प्रधानमंत्री कार्यालय
काशी–तमिल संगमम् 4.0 : मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि और पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल के. कैलासनाथन जी उपस्थित रहेंगे
केटीएस 4.0 थीम: “तमिल सीखें – तमिल करकलम्” - भारत की एकता का सांस्कृतिक सेतु
300 छात्र तमिल सीखने वाराणसी से जाएंगे तमिलनाडु
प्रविष्टि तिथि:
30 NOV 2025 7:18PM by PIB Delhi
आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित एल डी अतिथि गृह में गोविंद जायसवाल, संयुक्त सचिव (तकनीकी शिक्षा एवं साक्षरता), उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा काशी–तमिल संगमम् 4.0 के बारे में बड़ी जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष काशी–तमिल संगमम् के आयोजन के लिए व्यापक तैयारी पूरी हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों और आयोजन टीम के सदस्यों की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें समस्त तैयारियों, लॉजिस्टिक, कार्यक्रम संरचना और सुरक्षा-व्यवस्था पर विस्तार से चर्चित हुई।

गोविंद जायसवाल ने स्पष्ट किया कि इस बार काशी–तमिल संगमम् 4.0 दो चरणों में आयोजित किया जाएगा — प्रथम चरण 2 से 15 दिसंबर तक वाराणसी (काशी) में तथा द्वितीय चरण 15 से 31 दिसंबर तक तमिलनाडु में। प्रथम चरण में सात ग्रुप तमिलनाडु से काशी आएंगे, जबकि दूसरे चरण में लगभग 300 छात्र बनारस के तमिलनाडु भेजे जाएंगे। बतौर हिस्सा, 50 शिक्षक तमिलनाडु से काशी आएंगे जो यहाँ विद्यालयों में तमिल भाषा एवं संस्कृति का परिचय देंगे और छात्रों को तमिल सिखाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि प्रथम चरण के मुख्य अतिथि के रूप में धर्मेन्द्र प्रधान, भारत सरकार के शिक्षा मंत्री, प्रमुख रूप से उपस्थित होंगे। राज्य-स्तरीय सम्मानित अतिथि के रूप में योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, विशेष आमंत्रित अतिथि होंगे। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि तथा केन्द्रशासित प्रदेश पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल के. कैलासनाथन को भी माननीय अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

गोविंद जायसवाल ने बताया कि काशी–तमिल संगमम् 4.0 का मुख्य उद्देश्य भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करना है। इस पहल का विषय है “तमिल सीखें – तमिल करकलम”, जिसके माध्यम से तमिल भाषा, साहित्य, संगीत, नृत्य, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत को उत्तर भारत तक ले जाना है। तमिलनाडु और काशी की प्राचीन सभ्यता, लोक कलाएँ, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं, साझा चिंतन और संवाद की संस्कृति — ये सब मिलकर भारत की समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं।
काशी–तमिल संगमम् 4.0 सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है; यह एक राष्ट्रीय आंदोलन है जो एक भारत – श्रेष्ठ भारत की मूल भावना को जीवंत करता है। इस मंच के माध्यम से तमिलनाडु और उत्तर भारत के युवा, विद्यार्थी, शिक्षक एवं आम नागरिक एक-दूसरे से जुड़ेंगे, एक दूसरे की भाषा और संस्कृति को समझेंगे, सीखेंगे और सम्मान देंगे। यह विविधता में एकता का प्रतीक बनेगा जहाँ तमिल संस्कृति और भाषा से परिचय मिलेगा, और साथ ही भारतीय राष्ट्रीय एकता व सहअस्तित्व की भावना को और मज़बूत किया जाएगा।

गोविंद जायसवाल ने आशा व्यक्त की कि इस संगमम् से आने वाली पीढ़ियाँ न केवल तमिल भाषा जानेंगी, बल्कि उसकी गहराई, उसकी सांस्कृतिक समृद्धि और भारत के साझा सांस्कृतिक-ऐतिहासिक विरासत का अनुभव करेंगी। उन्होंने सभी नागरिकों, especially युवाओं और छात्रों से आह्वान किया है कि वे “तमिल सीखें – तमिल करकलम” अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इस सांस्कृतिक यात्रा को सार्थक बनाएं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर उन्होंने कहा कि काशी–तमिल संगमम् 4.0 एक उदाहरण है कि कैसे भारत की विविध सांस्कृतिक परतें, भाषाएं और सभ्यताएँ एक दूसरे के साथ जुड़कर एक मजबूत, समृद्ध और सौहार्दपूर्ण राष्ट्र की नींव बन सकती हैं।
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PK/BBT
(रिलीज़ आईडी: 2196608)
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