रेल मंत्रालय
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कोविड-19 के बाद किए गए तर्क संगत उपायों के चलते दैनिक ट्रेन सेवाओं की औसत संख्या बढ़कर 11,740 हुई, जो महामारी से पहले के 11,283 दैनिक ट्रेनों के स्तर से अधिक है


2238 मेल और एक्सप्रेस सेवाएं, कोविड-पूर्व के 1768 ट्रेनों के दैनिक स्तर से 470 अधिक

लंबी और मध्यम दूरी की रात्रिकालीन यात्रा के लिए स्वदेशी रूप से डिज़ाइन की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आरामदायक यात्रा के लिए तैयार, दो रेक परीक्षण और चालू करने की प्रक्रिया में

प्रविष्टि तिथि: 10 DEC 2025 4:46PM by PIB Delhi

वर्तमान में, भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चेयर कार वाली 164 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। इसके अलावा, वंदे भारत एक्सप्रेस और इसके वेरिएंट सहित नई ट्रेनों की शुरुआत भारतीय रेलवे में एक सतत् प्रक्रिया है, जो कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उस खंड की क्षमता
  • मार्ग की उपलब्धता
  • ज़रुरी रोलिंग स्टॉक की उपलब्धता
  • रोलिंग स्टॉक के लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचे की उपलब्धता
  • रेलवे ट्रैक और अन्य संपत्तियों के रखरखाव की ज़रुरत

कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए भारतीय रेलवे (आईआर) ने 23 मार्च 2020 से सभी नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था और केवल विशेष ट्रेनें ही चलाई जा रही थीं। भारतीय रेलवे ने आईआईटी-मुंबई की मदद से समय सारिणी का युक्तिकरण भी वैज्ञानिक तरीके से किया, जिसमें ट्रेन सेवाओं और ठहरावों का समायोजन भी शामिल था। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से यात्रियों की सुरक्षा के लिए रखरखाव कॉरिडोर ब्लॉक बनाने, ट्रेन सेवाओं की गति बढ़ाने और समय की पाबंदी में सुधार करने के लिए की गई थी। नवंबर 2021 से, एक्सप्रेस ट्रेनें युक्तिसंगत समय सारिणी और नियमित संख्या के अनुसार चलाई जा रही हैं।

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन 11,740 ट्रेनें (नवंबर 2025) चलती हैं, जबकि कोविड-19 से पहले यह संख्या 11,283 थी। भारतीय रेलवे नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन 2,238 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें (नवंबर 2025) चलती हैं, जबकि कोविड-19 से पहले यह संख्या 1,768 थी।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें

लंबी और मध्यम दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर संस्करण को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। ऐसे दो रैक निर्मित किए जा चुके हैं और परीक्षण/चालू करने की प्रक्रिया में हैं।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में उपलब्ध व्यापक तकनीकी प्रगति और सुरक्षा विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • कवच से सुसज्जित
  • 180/160 किमी प्रति घंटा की डिज़ाइन/ऑपरेटिंग गति के साथ उच्च वेगवृद्धि
  • क्रैशप्रूफ और झटके-रहित अर्ध-स्थायी कपलर और एंटी-क्लाइम्बर
  • ईएन मानकों के अनुरूप क्रैशप्रूफ कारबॉडी डिज़ाइन
  • ईएएन-45545 एचएल3 अग्नि सुरक्षा मानक
  • प्रत्येक कोच के अंत में आग को रोकने वाले दरवाजे
  • विद्युत कैबिनेट और शौचालयों में उन्नत एयरोसोल आधारित अग्नि पहचान और शमन प्रणाली
  • ऊर्जा दक्षता के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली
  • स्वदेशी रूप से विकसित यूवी-सी लैंप आधारित कीटाणुशोधन प्रणालियों से सुसज्जित एयर कंडीशनिंग इकाइयाँ
  • केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित प्लग दरवाजे और पूरी तरह से सीलबंद चौड़े गलियारे
  • सभी कोचों में सीसीटीवी कैमरे
  • आपातकालीन स्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/लोको पायलट के बीच संपर्क के लिए आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट
  • दिव्यांगजन यात्रियों के लिए प्रत्येक छोर पर स्थित ड्राइविंग कोचों में विशेष शौचालय
  • एयर कंडीशनिंग, सैलून लाइटिंग आदि जैसी यात्री सुविधाओं की बेहतर निगरानी के लिए केंद्रीकृत कोच निगरानी प्रणाली
  • ऊपरी बर्थों पर चढ़ने में आसानी के लिए एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ी

यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एनएस


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