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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों, ई-बैंड और वी-बैंड में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन पर अपनी सिफारिशें जारी की

प्रविष्टि तिथि: 10 DEC 2025 4:06PM by PIB Delhi

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज,, 21 गीगाहर्ट्ज बैंड्स, -बैंड और वी-बैंड में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन पर अपनी सिफारिशें जारी की।

दूरसंचार विभाग (डीओटी), संचार मंत्रालय, भारत सरकार ने दिनांक 13.09.2024 के एक संदर्भ पत्र के माध्यम से ट्राई से ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ए) के अंतर्गत ई और वी बैंड के आवंटन; और मौजूदा आवृत्ति बैंडों यानी 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज,, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों में माइक्रोवेव एक्सेस (एमडब्ल्यूए) और माइक्रोवेव बैकबोन (एमडब्ल्यूबी) स्पेक्ट्रम के आवंटन पर सिफारिशें प्रदान करने का अनुरोध किया था।

इस संबंध में, ट्राई ने 28.05.2025 को 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज,, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों, -बैंड और वी-बैंड में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन पर हितधारकों से टिप्पणिया और प्रति-टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिएं एक परामर्श पत्र जारी किया था। इसके जवाब में, 24 हितधारकों ने टिप्पणियां प्रस्तुत कीं और आठ हितधारकों ने प्रति-टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। परामर्श पत्र पर 11.08.2025 को ऑनलाइन माध्यम से एक खुली चर्चा (ओएचडी) आयोजित की गई।

परामर्श प्रक्रिया के दौरान हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों और आगे के विश्लेषण के आधार पर, ट्राई ने 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज,, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों, -बैंड और वी-बैंड में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप प्रदान किया है।

एक सामान्य सार्वजनिक दूरसंचार नेटवर्क में निम्नलिखित घटक होते हैं: (क) एक्सेस नेटवर्क; (ख) कोर नेटवर्क; और (ग) बैकहॉल लिंक। "एक्सेस नेटवर्क" ग्राहक उपकरणों को अंतिम छोड़ तक संपर्क प्रदान करता है। "कोर नेटवर्क" एक्सेस नेटवर्क को वैश्विक सार्वजनिक नेटवर्क जैसे सार्वजनिक इंटरनेट, सार्वजनिक लैंड मोबाइल नेटवर्क (पीएलएमएन) और सार्वजनिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (पीएसटीएन) से जोड़ता है। एक्सेस नेटवर्क को कोर नेटवर्क से जोड़ने के लिए "बैकहॉल लिंक" का उपयोग किया जाता है। दूरसंचार ट्रैफिक को बैकहॉल करने के लिए कई प्रकार की प्रौद्योगिकियां (जैसे माइक्रोवेव, ऑप्टिकल फाइबर केबल, कॉपर केबल और सैटेलाइट) उपलब्ध हैं। वर्तमान में, लगभग 54 प्रतिशत सेलुलर मोबाइल बेस स्टेशन माइक्रोवेव के माध्यम से जुड़े हुए हैं।

6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों, -बैंड और वी-बैंड में मौजूद माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम का उपयोग बैकहॉल लिंक में किया जा सकता है। 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), 7 गीगाहर्ट्ज, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज, 21 गीगाहर्ट्ज बैंडों को सामूहिक रूप से "पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड" कहा जाता है। ई-बैंड का स्पेक्ट्रम वर्ष 2022 में रेडियो बैकहॉल उद्देश्यों के लिए खोला गया था। वी-बैंड का स्पेक्ट्रम अभी तक भारत में लाइसेंस के साथ उपयोग के लिए नहीं खोला गया है।

दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 4(4) के अनुसार, केंद्र सरकार दूरसंचार के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के माध्यम से करेगी, सिवाय उन मदों के जो प्रथम अनुसूची में सूचीबद्ध हैं, जिनके लिए आवंटन प्रशासनिक प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा। दूरसंचार अधिनियम, 2023 की प्रथम अनुसूची में प्रशासनिक प्रक्रिया द्वारा स्पेक्ट्रम के आवंटन हेतु 19 मदों की सूची प्रदान की गई है। पहली अनुसूची के क्रमांक 12 पर मद "दूरसंचार सेवाओं के लिए रेडियो बैकहॉल" है। इसका मतलब यह है कि रेडियो बैकहॉल उद्देश्यों के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। विशेष रूप से, क्रमांक 12 में मद के अंतर्गत दिए गए स्पष्टीकरण में 'रेडियो बैकहॉल' शब्द को "दूरसंचार नेटवर्क में ग्राहक उपकरणों के अलावा अन्य दूरसंचार उपकरणों को आपस में जोड़ने के लिए केवल रेडियो आवृत्ति का उपयोग" के रूप में परिभाषित किया गया है।

सिफारिशों को अंतिम रूप प्रदान करते समय, ट्राई ने बैकहॉल स्पेक्ट्रम (अर्थात रेडियो बैकहॉल के लिए स्पेक्ट्रम) के आवंटन हेतु मौजूदा नीतिगत संरचना में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रीत किया है:

ए. पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड के साथ-साथ ई-बैंड में बैकहॉल स्पेक्ट्रम को वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं (यानी, एक्सेस स्पेक्ट्रम रखने वाले एक्सेस सेवा प्रदाताओं) को अस्थायी आधार पर आवंटित किया गया था।

बी. परंपरागत माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं के लिए लागू बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क में प्रति-वाहक शुल्क में वृद्धि हुई। सामान्य रूप से, वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं ने निर्धारित सीमा से कम माइक्रोवेव वाहक प्राप्त किए थे।

सी. वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं के अलावा अन्य सेवा प्रदाताओं को रेडियो बैकहॉल स्पेक्ट्रम आवंटित करने वाली संरचना विशेष रूप से अनुकूल नहीं थी। केवल कुछ सरकारी एजेंसियों एवं एक राज्य-स्वामित्व वाले ऑपरेटरों ने ही वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफ़िक के अलावा अन्य दूरसंचार ट्रैफ़िक के बैकहॉलिंग के लिए माइक्रोवेव कैरियर प्राप्त किए थे।

वर्तमान सिफारिशें इस बात को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं कि बैकहॉल स्पेक्ट्रम दूरसंचार सेवाओं का एक महत्वपूर्ण साधन है, इसलिए इसके अधिकतम उपयोग एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र संरचना की आवश्यकता है। कैप्टिव उपयोगकर्ताओं सहित विभिन्न अधिकृत संस्थाओं की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, ट्राई ने बैकहॉल स्पेक्ट्रम के आवंटन हेतु एक सक्षम नीतिगत संरचनाका सुझाव दिया है। ये सिफारिशें बैकहॉल स्पेक्ट्रम चार्जिंग संरचना को व्यापक रूप से पुनर्निर्माण एवं तर्कसंगत बनाती हैं।

ट्राई की सिफारिशों के मुख्य बिंदु:

  • बैकहॉल स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए नियम एवं शर्तों से संबंधित सिफारिशें:

सामान्यतः, वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता अपने सेल्युलर मोबाइल बेस स्टेशन साइटों को अपने कोर नेटवर्क से जोड़ने के लिए बैकहॉल स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हैं। चूंकि लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों (एलएसए) में सेल्युलर मोबाइल बेस स्टेशन साइटों का व्यापक तैनाती होती है, इसलिए ट्राई ने वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को उनके वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक को बैकहॉल करने के लिए संबंधित फ़्रीक्वेंसी बैंड में बैकहॉल स्पेक्ट्रम का लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र-व्यापी आवंटन (जिसे प्रायः 'ब्लॉक-आधारित आवंटन' कहा जाता है) करने की सिफारिश की है। बैकहॉल स्पेक्ट्रम का ब्लॉक-आधारित आवंटन वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को बड़े माइक्रोवेव बैकहॉल नेटवर्क के लिए स्वतंत्र रूप से योजना बनाने, तैनात करने और अनुकूलित करने में सक्षम बनाएगा।

