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राष्ट्रपति ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में 3 पद्म विभूषण, 8 पद्म भूषण और 55 पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए

राजस्थान के श्री जानकी लाल भाण्ड और पंडित श्री लक्ष्मण भट्ट तैलंग (मरणोपरांत) को कला के क्षेत्र में और डॉ. माया टंडन को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया

प्रविष्टि तिथि: 22 APR 2024 9:33PM by PIB Jaipur

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-I में 3 पद्म विभूषण, 8 पद्म भूषण और 55 पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर राजस्थान के श्री जानकी लाल भाण्ड और पंडित श्री लक्ष्मण भट्ट तैलंग (मरणोपरांत) को कला के क्षेत्र में और डॉ. माया टंडन को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह सहित भारत सरकार के अनेक मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अलंकरण समारोह के बाद केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों ने पद्म पुरस्कार विजेताओं के साथ गृह मंत्री द्वारा उनके आवास पर दिए गए रात्रि भोज के दौरान संवाद किया।

पद्म पुरस्कार विजेता कल सुबह (23 अप्रैल, 2024) राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री संग्रहालय का भी भ्रमण करेंगे।

राजस्थान से पुरस्कार विजेताओं के जीवन और कार्यों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है-

श्री जानकी लाल भाण्ड कला के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित

श्री जानकी लाल भाण्ड पररूपधारण (बहुरूपिया) कला के कुशल कलाकार हैं और उन्होंने रियासतों के समय से मनोरंजन की इस विधा को बरकरार रखा है।

01 जनवरी, 1943 को राजस्थान के वर्तमान चित्तौड़ जिले में जन्मे, श्री भाण्ड ने अपनी प्राथमिक शिक्षा चित्तौड़गढ़ में पूरी की। अपने पिता से विरासत में मिली इस कला को अपनाकर उन्होंने परिवार को आर्थिक सहयोग देने के लिए भीलवाड़ा में काम करना शुरू कर दिया। वह अपनी पत्नी के पूरे सहयोग से घंटों कार्य करते हुए अपनी इस कला का प्रदर्शन करते रहे।

श्री भाण्ड विलुप्त होने के कगार पर खड़ी बहरूपिया कला विधाओं जैसे गाडोलिया लोहार (महिला भेष), फकीर, काबुली पठान, कालबेलिया, नारद, सेठ-सेठानी, लैला-मजनू, पागल, हनुमान, बंदर आदि को संरक्षित करने के लिए समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन संपूर्ण राजस्थान, भारत और विदेश में किया। विदेशों में उन्हें मंकी मैन के नाम से जाना जाता है। दिल्ली में वर्ष 1986 में आयोजित अपना उत्सव में उन्होंने अपनी कला से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था। उन्होंने राजस्थान के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया और सराहना एवं पुरस्कार प्राप्त किये। इसके साथ –साथ इस पररूपधारण कला का प्रदर्शन ग्लासगो मेला 1990, यूरोपियन टूर 1991, बर्लिन न्यू कैसल, लंदन और बर्मिंघम में किया गया था।

श्री भाण्ड को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। दिल्ली में वर्ष 1986 में आयोजित अपना उत्सव कार्यक्रम में उन्हें पश्चिमी सांस्कृतिक केंद्र द्वारा सम्मानित किया गया, साथ ही वर्ष 1986 में रजत जयंती समारोह में गोवा, दमन और दीव सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। वर्ष 1990 में राष्ट्रीय पररूपधारण सम्मेलन में उन्हें पश्चिमी क्षेत्र संस्कृति केंद्र द्वारा सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस 1990 के अवसर पर उदयपुर, जिला कलेक्टर भीलवाड़ा द्वारा जिला स्तरीय सम्मान; सुजान संस्कृति मंच, अजमेर द्वारा सुजान श्री 97 पुरस्कार; वर्ष 1997 में लोक उत्सव गुजरात में पररूपधारण कला प्रदर्शन के लिए पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा पुरस्‍कार; सृजन उत्सवशिल्पग्राम में पररूपधारण कला प्रदर्शन के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा पुरस्‍कार; वर्ष 2005-06 में राजस्थान पत्रिका द्वारा कर्मधारी सम्मान; वर्ष 2008 में शिल्पग्राम उत्सव में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा पुरस्‍कार; गणतंत्र दिवस 2012 पर जिला स्तरीय सम्मान; गणतंत्र दिवस 2023 पर जिला कलक्टर एवं राज्य मंत्री द्वारा जिला स्तरीय सम्मान; जोधपुर में राज्य सरकार द्वारा दिनांक 25 मार्च 2023 को कला-पुरोधा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

पंडित श्री लक्ष्मण भट्ट तैलंग (मरणोपरांत) कला के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित

 

