जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

आंध्र प्रदेश में जनजातीय कल्याण योजनाएँ

प्रविष्टि तिथि: 04 DEC 2025 5:41PM by PIB Delhi

सरकार रंगारेड्डी और विकाराबाद जिलों के जनजातीय बस्तियों सहित देश में अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए एक रणनीति के रूप में अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) को क्रियान्वित कर रही है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अलावा, 41 मंत्रालयों/विभागों को अनुसूचित जनजातियों (अजजा) और गैर-अजजा आबादी के बीच विकास संबंधी अंतर को पाटने और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, आवास, विद्युतीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न जनजातीय विकास परियोजनाओं के लिए डीएपीएसटी के तहत जनजातीय विकास के लिए हर साल अपने कुल योजना बजट का कुछ प्रतिशत आवंटित करने का आदेश दिया गया है। अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बाध्य मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित निधियों के साथ योजनाएं केंद्रीय बजट दस्तावेज के व्यय प्रोफाइल के विवरण 10ख में लिंक https://www.indiabudget.gov.in/budget 2024-25/doc/eb/stat10b.pdf पर दी गई हैं।

 

राज्य सरकारों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे राज्य में अनुसूचित जनजाति की आबादी (जनगणना 2011) के अनुपात में कुल योजना आवंटन के संबंध में टीएसपी निधियां निर्धारित करें। रंगारेड्डी और विकाराबाद जिलों सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनी स्वयं की निधि से टीएसपी के लिए आवंटन और व्यय का विवरण https://statetsp.tribal.gov.in पर उपलब्ध है।

इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय देश में अनुसूचित जनजातियों (अजजा) के कल्याण और विकास के लिए विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों को कार्यान्वित कर रहा है। इन योजनाओं का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

 

मंत्रालय/विभाग और नीति आयोग क्रमशः सीएस और सीएसएस योजनाओं का मूल्यांकन करते हैं। इसके अलावा, नीति आयोग अन्य अधिदेशित मंत्रालयों/विभागों की सीएसएस योजनाओं का मूल्यांकन करता है। ऐसा करते समय, यह उन योजनाओं का भी मूल्यांकन करता है जो डीएपीएसटी के तहत सीएसएस के रूप में शामिल हैं। नीति आयोग ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के संबंध में 2020-21 में समाप्त हुए ईएफसी चक्र के लिए एक मूल्यांकन अध्ययन आयोजित किया है, जिसमें मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, टीआरआई को सहायता, लघु वन उपज के लिए एमएसपी, टीएसएस को एससीए , पीवीटीजी का विकास, जनजातीय महोत्सव, बुनियादी ढांचा, जन शिक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं।

 

1) अनुच्छेद 275 (1) के अधीन योजना:

i) विकाराबाद में लड़कियों के लिए एक मैट्रिकोत्तर कॉलेज छात्रावास 100.00 लाख रूपये की लागत के साथ स्वीकृत किया गया है।

ii) रंगा रेड्डी जिले में एएचएस (जी) माईसिगांडी के लिए (320) छात्रों के साथ कक्षाओं, छात्रावास और भोजन-सह-रसोईघर को 272.00 लाख रूपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है।

 

2) पिछले 5 वर्षों के दौरान अजजा छात्रों को मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति की मंजूरीः

i) रंगारेड्डी जिलाः 40113 अजजा छात्रों के लिए 153.55 करोड़ रूपये

ii) विकाराबाद जिलाः 5749 अजजा छात्रों के लिए 5.66 करोड़ रुपये

 

3) पिछले 5 वर्षों के दौरान कक्षा IX और X में पढ़ने वाले अजजा छात्रों को मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति की मंजूरीः

i) रंगारेड्डी जिलाः 53 अजजा छात्रों के लिए 1.20 लाख रूपये

(ii) विकाराबाद जिलाः 785 अजजा छात्रों के लिए 17.66 लाख रूपये

 