जहां वायरलेस एक्सेस सेवाएं प्रदान करने वाले नेटवर्क काफी सघन हैं, वहीं अन्य दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने वाले नेटवर्क भौगोलिक रूप से बहुत कम फैले हुए हैं। वायरलेस एक्सेस नेटवर्क की तुलना में, लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) में वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के अलावा अन्य दूरसंचार ट्रैफिक को बैकहॉल करने के लिए बहुत कम बैकहॉल लिंक की आवश्यकता होती है। इस पहलू के मद्देनजर, ट्राई ने वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के अलावा दूरसंचार ट्रैफिक के बैकहॉलिंग के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक-आधारित आवंटन की सिफारिश की है। ऐसे उद्देश्यों के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक-आधारित आवंटन सटीक एवं आवश्यकता-आधारित तैनाती की सुविधा प्रदान करेगा, विभिन्न संस्थाओं द्वारा उसी स्पेक्ट्रम के पुन: उपयोग को प्रोत्साहित करेगा और इस प्रकार, स्पेक्ट्रम के कम उपयोग को न्यूनतम करेगा।

वर्तमान दूरसंचार नेटवर्क में बैकहॉल स्पेक्ट्रम की पुरानी प्रचलनों की पहचान करते हुए, ट्राई ने सेवा प्रदाताओं को पहले से आवंटित वाहकों को बनाए रखने के पहलू की जांच की है। यह देखा गया है कि अगर सेवा प्रदाताओं को उनके मौजूदा वाहकों को बनाए रखने का अधिकार नहीं दिया जाता है, तो इसका परिणाम केवल सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण लागत प्रभाव ही नहीं होगा, बल्कि बदलाव की प्रक्रिया के दौरान सेवाओं में अस्थायी व्यवधान या उपभोक्ताओं के लिए सेवा की गुणवत्ता में गिरावट भी हो सकती है। इसके अनुसार, ट्राई ने सिफारिश की है कि मौजूदा स्पेक्ट्रम धारकों को अपने मौजूदा बैकहॉल वाहकों को बनाए रखने का विकल्प प्रदान किया जाना चाहिए।

बैकहॉल स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए ट्राई द्वारा अनुशंसित विस्तृत रूपरेखा निम्नलिखित है:

