कार्यशाला प्रस्तावित है ।

 

 

  1. दिनांक 26 जून 2018 को रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा सामानों के निर्यात हेतु प्राधिकार-पत्र जारी करने के लिये एक सरलीकृत प्रक्रिया अधिसूचित की । लागू की गई सरलीकृत प्रक्रिया में निम्न सम्मिलित हैं :-

 

क. एक ही संस्था के लिये एकसमान उत्पाद हेतु आदेश की पुनः प्राप्ति होने पर, चर्चा की प्रक्रिया को समाप्त किया गया है एवं इसकी अनुमति तुरंत प्रदान की जाती है ।

ख. अन्य संस्था को एकसमान उत्पाद की पुनरावृत्ति होने पर सभी हिस्सेदारों के साथ पहले की गई चर्चा अब केवल विदेश मंत्रालय तक सीमित रहेगी ।

ग. इंफ्रा-कंपनी व्यापार (जो विशेषकर विदेश स्थित रक्षा क्षेत्र से संबंधित जनक कंपनी द्वारा कार्य के बहिःस्रोतन के लिये प्रासंगिक है) में निर्यातक देश की सरकार से अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाणपत्र (इयूसी) की पूर्व निर्धारित व्यवस्था अब हटा दी गई है एवं ‘खरीददार’ कंपनी को अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाणपत्र (इयूसी) जारी करने का प्राधिकार प्रदान कर दिया गया है ।

घ. असैनिक इस्तेमाल के लिये छोटे हथियारों एवं रक्षा कवच के हिस्सों एवं कलपुर्जों के वैधानिक निर्यात को विदेश मंत्रालय (एमइए) के साथ चर्चा के बाद अब अनुमति प्रदान की जा रही है ।  

ड़. प्रदर्शनी के उद्देश्य से साज़ोसामान के निर्यात के लिये हिस्सेदारों से चर्चा की आवश्यकता अब हटा दी गई है (कुछ चयनित देशों को छोड़ कर) ।

च. निर्यात के अवसर खोजने एवं वैश्विक निविदाओं में भागीदारी करने के लिये रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), डीजीओएफ, एवं रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों के मुख्य प्रबंध निदेशकों को अधिकार प्रदान करना

 

  1. चेन्नई के अवड़ी आयुध कारखाने ‘इंजन फैक्ट्री अवड़ी (इवीए)’ ने टू टैंक हेवी व्हीकल इंजन- टी-90 भीष्म टैंक के लिये 1000 होर्स पावर का इंजन V92S2 और टी-72 अजेय टैंक एवं इसके अन्य प्रकार, जो अब तक आयातित किये जाते थे, के लिये V-46-6 इंजन का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण कर लिया है । स्वदेशीकरण किये हुए इंजन का मूल्य आयातित इंजन का 50 प्रतिशत है एवं यह भारतीय सेना की समर्पित मांग पर आधारित है । अगले 10 वर्ष तक इससे सरकार को 800 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है ।

 

  1. भारत को राष्ट्रीय रक्षा की आवश्यकताओं के प्रति आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दिनांक 4 अगस्त 2018 को रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ‘डिफेंस इण्डिया स्टार्ट-अप चैलेंज’ का शुभारंभ किया । इसके अतिरिक्त इस आयोजन में रक्षा मंत्री द्वारा निम्न शुरुआतें की गईं ।

 

 

    • स्पार्कः नमूनों एवं शोध किकस्टार्ट के लिये सहारा (रक्षा क्षेत्र में)
    • आई-डैक्स साझेदारों के लिये फ्रेमवर्क
    • ‘मेक-II प्रक्रिया के लिये स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन’

 

  • निर्यात को बड़े प्रोत्साहन के रूप में रक्षा उत्पादन विभाग (डीपीपी) ने दिनांक 04.10.2018 को रक्षा निर्यात को प्रोत्साहन की एक योजना अधिसूचित की है । योजना दो विकल्प मुहैया कराती है:

 

      • यदि उत्पाद अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी रूप से पारित हो जाता है किंतु अधिग्रहण के लिये अंतिम रूप से चयनित नहीं होता तो रक्षा मंत्रालय उत्पादों को “भारतीय सेना के लिये फिट” होने का प्रमाणन करेगा ।
      • संभावित रक्षा निर्यातक रक्षा मंत्रालय द्वारा तब भी उत्पादों का प्रमाणन प्राप्त कर सकते हैं (दिये गए विनिर्देशों के सम्मुख) जब उत्पाद भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा आवश्यक न हों । इस बात की आशा है कि रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग को यह योजना पूरा करेगी ।

 

  • 20 से 24 फरवरी, 2019 तक “एयरो इण्डिया 2019” का बारहवां संस्करण वायुसेना स्टेशन, येलाहंका, बैंगलुरू में आयोजित कराने का निर्णय लिया गया है । इस पांच दिवसीय आयोजन में जनता के लिये एयर-शो समेत एयरोस्पेस एवं रक्षा उद्योगों के लिये एक विशाल व्यापार प्रदर्शनी भी सम्मिलित होगी । एयरो इण्डिया हर दो वर्ष में आयोजित की जाने वाली रक्षा मंत्रालय की एक फ्लैगशिप परियोजना है । भारत सरकार के डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम की अवधारणा के अनुरूप एयरो इण्डिया पोर्टल www.aeroindia.gov.in उद्योगों एवं आमजन के साथ सभी प्रकार के आदान-प्रदान की एकल खिड़की सुविधा है । इसने पूर्णतया ऑनलाइन माध्यम से अपनी वेबसाइट (https://aeroindia.gov.in/Aero­India) के ज़रिये हिस्सेदारों के पंजीकरण के साथ साथ प्रदर्शनी में अपने उत्पाद का प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शकों के लिये स्थान की बुकिंग, बैठकों/ जगह की बुंकिंग इत्यादि के लिये व्यवस्था की है । इस बुकिंग के एवज में प्राप्त भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन है तथा प्रदर्शनी में शामिल होने वाले प्रदर्शक अपने स्थान की ऑनलाइन निगरानी कर सकते हैं जो इन दिनों आयोजित किये जा रहे अन्य विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के समान है । लगभग 70 प्रतिशत उपलब्ध स्थान 31 अक्टूबर तक पहले ही बुक हो चुका है । क्योंकि इस तिथि तक आवेदन करने वालों के लिये छूट का प्रावधान रखा गया था ।  

 

  • 10 सितम्बर 2018 को भारतीय वायुसेना के आईएल-76 परिवहन विमान से हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिडेट (एचएएल) के हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) ‘तेजस’ में हवा-से-हवा में 1,900 किलो ईंधन भरने का सफल ट्रायल किया गया है । ईंधन भरने की यह प्रक्रिया 20,000 फीट की ऊंचाई पर विमान की 270 नॉट्स की गति के साथ सभी आंतरिक टैंकों एवं ड्रॉपटैंकों में ईंधन भर कर संपन्न की गई । इसके साथ ही भारत उन प्रतिष्ठित देशों के समूह में शामिल हो गया जिन्होंने सैन्य श्रेणी के विमानों में हवा-से-हवा में ईंधन भरने की प्रणाली को विकसित कर लिया है । 

 

  • निर्यात का सरलीकरण करने के लिये, रक्षा उत्पादन विभाग (डीपीपी) ने दिनांक 01.11.2018 को मानकीकृत प्रक्रिया (एसओपी) में और संशोधन किया है । यह इस प्रकार का तीसरा संशोधन है जिसने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता (ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस) में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है । उद्योगों द्वारा आवेदन पत्र जमा करने एवं विभाग में आवेदन पत्र से संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिये अक्टूबर, 2018 में एक नये सॉफ्टवेयर की शुरुआत भी की गई है । डिजिटल विधि से हस्ताक्षरित निर्यात अनुज्ञप्ति निर्यातकों के लिये सुगम्य है । नया ऑनलाइन तंत्र विदेश मंत्रालय (एमइए), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना एवं भारतीय नौसेना समेत हिस्सेदारों से ऑनलाइन परामर्श की सुविधा भी प्रदान करता है ।

 

  • मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने दिनांक 27 नवम्बर, 2018 को ‘मिशन ज्ञान शक्ति’ की शुरुआत की । यह क्षेत्र में आत्मनिर्भरता में वृद्धि करने के लिये फिलहाल जारी पहल का हिस्सा है । रक्षा उत्पादन विभाग ने ‘मिशन ज्ञान शक्ति’ नाम से एक नये फ्रेमवर्क का गठन किया है जिसका उद्देश्य स्वदेशी उद्योग में बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की संस्कृति को बढ़ावा देना है । इसके पीछे मुख्य विचार विदेशी संसाधनों से तकनीक के हस्तानांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी) की संस्कृति बदलकर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त कर भारत में ही बौद्धिक संपदा का निर्माण करना है ।      
  • मंत्रालय ने सशस्त्र बलों द्वारा निर्णय लेते समय राजस्व अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिये सेना के तीनों अंगों (थल सेना, वायुसेना, नौसेना) के उप प्रमुखों की वित्तीय विषयों में निर्णय लेने की शक्तियों में पांच गुना बढ़ोतरी कर दी । नयी शक्तियों के साथ उप प्रमुख मौजूदा शक्तियों में 500 करोड़ रुपये बढ़ी हुई सीमा के साथ वित्तीय शक्तियों का पांच गुना अधिक प्रयोग कर पाएंगे । इससे सेना के तीनों अंगों की क्षमताओं में और अधिक प्राण आ पाएंगे । मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सशस्त्र बलों की सैन्य कार्रवाई से संबंधित तैयारी को उन्नत बनाने के उद्देश्य से हथियार एवं गोलाबारूद भंडार में बढ़ोतरी करने के लिये इस महत्वपूर्ण निर्णय को लिया । 

 

  • मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री श्री माइकल पॉम्पियो एवं रक्षा सचिव श्री जेम्स मैटिस ने दिनांक 6 सितम्बर, 2018 को नयी दिल्ली में भारत-अमेरिका मंत्रिस्तरीय 2+2 वार्ता का शुभारंभ किया । 70 वर्ष से अधिक का कूटनीतिक सहयोग मनाते हुए उन्होंने अपने इस विचार पर विश्वास जताया कि स्वतंत्रता, न्याय एवं क़ानून के शासन के प्रति समर्पण वाले मूल्यों के एक संप्रभु लोकतंत्र के रूप में निर्मित भारत और अमेरिका को शांति, संपन्नता, समृद्धि एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों की अगुवाई करनी चाहिये । इस तथ्य को मान्यता देते हुए कि दोनों देश रणनीतिक साझीदार हैं, मंत्रियों ने द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय एवं चतुष्पक्षीय स्वरूपों समेत क्षेत्रीय एवं वैश्विक विषयों पर साथ कार्य करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की । मंत्रियों ने भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका का एक बड़ा रक्षा साझेदार (एमडीपी) होने की रणनीतिक महत्ता पर पुनः विश्वास व्यक्त किया एवं भारत की बड़ा रक्षा साझेदार (एमडीपी) होने की स्थिति को व्यापक बनाने के प्रति एवं रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ बनाने तथा श्रेष्ठ रक्षा व सुरक्षा समन्वय एवं सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिये आपसी सहमति से कदम उठाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की ।   

 

भारतीय सेना

 

  1. जम्मू एवं कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति: अनेक चुनौतियों के बावजूद जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में लाई जा चुकी है । सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के साथ साथ राज्य के आंतरिक इलाकों में अनवरत चलाए जा रहे सैन्य अभियानों ने भारत के विरुद्ध जारी छद्म युद्ध में प्राण फूंकने की योजनाओं को नाकाम बना दिया है । सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य बनाने के लिये दबाव बनाए हुए है ।

 

 

  1. उत्तर-पूर्व में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति: भारत-म्यांमार सीमा पर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए एवं प्रभावी ढंग से आतंकवादियों के ख़ात्मे के लिए  खुफिया सूचनाओं पर आधारित सैन्य कार्रवाइयां शुरू की गई हैं । भारतीय सेना स्थानीय लोगों की सहायता के लिये आमजन के प्रति मैत्रीपूर्ण सैन्य अभियानों को जारी रखे हुए है ।

 

 

 

  1. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति: भारतीय सेना सम्पूर्ण वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूरे तरीक़े से तैयार है एवं यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यथास्थिति बनी रहे ।

 

प्रशिक्षण संबंधी आयोजन एवं सैन्य युद्धाभ्यास

 

 

 

  1. भारत-फ्रांस संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: भारत और फ्रांस के बीच फ्रांस के मैली ले कैम्प में 28 जनवरी से  4 फरवरी, 2018 तक संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास आयोजित किया गया । युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों सैन्य बलों को संयुक्त राष्ट्र अधिदेश के दायरे में रह कर आतंक एवं राजद्रोह विरोधी अभियानों के विरुद्ध एक दूसरे के प्रचालन के तौर तरीकों से परिचित कराना था ।

 

 

 

  1. भारत-मलेशिया संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: भारत एवं मलेशिया की सेना के बीच पहला संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास 'हरिमाऊ शक्ति-2018' दिनांक 30 अप्रैल से 13 मई, 2018 के बीच मलेशिया के Sengai Perdik Hulu Langat में आयोजित किया गया । भारतीय सेना की ओर से 4, ग्रेनेडियर्स एवं 1 रॉयल रेंजर रेजिमेंट और रॉयल मलय रेजिमेंट ने इस युद्धाभ्यास में भाग लिया । जंगल की ऊबड़ खाबड़ ज़मीन पर राजद्रोह विरोधी अभियानों के विरुद्ध सैन्य दलों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच यह सर्वप्रथम युद्धाभ्यास था । इस युद्धाभ्यास ने भविष्य में ऐसे ही संस्करणों के लिये आधार-भूमि तैयार की है ।

 

 

  1. भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में दिनांक 30 मई से 12 जून तक 'सूर्यकिरण-XIII' आयोजित किया गया । बटालियन स्तरीय युद्धाभ्यास में पहाड़ी भूभाग में आतंक विरोधी अभियान पर ध्यान दिया गया ।

 

 

 

  1. भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: थाईलैंड में दिनांक 6 से 19 अगस्त 2018 तक भारत-थाई संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास 'मैत्री' आयोजित किया गया । इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों सैन्य बलों को संयुक्त राष्ट्र अधिदेश के दायरे में रह कर आतंक एवं राजद्रोह विरोधी अभियानों के विरुद्ध प्रशिक्षित करना था । दोनों पक्षों ने शहरी क्षेत्र में युद्ध की परिस्थितियों में संभावित ख़तरों के सफाए के लिये संयुक्त रूप से योजना बनाकर और प्रशिक्षण कर उच्च-स्तरीय रणनीतिक प्रशिक्षण की श्रृंखलाओं को अंजाम दिया ।

 

 

  1. बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास एससीओ शांति अभियान 2018: भारत ने पहली बार दिनांक 24 से 29 अगस्त 2018 के बीच बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास एससीओ शांति अभियान 2018 के पांचवें संस्करण में भाग लिया । इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले देशों ने तैयार की गई वास्तविक परिस्थितियों में अतिवादी समूहों के विरुद्ध अपनी संघर्ष शक्ति एवं प्रभुत्व का प्रदर्शन किया ।

 

 

 

  1. भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: उत्तराखंड के चौबटिया में दिनांक 16 सितंबर से 29 सितंबर, 2018 के बीच भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्धाभ्यास-2018' आयोजित किया गया । दो सप्ताह चले इस आयोजन में ब्रिगेड स्तर पर संयुक्त तैनाती के साथ दोनों देशों की सेना ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के अंतर्गत राजद्रोह एवं आतंक विरोधी अभियानों में अपने रणनीतिक एवं तकनीकी कौशल को निखारा । भारतीय दल का प्रतिनिधित्व सूर्य कमान की गरुड़ ब्रिगेड की एक बटालियन ने किया जबकि अमेरिका से भाग लेने वाले दल में 23 इन्फेंट्री रेजिमेंट की प्रथम इन्फैंट्री बटालियन, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम और 7 इन्फैंट्री डिवीज़न शामिल थी ।

 

 