पंडित श्री लक्ष्मण भट्ट तैलंग प्राचीन विशुद्ध भारतीय शास्त्रीय संगीत शैली 'ध्रुवपद' के एक सुप्रसिद्ध और वरिष्ठ गायक थे।

24 दिसंबर, 1928 को जन्मे, पंडित भट्ट ने 1950-51 में ग्वालियर के प्रतिष्ठित संस्थान 'माधव संगीत महाविद्यालय' से सिंधिया राज परिवार की ओर से स्वर्ण पदक और विशेष वज़ीफ़े के साथ मास्टर डिप्लोमा प्राप्‍त किया। उन्हें यह कला संगीत के प्रति समर्पित अपने प्रतिष्ठित संगीत परिवार से विरासत में मिली और उन्होंने ग्वालियर और डागर घराने के कुछ प्रसिद्ध उस्तादों से सीखकर इसे और श्रेष्‍ठ बनाया। उनके दादा स्वर्गीय पं. गोपाल चन्द्र जी और पिता स्वर्गीय पं. गोकुल चंद्र जी भट्ट मंदिर हवेली संगीत के गायक थे। बाद में उन्‍होंने प्रसिद्ध कलाकार पंडित राजा भैया पूछ वाले और ग्वालियर घराने और ध्रुवपद के अन्य कलाकारों  के अधीन ख़याल और ध्रुवपद तथा सरकारी छात्रवृत्ति के माध्यम से दिल्ली के 'श्रीराम भारतीय कला केंद्र' संस्थान में प्रसिद्ध गुरु स्वर्गीय उस्ताद नासिर मोइनुद्दीन और स्वर्गीय उस्ताद नासिर अमीनुद्दीन खान डागर के मार्गदर्शन में ध्रुवपद का गहन प्रशिक्षण प्राप्‍त किया। इस संस्‍थान में, उन्होंने महान गुरु स्वर्गीय उस्ताद हाफ़िज़ अली खान और स्वर्गीय पंडित पुरुषोत्तम दास से पखावज, रुद्र वीणा और अन्य वाद्ययंत्र भी सीखे।

पंडित भट्ट ने अपने संगीत जीवन के लिए कठोर परिश्रम किया और संगीत के लगभग हर क्षेत्र में गायक, संगीतकार, लेखक, शिक्षक, आयोजक, वादक, निर्देशक, नवप्रवर्तक और निर्माता के रूप में महारत हासिल की। उन्होंने स्वयं द्वारा स्थापित दो संस्थानों 'रसमंजरी संगीतोपासना केंद्र' और 'अंतरराष्ट्रीय ध्रुवपद धाम ट्रस्ट' के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में काम किया। इन दोनों संस्‍थानों ने भारत और विदेशों में 100 से अधिक ध्रुवपद प्रशिक्षण कार्यशालाएं और 29 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्रुवपद उत्सवों का आयोजन किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन विशेषकर राजस्थान में ध्रुवपद के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। पंडित भट्ट ने अपने जीवन के 80 वर्ष अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय उत्सवों में प्रस्‍तुतियों, सेमिनारों, व्याख्यान-प्रदर्शनों और शिक्षण कार्यशालाओं आदि सभी क्षेत्रों में योगदान दिया। पंडित भट्ट की कई नवीन रचनाओं ने अगली पीढ़ी को प्रेरित किया। उन्होंने पुरानी ध्रुवपद परंपरा के साथ-साथ संपूर्ण शास्त्रीय संगीत को नए विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावशाली और स्वीकार्य बनाने के लिए शिक्षण विधियों और अन्य व्यावहारिक पहलुओं में कुछ नए आयामों का सूत्रपात किया और उन पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने औडव कल्याणम् केदार कल्याणम, मेवाड़ा दरबारी, अपनी शैली में जोगेश्वरी और जौन तोड़ी आदि जैसे कुछ नये रागों और ताल अद्धा चौताल की भी संकल्पना प्रस्तुत की। 'पचरंग' और 'सतरंग इंद्रधनुष' नामक उनकी दो रचनाओं में एक ही प्रस्‍तुति के अंतर्गत एक ही समय में एक ही राग में शास्त्रीय, अर्धशास्त्रीय, सुगम और लोक संगीत के पांच या सात गायन रूपों का शृंखलाबद्ध प्रयोग किया गया। संभवतः वह ध्रुवपद में अपनी पीढ़ी के पहले संगीतकार हैं, जिन्होंने स्वलिखित और अन्य लोकप्रिय, अलोकप्रिय और दुर्लभ कवियों की दो सौ से अधिक कविताएं प्रयोग कीं और इन्‍हें राष्ट्रीय स्‍तर पर प्रतिष्ठित प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित अपनी तीन पुस्तकों रसमंजरी शतक, संगीत रसमंजरी और पंचाशिका संगीत विमल मंजरी में शामिल किया। उन्होंने अपनी संगीत रचनाओं में कुछ नए समसामयिक विषयों जैसे 'सारे जहां से अच्छा' आदि को भी शामिल किया।