जनजातीय कार्य मंत्रालय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) की केंद्रीय क्षेत्र योजना को कार्यान्वित कर रहा है। केंद्रीय बजट 2018-19 में, भारत सरकार ने घोषणा की थी कि जनजातीय बच्चों को उनके अपने वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए, 2011 की जनगणना के अनुसार 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति की आबादी और कम से कम 20000 जनजातीय व्यक्तियों वाले प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) स्थापित किए जाएंगे। ईएमआरएस को खेल और कौशल विकास में प्रशिक्षण प्रदान करने के अलावा स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष सुविधाओं के साथ नवोदय विद्यालयों के बराबर होना चाहिए। राष्ट्रीय आदिवासी शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) एक स्वायत्त संगठन है, जिसकी स्थापना राज्य ईएमआरएस समितियों के साथ समन्वय में ईएमआरएस की योजना के प्रबंधन और कार्यान्वयन के लिए की गई है। रंगा रेड्डी और विकाराबाद जिलों में कोई भी ईएमआरएस स्वीकृत नहीं किया गया है, क्योंकि इसका कोई भी ब्लॉक निर्धारित दोहरे मानदंडों को पूरा नहीं करता है। ईएमआरएस की आवश्यकता की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।

अनुलग्नक

“आंध्र प्रदेश में जनजातीय कल्याण योजनाएँ” के संबंध में श्री कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी द्वारा दिनांक 04.12.2025 को पूछे गए लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 705 के भाग (क) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक।

देश में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही प्रमुख योजनाओं/कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण:

 

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 उपाय शामिल हैं और इसका उद्देश्य 63,843 गाँवों में बुनियादी ढाँचे की अंतरों को दूर करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुँच में सुधार करना और 5 वर्षों में 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक जनजातियों को आजीविका के अवसर प्रदान करना है। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय 79,156 करोड़ (केंद्रीय अंश: ₹56,333 करोड़ और राज्य अंश: ₹22,823 करोड़) रुपये है।

 

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन): सरकार ने 15 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) शुरू किया है, जिसे जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है।लगभग 24,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाले इस मिशन का उद्देश्य 3 वर्षों में समयबद्ध तरीके से पीवीटीजी परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुँच, सड़क और दूरसंचार सम्पर्क, गैर-विद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण करना है।

 

प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): जनजातीय कार्य मंत्रालय प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) को क्रियान्वित कर रहा है, जिसे जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए दो मौजूदा योजनाओं के विलय के माध्यम से डिजाइन किया गया है, अर्थात, “न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वन उपज (एमएफपी) के विपणन के लिए तंत्र और एमएफपी के लिए मूल्य श्रृंखला का विकास” और “जनजातीय उत्पादों/उपज के विकास और विपणन के लिए संस्थागत सहायता”।

 

इस योजना में चयनित लघु वनोपज (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण और घोषणा करने की परिकल्पना की गई है। किसी विशेष लघु वनोपज (एमएफपी) वस्तु का प्रचलित बाजार मूल्य निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने की स्थिति में, पूर्व-निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और विपणन कार्य, निर्दिष्ट राज्य एजेंसियों द्वारा किया जाएगा। साथ ही, सतत संग्रहण, मूल्य संवर्धन, अवसंरचना विकास, लघु वनोपज (एमएफपी) के ज्ञान आधार का विस्तार और बाजार सूचना विकास जैसे अन्य मध्यम और दीर्घकालिक मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

 

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): जनजातीय बच्चों को उनके अपने परिवेश में नवोदय विद्यालय के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए वर्ष 2018-19 में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) शुरू किए गए थे। नई योजना के अंतर्गत, सरकार ने 440 ईएमआरएस, जहाँ 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति की आबादी और कम से कम 20,000 जनजातीय लोग (2011 की जनगणना के अनुसार) हैं वहां प्रत्येक ब्लॉक में एक ईएमआरएस स्थापित करने का निर्णय लिया है। 288 ईएमआरएस स्कूलों को शुरू में संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान के तहत वित्त पोषित किया गया था, जिन्हें नए मॉडल के अनुसार उन्नत किया जा रहा है। तदनुसार, मंत्रालय ने देश भर में लगभग 3.5 लाख अनुसूचित जनजाति के छात्रों को लाभान्वित करने के लिए कुल 728 ईएमआरएस स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

 

संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान के अंतर्गत, अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को बेहतर बनाने और जनजातीय लोगों के कल्याण हेतु अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले राज्यों को अनुदान जारी किए जाते हैं। यह एक विशेष क्षेत्र कार्यक्रम है और राज्यों को 100% अनुदान प्रदान किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि के क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की गतिविधियों में अंतर को पाटने के लिए अनुसूचित जनजाति जनसंख्या की आवश्यकताओं के आधार पर राज्य सरकारों को धनराशि जारी की जाती है।

