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केवीआईसी का "नवयुग खादी फैशन शो" नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किया गया, इसमें राष्ट्र, फैशन और परिवर्तन के लिए खादी का प्रदर्शन किया गया


“खादी की असली ताकत इसके कारीगरों में है”: मनोज कुमार, अध्यक्ष, केवीआईसी

प्रविष्टि तिथि: 30 NOV 2025 12:06PM by PIB Delhi

नवयुग खादी फैशन शो का आयोजन शनिवार, 29 नवंबर को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, प्रगति मैदान में किया गया। इस शो में "नए भारत की नई खादी" को आधुनिक और नए तरीके से प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में खादी के आधुनिक और नए रूप को आधुनिक तरीके से प्रदर्शित किया गया। शो से जुड़ी प्रदर्शनी का उद्घाटन एक दिन पहले, 28 नवंबर को किया गया। इसी दिन खादी ज्ञान पोर्टल के दूसरे खंड का भी लोकार्पण किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार थे। उन्होंने रैंप पर प्रदर्शित परिधानों की सराहना की और खादी के कारीगरों के समर्पण एवं शिल्प कौशल की प्रशंसा की।

अपने संबोधन में, अध्यक्ष ने खादी को नया जीवन देने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खादी को महज एक कपड़े से ऊपर उठाकर देशभक्ति के प्रतीक के साथ-साथ आधुनिक भारतीय जीवनशैली का प्रतीक बना दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शक मंत्र - "खादी राष्ट्र के लिए, खादी फैशन के लिए और खादी परिवर्तन के लिए" को दोहराया। इसने खादी को एक नई पहचान दी है।

उन्होंने कहा, "आज की खादी न केवल पूज्य बापू की विरासत को आगे बढ़ा रही है बल्कि आधुनिक डिज़ाइन और वैश्विक फ़ैशन में भी तेज़ी से अपनी जगह बना रही है। खादी अब केवल गाँवों तक सीमित नहीं रही; शहरों, फ़ैशन बाज़ारों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी इसकी लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है।"

श्री मनोज कुमार ने कहा कि नए ज़माने की खादी डिज़ाइन, तकनीक और परंपरा का एक अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि खादी युवा पीढ़ी की पहली पसंद बन गई है और यह रोज़गार सृजन, पर्यावरणीय अनुकूलता और देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा से जुड़ी हुई है।

यह कार्यक्रम केवीआईसी, खादी उत्कृष्टता केंद्र (सीओईके), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) और भारतीय फैशन डिज़ाइन परिषद (एफडीसीआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। रैंप पर खादी परिधानों और उत्पादों की विविध श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली। विशेष रूप से प्रेरक क्षण तब आया जब देश भर से खादी संस्थानों और कारीगरों के प्रतिनिधियों ने रैंप पर वॉक किया। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार भी कारीगरों के साथ शामिल हुए। इससे यह संदेश गया कि खादी की असली ताकत उसके बुनकरों और निर्माताओं में निहित है - जो "गाँव से ग्लैमर तक" की यात्रा का एक सशक्त अभिव्‍यक्ति है।

इस कार्यक्रम में केवीआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (ए एंड आरई), एमएसएमई मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार और केवीआईसी के वित्तीय सलाहकार, सीओईके के निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

नवयुग खादी, खादी को और अधिक आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पहली बार, एक समर्पित डिज़ाइनर टीम के मार्गदर्शन में, देश भर के खादी संस्थानों द्वारा निर्मित साड़ियों, परिधानों, धागों, सहायक उपकरणों और घरेलू सजावट के उत्पादों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में ओडिशा के इक्‍कत, असम के एरी सिल्क, गुजरात के तंगालिया, कर्नाटक के रेशम, बंगाल के सूती और तेलंगाना व बिहार के पारंपरिक बुनाई सहित विविध क्षेत्रीय शिल्प कला को एक साथ प्रदर्शित किया गया।  यह प्रधानमंत्री के "नए भारत की नई खादी" के दृष्टिकोण को साकार करती है। इस प्रकार, खादी को एक आधुनिक, समावेशी और विश्वस्तरीय वस्त्र विरासत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

28 नवंबर को उद्घाटन की गई इस प्रदर्शनी में खादी ज्ञान पोर्टल (खंड II) का भी शुभारंभ किया गया। केवीआईसी अध्यक्ष ने खादी संस्थाओं से बातचीत कर उनकी ज़रूरतों को समझा और उन्हें केवीआईसी की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।

यह कार्यक्रम 3 दिसंबर 2025 तक सुबह 11:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा, जिसमें प्रदर्शनियाँ, बिक्री काउंटर और हाथ से कताई, प्राकृतिक रंगाई और साड़ी ड्रेपिंग पर आकर्षक कार्यशालाएँ शामिल होंगी। आगंतुकों को इन चर्चा सत्रों के माध्यम से खादी का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

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पीके/केसी/पीपी/एसके


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