  1. भारत-कज़ाकिस्तान संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास: भारत एवं कजाकिस्तान की सेना के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का तीसरा संस्करण कजाकिस्तान के ओटर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित किया गया । काजइण्ड 2018 दिनांक 10 सितम्बर से 23 सितम्बर 2018 के बीच आयोजित किया गया एक चौदह दिन चलने वाला संयुक्त युद्धाभ्यास था । कजाख सैन्य दल का प्रतिनिधित्व मिलिट्री बेस 85395 ने किया जबकि भारतीय दल की नुमाइंदगी 5 लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट ने की । दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से शहरी क्षेत्र में युद्ध की परिस्थितियों में संभावित ख़तरों के सफाए के लिये संयुक्त रूप से योजना बनाकर और प्रशिक्षण कर उच्च-स्तरीय रणनीतिक प्रशिक्षण की श्रृंखलाओं को अंजाम दिया ।

 

 

 

  1. बिम्सटेक देशों का बहुराष्ट्रीय संयुक्त युद्धाभ्यासः बिम्सटेक देशों का प्रशिक्षण अभ्यास मिलैक्स-2018 दिनांक सितम्बर 10 से सितम्बर 16, 2018 के बीच आयोजित किया गया । इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य बिम्सटेक देशों को अर्द्धशहरी क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों की योजना बनाने एवं उनके संचालन के लिये सामूहिक रूप से प्रशिक्षित करना था । युद्धाभ्यास का ज़ोर सैन्य दलों को शहरी एवं अर्द्धशहरी वातावरण में राजद्रोह विरोधी एवं आतंकवाद रोधी अभियानों के लिये संयुक्त रूप से प्रशिक्षित कर तैयार करना था । प्रशिक्षण हेतु सैन्य दलों में सेना की 1 गोरखा राइफल्स एवं जापान की ग्राउण्ड सेल्फ डिफेंस फोर्सेज़ की 32 वीं रेजिमेंट से ली गई टुकड़ियां शामिल थीं ।      

 

  1. भारत-जापान संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यासः- अपनी तरह का पहला भारत-जापान संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास धर्म गार्जियन 2018 सीआईरेडबल्यूएस, वैरेंग्ट में 1 नवम्बर से 14 नवम्बर, 2018 तक आयोजित किया गया । इस युद्धाभ्यास का प्राथमिक लक्ष्य भाग लेने वाले सैन्य दलों को शहरी एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में संयुक्त रूप से राजद्रोह रोधी एवं आतंकवाद रोधी अभियानों के लिये तैयार करना था । प्रशिक्षण हेतु सैन्य दलों में सेना की 1 गोरखा राइफल्स एवं जापान की ग्राउण्ड सेल्फ डिफेंस फोर्सेज़ की 32 वीं रेजिमेंट से ली गई प्लाटून शामिल थीं ।      

 

 

  1. भारत-रूस संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यासः भारत एवं रूस के बीच दिनांक 18 नवम्बर से 28 नवम्बर 2018 के बीच सबीना सैनिक अड्डे पर संयुक्त सैन्य अभ्यास का दसवां संस्करण आयोजित किया गया । इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेना के बीच संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अंतर्गत शांतिपूर्ण अभियानों के लिये संयुक्त रूप से योजना बनाने एवं संचालन करने का अभ्यास करना था ।

 

  1. भारत-मॉलदीव संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यासः मॉलदीव के माफिलाफुशी में दिनांक 14 दिसम्बर 2018 से 20 दिसम्बर 2018 के बीच भारत और मॉलदीव के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास एकुवेरिन 2018 का नौवां संस्करण आयोजित किया गया । भारतीय सेना के दस्ते में मद्रास रेजिमेंट के अधिकारी व जवान सम्मिलित थे जबकि मॉलदीव के दल का प्रतिनिधित्व मॉलदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (एमएनडीएफ) के अधिकारियों एवं नौसैनिकों ने किया । प्राथमिक रूप से इस संयुक्त युद्धाभ्यास का ज़ोर सैन्य दलों को ग्रामीण/ शहरी क्षेत्रों में राजद्रोह विरोधी व आतंकवाद विरोधी अभियानों के विरुद्ध प्रशिक्षित कर तैयार करना था ।  

 

  1. चेन्नई की अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में अफगान महिला अधिकारियों का प्रशिक्षणः विदेशी महिला अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के सेना के सतत प्रयास के तौर पर अफगाननिस्तान की सेना एवं वायुसेना की महिला अधिकारियों को दिनांक 22 दिसम्बर, 2018 से 26 दिसम्बर, 2018 के बीच  शारीरिक, शस्त्र, रणनीतिक, संचार एवं नेतृत्व संबंधी कौशल के आधारभूत सैन्य आयामों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया ।

 

  1. भारत-चीन संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यासः चीन के चेंगदू में 10 दिसम्बर 2018 से 23 दिसम्बर 2018 के बीच सातवां भारत-चीन संयुक्त युद्धाभ्यास हैण्ड-इन-हैण्ड 2018 आयोजित किया गया । इस युद्धाभ्यास में एक कम्पनी के बराबर संख्या में भारतीय सेना की 11 सिख लाइट इफेंट्री और तिब्बती सैन्य ज़िले की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की एक रेजिमेंट ने भाग लिया । भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 11 सिख लाइट इंफेंट्री के कमान अधिकारी कर्नल पुनीत प्रताप सिंह तोमर ने किया जबकि चीन के दल का नेतृत्व कर्नल झाऊ जुन ने किया । अभ्यास में आंतरिक कक्षाएं तथा मैदानी प्रशिक्षण गतिविधियां शामिल होंगी । इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेना के बीच करीबी संबंधों का निर्माण करना व उनको प्रोत्साहित करना तथा साथ ही स्वयं के नियंत्रण में दोनों देशों के सैन्य दलों को नेतृत्व प्रदान करने की संयुक्त कमान अधिकारी की योग्यता में बढ़ोतरी करना है । युद्धाभ्यास में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमत अंतर्राष्ट्रीय राजद्रोह रोधी एवं आतंकवाद रोधी अभियानों के खिलाफ रणनीतिक स्तरीय सैन्य कार्रवाइयों को अंजाम दिया जाएगा ।        

 

मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर)

 

 

  1. भारत के उत्तर पूर्वी प्रदेशों में बाढ़ (जून 2018): उत्तर पूर्वी राज्यों असम, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में बाढ़ एवं भूस्खलन के दौरान राहत व बचाव कार्य के लिये सेना के कॉलम तैनात किये गए । बाढ़ से लगभग छह लाख लोग प्रभावित हुए । असम राइफल्स और भारतीय सेना द्वारा मणिपुर में कुल 430 एवं त्रिपुरा में 930 लोगों की जान बचाई गई ।

 

  1. केरल की बाढ़ (अगस्त 2018): केरल के बाढ़ से बर्बाद कन्नूर, वेयानड, कोझीकोड, मल्लपुरम, इडुकी एवं एर्णाकुलम ज़िलों में राहत एवं बचाव कार्य के लिये सेना के कॉलम तैनात किये गए । भारतीय सेना ने 60 नावों और 100 जीवनरक्षक जैकेट्स के साथ अपने दस कॉलम और दस इंजीनियरिंग कार्यबल (इटीएफ) तैनात किये । सेना ने 38 दूरस्थ क्षेत्रों को दोबारा जोड़ने के लिये 13 अस्थायी पुल निर्मित किये और 3,627 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया ।

 

खेलकूद एवं एडवेंचर गतिविधियां

 

  1. एशियन ड्रैगन बोट प्रतिस्पर्धाः चीन के डाली में दिनांक 5 मई से 8 मई, 2018 को नायब सूबेदार सूरज सिंह नेगी ने पांचवी एशियाई ड्रैगन बोट प्रतिस्पर्धा में 10 मीटर मिक्स्ड 500 मीटर प्रतियोगिता में कप्तान के रूप में भाग लिया और देश के लिये कांस्य पदक जीता ।  

 

  1. युवा ओलंपिक खेल: पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट की बॉयज़ स्पोर्ट्स कंपनी में प्रशिक्षित जेरेमी लालरीनुगा ने अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित युवा ओलंपिक खेलों में 62 किलोग्राम वर्ग में कुल 274 किलोग्राम वज़न उठाकर और भारत के लिये पहली बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया ।

 

  1. एशियाई योग खेलकूद प्रतिस्पर्धा: दिनांक 27 आए 30 सितंबर, 2018 के बीच तिरुवनन्तपुरम में आयोजित आठवीं एशियाई योग स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे आर्टिलियरी रेजिमेंट के गनर (ऑपरेटर) संदीप चाते ने विभिन्न देशों के 15 अन्य खिलाड़ियों को हराकर स्वर्ण पदक जीता ।

 

  1. जूनियर एशियन एथलेटिक्स: मद्रास इंजीनियर्स ग्रुप बैंगलुरू के रिक्रूट अजित कुमार ने जिफू में आयोजित जूनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया ।

 

 

मिश्रित आयोजन

 

  1. राष्ट्रपति ने सिपाही मुरलीकांत राजाराम पेटकर (सेवानिवृत्त) को पद्मश्री प्रदान किया: राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने दिनांक 20 मार्च, 2018 को 1965 के भारत-पाक युद्ध के वरिष्ठ सेवानिवृत्त सिपाही मुरलीकांत राजाराम पेटकर, जिन्होंने पैरा ओलम्पिक खेलों में 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में स्वर्ण पदक जीता, को पद्मश्री से सम्मानित किया । कई गोलियां लगने के साथ ही वह गंभीर रूप से घायल हुए किंतु उन्होंने अथक प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रेरणास्पद ऊंचाईयों को छुआ ।

 

  1. राष्ट्रपति का सियाचिन ग्लेशियर का दौरा: सेना के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिनांक 10 मई, 2018 को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर का दौरा किया । उन्होंने सियाचिन के बेस कैम्प में सैन्य टुकड़ियों को संबोधित किया एवं कठोर मौसमी परिस्थितियों में तैनात सैनिकों के प्रयासों की यह सुनिश्चित करते हुए खूब प्रशंसा की कि उनके हित देश के हृदय में सर्वोपरि हैं ।

 

  1. सेना का कश्मीर सुपर-30 (मेडिकल पहल): चिनार कोर के कमांडर द्वारा दिनांक 12 जून, 2018 को श्रीनगर में कश्मीर सुपर-30 (मेडिकल) परियोजना के प्रतिष्ठित केंद्र का शुभारंभ किया गया था । परियोजना की अवधारणा सेना ने तैयार की है जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा के बच्चों को 12 महीनों के लिए कोचिंग और मार्गदर्शन प्रदान करने का एक आवासिक कार्यक्रम है ।

 

  1. सांबा सुपर-40: गुर्ज डिवीज़न के तत्वावधान में सांबा सुपर 40 परियोजना सांबा के युवा एनडीए/सीडीएस प्रतिभागियों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के पाठ्यक्रमानुसार अच्छा प्रशिक्षण मुहैया कराने के लिये शुरू की गई थी । परियोजना के अंतर्गत संभावित उम्मीदवारों की पहचान, स्क्रीनिंग और चयन किया जाता है । सांबा ब्रिगेड के सैन्य अधिकारियों द्वारा सांबा, विजयपुर और कठुआ के स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक चर्चा की जाती है । कुल 36 विद्यार्थियों का संक्षिप्त सूची में चयन किया गया था  जिनमें से दो लड़कों व एक लड़की ने लिखित परीक्षा पास की है । अब उन्हें सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड  (एसएसबी) के लिये प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ।

 

  1. अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना का बचाव अभियान: भारतीय सेना ने दिनांक 12 मार्च 2018 को अरुणाचल प्रदेश के सेला दर्रे के करीब एक अप्रत्याशित भारी बर्फबारी के बाद अवशून्य तापमान में 320 वाहनों में फंसे स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों की जान बचाई । भारतीय सेना की तीन टीमों ने अंतिम व्यक्ति और वाहन को सुरक्षित निकाल लेने तक अथक प्रयास किये ।

 

  1. पराक्रम पर्व उत्सव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिनांक 28 सितंबर 2018 को जोधपुर वायुसेना अड्डे पर संयुक्त कमांडर सम्मेलन को संबोधित किया और वहां 'पराक्रम पर्व' की शुरुआत भी की । उन्होंने शहर के कोणार्क युद्ध स्मारक पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की । आगंतुक पुस्तिका में प्रधानमंत्री ने लिखा कि देश को उन सशस्त्र बलों पर गर्व है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के प्रति समर्पित हैं । रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिनांक 29 सितंबर, 2018 को इंडिया गेट पर 'पराक्रम पर्व' उत्सव का शुभारंभ किया । इस समारोह में सैन्य एवं असैन्य उच्चाधिकारी, साथ ही बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे तथा एनसीसी के कैडेट उपस्थित थे । देश भर में विभिन्न स्थानों पर इसी प्रकार के समारोह आयोजित किये गए ।

 

 

 

भारतीय नौसेना

 

विदेश में संचालित कार्यवाही

 

  1. पश्चिमी जहाज़ी बेडे की विदेश तैनाती (ओएसडी): दिनांक 5 अप्रैल से 23 मई 2018 के बीच पश्चिमी जहाज़ी बेड़े के युद्धपोत मुंबई एवं त्रिखंड  को विदेश तैनाती के लिये भेजा गया । इस तैनाती के दौरान इन युद्धपोतों ने 1 मई से 7 मई 2018 के बीच रियूनियन द्वीप पर पी8आई वायुयानों के साथ वरुण युद्धाभ्यास के तीसरे चरण में भाग लिया । पश्चिमी जहाज़ी बेड़े के युद्धपोत कोलकाता  एवं त्रिखंड  ने दक्षिण अफ्रीका के सिमन्स टाउन में दिनांक 1 अक्टूबर 2018 से 13 अक्टूबर, 2018 को इब्समार युद्धाभ्यास में भाग लिया ।

 

  1. मालाबार 18 एवं रिम्पैकः पूर्वी जहाज़ी बेड़े के युद्धपोत सहयाद्रि, कामोर्ता एवं शक्ति को ‘पूर्वी जहाज़ी बेड़े की विदेश तैनाती’ के लिये भेजा गया । इन पोतों ने पी8आई एयरक्राफ्ट के साथ गुआम में मालाबार युद्धाभ्यास में भाग लिया । मालाबार 18 की समाप्ति पर कामोर्ता  एवं शक्ति  7 जुलाई 2018 को विशाखापट्टनम लौट आए । इसके बाद सहयाद्रि ने डार्विन के हवाई एवं काकाडू में रिम्पैक (रिम ऑफ द पैसिफिक) में भाग लिया और अंततः 29 सितम्बर, 2018 को विशाखापट्टनम लौट आया ।   

 

 

  1. जेज़ू में अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यूः पूर्वी जहाज़ी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस राणा को 17 सितम्बर 2018 से 24 नवम्बर 2018 तक ‘पूर्वी जहाज़ी बेड़े की विदेश तैनाती’ के लिये भेजा गया । इस जहाज़ी बेड़े ने दक्षिण कोरिया के जेज़ू में दिनांक 8 से 15 अक्टूबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लिया । इस युद्धपोत ने दिनांक 12 नवम्बर 2018 से 16 नवम्बर 2018 को इण्डोनेशिया के सुराबया में इण्ड-इण्डो द्विपक्षीय युद्धाभ्यास में भाग लिया ।    

 

 

  1. 1 प्रशिक्षण स्क्वैड्रन (1टीएस) की विदेश तैनाती: भारतीय नौसेना की 1 प्रशिक्षण स्क्वैड्रन के पोत तीर, सुजाता, सुदर्शिनी, शार्दूल एवं भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के पोत सारथी को दिनांक 20 सितम्बर से 22 अक्टूबर 2018 तक दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रशिक्षण तैनाती के लिये भेजा गया । इन पोतों ने लुमत, मलेशिया, सिंगापुर एवं इंडोनेशिया के जकार्ता की यात्रा की । तैनाती के दौरान भारतीय नौसेना के युद्धपोत तीर, सुजाता एवं शार्दूल को पालू, इण्डोनेशिया से सुनामी प्रभावित सुलवेसी द्वीप में राहत पहुंचाने के लिये पंथांतरित कर दिया गया ।  

 

नौसेना कार्रवाईयां/ गतिविधियां

 

