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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल हिंदी पखवाड़ा – 2025 (16 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025)

प्रविष्टि तिथि: 14 SEP 2025 8:22PM by PIB Bhopal

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हिंदी पखवाड़ा – 2025 का आयोजन दिनांक 16 सितम्बर 2025 से 30 सितम्बर 2025 तक विविध कार्यक्रमों के साथ किया जा रहा है। इस पखवाड़े का उद्देश्य राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति सृजनात्मकता, अभिरुचि और जागरूकता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दिनांक 16 सितम्बर 2025 (मंगलवार) को होगा। उद्घाटन सत्र में माननीय गृहमंत्री जी का संदेश वाचन एवं उद्घाटन किया जाएगा।

पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रम—

17 सितम्बर 2025 (बुधवार) – हिंदी यूनिकोड टंकण प्रतियोगिता (तकनीकी एवं गैर तकनीकी वर्ग)
18 सितम्बर 2025 (गुरुवार) – अनुवाद प्रतियोगिता
19 सितम्बर 2025 (शुक्रवार) – समीक्षात्मक लेखन प्रतियोगिता (विषय: हिंदी फिल्म जगत की कालजयी फिल्म “शोले” के 50 वर्ष पूर्ण होने पर)
23 सितम्बर 2025 (मंगलवार) – तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता (कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली छात्र-छात्राओं हेतु)
24 सितम्बर 2025 (बुधवार) – संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने वाले नायकों का परिचय एवं उनकी भूमिका (विडियो प्रस्तुति आधारित प्रतियोगिता)
25 सितम्बर 2025 (गुरुवार) – सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
30 सितम्बर 2025 (मंगलवार) – समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह


इस अवसर पर संग्रहालय के निदेशक डॉ. अमिताभ पांडे ने कहा कि “हिंदी पखवाड़ा न केवल भाषा के संवर्द्धन का अवसर है, बल्कि यह नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और भाषाई गौरव से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।”

हिंदी पखवाड़ा एक ऐसा पर्व है, जिसमें विविध प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों की रचनात्मकता, लेखन-कौशल, वाक्पटुता और ज्ञान-विस्तार को प्रोत्साहित किया जाता है। इस वर्ष विशेष आकर्षण फिल्म “शोले” पर समीक्षात्मक लेखन प्रतियोगिता तथा स्कूली छात्रों के लिए तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता होगी, जो युवाओं को न केवल हिंदी लेखन और वक्तृत्व में दक्ष बनाएगी बल्कि उन्हें हिंदी के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित कराएगी।

मानव संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी ने सभी को विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि, ऐसे आयोजन कर्मचारियों और विद्यार्थियों दोनों को यह प्रेरणा देते हैं कि वे अपने दैनिक कार्यों और संवाद में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें।
मानव संग्रहालय के राज भाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया ने बताया कि,यह पखवाड़ा हिंदी की समकालीन प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डालता है, क्योंकि तकनीक और डिजिटलीकरण के इस दौर में हिंदी यूनिकोड टंकण जैसी प्रतियोगिताएँ भाषा को नए युग की आवश्यकताओं से जोड़ती है ।

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