 

अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान सहायता: अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान सहायता योजना के अंतर्गत, मंत्रालय शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है, जिसमें आवासीय विद्यालय, गैर-आवासीय विद्यालय, छात्रावास, सचल औषधालय, दस या अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, आजीविका आदि शामिल हैं।

 

अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति: यह योजना कक्षा IX-X में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लागू है। माता-पिता की सभी स्रोतों से आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। दिवा छात्रों को 225 रुपये प्रति माह और छात्रावास में रहने वालों को 525 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति वर्ष में 10 महीने की अवधि के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के माध्यम से वितरित की जाती है। पूर्वोत्तर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों जहाँ यह अनुपात 90:10 है को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। विधायिका रहित संघ राज्यक्षेत्रों के लिए साझाकरण पैटर्न 100% केंद्रीय हिस्सा है।

 

अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति: इस योजना का उद्देश्य मैट्रिकोत्तर या उच्चतर माध्यमिक स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। माता-पिता की सभी स्रोतों से आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले अनिवार्य शुल्क की प्रतिपूर्ति संबंधित राज्य शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित सीमा के अधीन की जाती है और अध्ययन के पाठ्यक्रम के आधार पर 230 रुपये से 1200 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति राशि का भुगतान किया जाता है। यह योजना राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों द्वारा कार्यान्वित की जाती है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जहां यह 90:10 है को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए साझाकरण पैटर्न 100% केंद्रीय हिस्सा है।

 

अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्तियाँ: यह योजना चयनित छात्रों को विदेश में स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टरल अध्ययन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है। प्रतिवर्ष कुल 20 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं। इनमें से 17 छात्रवृत्तियाँ अनुसूचित जनजातियों के लिए और 3 छात्रवृत्तियाँ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के छात्रों के लिए हैं। माता-पिता/परिवार की सभी स्रोतों से आय ₹6.00 लाख प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

 

अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति और छात्रवृत्ति:

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति- (उच्च श्रेणी) योजना [स्नातक स्तर]: इस योजना का उद्देश्य मेधावी अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मंत्रालय द्वारा चिन्हित देश भर के 265 उत्कृष्ट संस्थानों, जैसे आईआईटी, एम्स, आईआईएम, एनआईआईटी आदि में से किसी में भी निर्धारित पाठ्यक्रमों में अध्ययन हेतु प्रोत्साहित करना है। सभी स्रोतों से पारिवारिक आय 6.00 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्रवृत्ति राशि में शिक्षण शुल्क, रहने का खर्च और पुस्तकों व कंप्यूटर के लिए भत्ते शामिल हैं।

 

अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति: भारत में एमफिल और पीएचडी की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जनजाति के छात्रों को प्रति वर्ष 750 अध्येतावृत्तियां प्रदान की जाती हैं। अध्येतावृत्ति यूजीसी के मानदंडों के अनुसार प्रदान की जाती है।

 

जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता: मंत्रालय इस योजना के माध्यम से राज्य सरकारों को जहां पहले से नए टीआरआई स्थापित नहीं हैं, वहां उनकी स्थापना करने के लिए सहायता प्रदान करता है और मौजूदा टीआरआई के कामकाज को मजबूत किया जा सके ताकि अनुसंधान और दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, समृद्ध जनजातीय विरासत को बढ़ावा देने आदि के प्रति अपनी मुख्य जिम्मेदारी को पूरा किया जा सके। जनजातीय कला और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए, अनुसंधान और दस्तावेजीकरण, कला और कलाकृतियों के रखरखाव और संरक्षण, जनजातीय संग्रहालय की स्थापना, राज्य के अन्य हिस्सों में आदिवासियों के लिए आदान-प्रदान यात्राओं, जनजातीय त्योहारों के आयोजन आदि के माध्यम से देश भर में जनजातीय संस्कृति और विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियां करने के लिए टीआरआई को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा शीर्ष समिति के अनुमोदन से आवश्यकतानुसार टीआरआई को 100% सहायता अनुदान वित्त पोषित है।

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