  1. मिशन आधारित तैनातीः भारतीय नौसेना द्वारा मिशन आधारित तैनाती को राष्ट्रीय सामुद्रिक हितों की रक्षा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सार्थक सामुद्रिक महत्ता के क्षेत्रों में उपस्थिति/ लगभग उपस्थिति बनाये रखने के उद्देश्य से चरणबद्ध ढंग से कार्यान्वित किया गया । यह तैनाती प्रधानमंत्री के ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन (सागर)’ दृष्टिकोण के अनुरूप थी । जून 2017 में मिशन आधारित तैनाती के शुरू होते ही भारतीय नौसेना के युद्धपोत एवं विमान ओमान की खाड़ी/ अरब की खाड़ी, एडन की खाड़ी/ लाल समुद्र, दक्षिण एवं केंद्रीय हिंद महासागर क्षेत्र में अंडमान के समुद्र में सुंडा स्ट्रैट/ मलैयका स्ट्रैट के निकट एवं बंगाल की खाड़ी के उत्तर में नियमित तौर पर तैनात किये जा रहे हैं ।

 

  1. भारतीय नौसेना के सैन्य युद्धाभ्यासः हर समय युद्ध के लिये तैयार रहने के लिये भारतीय नौसेना ने कमान स्तरीय सैन्य युद्धाभ्यास एनकोर-18 (पूर्वी नौसेना कमान), एक्सपीएल-18 (पश्चिमी नौसेना कमान) एवं शिक्षा-18 (सैन्य स्तरीय वॉर गेमिंग युद्धाभ्यास) का संचालन किया । इन युद्धाभ्यासों में सेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल की हिस्सेदारी भी देखी गई । यह युद्धाभ्यास भारतीय नौसेना की युद्ध संबंधी योजनाओं में निखार लाने तथा सैन्य साज़ोसामान से जुड़े विषयों के समाधान में सहायता करते हैं, साथ ही शांति से युद्ध की ओर बाधारहित परिवर्तन का मंच भी प्रदान करते हैं ।

 

Foreign Cooperation

विदेशी सहयोग

 

 

  1. हिंद महासागर नौसेना परिसंवाद (आईओएनएस): वर्तमान में हिंद महासागर नौसेना परिसंवाद में 24 सदस्य देश हैं जिनमें से आठ देशों की स्थिति प्रेक्षक की है । ईरान फिलहाल आईओएनएस का ‘अध्यक्ष’ है । सदस्य देशों के बीच सामुद्रिक सहयोग को प्रोत्साहन देने में यह संरचना एक महत्वपूर्ण सामुद्रिक संरचना बन चुकी है । अप्रैल 2018 में तेहरान में नौसेना प्रमुखों के सम्मेलन में वर्ष 2019 में ईरान द्वारा समुद्री लुटेरों के विरुद्ध अभ्यास करने का निर्धारण किया गया था एवं भारत ने आईडबल्यूजी इंफॉर्मेशन शेयरिंग एंड इंटरऑपरेबिलिटी (आईएस एंड आई) की अध्यक्षता प्राप्त की । भारतीय नौसेना ने भी 23, 14 नवम्बर 2018 को कोच्चि में हिंद महासागर नौसेना परिसंवाद (आईओएनएस) की दसवीं वर्षगांठ को मनाने के लिये गतिविधियां संचालित कीं । इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में आईओएनएस के सम्मान में सेमिनार, कोच्चि से मस्कट तक टॉल-शिप-सेल-टूगेदर एवं स्पेशल डे कवर जारी किया गया । आयोजन में 11 नौसेनाओं एवं 27 देशों ने भाग लिया । 

 

  1. मिलन-18: 6 मार्च 2018 से 13 मार्च, 2018 तक मिलन-18 का संचालन किया गया । 16 देशों से 30 से भी अधिक प्रतिनिधि एवं 8 देशों से 11 युद्धपोतों ने मिलन में भाग लिया । ‘तटीय चरण’ के दौरान ‘समुद्र में ग़ैरकानूनी गतिविधि से मुकाबले के लिये क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा’ पर ज़ोर देती एक टेबल टॉप गतिविधि एवं ‘सामुद्रिक व्यवस्था की तलाश- सूचना साझा करने के एक विस्तृत निकाय की आवश्यकता’ विषय पर एक सेमिनार संचालित की गई । ‘सामुद्रिक चरण’ में भाग लेने वाले युद्धपोतों ने ‘खोजबीन एवं बचाव’ तथा ‘सामुद्रिक निषेधाज्ञा से जुड़ी कार्रवाई’ समेत विभिन्न प्रकार की स्थितियों पर आपसी पारस्परिकता में निखार लाने के उद्देश्य से अनेक अभ्यास किये । 

 

  1. सेशेल्स को दूसरे डॉर्नियर की आपूर्तिः दिनांक 25 जून 2018 को नयी दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सेशेल्स वायुसेना को दूसरा डॉर्नियर एयरक्राफ्ट सौंप दिया गया । समारोह के दौरान भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व अन्य फ्लैग अधिकारियों के साथ साथ उप नौसेना प्रमुख ने किया । सेशेल्स को पहला डॉर्नियर जनवरी 2013 में प्रदान किया गया ।

 

  1. अंटार्कटिका में 37 वीं भारतीय विज्ञान प्रदर्शनीः जलमाप चित्रण संबंधी सर्वेक्षण की टीम, जिसमें जलसर्वेक्षण के विस्तृत पाठ्यक्रम में शिक्षित एक अधिकारी एवं एक नाविक शामिल थे, ने भारतीय खाड़ी क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिये दिसंबर 2017 से मार्च 2018 तक 37 वीं भारतीय विज्ञान प्रदर्शनी में भाग लिया । 

 

देशहित संबंधी महत्वपूर्ण आयोजन

 

  1. समुद्र में विधायकों/ सांसदों/ प्रदेश सरकार के कार्मिकों का दिनः प्रधानमंत्री ने 2015 में हुए संयुक्त कमांडर सम्मेलन में भारतीय नौसेना को निर्देश दिया कि वह तटवर्ती प्रदेशों के विधायकों/ सांसदों/ प्रदेश सरकार के कार्मिकों के लिये समुद्र में एक दिन आयोजित कराए । अभी तक पश्चिम बंगाल, ओडीशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं केरल के लिये इन अभिज्ञता दौरों का आयोजन किया जा चुका है । दिनांक 8 अप्रैल 2018 को मुंबई के निकट महाराष्ट्र के विधायकों/ सांसदों/ प्रदेश सरकार के कार्मिकों के लिये ‘समुद्र में एक दिन’ आयोजित किया गया था । मुख्यमंत्री समेत कुल 146 सांसद/ विधायक/ प्रदेश सरकार के कार्मिक भारतीय नौसेना के पांच युद्धपोतों में सवार हुए ।  

 

  1. उत्तर हिंद महासागर समुद्र जलसर्वेक्षण आयोगः गोवा के वास्को-द-गामा में भारतीय नौसेना जलसर्वेक्षण विभाग (आईएनएचडी) की ओर से दिनांक 9 अप्रैल 2018 से 12 अप्रैल 2018 तक उत्तर हिंद महासागर समुद्र जलसर्वेक्षण आयोग (एनआईओएचएस) सम्मेलन आयोजित किया गया । इस सम्मेलन की अध्यक्षता उत्तर हिंद महासागर समुद्र जलसर्वेक्षण आयोग (एनआईओएचएस) के अध्यक्ष एवं मुख्य जलसर्वेक्षक वाइस एडमिरल विनय बधवार ने की । अंतर्राष्ट्रीय जलसर्वेक्षण संस्था (आईएचओ) से कुल 64 विदेशी प्रतिनिधियों, सदस्य देशों एवं उद्योगों ने इस सम्मेलन में भाग लिया ।    

 

  1. कृत्रिम बुद्धिमताः कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के क्षेत्र में तकनीकी उन्नति का उपयोग करने की भारत सरकार की पहल के पालन स्वरूप राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के रणनीतिक कार्यान्वयन का अध्ययन करने के लिये फरवरी 2018 में रक्षा मंत्रालय/ रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा एक कार्यबल का गठन किया गया । इस कार्यबल में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भाभा आण्विक अनुसंधान केंद्र (बार्क), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), रक्षा क्षेत्र में कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, उद्योगों एवं सेना के तीनों अंगों से प्रतिष्ठित विद्वज्जन सम्मिलित थे । दिनांक 30 जून, 2018 को रक्षा मंत्री को प्रदान इस कार्यबल की रिपोर्ट में मुख्य रूप से सेना के तीनों अंगों द्वारा क्रियान्वयन के लिये कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के ‘यूज़ केस’, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) परियोजनाओं के लिये रक्षा बजट के एक हिस्से का आवंटन करना, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) हेतु विशेषज्ञता निर्माण एवं कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) कमान संरचना की स्थापना शामिल थे । भारतीय नौसेना ने कृत्रिम बुद्धिमता के उपयोग करने वाले तौर तरीक़ों को कार्यान्वयन के लिये लघु, मध्यम एवं दीर्घकाल के आधार पर विभाजित किया है एवं कृत्रिम बुद्धिमता पर आधारित चार ‘प्रूफ ऑफ कंसेप्ट’ परियोजनाओं पर कार्य कर रही है ।    

 

 

  1. नाविका सागर परिक्रमाः भारतीय महिला नौसेना कर्मियों द्वारा प्रथम बार संपूर्ण ग्लोब का भ्रमण पूरा कर दिनांक 21 मई, 2018 को आईएनएसवी तारिणी वापस भारत पहुंची । पूरी तरह महिलाओं से निर्मित दल की यह पहली भारतीय विश्व जलयात्रा है । रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गोवा में नौका को झंडी दिखाई । दल ने दिनांक 23 मई 2018 को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से एवं 1 जून 2018 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात की । इस समुद्री यात्रा के दौरान नौका ने 22,300 नॉटिकल मील की दूरी तय की एवं विश्व जलयात्रा के समस्त नियमों का पालन किया । यह अभियान महिलाओं को अपनी पूर्ण क्षमता प्राप्त कराने हेतु उनका सशक्तिकरण करने की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप था । इसने विश्व मंच पर ‘नारी शक्ति’ को भी चित्रित किया एवं चुनौतीपूर्ण वातावरण में उनकी भागीदारी के दृश्य दिखाकर भारत में महिलाओं के प्रति समाज के रवैये एवं मनःस्थिति को बदलने में सहायता भी की । साथ ही स्वदेश-निर्मित 56 फुट लंबी समुद्री नौका आईएनएसवी तारिणी ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ‘मेक-इन-इण्डिया’ पहल को भी दर्शाया ।

 

 

खोजबीन व बचाव तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एसएआर एवं एचएडीआर)

 

  1. गोता एवं बचाव संबंधी सहायताः पानी में गिरने और डूब जाने वाले लोगों की खोजबीन एवं बचाव के लिये नौसेना ने स्थानीय महकमों को सहायता देना जारी रखा । मौजूदा वर्ष में 110 अनुरोधों में सहायता उपलब्ध कराई गई है । गोदावरी नदी में दिनांक 15 मई, 2018 को डूबी नाव की खोजबीन एवं बचाव के लिये दो चेतक हेलिकॉप्टरों, एक यूएच3एच एवं एक डीओ की सहायता से हवा से व्यापक खोजबीन कराई गई ।  

 

  1. चक्रवात बरगिटा- मॉरीशसः एक उष्णकटिबंधीय दबाव ‘बरगिटा’ ने 18 जनवरी, 2018 को मॉरीशस को पार किया । एचएसआई, मॉरीशस के अनुरोध के आधार पर एवं रक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप आईएनएस सर्वेक्षक ने दिनांक 27 जनवरी, 2018 को मॉरीशस की सरकार को वस्त्रों एवं दवाओं से निर्मित राहत सामग्री प्रदान की ।

 

  1. चटगांव में मानवीय सहायता का नौवहनः चटगांव में दिनांक 5 मई से 14 मई, 2018 तक मानवीय सहायता के लिये भारतीय नौसेना के एक पोत ऐरावत की तैनाती की गई । बांग्लादेश की सरकार को कुल 345 टन राहत सामग्री सौंपी गई । 

 

  1. अति-गंभीर चक्रवात ‘तितली’: पूर्वी नौसेना कमान, विशाखापट्टनम में दिनांक 11 अक्टूबर, 2018 को अति गंभीर चक्रवात ‘तितली’ के श्रीकाकुलम में प्रवेश करने के बारे में सूचना प्राप्त हुई । आंध्र प्रदेश एवं ओडीशा की प्रदेश सरकारों द्वारा मांगी गई सहायता के आधार पर भारतीय नौसेना ने प्रदेश प्रशासन के साथ समन्वय कर विभिन्न स्थानों पर खाने के 3,000 पैकेट एवं 5,500 किलोग्राम राहत सामग्री को वायुयान से गिराने समेत मानवीय राहत एवं आपदा राहत (एचएडीआर) तथा खोजबीन एवं बचाव (एसएआर) सहायता उपलब्ध कराई । भारतीय नौसेना की टीमें दिनांक 15 अक्टूबर, 2018 को वापस बुला ली गई ।

 

  1. गोल्डन ग्लोब स्पर्धाः कमांडर अभिलाष टॉमी ने गोल्डन ग्लोब रेस 2018 में हिस्सा लिया, जो कि दुनिया में 30,000 नॉटिकल मील की एकल समुद्री दौड़ है । यह दिनांक 1 जुलाई 2018 को फ्रांस के लेस सेबल्स-डी’ ओलोन से शुरू हुई थी । दिनांक 21 सितम्बर, 2018 को जब कमांडर अभिलाष टॉमी तीसरे स्थान पर प्रतिस्पर्धा में बने हुए थे हिंद महासागर के उफान युक्त सागर में उनकी पाल-नौका ‘एसवी थूरिया’ का मस्तूल हट गया जिससे वह घायल हो गए । इस घटना के बाद वह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट से 3,200 किलोमीटर दूर फंसे थे । मैरीटाइम रेस्क्यू कॉर्डिनेशन सेंटर, कैनबरा की अगुवाई में चलाए गए संयुक्त बचाव अभियान (भारत, फ्रांस एवं ऑस्ट्रेलिया) में कमांडर अभिलाष टॉमी को दिनांक 24 सितम्बर 2018 को फ्रांस की मछली पकड़ने वाली नौका ऑसिरिस की मदद से बचाकर चिकित्सकीय देखभाल के लिये लै डी एम्सटर्डम ले आया गया । लै डी एम्सटर्डम से भारतीय नौसेना के पोत सतपुड़ा से कमांडर टॉमी को वापस भारत ले आया गया ।      

 

अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेलकूद प्रतिस्पर्धाएं

 

  1. हॉंगकॉंग जिमनास्टिक्स प्रतिस्पर्धाः राकेश पात्रा (सीपीओ, पीटी) ने दिनांक 20 जनवरी से 21 जनवरी, 2018 के बीच आयोजित हॉंगकॉंग जिमनास्टिक्स प्रतिस्पर्धा में भाग लिया एवं 3 स्वर्ण पदक जीते ।

 

  1. प्रेसिडेंट कपः नौसेना की मुक्केबाज़ी टीम के एन टी लालबायक्किमा, एसइए II (जीएस) ने कजाकिस्तान के अस्ताना में 4 जून से 11 जून, 2018 तक आयोजित प्रेसिडेंट कप में देश का प्रतिनिधित्व किया एवं कांस्य पदक जीता ।

 

  1. अंतर्राष्ट्रीय मास्टर्स, दुबईः नौसेना की कबड्डी टीमों के रोहित कुमार, पीओ इएलए (आर) एवं सुरजीत, पीओ (जीएस) ने अंतर्राष्ट्रीय मास्टर्स, दुबई में 22 जून, 2018 से 30 जून, 2018 तक देश का प्रतिनिधित्व किया एवं स्वर्ण पदक जीता ।

 

  1. एशियाई कुश्ती प्रतिस्पर्धाः नौसेना की कुश्ती टीम के सचिन राठी, एसइए II (जीडबल्यू) ने दिनांक 20 जुलाई, 2018 से 22 जुलाई, 2018 तक नयी दिल्ली में आयोजित जूनियर एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान स्वर्ण पदक जीता ।

 

  1. विश्व कुश्ती प्रतिस्पर्धा 2018: विजय, एसइए II (जी डबल्यू) ने दिनांक 17 सितम्बर, 2018 से 23 सितम्बर, 2018 तक स्लोवाकिया के ट्रनाव में आयोजित विश्व कुश्ती प्रतिस्पर्धा में रजत पदक जीता ।

 

पर्वतारोहण संबंधी साहसकर्म

 

  1. माउंट देवतिबा में महिलाओं का अभियान: माउंट देवतिबा में दिनांक 28 मई, 2018 से केवल महिलाओं का नौसेना पर्वतारोहण अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया । माउंट देवतिबा हिमाचल प्रदेश की पीर पांजाल रेंज में दूसरी सबसे बड़ी चोटी (6,001 मीटर) है । इस अभियान ने महिलाओं की पर्वतारोही टीम के लिये निकट भविष्य में और अधिक चुनौतीपूर्ण चोटियों पर जीत प्राप्त करने की नींव रखी । यह टीम दिनांक 10 जून, 2018 को चोटी पर पहुंची ।