  1. 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न) बैंड में स्पेक्ट्रम को सभी प्रकार की अधिकृत संस्थाओं, जिनमें कैप्टिव उपयोगकर्ता भी शामिल हैं, को बैकहॉल उद्देश्यों के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के आधार पर आवंटित करना चाहिए। 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न), बैंड में प्रति लिंक अधिकतम दो वाहक होने चाहिए, जिनमें से प्रत्येक की बैंडविड्थ 28 मेगाहर्ट्रज (युग्मित) हो।
  2. 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज और 18 गीगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम को लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के बैकहॉलिंग के लिए ब्लॉक-आधार पर केवल वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को ही आवंटित किया जाना चाहिए। लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में ब्लॉक-आधार पर इन बैंडों में किसी वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को अधिकतम आठ वाहक आवंटित किए जा सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक की बैंडविड्थ 28 मेगाहर्ट्ज (युग्मित) होना चाहिए। ट्राई  ने लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र की श्रेणी के बावजूद आठ वाहकों की एकसमान सीमा की सिफारिश की है। मौजूदा नीति के अंतर्गत, मेट्रो/श्रेणी-ए लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों में आठ वाहकों की सीमा थी, जबकि श्रेणी-बी/श्रेणी-सी लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों में छह वाहकों की सीमा थी।
  3. 21 गीगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम को पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक-आधारित आवंटन के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। इस बैंड में स्पेक्ट्रम को सभी प्रकार की अधिकृत संस्थाओं, जिनमें कैप्टिव उपयोगकर्ता भी शामिल हैं, को वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफ़िक के अलावा अन्य दूरसंचार ट्रैफ़िक के बैकहॉलिंग के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। 21 गीगाहर्ट्ज बैंड में प्रति लिंक अधिकतम चार वाहक, प्रत्येक 28 मेगाहर्ट्ज (युग्मित) बैंडविड्थ के साथ, निर्धारित किए जाने चाहिए।
  4. ई-बैंड (71-76 गीगाहर्ट्ज और 81-86 गीगाहर्ट्ज का युग्म) स्पेक्ट्रम को लाइसेंस सेवा क्षेत्र में वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के बैकहॉलिंग के लिए ब्लॉक-आधार पर वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को आवंटित किया जाना चाहिए। लाइसेंस सेवा क्षेत्र में ब्लॉक-आधार पर ई-बैंड में किसी वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को अधिकतम तीन वाहक आवंटित किए जा सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक की बैंडविड्थ 250 मेगाहर्ट्ज (युग्मित) होनी चाहिए। वर्तमान नीति के तहत, ई-बैंड में अधिकतम दो वाहक आवंटित किए जा सकते थे।
  5. ई-बैंड में 250 मेगाहर्ट्ज (युग्मित) बैंडविड्थ वाले दो वाहकों को वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफ़िक के अलावा अन्य दूरसंचार ट्रैफ़िक के बैकहॉलिंग के लिए कैप्टिव उपयोगकर्ताओं सहित सभी प्रकार की अधिकृत संस्थाओं को पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक आधार पर आवंटित करने के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
  6. वी-बैंड (57-66 गीगाहर्ट्ज) में स्पेक्ट्रम को सभी प्रकार की अधिकृत संस्थाओं, जिनमें कैप्टिव उपयोगकर्ता भी शामिल हैं, को बैकहॉल उद्देश्यों के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के आधार पर आवंटित किया जाना चाहिए। वी-बैंड में प्रति लिंक अधिकतम 20 वाहक होने चाहिए, जिनमें से प्रत्येक की बैंडविड्थ 50 मेगाहर्ट्ज (बिना जोड़ी का) हो।
  7. वी-बैंड में लाइसेंस प्राप्त निश्चित सेवाओं (रेडियो बैकहॉल) के समानांतर, वी-बैंड (57-66 गीगाहर्ट्ज) में लाइसेंस-मुक्त उपयोग की भी अनुमति दी जानी चाहिए, जो कम-शक्ति वाले इनडोर और बहुत कम-शक्ति वाले आउटडोर उपयोग के लिए गैर-हस्तक्षेप, गैर-सुरक्षा और साझा (गैर-विशेष) आधार पर हो।

ख. बैकहॉल स्पेक्ट्रम चार्जिंग से संबंधित सिफारिशें:

पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को बैकहॉल स्पेक्ट्रम आवंटित करने की मौजूदा नीति के अंतर्गत, बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क में लगातार वृद्धि हो रही थी। किफायती बैकहॉल सेवा प्रदान करने और बैकहॉल वाहकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से, ट्राई ने पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में बैकहॉल स्पेक्ट्रम के लिए प्रति वाहक एक समान शुल्क की सिफारिश की है।

पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को बैकहॉल स्पेक्ट्रम आवंटित करने की मौजूदा नीति के अंतर्गत, पहले माइक्रोवेव वाहक के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 0.15 प्रतिशत था। इसके अलावा, बाद के माइक्रोवेव कैरियर (दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें आदि) के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क बढ़ता जाता था। ट्राई ने सिफारिश की है कि पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में प्रति वाहक स्पेक्ट्रम शुल्क एजीआर का 0.1 प्रतिशत होना चाहिए। इससे वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं द्वारा देय बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क में काफी कमी आएगी।

व्याख्या: मान लें कि एक वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) में पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में पांच वाहक रखता है। मौजूदा चार्जिंग व्यवस्था के अंतर्गत, लागू (बढ़ते हुए) चार्जिंग मैट्रिक्स के अनुसार एलएसए में एजीआर का 1.1 प्रतिशत बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क देना आवश्यक था। ट्राई द्वारा प्रत्येक कैरियर के लिए 0.1 प्रतिशत का एकसमान स्पेक्ट्रम शुल्क की सिफारिश किए जाने के कारण, अब वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को एलएसए में एजीआर का केवल 0.5 प्रतिशत बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क देना होगा। इससे वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को एलएसए में एजीआर का 0.6 प्रतिशत का बचत होगा। इस उदाहरण के अनुसार, अनुशंसित बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क से वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क में लगभग 55 प्रतिशत की बचत होगी।