पंडित भट्ट को आकाशवाणी निदेशालय (प्रसार भारती), दिल्ली द्वारा टॉप ग्रेड से सम्मानित किया गया। उन्हें आजीवन योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार और उपाधियाँ मिलीं, जैसे राजस्थान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, दो बार तुलसी पुरस्कार, स्वाति तिरुन्नल पुरस्कार, कला गुरु और श्रेष्ठ आचार्य सम्मान, उदयपुर महाराणा द्वारा महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन डागर घराना पुरस्कार, जयपुर महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह पुरस्कार, संगीत वारिधि और संगीत कौस्तुभ उपाधि आदि।

श्री लक्ष्मण भट्ट तैलंग का 10 फरवरी, 2024 को निधन हो गया।

 

डॉ. माया टंडन सामाजिक कार्य के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित

 

डॉ. माया टंडन "सहायता" नामक  ट्रस्‍टकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। पहले इस ट्रस्‍ट का नाम डॉ. एम.एन. टंडन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट था। यहट्रस्‍ट सड़क सुरक्षा पर आपातकालीन चिकित्सा देखभाल (ई.एम.सी.) में आम लोगों/प्रथम रिस्‍पॉन्‍डर को प्रशिक्षण देने में विशेषज्ञ है।

20 फरवरी 1937 को अजमेर, राजस्थान में जन्मी, डॉ. टंडन ने 1961 में राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.बी.बी.एस.,1968 में एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर से डीए एनेस्थीसिया और वर्ष 1972 में एमएस एनेस्थीसिया की डिग्री प्राप्त की। उन्हें यूनाइटेड किंगडम के रॉयल लिवरपूल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया में कॉमनवेल्थ मेडिकल फेलोशिप प्राप्त हुई। वहां रहते हुए, उन्होंने गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाने के लिए यूके के एनएचएस (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा) द्वारा प्रथम रिस्‍पॉन्‍डर के रूप में जनता के प्रशिक्षण को बारीकी से देखने के अवसर का लाभ उठाया। इस अनुभव ने भविष्य में इस क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्य की नींव रखी।

डॉ. टंडन ने जे. के. लोन हॉस्पिटल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर, राजस्थान के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की प्रमुख,वरिष्ठ प्रोफेसर, और अधीक्षक के रूप में काम किया।  पिछले तीन दशकों से, वह सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु दर को कम करने की दिशा में निरंतर काम कर रही हैं। 1995 में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद,डॉ. टंडन ने उसी वर्ष डॉ. एम.एन. टंडन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट (सहायता)की स्थापना की और एक मिशन के रूप में, भारत में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने का काम करना शुरू किया। उन्होंने एएचए और यूरोपियन रिससिटेशन कौंसिल (ईआरसी) के दिशानिर्देशों से प्राप्त जानकारी के आधार पर एक बेसिक लाइफ सेविंग (बीएलएस) पाठ्यक्रम भी तैयार किया। वह इन दिशानिर्देशों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगातार अद्यतन करती रही हैं। उन्होंने दुर्घटना के बाद देखभाल के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में जीवन सुरक्षा की मान्यता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहायता को जनवरी 2014 में पंजीकृत किया गया था और आज, इसके पास देश में बढ़ती सड़क दुर्घटना मृत्यु दर, रुग्णता और विकलांगता की संख्या कम करने के लिए आम जनता के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करने वाले समर्पित पेशेवरों की एक विशाल टीम है।

डॉ. टंडन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद (2016-2018) की सदस्य रही हैं, और वर्षों पहले इसकी स्थापना के बाद से राजस्थान राज्य सड़क सुरक्षा परिषद और राजस्थान सड़क सुरक्षा नीति में इनकी एक सक्रिय भूमिका है। उन्होंने 2004-2006 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित राजस्थान विश्वविद्यालय महिला संघ की अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। डॉ. माया टंडन 87 वर्ष की आयु में भी सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्‍यु में कमी का अपना सपना साकार करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं।

डॉ. टंडन को 2004 में चौथे राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद पुरस्कार, 2006 में आईआरटीई प्रिंस माइकल अंतरराष्ट्रीय सड़क सुरक्षा पुरस्कार, 2006 में राजस्थान सरकार द्वारा जिला सड़क सुरक्षा पुरस्कार, 2013 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार,2019 में आईआईटी दिल्ली में भारतीय सड़क सुरक्षा अभियान द्वारा ‘’सड़क सुरक्षा के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के लिए प्रभावशाली और उत्कृष्टता पुरस्कार’’से सम्मानित किया गया।


(रिलीज़ आईडी: 2018585) आगंतुक पटल : 89