 

  1. माउंट मैन्थोसा (6,443 मीटर) अभियानः दिनांक 21 सितम्बर, 2018 को कोच्चि से एक दस सदस्यीय पर्वतारोहण अभियान को झंडी दी गई । यह टीम 16 अक्टूबर, 2018 को सफलतापूर्वक चोटी पर पहुंची । यह टीम तीन अधिकारियों एवं सात नाविकों से बनी थी ।

 

 

                                                                                                भारतीय वायुसेना

 

 

अधिग्रहण

 

  1. राफेल: राफेल अनेक भूमिकाओं में कारगर एक लड़ाकू विमान है जो लंबी दूरी तक लक्ष्यों पर निशाना साधने की क्षमता एवं हमारे प्रतिद्वंद्वियों पर प्रणालीगत क्षमता की श्रेष्ठता प्रदान करेगा । इसके साथ प्रयुक्त अस्त्रों में दृष्टि सीमा से परे (बियॉन्ड विसुअल रेंज) मीटियोर प्रक्षेपास्त्र के साथ साथ लंबी दूरी से हवा से ज़मीन पर वार करने वाला स्कैल्प परिशुद्धि निर्देशित शस्त्र भी है । इसके अतिरिक्त भारतीय वायुसेना के लिये राफेल में ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के लिए उन्नतांश पर इंजन को स्टार्ट करने समेत भारत के दृष्टिकोण से विशिष्ट परिवर्तन भी किये गए हैं ।

 

  1. सी-130 जे सुपर हरक्युलिस: सी-130 जे एक मध्यम आकार का हर मौसम में कारगर परिवहन विमान है जिसमें  युद्धक्षेत्र के भीतर और बाहर कार्य करने की क्षमता मौजूद हैं । इसमें युद्ध हेतु सैनिकों/ सैन्यकर्मियों या सैन्य साजोसामान को ज़मीन पर उतारने या हवा से नीचे गिराने की क्षमताएं मौजूद हैं । भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने रात में दृष्टि प्रदान करने वाले नयी पीढ़ी के आधुनिक सैन्य चश्मों का अधिग्रहण कर इस विमान की रात्रिकालीन सैन्य कार्रवाईयों की क्षमता में बढ़ोतरी की है ।

 

  1. चिनूक हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर: भारतीय वायुसेना को मार्च 2019 तक 15 चिनूक हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति हो जाएगी । वायुसैनिकों और ज़मीन पर कार्यरत दल ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में प्रशिक्षण शुरू कर दिया है ।

 

सैन्य हथियारों को उन्नत बनाने के लिये सुधार

 

  1. मिराज 2000 में सुधार: मिराज 2000 लड़ाकू विमान को उन्नत बनाने के लिये उसमें सुधार करने का कार्य हिंदुस्तान ऐयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा किया जा रहा है । सुधार के लिये विमान को उन्नत बनाने के कार्यक्रम में नया एवं शक्तिशाली राडार, नया वैमानिकी सूट एवं हथियारों को लगाया जाना शामिल है । विमान में सुधार कर उन्नत बनाने का कार्यक्रम दो चरणों में किया गया है । शुरुआती ऑपरेशनल क्लीयरेंस (आईओसी), डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट (डी एंड डी) फ्रांस की ओईएम सुविधाओं में पूरा किया गया और अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) डी एंड डी (डिज़ाइन एवं डेवलपमेंट) मार्च 2018 में पूरा किया गया ।

 

  1. मिग-29 में सुधार: मिग-29 को उन्नत करने के लिये सुधार तथा इसका जीवनकाल बढ़ाने का अनुबंध ओइएम के साथ किया गया था । परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत रूस में छह विमानों का डिज़ाइन एवं डेवलपमेंट किया गया था । दूसरा चरण बचे हुए विमानों का सीरीज़ अपग्रेड था जो भारतीय वायुसेना के बेस रिपेयर डिपो में किया गया । सुधार किये हुए लड़ाकू विमान अग्रणी स्क्वाड्रन में दैनंदिन ऑपरेशनों में इस्तेमाल किये जा रहे हैं । सुधार कर उन्नत बनाए गए लड़ाकू विमान अत्याधुनिक वैमानिकी से, अनेक प्रकार के कुशल हवा से हवा में तथा हवा से ज़मीन पर वार करने वाले शस्त्रों के साथ साथ हवा में ईंधन भरने की सुविधा से सुसज्जित हैं ।

 

  1. यूएवी अपग्रेडः सेना के तीनों अंगों हेतु हेरोन यूएवी प्रणाली के उन्नयन के संयुक्त विषय में प्रगति हो रही है एवं भारतीय वायुसेना इस कार्य का प्रमुख अंग है । मित्र और शत्रु विमानों की पहचान एवं ट्रैफिक कॉलिज़न एवोइडेंस सिस्टम इस अपग्रेड का हिस्सा होंगे । अनुबंध के लिये बातचीत समाप्त हो चुकी हैं ।

 

ऑपरेशन

 

  1. एयरक्राफ्ट दुर्घटना दरः वार्षिक विमान दुर्घटना दर, जो वित्तीय वर्ष के दौरान प्रति 10,000 घंटों की उड़ान में हुई दुर्घटनाओं के रूप में परिकलित की जाती है, ने वर्ष दर वर्ष उत्तरोत्तर बढ़ती गिरावट दर्ज की है । पिछले 40 वर्षों में देखी गई श्रेणी-I की दुर्घटना दर निम्न हैः 

 

 https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001XTS7.png

 

 

  1. फ्लाइंग एफर्टः फ्लाइंग एफर्ट में वृद्धि हुई है एवं दुर्घटना की दर में कमी हुई है, जो भारतीय वायुसेना द्वारा उठाये गए सक्रिय सुरक्षा कदमों की ओर संकेत करती है ।  पिछले दस वर्ष में वित्तीय वर्षवार भारतीय वायुसेना द्वारा फ्लाइंग एफर्ट निम्न हैं:

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image00258LF.png

Make Projects

 

मेक परियोजनाएं

 

  1. एईडबल्यू एंड सी (स्वदेशी): सुरक्षा मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति (सीसीएस) ने दिनांक 6 अक्टूबर, 2004 को एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कण्ट्रोल (एईडबल्यू एंड सी) प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी । सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) को भारतीय वायुसेना के लिये ऑपरेशनल एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कण्ट्रोल (एईडबल्यू एंड सी) प्रणाली की डिज़ाइन तैयार कर विकसित करने के लिये केंद्रीय एजेंसी के रूप में नामित कर दिया गया । एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कण्ट्रोल (एईडबल्यू एंड सी) प्रणाली उन प्रणालियों की एक प्रणाली है जिसमें एम्ब्रैयर-145 एयरक्राफ्ट पर प्राइमरी राडार (पीआर), सैकेण्ड्री सर्विलांस राडार (एसएसआर), इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेज़र्स (इएसएम) सिस्टम, और कम्युनिकेशन सपोर्ट मेज़र्स (सीएसएम) सिस्टम, सेल्फ प्रोटेक्शन स्यूट्स (एसपीएस), मिशन कम्युनिकेशन सिस्टम (एमसीएस) एवं होते हैं । एयरक्राफ्ट में लंबी अवधि तक क्षमताएं हासिल करने के लिये हवा से हवा में ईंधन भरने की सुविधा मौजूद है । 

 

  1. अवाक्स (भारत): एयरबोर्न वॉर्निंग एण्ड कण्ट्रोल सिस्टम (अवाक्स-इण्डिया) में एक परिवहन विमान पर हवा में एवं समुद्र की सतह पर स्थित लक्ष्यों की स्थिति पता लगाने तथा दुश्मन की मौजूदगी के संकेत पकड़ने के लिये संवेदक लगे होते हैं । एयरक्राफ्ट में लगे संवेदक अभियान के नियंत्रकों एवं ज़मीन पर स्थित स्टेशन तक एक अत्याधुनिक संचार डेटा लिंक की सहायता से विस्तृत सूचना पहुंचाता है । यह प्रणाली कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर आते दुश्मन के लक्ष्यों के बारे में समयपूर्व चेतावनी मुहैया कराती है ।

 

युद्धाभ्यास

 

  1. युद्धाभ्यास गगन शक्तिः भारतीय वायुसेना ने 8 अप्रैल 2018 से 22 अप्रैल, 2018 तक संपूर्ण भारत में गगनशक्ति 2018 युद्धाभ्यास का संचालन किया । इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य एक संक्षिप्त एवं तीव्र युद्ध की स्थिति में वायु शक्ति का तत्क्षण उपयोग एवं समन्वय करना था । युद्धाभ्यास की एक महत्वपूर्ण बात विमान, प्रक्षेपास्त्र प्रणाली एवं राडार समेत लड़ाई के सभी संसाधनों की उच्च उपलब्धता एवं विश्वस्तता थी । उच्च गति वाली सैन्य कार्रवाई ने सैन्य-संचालन श्रृंखला के टिकाऊपन का पता लगाने में भारतीय वायुसेना को समर्थ बनाया ।    

 

  1. पिच-ब्लैक युद्धाभ्यास-2018 (देश से बाहर अभ्यास): पिच-ब्लैक युद्धाभ्यास रॉयल ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना द्वारा संचालित एक द्विवर्षीय युद्धाभ्यास है । भारतीय वायुसेना के लिये दिनांक 19 जुलाई से 18 अगस्त, 2018 तक ऑस्ट्रेलिया के डार्विन में संचालिच पिच-ब्लैक युद्धाभ्यास-2018 सर्वप्रथम युद्धाभ्यास था । भारतीय वायुसेना ने 145 वायुसेना कर्मियों समेत 4 सुखोई-30 एमकेआई विमान, एक सी-17 एवं एक सी-130 जे विमान के साथ इस युद्धाभ्यास में भाग लिया । मलेशिया से गुजरते समय वहां के सुबंग में होप युद्धाभ्यास का संचालन किया गया ।

 

  1. अंतर्राष्ट्रीय सेना-खेल-2018 (देश से बाहर): कजाकिस्तान में 6 अगस्त से 8 अगस्त, 2018 तक “यूएवी प्रतियोगिता” तथा रूस में 3 से 4 अगस्त, 2018 तक “एक्सरसाइज़ एवियाडार्ट्स (हवा से ज़मीन पर फायरिंग)” में दो-दो प्रेक्षकों ने भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व किया । 

 

  1. एविया इंद्र युद्धाभ्यास-2018 [चरण-I (देश में) तथा चरण-II (देश से बाहर)]: इस युद्धाभ्यास को दो चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई थी । युद्धाभ्यास का चरण-II दिनांक 17 सितम्बर से 28 सितम्बर, 2018 के बीच रूस के लिपेट्स्क में आयोजित किया गया एवं चरण-I भारत के जोधपुर में दिनांक 10 दिसंबर से 21 दिसंबर, 2018 तक आयोजित किया गया । रूस की वायुसेना ने 30 सदस्यों के साथ इस युद्धाभ्यास में भाग लिया ।

 

  1. कॉप इण्डिया युद्धाभ्यास-2018: संयुक्त राज्य अमेरिका एवं भारतीय वायुसेना ने कॉप इण्डिया नाम के युद्धाभ्यास में भाग लिया । यह कलाईकुण्डा एवं पानागढ़ में दिनांक 3 दिसंबर से 14 दिसंबर, 2018 के बीच आयोजित की गई थी । अमेरिकी वायुसेना ने इस युद्धाभ्यास में 12 एफ-15 सी/डी लड़ाकू विमानों और 3 सी-130 परिवहन विमानों के साथ भाग लिया । इस युद्धाभ्यास में जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के प्रेक्षकों ने भी भाग लिया ।

 

मानवीय सहायता एवं आपदा राहत

 

  1. मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सेमिनारः मई 2018 में पश्चिमी वायुसेना कमान के मुख्यालय ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) पर एक सेमिनार का आयोजन किया । इस सेमिनार में सेना, एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय एवं जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड एवं दिल्ली के राज्य आपदा राहत प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधि उपस्थित थे ।

 

  1. वार्षिक संयुक्त एचएडीआर अभ्यासः प्रधानमंत्री के निर्देशों पर आधारित वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास दिनांक 25 सितम्बर, 2018 से 26 सितम्बर, 2018 के बीच प्रयाग में आयोजित किया गया । अभ्यास के हिस्से के तौर पर देहरादून, बरेली एवं गोरखपुर क्षेत्र में कृत्रिम रूप से भूकम्प की स्थितियां बनाकर अभ्यास किया गया । यह अभ्यास भारतीय वायुसेना एवं मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) ऑपरेशन में शामिल विभिन्न एजेंसियों राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ), प्रदेश सरकार की एजेंसियों एवं नगरपालिका स्तर तक की नागरिक प्रशासन से जुड़ी अन्य एजेंसियों समेत विभिन्न एजेंसियों द्वारा संचालित किया गया ।

 

  1. महाराष्ट्र की आकस्मिक बाढ़ः दिनांक 7 जुलाई, 2018 को हेलिकॉप्टर ने महाराष्ट्र के पालघर में चिंचोटी झरने के निकट फंसे हुए पांच नागरिकों के बचाव का कार्य किया ।

 

  1. केरल में बाढ़ राहतः अगस्त 2018 में विनाशक बाढ़ के बाद भारतीय वायुसेना ने राहत एवं बचाव ऑपरेशन शुरू किया । केरल में राहत एवं बचाव ऑपरेशन में 47 वायुयानों (पांच सी-17, 3 आईएल-76, 5 सी-130 जे एवं 10 एएन-32 और हेलिकॉप्टरों) ने भाग लिया । मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) मिशन में भारतीय वायुसेना ने 4,209 यात्रियों को विपत्ति वाले स्थान से सुरक्षित रूप से उठाया एवं 1,554 टन वज़न उठाया तथा 1404 घंटे की 1,121 उड़ानें भरीं ।

 

प्रचार के प्रयास

 

  1. कैरियर वेबसाइट की देखरेखः भारतीय वायुसेना एक कैरियर वेबसाइट www.careerindianairforce.cdac.in का संचालन करती है, जिसमें सभी प्रकार की प्रवेश एवं चयन के संबंध में सूचना पाई जाती है । ऑनलाइन परीक्षा के ऑनलाइन पंजीकरण एवं संचालन के लिये इस वेबसाइट का उपयोग होता है । चयन प्रक्रिया की विभिन्न स्थितियों जैसे विज्ञापन जारी करने से लेकर अंतिम मेरिट सूची जारी करने तक वेबसाइट को नियमित रूप से अपग्रेड किया जाता है ।  

 

  1. प्रिंट प्रकाशनों में विज्ञापनः सभी प्रवेश संबंधी जानकारी के लिये विज्ञापन रोजगार समाचार, विभिन्न पत्रिकाओं, एवं संपूर्ण भारत में मातृभाषा समाचार पत्रों में भी जारी किये गए हैं ।

 

प्रशिक्षण

 

  1. ई-प्रशिक्षणः भारत सरकार की डिजिटल भारत पहल के अनुरूप भारतीय वायुसेना आरम्भिक वायुसेना कर्मियों के प्रशिक्षण की वर्तमान कार्य पद्धति में प्रतिमान परिवर्तन लाने में अग्रणी रही है । इस दिशा में बैंगलुरू के जालाहल्ली वायुसेना स्टेशन में इलेक्ट्रिकल एडं इन्सट्रूमेंटेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ई एंड आईटीआई) में इलेक्ट फिट ट्रेड के 400 आरम्भिक प्रशिक्षुओं के लिये एक पायलट ई-प्रशिक्षण परियोजना लाई गई । प्रशिक्षुओं एवं प्रशिक्षकों को एक बेतार नेटवर्क के माध्यम से एकीकृत किये गए ‘टेबलेट’ उपलब्ध कराये गए । उपयोगकर्ता इकाई के वाई-फाई कवरेज क्षेत्र में अपने स्थान पर एक केंद्रीय सर्वर में इकट्ठा प्रशिक्षण सामग्री पर जाने में समर्थ हैं । ई-प्रशिक्षण का क्रियान्वयन करने में पायलट परियोजना (चरण-I) बहुत सफल सिद्ध हुई है एवं सभी प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों एवं प्रशिक्षण संस्थानों में इसका क्रियान्वयन करने की योजना है ।