ट्राई ने पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक-आधारित आवंटन के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क के युक्तिकरण की भी सिफारिश की है। इससे पहले, पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क, रेडियो संचार सेवाओं और अनुप्रयोगों के विभिन्न प्रकारों के लिए कैप्टिव उपयोगकर्ताओं को आवृत्तियों के आवंटन के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क (सूत्र आधार पर प्रभारित) दिनांक 11.12.2023 के संचार विभाग के आदेश द्वारा नियंत्रित होते थे। इस आदेश के अनुसार, 6 गीगाहर्ट्ज (निम्न) और 7 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5 से 25 किमी की दूरी के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक शुल्क 7,20,000 रुपये प्रति वाहक प्रति वर्ष निर्धारित था। इसके अलावा, इस आदेश के अनुसार, 13 गीगाहर्ट्ज, 15 गीगाहर्ट्ज, 18 गीगाहर्ट्ज और 21 गीगाहर्ट्ज बैंड में 2 से 5 किमी की दूरी के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक शुल्क 3,60,000 रुपये प्रति वाहक प्रति वर्ष निर्धारित था। इन अनुशंसाओं के माध्यम से, ट्राई ने पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क को बहुत हद तक युक्तिसंगत बनाया गया है। ट्राई ने पारंपरिक माइक्रोवेव बैकहॉल बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क की निम्न सिफारिश की है:

  • 6 गीगाहर्ट्रज (निम्न) और 7 गीगाहर्ट्रज बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए प्रति वाहक प्रति वर्ष 75,000 रुपये।
  •  13 गीगाहर्ट्र, 15 गीगाहर्ट्रज, 18 गीगाहर्ट्र और 21 गीगाहर्ट्र बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए प्रति वाहक प्रति वर्ष 25,000 रुपये।

वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाताओं को ब्लॉक-आधार पर बैकहॉल स्पेक्ट्रम आवंटित करने की मौजूदा नीति के अंतर्गत, ई-बैंड में प्रति वाहक स्पेक्ट्रम शुल्क समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 0.15 प्रतिशत था। ट्राई ने सिफारिश की है कि वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के बैकहॉलिंग के लिए ब्लॉक-आधार पर वायरलेस एक्सेस सेवा प्रदाता को आवंटित ई-बैंड कैरियर के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क प्रत्येक कैरियर के एजीआर का 0.10 प्रतिशत होना चाहिए। इससे ई-बैंड में प्रति कैरियर स्पेक्ट्रम शुल्क में लगभग 33 प्रतिशत की कमी आएगी।

वायरलेस एक्सेस नेटवर्क ट्रैफिक के अलावा अन्य दूरसंचार ट्रैफिक के बैकहॉलिंग के लिए ई-बैंड में आवंटित किए जाने वाले पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के संबंध में, ट्राई ने ई-बैंड में किसी भी पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क 25,000 रुपये प्रति वाहक प्रति वर्ष निर्धारित किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा नीति व्यवस्था के अंतर्गत, किसी भी प्रकार की इकाई को पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के आधार पर ई-बैंड में स्पेक्ट्रम आवंटित करने का कोई प्रावधान नहीं था।

वी-बैंड में स्पेक्ट्रम के संबंध में, जिसे किसी भी अधिकृत इकाई, जिसमें कैप्टिव उपयोगकर्ता भी शामिल हैं, को पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के आधार पर रेडियो बैकहॉल उद्देश्यों के लिए आवंटित किया जाना है, ट्राई ने वी-बैंड में पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक के लिए बैकहॉल स्पेक्ट्रम शुल्क 2,500 रुपये प्रति वाहक प्रति वर्ष निर्धारित करने की सिफारिश की है।

ये सिफारिशें ट्राई की वेबसाइट (www.trai.gov.in) पर उपलब्ध हैं। किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए ट्राई के सलाहकार (नेटवर्क, स्पेक्ट्रम एवं लाइसेंसिंग) श्री अखिलेश कुमार त्रिवेदी से +91-11-20907758 पर संपर्क किया जा सकता है।

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पीके/केसी/एके

 


(रिलीज़ आईडी: 2202011) आगंतुक पटल : 111
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