 

महिला सशक्तिकरण

 

  1. लड़ाकू वर्ग में महिला पायलटों की भर्ती : भारतीय वायुसेना महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर मुहैया कराने में अग्रणी रही है एवं फ्लाइंग तथा ग्राउण्ड ड्यूटी शाखाओं में अधिकारियों के रूप में महिलाओं की भर्ती की मार्ग-निर्माता रही है । 1993 से महिलाएं फाइटर वर्ग को छोड़ कर सभी शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के रूप में ली जा रही हैं । भारतीय वायुसेना ने हाल ही में प्रायोगिक आधार पर पांच वर्ष की अवधि के लिये फाइटर शाखा में महिलाओं को शामिल करने के लिये शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) योजना को नवीकृत किया है । तीन महिला अधिकारियों के पहले बैच को 2016 में फाइटर शाखा में कमीशन प्रदान किया गया । यह तीन महिला अधिकारी अग्रणी फाइटर स्क्वैड्रन में पदस्थापित हैं ।

 

विविध

 

  1. विंटेज फ्लाइटः भारतीय वायुसेना टाइगर मोथ, हार्वर्ड एवं डाकोटा विंटेज एयरक्राफ्ट का रखरखाव एवं संचालन करती है । यह एयरक्राफ्ट भारतीय विमानन के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं । यह एयरक्राफ्ट वर्तमान में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के रंगों में संचालित हो रहे हैं एवं पूरे देश में दर्शकों की वाहवाही बटोर रहे हैं क्योंकि यह राष्ट्रीय महत्व के अधिकतर फ्लाईपास्ट एवं एयर डिस्प्ले का अविभाज्य हिस्सा हैं । भारतीय आकाश पर इनकी उपस्थिति भारतीय नागरिकों को हमारी संपन्न उड्डयन विरासत की याद दिलाने का कार्य करती है एवं भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनने के लिये अनगिनत युवाओं को प्रेरित करती है ।

 

  1. एटीएफ ऑनलाइन भुगतानः एटीएफ डीआईपी’ (ओजस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्राप्त एटीएफ बिलों का सीडीए (एएफ) ने मेसर्स आईओसीएल को ऑनलाइन भुगतान जारी करना शुरू कर दिया है एवं यह भारतीय वायुसेना द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है । 

 

भारतीय तटरक्षक बल

 

 

कार्य

 

  1. विस्तारित विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र निगरानीः भारत के सामुद्रिक क्षेत्र में समुद्री निगरानी करने के अतिरिक्त भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के पोत एवं वायुयान समुद्रवर्ती प्रदेशों में सामुद्रिक निगरानी के लिये भी तैनात किये गए हैं । भारतीय तटरक्षक बल ने मॉलदीव के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में फरवरी से अप्रैल 2018 के बीच अपने युद्धपोत सारथी के माध्यम से एवं युद्धपोत समर्थ के माध्यम से अप्रैल से मई 2018 के बीच, तत्पश्चात जुलाई-अगस्त 2018 में एक आईसीजी डॉर्नियर एयरक्राफ्ट से तीन बार विस्तारित तैनाती की ।

 

तटीय सुरक्षा

 

 

  1. तटीय सुरक्षा अभ्यासः भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) नौसेना के साथ मिलकर समूचे तट की गश्त एवं निगरानी का कार्य कर रहा है । 2009 से समन्वित गश्त एवं कार्य की मानकीकृत प्रक्रियाओं के प्रमाणीकरण की प्रभावोत्पादकता सुनिश्चित करने के लिये कुल 180 समन्वित सुरक्षा अभ्यास किये गए हैं ।  

 

  1. तटवर्ती सुरक्षा ऑपरेशनः तटवर्ती सुरक्षा पर निरंतर ज़ोर देते हुए 2009 से सभी हिस्सेदारों के साथ समन्वय से 351 तटीय सुरक्षा ऑपरेशन का संचालन किया गया है ।

 

खोजबीन एवं बचाव

 

  1. भारतीय तटरक्षक बल भारत के विशाल 4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर के खोजबीन एवं बचाव क्षेत्र में सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव के लिये राष्ट्रीय समन्वय एजेंसी है । भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के अध्यक्ष हैं जो सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव कार्य एवं इससे संबंधित विषयों के समन्वय के लिये उत्तरदायी है ।

 

  1. डिस्ट्रैस बीकन अभ्यासः सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव कार्य की गुणवत्ता में सुधार के लिये बीकन अभ्यासों की श्रृंखला संचालित की जा रही है । चौदहवां और पंद्रहवा अभ्यास क्रमशः मई 23 से 25 एवं सितम्बर 26 से 28, 2018 को संचालित किया गया । इस दौरान रक्षा एवं नागरिक क्षेत्रों से सक्रिय भागीदारी देखी गई एवं वर्ष 2018 में कुल 96 बीकन का परीक्षण किया गया ।

 

  1. खोजबीन एवं बचाव अभ्यासः राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव योजना के प्रमाणीकरण की अनिवार्यता के लिये एवं सामुद्रिक खोजबीन व बचाव प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिये समन्वित रवैये की दिशा में एजेंसियों की बढ़ी हुई संचालनीयता के अभ्यास के लिये राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के तत्वावधान में सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव अभ्यास संचालित किये गए । 2018 में इन अभ्यासों के दौरान बड़ी संख्या में राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के सदस्यों, हिस्सेदारों, एजेंसियों, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षकों की भागीदारी देखी गई, जो निम्न हैः-

 

(क). चेन्नई के तट के करीब 16-17 जनवरी, 2018 के बीच राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव कार्यशाला एवं अभ्यास (एसएआरइएक्स-18) संचालित किया गया । यह खोजबीन एवं बचाव अभ्यास भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) द्वारा संचालित द्विवार्षिक अभ्यासों की श्रृंखला में से था ।

 

(ख). अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में पोर्ट ब्लेयर के समुद्र तट के निकट 19 एवं 21 मार्च, 2018 को क्षेत्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं राहत अभ्यास ।

 

  1. सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव कार्यशाला एवं संवादमूलक सत्रः राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के तत्वावधान में, भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र से संबंधित कार्य करने वाले लोगों, मछुवारों एवं अन्य हिस्सेदारों के लिये सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव कार्यशाला एवं संवादमूलक सत्र आयोजित कराने की पहल की । इस पहल का उद्देश्य मछली से जुड़े समुदायों एवं समुद्र से संबंधित कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिये समन्वित रुख़ अपनाना तथा तटीय समुदायों के मध्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था ।

 

  1. खोजबीन एवं बचाव संचार अभ्यासः हिंद महासागर क्षेत्र में अग्रणी सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव सेवा प्रदाताओं के साथ हमारे सैन्य कार्रवाई से संबंधित संबंधों को सुदृढ़ बनाने के दृष्टिकोण से एमआरसीसी (मुंबई), एमआरसीसी (चेन्नई) तथा एमआरसीसी (पोर्ट ब्लेयर) ने मित्रवत देशों, जिनमें ओमन, बांग्लादेश, इण्डोनेशिया, मलेशिया, कतर, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, श्रीलंका, म्यांमार एवं ऑस्ट्रेलिया शामिल थे, के साथ खोजबीन एवं बचाव संचार अभ्यास (एसएआर-कॉमैक्स) संचालित किया ।

 

  1. राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड की सत्रहवीं बैठकः भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक एवं राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 5 जुलाई, 2018 को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड की सत्रहवीं बैठक संपन्न हुई । बैठक में पांच प्रदेशों के मत्स्य विभाग के प्रतिनिधियों के साथ अन्य विशेष आमंत्रित सदस्यों समेत बोर्ड के सभी सदस्य उपस्थित थे । मछुवारों एवं समुद्र से जुड़ा कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा एवं उनकी समीक्षा की गई । बैठक के दौरान राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा वार्षिक राष्ट्रीय सामुद्रिक खोजबीन एवं बचाव बोर्ड पुरस्कार भी बांटे गए । मछुवारों हेतु भारतीय तटरक्षक बल खोजबीन एवं बचाव पुरस्कार महाराष्ट्र के तारापुर से 33 नॉटिकल मील की दूर पर मछली पकड़ने वाली डूबती नाव शिवनेरी से 12 ज़िंदगियां बचाने के लिये मछली पकड़ने वाली नौका धरती के मालिक एवं संचालक श्री मिलन शंकर तारे को प्रदान किया गया ।  

 

असैनिक प्राधिकरण की सहायता

 

  1. गणेश उत्सव-2018: मुंबई के समुद्री तट पर भगवान गणेश की मूर्तियां विसर्जित करने के समारोह के दौरान तटरक्षक बल के क्षेत्रीय मुख्यालय (पश्चिम) ने समारोह में निगरानी तथा खोजबीन व बचाव कवर मुहैया कराने के लिये 13 से 23 सितम्बर, 2018 को ‘ऑपरेशन उत्सव’ का संचालन किया । भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के पोत एवं विमानों ने श्रद्धालुओं को 14, 17, 19 एवं 23 सितम्बर, 2018 के दिन खोजबीन एवं बचाव कवर उपलब्ध कराया ।

 

  1. केरल की बाढ़ के दौरान असैनिक प्राधिकरण की सहायताः अगस्त 2018 में केरल में आई बाढ़ के दौरान भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने ‘ऑपरेशन राहत’ नाम से बड़े स्तर पर एक आपदा प्रत्युत्तर एवं राहत अभियान शुरू किया । भारतीय तटरक्षक बल ने इस ऑपरेशन के दौरान आठ पोत, चार डॉर्नियर टोही विमानों एवं तीन हेलिकॉप्टरों का उपयोग किया । केरल के बाढ़ प्रभावित ज़िलों में 7 से 9 तटरक्षक कर्मियों से बनीं कुल 36 आपदा प्रत्युत्तर टीमें तैनात की गई । 

 

  1. अरब सागर में लुबान चक्रवात के दौरान भारतीय तटरक्षक  बल (आईसीजी) के प्रयासः दिनांक 1 अक्टूबर 2018 को दक्षिण पूर्वी अरब सागर में लुबान चक्रवात आने के बाद भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया । कोच्चि में तटरक्षक बल की आपदा प्रत्युत्तर टीमों का निर्माण किया गया एवं जेमिनी जीवनरक्षक नावों को अल्पकालीन सूचना पर तैनाती के लिये तैयार रखा गया । समुद्र में मछुवारों को चेतावनी देने/ ख़तरे के प्रति शिक्षित करने एवं वापस बंदरगाह पर लौट आने हेतु मार्गदर्शन करने के लिये औसतन 10 से 12 युद्धपोत, 5 से 6 डॉर्नियर एयरक्राफ्ट एवं 1-2 हेलिकॉप्टरों की तैनाती की गई ।

 

  1. बंगाल की खाड़ी में तितली चक्रवात के दौरान भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के प्रयासः दिनांक 8 अक्टूबर, 2018 को बंगाल की खाड़ी में बने ‘तितली’ चक्रवात के पहुंचने के बाद भारती तटरक्षक बल (आईसीजी) ने पुनः बड़ी संख्या में राहत एवं बचाव ऑपरेशन शुरू किये । गोपालपुर में तटरक्षक बल की तीन आपदा प्रत्युत्तर टीमें तैनात की गई जबकि 4 टीमें पारादीप में एवं 6 टीमें हल्दिया में तुरंत तैनाती के दृष्टिकोण से तैयार रखी गई । समुद्र में मछुवारों को चेतावनी देने/ ख़तरे के प्रति शिक्षित करने एवं वापस बंदरगाह पर लौट आने हेतु मार्गदर्शन करने के लिये औसतन 8 पोत एवं 3 से 4 डॉर्नियर एयरक्राफ्ट तैनात किये गए ।

 

  1.  ‘गाजा चक्रवात के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के प्रयासः दिनांक 8-9 नवम्बर, 2018 को उत्तरी अंडमान समुद्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने के पश्चात भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 9 नवम्बर, 2018 को समुद्र में कार्यरत मछुवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पूर्वोपाय स्वरूप अनेक कदम उठाये ।

 

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

 

  1. समझौता पत्रक (एमओयू) भारत ने संरक्षा व सुरक्षा तथा समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को स्वीकार किया है । तदनुसार भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) अपने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ समुद्र को सुरक्षित, संरक्षित एवं स्वच्छ बनाने का प्रयत्न करता है । भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने बांग्लादेश, जापान, श्रीलंका, वियतनाम के तटरक्षक बलों एवं रॉयल ओमान पुलिस तटरक्षक बल के साथ तटरक्षा संबंधी प्रासंगिक विषयों पर सहयोग किया है । इसके अतिरिक्त भारतीय तटरक्षक बल एवं पाकिस्तान समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने दोनों सरकारों के रक्षा मंत्रालयों के मध्य हस्ताक्षरित समझौता-पत्र के अनुरूप एक संचार सम्पर्क भी स्थापित किया है । 

 

द्विपक्षीय आदान-प्रदान

 

  1. भारतीय एवं श्रीलंकाई तटरक्षक बल के बीच समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षरः भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) एवं श्रीलंका के तटरक्षक बल (एसएलसीजी) के बीच कोलंबो में समुद्र में अंतर्राष्ट्रीय ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों के मुक़ाबले के लिये सहयोगात्मक संबंध की स्थापना करने एवं भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) एवं श्रीलंकाई तटरक्षक बल (एसएलसीजी) के बीच क्षेत्रीय सहयोग को विकसित करने के लिये दिनांक 9 मई, 2018 को एक समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए । 

 

संयुक्त अभ्यास

 

  1. बांग्लादेश तटरक्षक बल के साथ संयुक्त युद्धाभ्यासः बांग्लादेश के पोत ताजुद्दीन ने दिनांक 25 मई से 28 मई, 2018 के बीच समझौता पत्र (एमओयू) की शर्तों के अंतर्गत संयुक्त युद्धाभ्यास के लिये चेन्नई का दौरा किया । इस पोत ने 30 मई से 2 जून, 2018 तक भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के साथ पेशेवराना आदान-प्रदान के लिये विशाखापट्टनम का दौरा भी किया ।  

 

  1. जापान तटरक्षक (जेसीजी) के साथ संयुक्त अभ्यासः भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) एवं जापानी तटरक्षक बल (जेसीजी) के बीच चेन्नई में/ के करीब 16-17 जनवरी, 2018 को वार्षिक युद्धाभ्यास आयोजित किया गया । एकीकृत हेलिकॉप्टर समेत जापानी तटरक्षक बल (जेसीजी) के पोत सुगारू ने इस संयुक्त अभ्यास में भाग लिया ।

 

समुद्री वातावरण

 

  1. दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र में तेल एवं रासायनिक प्रदूषण पर जवाबी कार्रवाई हेतु सहयोग के लिये समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षरः भारत सरकार की ओर से भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक ने दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीइपी), कोलम्बो, श्रीलंका के महानिदेशक के समक्ष दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र (समुद्री देशों भारत, बांग्लादेश, मॉलदीव, पाकिस्तान एवं श्रीलंका से निर्मित) में तेल एवं रासायनिक प्रदूषण पर जवाबी कार्रवाई हेतु सहयोग के बारे में दिनांक 12 मई, 2018 को सहमति का प्रपत्र जमा करा दिया है ।

 

  1. अतंर्राष्ट्रीय समुद्रतट स्वच्छता दिवस- 2018: ‘स्वच्छ भारत अभियान’ एवं ‘स्वच्छता की सेवा’ के माध्यम से प्रधानमंत्री की वृहत स्वच्छता की अपील एवं निर्मलता अभियान पर सरकार द्वारा जारी प्रयासों की दिशा में भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने सभी तटवर्ती प्रदेशों/ केंद्र शासित प्रदेशों में दिनांक 15 सितम्बर, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय समुद्रतट स्वच्छता दिवस -2018 का संचालन किया । पूरे देश में 22,026 स्वंयसेवकों ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्रतट स्वच्छता दिवस -2018 अभियान (आईसीसी-2018) में भाग लिया, जिसका परिणाम 71,220 किलोग्राम सामुद्रिक कचरे के संग्रह के रूप में हुआ ।

 

मत्स्य सुरक्षा

 

  1. विदेशी मछली मारने वाले जलयानों को पकड़नाः भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने जनवरी 2018 से 26 चालक दल सदस्यों समेत 4 मछली पकड़ने वाले विदेशी जलयानों को एमज़ेडआई अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के अंतर्गत पकड़ा ।

 

  1. भारतीय एवं विदेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को स्वदेश भेजनाः स्वदेश भेजने से जुड़ी कार्रवाई सीधे भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) मुख्यालय द्वारा समन्वित की जाती है जिसमें विदेश मंत्रालय, संबंधित देशों में भारतीय उच्चायोग, प्रदेश मत्स्य विभागों एवं ज़िला प्रशासन से व्यापक व समर्पित चर्चा शामिल होती है । जनवरी 2018 से तटरक्षक बल ने भारत से 11 श्रीलंकाई एवं 26 पाकिस्तानी मछुवारों को स्वदेश भेजा है, तथा श्रीलंका से 155 भारतीय मछुवारे स्वदेश लाए गए हैं । 

 

उड्डयन

 

  1. 16 एडवान्स्ड लाइट हेलिकॉप्टर्स (एएलएच) एमके-III: मेसर्स हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 29 मार्च, 2017 को 16 एएलएच एमके-III की आपूर्ति के लिये अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया है एवं जून 2018 में पहले ग्रीन एयरक्राफ्ट का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया है । प्रणालियों के एकीकरण एवं सत्यापन का कार्य जारी है एवं मार्च 2020 में पहले दो हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति प्रस्तावित है । यह हेलिकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक एवं निगरानी, रोकने, पोत में चढ़ने वालों की सहायता करने में सक्षम हैं एवं जहाज़ों से प्रदूषण का जवाब देने की सुविधा से सुसज्जित हैं ।    

 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन

 

 

  1. लंबी दूरी का सतह से सतह पर मार करने वाला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र अग्नि-5’: पूरे वर्ष के दौरान अग्नि-5 के जनवरी, जून एवं दिसम्बर, 2018 में तीन बार सफल परीक्षण किये गए । इस प्रक्षेपास्त्र के अब तक कुल सात फ्लाइट परीक्षण किये गए हैं एवं अब तक सभी अभियान सफल रहे हैं ।   

 

 

  1. बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (प्रोग्राम एडी): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों से होने वाले हमलों के विरुद्ध रणनीतिक अस्त्र के रूप में इंटरसेप्टर प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया है । एंडो इंटरसेप्टर मिसाइल (एएडी) एवं एक्सो इंटरसेप्टर मिसाइल (पीडीवी) के क्रमशः अगस्त 2018 और सितम्बर 2018 में सफल परीक्षण किये गए । 

 

  1. दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाला अस्त्र प्रक्षेपास्त्रः रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने पहले ही वार में लक्ष्य पर निशाना साधने की उच्च प्रायिकता वाले हवा से हवा में मार करने वाले दृश्य सीमा से परे प्रक्षेपास्त्र ‘अस्त्र’ का विकास किया है, जिससे हवा में पैतरेंबाज़ी कर उड़ते सुपरसोनिक लक्ष्य को नष्ट किया जा सके । भारतीय वायुसेना ने सितम्बर/ अक्टूबर 2018 में प्रक्षेपास्त्र के अंतरिम विकास परीक्षण के रूप में आईटीआर बालासोर में इसके अनेक परीक्षण किये हैं ।   

 

  1. नयी पीढ़ी का एंटी-रेडिएशन प्रक्षेपास्त्र (एनजीएआरएम): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) 100 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले नयी पीढ़ी के एंटी-रेडिएशन प्रक्षेपास्त्र (एनजीएआरएम) की रचना एवं विकास करने में संलग्न है । सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान पर प्रक्षेपास्त्र को लगाने के लिये समुचित परिवर्तन के साथ एकेयू-58 लांचर का उपयोग किया जाएगा । क्रमशः जून एवं जुलाई 2018 में उच्च एवं कम तापमान में एकीकृत पी-I और पी-II रॉकेट मोटर की सफल स्थैतिक फायरिंग की गई थी । सितम्बर 2018 में कैप्टिव फ्लाइट ट्रायल्स भी सफलतापूर्वक संचालित किये गए थे ।

 

  1. मानव द्वारा उठाने योग्य एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम): एमपीएटीजीएम ‘फायर एंड फॉरगेट’ तथा ‘टॉप अटैक’ क्षमताओं वाला तीसरी पीढ़ी का एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है जो दिन व रात दोनों में संचालित किया जा सकता है । एमपीएटीजीएम हथियार प्रणाली की रचना एवं विकास भारतीय सेना की इंफैण्ट्री एवं पैराशूट बटालियन के साथ तैनाती के लिये किया गया है । वर्ष के दौरान नियंत्रित परीक्षणों के लिये मिसाइल के सब-सिस्टम्स का परीक्षण किया गया एवं मिसाइल के साथ जोड़ने के लिये तैयार किया गया, इसके बाद सितम्बर 2018 में मिसाइल प्रणाली के कामयाब प्रोग्राम कण्ट्रोल फ्लाइट ट्रायल किये गए ।

 

  1. स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक (एमएएनटी) गाइडेड मिसाइलः वर्ष के दौरान राजस्थान के जैसलमेर में मई 2018 के दौरान एसएएनटी गाइडेड मिसाइल मिशन-01 अभियान संचालित किया गया जिसके दौरान एमआई-35 हेलिकॉप्टर के माध्यम से एसएएनटी की सफल फायरिंग का प्रदर्शन किया गया । नवम्बर 2018 में एसएएनटी सीकर के गणितीय नमूने के साथ रिलीज़ फ्लाइट ट्रायल्स (आरएफटी) भी किये गए जिनमें एमआई-35 से सुरक्षित वियोजन, ट्रांसफर एलाइनमेंट एल्गोरिद्म, लॉंच रिलीज़ सीक्वेंस एवं लैटेक्स कण्ट्रोल ऑटो पायलट एल्गोरिद्म का प्रदर्शन किया गया । 

 

  1. स्मार्ट एंटी एयर फील्ड वेपन (एसएएडबल्यू): स्मार्ट एंटी एयर फील्ड वेपन (एसएएडबल्यू) एक लंबी दूरी का सटीक स्टैंड ऑफ हवा से ज़मीन पर मार करने वाला अस्त्र है जो ज़मीन पर स्थित लक्ष्यों पर निशाना साध सकता है । मई 2018 में इस हथियार की भेदन क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिये पूर्ण विन्यास में इसका इम्पैक्ट ट्रायल किया गया था । स्मार्ट एंटी एयर फील्ड वेपन (एसएएडबल्यू) के यह परीक्षण भारतीय वायुसेना के विमान से अगस्त 2018 में भी किये गए थे । इस अस्त्र के अब तक आठ विकासात्मक उड़ान परीक्षण हो चुके हैं ।

 

  1. मध्यम उन्नतांश सुदीर्घ स्थायित्व मानवरहित एरियल वाहन (यूएवी) तापस-बीएच’: अनेक अभियानों में काम आने वाले तापस-बीएच को सेना के तीनों अंगों के लिये आसूचना संग्रह, निगरानी एवं टोह लेने की भूमिकाएं निभाने के लिये 24 घंटे कार्यरत रहने की योग्यता के साथ विकसित किया जा रहा है । इसका निर्माण समुद्र की सतह से 30,000 फीट के उन्नतांश पर कार्य करने के लिये किया जा रहा है एवं यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तथा इलेक्ट्रो-ऑप्टिक व सिंथेटिक एपेर्चर राडार (इओ एंड एसएआर) पेलोड्स को ले जाने में सक्षम है । वर्ष के दौरान इसके कुल 63 टैक्सी ट्रायल (एलएसटीटी एवं एचएसटीटी) हो चुके हैं । यूज़र कॉन्फिग्युरेशन फ्लाइट का पहला चरण फरवरी 2018 में शुरू हुआ । आज तक ऐसे 25 ट्रायल पूरे हो चुके हैं ।  

 

  1. गाइडेड पिनाका रॉकेट प्रणालीः रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा 20 से 80 किलोमीटर की रेंज में मौजूद लक्ष्य पर निशाना साधने के लिये गाइडेड पिनाका रॉकेट प्रणाली का विकास किया जा रहा है । यह रॉकेट पिनाका एमके-II रॉकेट की प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करता है एवं इसमें पथभ्रष्ट करने पर आधारित एयरोडायनेमिक नियंत्रण एवं इनर्शियल नेवीगेशन सिस्टम/ ग्लोबल पॉज़ीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) आधारित मार्गदर्शन हैं । इस प्रणाली का मई 2018 में पीएक्सई, चांदीपुर में सफल परीक्षण किया गया था एवं इसने अभियान के लिये निर्धारित सभी उद्देश्यों को पूरा किया ।    

 

  1. युद्ध सामग्री का नया परिवार (एनएफएमएस): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा मौजूदा युद्ध-सामग्री में सुधार करने एवं उनके प्रदर्शन में निखार के लिये छह प्रकार की युद्ध सामग्री की रचना एवं विकास किया जा रहा है यथा सॉफ्ट टारगेट ब्लास्ट म्यूनीशन ‘निपुण’, एंटी-टैंक प्वाइंट अटैक म्यूनीशन ‘विभव’, एंटी-टैक बार म्यूनीशन ‘विशाल’, डायरेक्शनल फ्रैग्मेंटेशन म्यूनीशन ‘पार्थ’, एंटी-टैंक म्यूनीशन ‘प्रचण्ड’ एवं जंपिंग फ्रैग्मेंटेशन म्यूनीशन ‘उल्का’ । वर्ष के दौरान प्रचण्ड का पीएसक्यूआर-आधारित यूज़र ट्रायल पूर्ण हो चुका है ।   

 

 

  1. अर्जुन आर्मर्ड रिकवरी एंड रिपेयर व्हीकल (अर्जुन एआरआरवी) : अर्जुन आर्मर्ड रिकवरी एंड रिपेयर व्हीकल का उद्देश्य सैन्य कार्रवाई के दौरान विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों में एमबीटी अर्जुन के अनेक रिकवरी, मरम्मत एवं पुनःपूर्ति से संबंधित कामकाज करना है । वर्ष के दौरान डीआरडीओ के आंतरिक परीक्षणों में पहली प्रतिकृति का सफल प्रदर्शन किया गया था एवं दूसरी प्रतिकृति विकासात्मक परीक्षणों के दौर में है ।

 

  1. एडवांस लाइट टौड एरे सोनार (एएलटीएस): एडवांस लाइट टौड एरे सोनार (एएलटीएस) विशेषकर समुद्र की सतह से नीचे की परिस्थितियों में प्रचालित पनडुब्बियों के संसूचन, स्थानीकरण एवं वर्गीकरण की एक प्रभावी संवेदन प्रणाली है । यह पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडबल्यू) से जुड़ी कार्रवाइयों में उपयोगी है एवं तेज़ गति से टॉरपीडो के हमले करने में सक्षम शांत पड़ी पनडुब्बियों को ढूंढने में युद्धपोतों के लिये तीव्र संसूचक हैं  । आईएनएस शारदा पर प्रणाली के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण जारी हैं । परीक्षणों के दौरान घसीटने एवं लॉंच करने से संबंधित मापदण्डों समेत लगभग 75 एनएसक्यूआर मापदण्डों का प्रदर्शन किया गया ।  

 

  1. यूएसएचयूएस-2: पनडुब्बियों की शाखा की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के देखते हुए एवं इन पनडुब्बियों पर लगी मौजूदा रूसी सोनार में पुर्जों के पुराने पड़ जाने से निपटने के लिये यूएसएचयूएस-2 चार इकेएम पनडुब्बियों पर तैनाती के लिये एक पनडुब्बी सोनार है । यूएसएचयूएस-2 के इंजीनियर्ड नमूनों की रचना एवं विकास एनपीओएल में किया जा रहा है एवं इनका निर्माण मेसर्स बीइएल, बैंगलुरू में किया जा रहा है । वर्ष के दौरान रूस में आईएनएस सिंधुकेसरी पर यूएसएचयूएस-2 का सी एक्सेप्टेंस ट्रायल (एसएटी) फेज़-1 पूरा किया गया था ।     

 

  1. पोर्टेबल डाइवर डिटेक्शन सोनार (पीडीडीएस): डीआरडीओ/ एनपीओएल बंदरगाहों के निकट छोटे लक्ष्यों जैसे गोताखोर एवं गोताखोर डिलीवरी वाहनों की पहचान करने में सक्षम पीडीडीएस प्रणाली की रचना एवं विकास कर रहे हैं । जब भी आवश्यकता हो इसकी तैनाती एवं पुनः प्राप्ति की जी सकती है । इस वर्ष के दौरान पोर्टेबल डाइवर डिटेक्शन सोनार (पीडीडीएस) प्रणाली का विकास किया गया । इस प्रणाली का मैदान पर मूल्यांकन 2019 की शुरुआत में हो जाएगा ।

 

  1. एडवांस लाइट वेट टॉरपीडो (एएलडबल्यूटी): एएलडबल्यूटी किसी पोत, हेलिकॉप्टर अथवा फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट से दाग़ा जाने वाला एक पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो है । इसमें कम गति (25 नॉटिकल माइल) में 25 किलोमीटर एवं उच्च गति (50 नॉटिकल माइल) में 12 किलोमीटर की द्वैत गति वाली क्षमताएं हैं । वर्ष के दौरान पूर्ण टॉरपीडो के साथ 70 किलोवॉट बैटरी का डिस्चार्ज परीक्षण किया गया । एएलडबल्यूटी में इस्तेमाल रिकवरी प्रणाली जैसे- एसटीआरएस, आईपीआरएस, नोइज़ मेकर एवं बीएसएटी की कार्यप्रणाली देखने के लिये विशाखापट्टनम के निकट समुद्र में इसका स्थैतिक परीक्षण किया गया था । सिंगल ट्यूब लॉंचर से इसकी स्वचालिक वैद्युत फायरिंग एवं गतिज सामुद्रिक परीक्षण किया गया जिसमें टॉरपीडो ने अभियान में निर्धारित क्रम के अनुरूप व्यवहार किया । 

 

  1. सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर): नेटवर्क द्वारा सक्षम, अंतः प्रचालनीय एवं प्रमापीय सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) के समूह के विकास का उद्देश्य नौसेना की आवश्यकतानुसार मोबाइल तथा फिक्स्ड फोर्सेज़ को सुरक्षित बेतार संचार की क्षमता उपलब्ध कराना है, यथा- नेवल कॉम्बैट (एसडीआर-एनसी), टैक्टिकल (एसडीआर-टीएसी), एयरबोर्न (एसडीआर-एआर), मैनपैक (एसडीआर-एमपी) एवं हैण्ड हेल्ड (एसडीआर एचएच) । वर्ष के दौरान एसडीआर टीएसी के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण एवं एक्सेप्टेंस टेस्ट विशाखापट्टनम के पांच पोतों पर पूरे किये गए । चुनिंदा बैण्ड पर एसडीआर-एआर के फ्लाइट ट्रायल भी पूरे किये गए ।

 

  1. एयर डिफेंस फायर कण्ट्रोल राडार (एडीएफसीआर) अतुल्य’: एयर डिफेंस फायर कण्ट्रोल राडार (एडीएफसीआर) ‘अतुल्य’ एंटी-एयरक्राफ्ट गन के साथ मिल कर एक भू-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम का निर्माण करता है जिसका मुख्य उद्देश्य कम तथा अत्यंत कम दूरी से हवा से उत्पन्न सभी ख़तरों के विरुद्ध रात व दिन दोनों में एक प्रभावी रक्षण सुनिश्चित करना है । इस वर्ष के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा राडार प्रणाली का मूल्यांकन पूरा किया गया एवं एयर डिफेंस फायर कण्ट्रोल राडार की गन एवं लक्ष्यों समेत एकीकृत परीक्षण फायरिंग की गई ।

 

  1. एयर डिफेंस टैक्टिकल कण्ट्रोल राडार (एडीटीसीआर) : एयर डिफेंस टैक्टिकल कण्ट्रोल राडार यानी एडीटीसीआर प्रणाली हवा में मित्र व शत्रु लक्ष्यों की निगरानी, खोजबीन एवं पहचान करने तथा अनेक एयर डिफेंस कमान चौकियों/ शस्त्र-प्रणालियों तक आंकड़े भेजने के लिये सेना एयर डिफेंस द्वारा विकसित की गई है । वर्ष के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एयर डिफेंस टैक्टिकल कण्ट्रोल राडार (एडीटीसीआर) प्रणाली का आंतरिक मूल्यांकन पूरा किया । सभी पीएसक्यूआर मापदण्डों का पालन किया गया एवं प्रदर्शन/ विश्लेषण के माध्यम से उनका सत्यापन किया गया । यह प्रणाली उपयोगकर्ता परीक्षण के लिये तैयार है ।

 

सीमा सड़क संगठन

 

सीमा सड़क संगठन से संबंधित युगांतरकारी आयोजन/ उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

 

वर्तमान में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) 27,404.18 किलोमीटर लंबी 883 सड़कों पर कार्य कर रहा है, जिनमें से 7,991.98 किलोमीटर लंबी सड़कें केवल रखरखाव के दौर में हैं एवं शेष सड़कें डबल लेन बनकर सुधार के दौर में/ निर्माणाधीन हैं ।  सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) देश के शेष भागों से सीमावर्ती क्षेत्रों का सम्पर्क सुनिश्चित करने के लिये 126 सड़कों (4,800 किलोमीटर) पर हिमपात से जमा बर्फ साफ करने के अलावा सात हवाई क्षेत्रों का रखरखाव भी कर रहा है ।

 

  1. उपलब्धियां एवं लक्ष्यः सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने जनवरी 2018 से नवम्बर 2018 तक की अवधि के दौरान सड़क निर्माण से जुड़े निम्न लक्ष्य प्राप्त कर लिये हैं ।

 

आइटम  ए/यू        20 नवम्बर, 2018 तक उपलब्धियां   

 

निर्माण कार्य               किमी Eqvt Cl-9 843.40

ऊपरी भाग पर कार्य               किमी Eqvt Cl-9 1,716.24

नयी परत बिछाने का कार्य         किमी 1,945.37

स्थायी कार्य लाख 1,19,248.28

बड़े पुल            मीटर 2,290.18

सुरंग      लाख 31,531.28

 

  1. इस वित्तीय वर्ष में किये गए महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं :

 

        • सैन्य रूप से महत्वपूर्ण भारत चीन सीमावर्ती सड़क (आईसीबीआर) पर तामा-चुंग-चुंग-माजा सड़क पर बीदख (16 किमी) तक सम्पर्कः पिछले वर्ष गेलेनसिनिएक पर 200 फीट के बैले पुल (24 अक्टूबर 2017 को सुबनसिरी नदी पर पहला एकल स्पैन पुल) का उद्घाटन कर इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी, जिसने कार्य की गति में वृद्धि करने के लिये अतिरिक्त बिंदु उपलब्ध कराए । तदनुसार 30 जनवरी 2018 को बीदख तक सड़क सम्पर्क स्थापित किया गया ।

 

 

        • 60 फीट लंबे बैले पुल का शुभारंभः लाइमकिंग से करीब 40 मीट्रिक टन सामान के हवाई परिवहन के साथ तामा-चुंग-चुंग-ताकसिंग सड़क पर 31.36 किलोमीटर पर 60 फीट लंबे बैले पुल की शुरुआत दिनांक 31 जनवरी, 2018 को पूरी हो गई, अब यहां तक कि मॉनसून के दौरान भी यह सड़क खुली रहेगी ।     

 

        • 190 फीट के टीडीआर का पुनर्स्थापनः एनएच-34 पर धारासू-गंगोरी सड़क पर किलोमीटर 31 पर गंगोरी गढ़ में मौजूदा 190’ डबल डबल बैले पुल (सी1-24) भारी भरकम सिविल वाहनों के आवागमन के कारण दिनांक 1 अप्रैल, 2018 को टूट गया । 12 घंटे के अंदर ह्यूम पाइपों के इस्तेमाल से वैकल्पिक मार्ग शुरू किया गया एवं 12 घंटे के अंदर ट्रैफिक दोबारा शुरू कर दिया गया । अब सी1-140 का ट्रिपल डबल रीइंफोर्स्ड 190 फीट बीबी दिनांक 20 अप्रैल 2018 को शुरू किया गया ।  

 

        • कवरंगलुई पुल का उद्घाटनः लॉनत्लाई-डर्टलैंग-पारवा सड़क पर कवरंगलुई नदी पर 72.50 मीटर के मल्टी स्पैन पीएससी बॉक्स गर्डर स्थायी पुल का निर्माण पूरा हो गया है एवं दिनांक 12 फरवरी 2018 को मिजोरम के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल निर्भय शर्मा द्वारा इसका उद्घाटन किया गया । 

 

        • थेंग सुरंग का उद्घाटनः गंगटोक-चुंगथैंग सड़क पर 86 किलोमीटर पर बार बार होने वाले भूस्खलन से निपटने के लिये एक 542 मीटर लंबी घोड़े के पैर के आकार की एनएचडीएल विनिर्देशों वाली सुरंग का कार्य पूरा किया गया है । यह सुरंग रक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे ने 7 जून 2018 को राष्ट्र के नाम समर्पित कर दी ।

 

        • भूटान में डामचू-चुखा सड़क का उद्घाटनः सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित एशियन हाइवे स्टैण्डर्ड्स के 29.20 किलोमीटर पर डामचू-चुखा सड़क का दिनांक 18 जुलाई 2018 को औपचारिक रूप से भूटान सरकार के प्रधानमंत्री लोताये दाशो शेरिंग तोबगे द्वारा उद्घाटन किया गया । नयी सड़क फुंटशोलिंग-थिम्फू के बीच लगने वाले समय को एक घंटा कम कर देगी एवं तीव्र चढ़ाई वाली 19.5 किलोमीटर की यात्रा कम कर देगी ।

 

        • हुसैनीवाला पुल का उद्घाटनः पुराने फिरोज़पुर-लाहौर राजमार्ग पर सतलुज नदी पर फिरोज़पुर को हुसैनीवाला एन्क्लैव से जोड़ने वाले अस्थायी पुल के चार स्पैन को 238 लाख रुपये की लागत से तैयार 70 आर की लोड-क्लास वाले एक नये पुल के निर्माण से बदल दिया गया है । यह पुल दिनांक 12 अगस्त 2018 को रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा राष्ट्र के नाम समर्पित किया गया था । हुसैनीवाला वह स्थान है जहां स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव, जिन्होंने मातृभूमि के लिये महान बलिदान दिया, का अंतिम संस्कार किया गया था । इन वीरों, जिनको पूरा देश कभी नहीं भूल सकता है, के सम्मान में यहां एक स्मारक बनाया गया है । 

 

        • अखनूर-पुंछ सड़क की संरेखण योजना की अनुमतिः दिनांक 5 सितम्बर 2018 को पत्र संख्या RW/NH-12037/1214/Misc-New NHs/2014/NH-I/Zone-II के माध्यम से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क की संरेखण योजना को मंजूरी प्रदान कर दी । परामर्शदाता ने दिनांक 6 सितम्बर 2018 को संभाव्यता रिपोर्ट के साथ स्वीकृत अंतिम संरेखण योजना सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास जमा करा दी ।

 

        • संयुक्त बैले पुल का शुभारंभः दिनांक 25 सितम्बर 2018 को अरुणाचल प्रदेश की लोहित घाटी के मेशाई में लोहित नदी पर एक संयुक्त पुल (BSB 400 ft+140 ft DSRBB & 2X130 ft DSRBBs) का शुभारंभ किया गया  

 

        • सेला सुरंगें: सेला दर्रे पर 687.11 करोड़ रुपये की लागत से बी-सी-टी सड़क पर 9.775 किलोमीटर की लंबाई वाले उपमार्ग के साथ 0.475 किलोमीटर एवं 1.79 किलोमीटर लंबाई की दो सुरंगों का खाका बनाने एवं इनका निर्माण करने की प्रशासनिक अनुमति प्रदान कर दी गई है एवं इस बारे में निविदा संबंधी कार्यवाही जारी है । 

 

        • चारधाम परियोजनाएं: प्रतिष्ठित चारधाम परियोजना प्रारंभ कर दी गई है । इपीसी (इंजीनियरिंग, अधिग्रहण एवं निर्माण) रीति के अंतर्गत 18 पैकेजेज़ के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की तैयारी का कार्य जारी है । जिनमें से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 8 पैकेजेज़ के लिये अनुबंध प्रदान कर दिये हैं एवं शेष का कार्य प्रगति पर है ।

 

        • भारत-चीन सीमा पर सड़कों की प्रगति (आईसीबीआर): 3,418 किलोमीटर लंबाई के 61 आईसीबीआर का कार्य सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंपा गया है, जिनमें से 28 सड़कें पूरी हो गई हैं । शेष सड़कों पर कार्य पूरा होने के विभिन्न चरणों में है । यद्यपि भारत चीन सीमा पर कुल 3418 किलोमीटर सड़कों में से 2316.62 किलोमीटर (68 प्रतिशत) लंबाई पर कार्य पूरा हो चुका है एवं संयोजित लंबाई 3144 किलोमीटर (90 प्रतिशत) है । पैकेज रीति से आईसीबीआर कनेक्टिविटी की स्थिति निम्न प्रकार हैः  

 

  1. इतना ही नहीं जनरल रिज़र्व इंजीनियरिंग फोर्स (जीआरइएफ) अभिलेख आवेदन की शुरुआत कर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कार्मिकों से जुड़े आंकड़ों को अपडेट करने की पहल की शुरुआत की है । सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह, अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम), विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) ने मोबाइल एप ‘जीआरइएफ अभिलेख’ की शुरुआत कर उसका क्रियान्वयन किया जो देश के दूरदराज वाले क्षेत्रों में कार्यरत 36,000 जीआरइएफ कार्मिकों को बहुत फायदा पहुंचाएगा । यह मोबाइल एप सभी सेवारत जनरल रिज़र्व इंजीनियरिंग फोर्स (जीआरइएफ) कार्मिकों को कैरियर प्रबंधन संबंधी सूचना उपलब्ध कराएगा । यह एप सभी एंड्रोइड/ विंडो/ आईओएस आधारित मोबाइल फोन के अनुरूप है ।    

 

भूतपूर्व सैनिक कल्याण

 

 

पुनर्वास

 

  1. पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) के माध्यम से जनित रोजगारः विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2014 से 2018 तक (नवम्बर 2018 तक) पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) से जनित रोजगार का विवरण निम्न हैः

 

 

स्थान

तिथि

भागीदारी

रिक्तियां (लगभग)

सिकंदराबाद

20 जनवरी 2018

35

1552

1493

कोच्चि

08 मार्च 2018

32

1400

765

चंडीगढ़

26 जून 2018

30

1307

525

मुंबई

24 अक्टूबर 2018

35

1095

1874

चेन्नई

14 नवम्बर 2018

49

1056

6025

नागपुर

29 नवम्बर 2018

36

567

3280

पुणे

06 दिसंबर 2018

31

9001

709

बैंगलुरू

26-28 दिसंबर 18

आयोजित किया जाना है

 

 

  1. डीजीआर के पुनर्वास प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की उपलब्धियां

 

अधिकारियों एवं जूनियर कमीशंड अधिकारियों/ अन्य पदों  को पिछले पांच वर्ष में प्रदान पुनर्वास प्रशिक्षण का विवरण निम्न हैः-

 

क्रम संख्या

श्रेणी

2018-19

(क)

अधिकारी

360

(ख)

जूनियर कमीशंड अधिकारी/ अन्य रैंक

3,434

 

कुल

3,794

 

* मुख्यालय द्वारा रेजिमेंटल सेंटर में पाठ्यक्रम आयोजित कराए जा रहे हैं ।

 

  1. भूतपूर्व सैनिक (इएसएम) स्वास्थ्य रक्षा

 

  • दिनांक 4 जनवरी 2018 की पत्र संख्या 22B(l5)/2017/WE/D(Res-I) के माध्यम से भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) समेत 85 चिकित्सा सुविधाओं को सूची में सम्मिलित करने के आदेश जारी किये गए ।
  • दिनांक 26 मार्च 2018 की पत्र संख्या 22D(29)/2017/WE/D(Res) के माध्यम से पॉलिक्लीनिक शिमला से रामपुर स्थानांतरित करने पर रक्षा राज्यमंत्री का अनुमोदन मिलने का आदेश जारी किया गया  ।   
  • दिनांक 7 मई 2018 की पत्र संख्या 22D(29)/2017/WE/D(Res-I) के माध्यम से पीसीज़ को अलोंग एवं खोन्सा से टेंगा एवं तवांग स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये गए ।
  • दिनांक 25 जून 2018 की पत्र संख्या 22D(02)/2016/WE/D(Res-I) के माध्यम से भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) के लाभार्थियों को दवाओं की आपूर्ति करने से संबंधित आदेश में संशोधन कर छोटे कस्बों एवं नगरों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं दूरदराज में स्थित क्षेत्रों में अधिकृत स्थानीय दवा विक्रेताओं का मनोनयन आसान कर दिया गया ।
  • दिनांक 2 अगस्त 2018 की पत्र संख्या 18(54)/2018/WE/D(Res-I) के माध्यम से सरकार ने नाम निर्दिष्ट करने संबंधी प्रणाली को परिवर्तित कर भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) के सूचीबद्ध केंद्र के नाम को छोड़ कर इसीएचएस लाभार्थियों को अपनी रूचि के किसी भी सूचीबद्ध इसीएचएस केंद्र में जाने का अधिकार प्रदान कर दिया गया ।
  • दिनांक 7 अगस्त 2018 की पत्र संख्या 22D(l8)/2017/WE/D(Res-I) के माध्यम से भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) लाभार्थियों के चिकित्सकीय उपचार के लिये यात्रा भत्ता नियमों में ढील देकर निजी कारों एवं टैक्सियों से की जाने वाली यात्राओं को भी सम्मिलित किया गया । 
  • दिनांक 8 अगस्त 2018 की पत्र संख्या 22B(06)/2017/WE/D(Res-I) के माध्यम से भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) लाभार्थियों को केंद्र/ प्रदेश/ स्थानीय सरकार द्वारा वित्तपोषित एवं चिकित्सा की वैकल्पिक पद्धति आयुष की सुविधा वाले सरकारी आयुष अस्पतालों/ महाविद्यालयों/ आयुष राष्ट्रीय संस्थानों/ सरकारी दवाखानों/ ज़िला चिकित्सालयों/ उप ज़िला चिकित्सालयों/ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों/ नगरपालिका अस्पतालों में आयुष पद्धति के अंतर्गत चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति प्रदान कर दी गई है ।
  • दिनांक 18 सितम्बर 2018 की पत्र संख्या 18(77)/2017/WE/D(Res-I) के माध्यम से स्थायी विकलांगता की परिभाषा के अंतर्गत भूतपूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) लाभार्थियों के 25 वर्ष की आयु से अधिक के निर्भर अविवाहित पुत्रों के संदर्भ में दिनांक 7 मई 2018 को जारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आदेश संख्या OM No.4-24/96-C&P/CGHS(P)/EHS के प्रावधानों को इसीएचएस लाभार्थियों पर लागू करने हेतु समर्थ प्राधिकारी की अनुमति प्रदान कर दी गई ।
  • दिनांक 28 सितम्बर, 2018 की पत्र संख्या 18(107)/WE/D(Res-I) के माध्यम से मध्यप्रदेश के इंदौर में एक नये टाइप-डी भूतपूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (इसीएचएस) पॉलिक्लीनिक की स्थापना के लिये सरकार की स्वीकृति प्रदान कर दी गई ।
  • रक्षा राज्यमंत्री ने दिनांक 16 अक्टूबर, 2018 कद टेंगा और तवांग में पॉलिक्लीनिकों का उद्घाटन किया । इन पॉलिक्लीनिकों के कार्यरत होने से रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत सभी पॉलिक्लीनिकों में काम शुरू हो गया है । 

 

 

कल्याणकारी गतिविधियां

 

  1. वित्तीय सहायता

 

रक्षा मंत्री विवेकाधीन कोष (आरएमइडीएफ) की कल्याण योजना के अंतर्गत 2018-19 में 46,16,84,000/- (छियालीस करोड़ सोलह लाख चौरासी हज़ार) रुपये की धनराशि 14,205 लाभार्थियों में वितरित की गई । इसका परिणाम भूतपूर्व सैनिकों (इएसएम) के बीच अधिक उपयोगकर्ता संतुष्टि एवं काफी कम शिकायतों के रूप में हुआ ।    

 

  • प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएस) के अंतर्गत 2014-15 से 2017-18 के दौरान 57,545 लाभार्थियों को 146.99 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई । प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएस) के अंतर्गत 11,572 लाभार्थियों को 29.79 करोड़ रुपये (मार्च-दिसंबर 2018) बांटे गए ।
  • रक्षा सेवा एस्टिमेट्स से प्रदेशों/ केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र की ओर से प्रदान कुल भाग लगभग 25.67 करोड़ रुपये (मार्च-दिसंबर 2018) ।   

 

  1. पेंशन

 

  1. उदारीकृत पारिवारिक पेंशन में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को सम्मिलित किया जानाः

 

सरकार के दिनांक 7.3.2018 की आदेश संख्या 2(3)/2012/D(Pen/Pol).Vol. II के माध्यम से मंत्रालय की दिनांक 3.2.2011 की पत्र संख्या 2(1)/2011/D(Pen/Policy) के अनुच्छेद (iii) के पैराग्राफ 1 की श्रेणी घ के अंतर्गत निम्न संशोधन किये गए हैं:

 

 

 “सैन्य क्षेत्र में शत्रु की सेना के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान एवं सशस्त्र संघर्ष के दौरान सैन्य कर्तव्य/ गतिविधि निभाते समय प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, हिमस्खलन, भूस्खलन, चक्रवात, अग्नि एवं बिजली गिरने या नदी में डूबने के कारण दुर्घटनावश हुई मृत्यु/ चोट में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अथवा नियंत्रण रेखा पर अथवा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती भी सम्मिलित होगी ।

 

  1. तदर्थ अनुग्रह भत्ते में वृद्धिः

 

दिनांक 9 अप्रैल 2018 की सरकारी आदेश संख्या 1(5)/2017/D(Pen/Policy) में सहानुभूति के आधार पर निम्न श्रेणी के पेंशनधारियों/ कुटुम्ब पेंशनधारियों को दिनांक 1 जनवरी 2016 से तदर्थ अनुग्रह भत्ते में 3,500/- रुपये प्रतिमाह से 9,000/- रुपये प्रतिमाह की वृद्धि को स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया है ।

 

      • सशस्त्र बलों के पाकिस्तान से देशांतरित पेंशनधारी/ कुटुम्ब पेंशनधारी ।
      • बर्मा की सेना के पेंशनधारी/ परिवार पेंशनधारी जो भारतीय हैं एवं भारत में पेंशन उठा रहे हैं ।
      • नेपाली मूल के बर्मा की सेना के पेंशनधारी जो नेपाल में स्थित भारतीय पेंशन कार्यालयों से एवं भारतीय दूतावास पेंशन कार्यालयों से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं ।

 

  1. गैर सेवा कर भत्ते (एनपीए) में संशोधन

 

24 मई 2018 की सरकारी आदेश संख्या 1(7)/2014-D(Pen/Policy) के अतंर्गत यह निर्णय लिया गया है कि सशस्त्र बलों के वह चिकित्सा अधिकारी जो 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2017 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं या इस कालावधि में जिनकी मृत्यु हुई है तथा जो सेवानिवृत्ति/ मृत्यु होने वाली तिथि पर पुरानी दर से गैर सेवा कर भत्ते (एनपीए) प्राप्त कर रहे थे, उनके संदर्भ में सभी प्रकार की पेंशन/ कुटुम्ब पेंशन का दिनांक 1.7.2017 से संशोधन किया जाएगा एवं सेवानिवृत्ति की तिथि पर मूल वेतन में 20 प्रतिशत की दर से गैर सेवा कर भत्ता (एनपीए) जोड़ा जाएगा । 

 

  1. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में आमेलित किये गए व्यक्तियों के मामलों में अर्हक सेवा को न जोड़े जाने संबंधी आदेशः

 

दिनांक 20 जून 2018 की सरकारी आदेश संख्या 1(04)/2007/D(Pen/Pol) के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है कि उन रक्षा सेवा पेंशनधारियों, जिन्हें किसी सरकारी क्षेत्र के उपक्रम/ स्वायत्तशासी निकायों में आमेलित करते समय शत-प्रतिशत एकमुश्त राशि के भुगतान की तिथि से 15 वर्ष की कम्युटेशन अवधि पूरी होने पर एकमुश्त राशि का भुगतान किया गया था, की 1 जनवरी 2006 से संशोधित पेंशन का निर्धारण करते समय, पेंशन/ कुटुम्ब पेंशन को भी इस मंत्रालय के दिनांक 30 सितम्बर 2016 के पत्र में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार संशोधित किया जाएगा ।

 

 

राष्ट्रीय कैडेट कोर

 

गतिविधियां एवं उपलब्धियां

 

    1. राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का मुख्य कार्य प्रशिक्षण प्रदान करना है । प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम उद्देश्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रख कर तैयार किया गया है जो कि इच्छित परिणाम प्रदान कर रहा है । हालांकि हाल ही में यह धारणा बलवती हुई है कि युवाओं की परिवर्तित होती आंकाक्षाओं एवं समाज की युवाओं से अपेक्षाओं को शामिल करने के लिये हमारे प्रशिक्षण के मूल दर्शन में समुचित बदलाव होना चाहिये । एनसीसी की गतिविधियां निम्न हैं :   

 

    1. सांस्थानिक प्रशिक्षणः यह सेना विंग, नौसेना विंग तथा वायुसेना विंग के कुल विशेष प्रशिक्षण का मुख्य भाग है एवं स्कूल व कॉलेज में प्रदान किया जाता है । संबंधित सेवाएं कार्यक्रमों/ मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण के लिये सभी सुविधाएं प्रदान करती हैं ।    

 

    1. कैम्प प्रशिक्षणः कैम्प प्रशिक्षण राष्ट्रीय कैडेट कोर के सबसे महत्वपूर्ण भाग की रचना करता है । एनसीसी के हर कैडेट से न्यूनतम दो कैम्प में उपस्थिति दर्ज कराने की अपेक्षा की जाती है । इसलिये नामांकित कैडेट्स में से लगभग  70 प्रतिशत को हर वर्ष यह अवसर मिलता है । वर्ष के दौरान संचालित विभिन्न कैम्प वार्षिक प्रशिक्षण कैम्प (प्रदेश स्तर पर आयोजित), 35 एक भारत श्रेष्ठ भारत (इबीएसबी) कैम्प समेत केंद्रीय स्तर पर आयोजित कैम्प, छह नेतृत्व कैम्प, थल सैनिक कैम्प, वायुसैनिक कैम्प, नौसैनिक कैम्प, आठ रॉक क्लाइबिंग कैम्प एवं रिपब्लिक डे कैम्प (आरडीसी) हैं ।   

 

    1. सेना विंग गतिविधियां: सभी प्रदेशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती कुल 677 सेना इकाईयां हैं । सांस्थानिक प्रशिक्षण के अतिरिक्त, एनसीसी की सेना विंग के कैडेट्स को बतौर संयोजन प्रशिक्षण नियमित सैन्य इकाईयों के साथ रहने और काम करने का अवसर भी प्रदान किया जाता है । प्रतिवर्ष 60 महिला अधिकारियों एवं 560 सीनियर विंग बालिका कैडेट्स समेत कुल 440 अधिकारी तथा 20,000 कैडेट्स सेना की विभिन्न इकाईयों के साथ दो सप्ताह की अवधि के लिये संयोजित किये जाते हैं । प्रतिवर्ष लगभग 1000 सीनियर विंग बालिका कैडेट्स को भी विभिन्न सैनिक अस्पतालों से संयोजित किया जाता है । इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष 120 एसडी कैडेट्स को भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के साथ संयोजन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है और 48 एसडबल्यू कैडेट्स को चेन्नई की अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी के साथ संयोजन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है । इस वर्ष नयी दिल्ली में 17 से 28 सितम्बर, 2018 के बीच आयोजित थाई सैनिक कैम्प के दौरान कुल 1,360 कैडेट्स (680 एडी एवं 680 एसडबल्यू) ने हिस्सा लिया ।

 

 

    1. नौसेना विंग गतिविधियां: समस्त प्रदेशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती 62 नौसेना इकाईयां हैं । वर्ष के दौरान संचालित नौसेना प्रशिक्षण गतिविधियों में समुद्री प्रशिक्षण व संयोजन, नौसेना अकादमी संयोजन, स्कूबा डाइविंग, पाल-नौकायन यात्राएं, इंजीनियरिंग एवं इलेक्ट्रिकल छात्रों के लिये नौसेना तकनीकी महाविद्यालय एवं ऑल इण्डिया याटिंग रेगट्टा में तकनीकी कैम्प (आईएनएस, चिलिका, ओडीशा) शामिल है । कारवाड़ में प्रति वर्ष 600 नौसेना कैडेट्स को प्रशिक्षण देने के लिये एक नौसैनिक कैम्प आयोजित किया जाता है । इस वर्ष पाल-नौकायन के लिये गोवा में एक विशेष प्रशिक्षण कैम्प आयोजित किया गया ।   

 

    1. एयर विंग गतिविधियां: वर्तमान में 50 फ्लाइंग स्क्वैड्रन एवं 11 तकनीकी स्क्वैड्रन समेत कुल 61 स्क्वैड्रन हैं । इन एयर स्क्वैड्रन में हमारे अधिकतर प्रदेश एवं केंद्र शासित प्रदेश कवर होते हैं । मुख्य एयर विंग गतिविधियों में माइक्रोलाइट फ्लाइंग, एयरो मॉडलिंग एवं संयोजन प्रशिक्षण शामिल है । प्रति वर्ष 600 एयर कैडेट्स के प्रशिक्षण के लिये जोधपुर में एक वायु सैनिक कैम्प आयोजित किया जाता है ।

 

    1. समाज सेवा एवं स्वयंसेवी सामुदायिक विकास कार्यक्रमः समाज सेवा एवं स्वयंसेवी सामुदायिक विकास कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के समक्ष पेश आ रही समस्याओं के प्रति युवाओं को संवेदनशील बनाना एवं उनके समाधान के लिये सकारात्मक योगदान देने में उनकी सहायता करना है । विभिन्न समाज सेवा एवं सामुदायिक विकास गतिविधियां, जिनमें कैडेट्स भाग लेते हैं, हैं:

 

  • पर्यावरण सुरक्षा परियोजनाः प्लास्टिक के उपयोग के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिये यह परियोजना वर्ष के दौरान सभी निदेशालयों में संचालित की गई , जिसमें एनसीसी कैडेट्स ने स्थानीय निवासियों के साथ जागरूकता पैदा करने के लिये वृक्षारोपण के तीन अभियानों/ द्वार से द्वार चलाये अभियानों/ चर्चाओं में सक्रियतापूर्वक भागीदारी की । 1.25 लाख से अधिक बालवृक्ष लगाए गए ।  

 

  • नशीली दवा/ तम्बाकू रोधी कार्यक्रमः राष्ट्रीय अभियान के भाग के रूप में लगभग 78,000 एनसीसी कैडेट्स ने 26 जून को विभिन्न नशीली दवा रोधी गतिविधियों में भागीदारी की ।

 

  • मिशन इंद्रधनुषः भारत भर में प्रभावित ज़िलों में बच्चों के प्रतिरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्य में सहायता देने के लिये एनसीसी कैडेट्स ने इस वर्ष न्यूनतम 14,700 बच्चों का प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया है ।

 

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसः इस वर्ष भी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अपनी निर्धारित परम्परा को बनाये रखते हुए लगभग 6000 अलग अलग स्थानों पर कुल 7 लाख से अधिक कैडेट्स ने आयोजन में भाग लिया ।

 

  • स्वच्छ भारत अभियानः विभिन्न प्रदेशों में प्रदेश भर में स्वच्छता आधारित कार्यक्रमों पर हर वर्ष बड़ा ज़ोर दिया जाता है । इस वर्ष 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक साढ़े दस लाख से अधिक कैडेट्स ने विभिन्न स्वच्छता संबंधी अभियानों में स्वैच्छिक योगदान दिया । 

 

  • स्वच्छ भारत यात्राः महात्मा गांधी की जन्मशती का 150 वां साल होने के अवसर पर एफएसएसआई द्वारा संपूर्ण भारत में ‘स्वच्छ भारत यात्रा’- एक साइक्लोथॉन एवं संबंधित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं । इस आयोजन में सभी प्रदेश सरकारों व केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के संबंधित विभागों एवं रक्षा मंत्रालय समेत भारत सरकार के 14 मंत्रालय साझीदार हैं । यात्रा के अंतर्गत 3,000 किलोमीटर के छह साइक्लिंग चरणों में 18,000 किलोमीटर की दूरी तय करने की योजना बनाई गई है । यात्रा के प्रत्येक चरण में हर चरण में 25-25 साइकिल चालकों के साथ प्रतिदिन लगभग 50-60 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी । यह यात्रा 16 अक्टूबर, 2018 को प्रत्येक छह चरण में एकसाथ शुरू होगी एवं 27 जनवरी, 2019 को नयी दिल्ली में समाप्त होगी ।

 

  • आपदा राहतः प्राकृतिक एवं अन्य प्रकार की आपदाओं में एनसीसी ने हमेशा ही मदद के लिये हाथ बढ़ाया है । वर्ष दर वर्ष एनसीसी के कैडेट्स ने बाढ़ों, भूकंपों, चक्रवातों एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से दौरान उत्कृष्ट सेवा प्रदान की है । एनसीसी के कैडेट्स केरल में आई बाढ़ एवं चक्रवात के दौरान राहत अभियानों में असैनिक प्रशासन की सक्रिय सहायता करने में शामिल थे । 

 

    1. युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम (वाईइपी): युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का उद्देश्य मित्र देशों की एनसीसी/ एकसमान सरकारी/ युवा संस्थाओं के कैडेट्स के बीच देश से देश तक आदान-प्रदान कार्यक्रम है, जिससे आयोजक देश की एनसीसी गतिविधियों में भागीदारी से भाग लेने वाले कैडेट्स के बीच जागरूकता से स्तर में वृद्धि होती है एवं एक दूसरे की सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक सच्चाईयों के प्रति प्रशंसा का भाव पैदा होता है । यह आदान-प्रदान कार्यक्रम हमारे कूटनीतिज्ञों एवं नेताओं द्वारा मित्रवत देशों के साथ संबंधों के निर्माण हेतु किये जा रहे प्रयासों को सहारा देकर ‘कूटनीति की तीसरी परत’ के रूप में कार्य करता है ।  वर्तमान में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का 11 देशों (नेपाल, भूटान, सिंगापुर, वियतनाम, रूस, श्रीलंका, बांग्लादेश, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, मॉलदीव एवं किर्गिस्तान) के साथ अदला-बदली के आधार पर युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम है ।

 

 

    1. खेलकूदः

 

      • अखिल भारतीय मावलंकर निशानेबाजी प्रतियोगिता (2018): राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की कोर प्रशिक्षण गतिविधियों में से एक फायरिंग होने के कारण इसकी खेलकूद संबंधी गतिविधियों में निशानेबाजी का विशेष स्थान है । एनसीसी, टीम के चयन के लिये अंतर-एनसीसी प्रदेश निदेशालय प्रतिस्पर्धा का संचालन करती है, जो नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के आयोजनों जैसे अखिल भारतीय जीवी मावलंकर निशानेबाजी प्रतियोगिता (एआईजीवीएमएससी) में भाग लेती है । एनसीसी की निशानेबाज़ी टीमें इस आयोजन में वर्षों से अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं । इस वर्ष एनसीसी के 55 कैडेट्स ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया एवं अखिल भारतीय जीवी मावलंकर निशानेबाजी चैम्पियनशिप प्रतिस्पर्धा 2018 में निशानेबाजी टीम ने निम्न पदक जीते:-

 

  1. स्वर्ण - 03
  2. रजत - 05
  3. कांस्य - 01

  कुल     09

 

 

      • सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंटः प्रतिष्ठित सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2018 में जूनियर बॉयज़, सब जूनियर बॉयज़ एवं जूनियर गर्ल्स श्रेणियों में एनसीसी की टीमों ने भाग लिया, जहां उनका मुकाबला दुनिया की कुछ सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय टीमों से हुआ । इस वर्ष ओडीशा से हमारी अंडर 14, सब जूनियर बॉयज़ टीम फाइनल में पहुंची ।

 

      • जवाहरलाल नेहरू हॉकी कपः जूनियर बॉयज़, जूनियर गर्ल्स एवं सब जूनियर बॉयज़ श्रेणी में एनसीसी की टीमों ने प्रतियोगिता में भाग लिया । इस वर्ष जूनियर बॉयज़ श्रेणी में ओडीशा से हमारी टीम फाइनल में भी पहुंची ।

 

*****

 

 

एबी- XYZ                                               (Release ID: 1557937)

 


(रिलीज़ आईडी: 1559778) आगंतुक पटल : 504