कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
संसद प्रश्न: इंस्पायर योजना
प्रविष्टि तिथि:
10 DEC 2025 4:42PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की "इनोवेशन इन साइंस पर्सूट फॉर इंस्पायर रिसर्च (इंस्पायर)" योजना देश में लागू की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य मेधावी युवाओं को महाविद्यालय व विश्वविद्यालय स्तर पर बुनियादी एवं प्राकृतिक विज्ञानों का अध्ययन करने और इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि तथा पशु चिकित्सा विज्ञान सहित बुनियादी और अनुप्रयुक्त विज्ञान क्षेत्रों में अनुसंधान करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई है। इसका अंतिम लक्ष्य देश के अनुसंधान एवं विकास आधार का विस्तार करना है।
इंस्पायर मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नॉलेज) योजना को निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ लागू किया गया है: (i) युवा छात्रों को विज्ञान का अध्ययन करने और अनुसंधान कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए आकर्षित करना (ii) रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना और उनमें नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना। इंस्पायर मानक योजना का उद्देश्य 10-17 वर्ष की आयु वर्ग के उन युवा विद्यार्थियों को लक्षित करना है जो कक्षा VI से XII में पढ़ रहे हैं। देश के सभी विद्यालय, जो जिला/राज्य शिक्षा प्राधिकरणों द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, चाहे सरकारी हों अथवा निजी, सहायता प्राप्त हों या गैर-सहायता प्राप्त, केंद्र सरकार द्वारा संचालित हों अन्यथा राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित हों और जिनमें कक्षा 6 से 12 तक की कक्षाएं हैं, वित्तीय वर्ष के दौरान अपने विद्यालयों से 5 विद्यार्थियों को नामांकित करने के पात्र हैं। नामांकन विभाग द्वारा वर्ष की विशिष्ट अवधि के दौरान ई-एमआईएएस पोर्टल (www.inspireawards-dst.gov.in) पर ऑनलाइन माध्यम से आमंत्रित किए जाते हैं।
नामांकन प्रक्रिया में विद्यार्थियों की बुनियादी जानकारी, बैंक खाता विवरण, साथ ही प्रस्तावित मॉडल/परियोजना का संक्षिप्त विचार/सारांश प्रस्तुत करना शामिल है। विद्यार्थियों द्वारा दिए गए विचार के आधार पर इन ऑनलाइन नामांकनों की जांच की जाती है और चयनित विद्यार्थियों को परियोजना/मॉडल तैयार करने/विचार प्रदर्शित करने व जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। इस योजना के तहत वित्तीय सहायता सीधे लाभ हस्तांतरण के माध्यम से छात्रों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है।
इंस्पायर इंटर्नशिप का उद्देश्य बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण 10वीं कक्षा के 50,000 मेधावी विद्यार्थियों को विज्ञान शिविरों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुभव प्रदान करना है। इन शिविरों में विद्यार्थियों को भारत और विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने और वैज्ञानिक खोज के रोमांच को महसूस करने का अवसर मिलता है, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता भी शामिल होते हैं। यह अनुभव न केवल विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा को बढ़ाता है बल्कि उन्हें नई सोच अपनाने, प्रयोगधर्मिता विकसित करने और 16–17 वर्ष की आयु में ही उच्च शिक्षा के लिए विज्ञान विषय चुनने हेतु प्रेरित करता है। प्रत्येक इंटर्नशिप शिविर आवासीय स्वरूप में आयोजित होता है और इसकी अवधि पांच दिन की होती है।
उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति (शी) का उद्देश्य छात्रवृत्ति प्रदान करके और अग्रणी शोधकर्ताओं के साथ ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के माध्यम से मार्गदर्शन देकर प्रतिभाशाली युवाओं को विज्ञान-प्रधान कार्यक्रमों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने की दर को बढ़ाना है। यह योजना 17-22 वर्ष की आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को प्राकृतिक व मूलभूत विज्ञानों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रति वर्ष 0.80 लाख रुपये की दर से 12,000 छात्रवृत्तियां प्रदान करती है।
इंस्पायर फेलोशिप उन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है जिन्होंने राष्ट्रीय महत्व के विश्वविद्यालय/शैक्षणिक संस्थान जैसे आईआईटी, एनआईटी, आईआईटीएसईआर स्तर की परीक्षा में इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, पशु चिकित्सा सहित बुनियादी व अनुप्रयुक्त विज्ञान में प्रथम स्थान प्राप्त किया हो, साथ ही उन इंस्पायर स्कॉलर्स को भी जिन्होंने एमएससी स्तर पर कुल मिलाकर 70% अंक प्राप्त किए हों और देश के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/शैक्षणिक संस्थान में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र हों। ये फैलोशिप अधिकतम 5 वर्षों (जेआरएफ के रूप में 2 वर्ष और एसआरएफ के रूप में 3 वर्ष) या पीएचडी की समाप्ति, जो भी पहले हो, के लिए मान्य हैं, ताकि पूर्णकालिक पीएचडी कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके। आकस्मिक खर्चों सहित फैलोशिप की राशि सीएसआईआर-यूजीसी नेट फैलोशिप के समतुल्य है और भारत सरकार के मानदंडों एवं विनियमों के अनुसार समय-समय पर इसमें बदलाव किया जाता है। वर्तमान में, प्रत्येक फेलो को प्रति माह 37,000 रुपये + मेजबान संस्थान के शहर के आधार पर स्वीकार्य एचआरए + जेआरएफ के रूप में 20,000 रुपये वार्षिक आकस्मिक निधि और प्रति माह 42,000 रुपये + मेजबान संस्थान के शहर के आधार पर स्वीकार्य एचआरए + एसआरएफ के रूप में 20,000 रुपये वार्षिक आकस्मिक निधि प्राप्त होगी।
इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप 27–32 वर्ष आयु वर्ग के पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ताओं को इंजीनियरिंग, कृषि, पशु चिकित्सा और चिकित्सा सहित बुनियादी तथा अनुप्रयुक्त विज्ञान क्षेत्रों में पांच वर्ष की फैकल्टी फेलोशिप का अवसर प्रदान करती है। सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए विज्ञापन वर्ष की 1 जनवरी को अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष निर्धारित है, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा महिला उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 37 वर्ष और मानक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए 42 वर्ष है। प्रत्येक चयनित फेलो को 1,25,000 रुपये प्रति माह की फेलोशिप (2000 रुपये वार्षिक वृद्धि सहित) और पांच वर्षों की अवधि में कुल 35 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान (7.0 लाख रुपये प्रति वर्ष) प्रदान किया जाता है।
इस योजना को इस तरह से संशोधित किया गया है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखने वाले मौलिक विचारों को प्रोत्साहित किया जा सके। संशोधित ढांचे के तहत, राज्य स्तरीय प्रदर्शनी व परियोजना प्रतियोगिताओं (एसएलपीईसी) से चयनित छात्रों को राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) के सहयोग से आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे प्रमुख संस्थानों में मार्गदर्शन सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे अपने नवाचारों को और परिष्कृत एवं विकसित कर सकें। इस योजना का उद्देश्य देश भर के पात्र विद्यालयों से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दस लाख मौलिक विचार प्राप्त करना है। चयनित विद्यार्थियों को उनके प्रोजेक्ट/मॉडल के विकास और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
देश के वे सभी विद्यालय, जो संबंधित जिला या राज्य शिक्षा प्राधिकरणों द्वारा मान्यता प्राप्त हैं—चाहे वे सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, या केंद्रीय अथवा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित हों—और जिनमें कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा उपलब्ध है, इस योजना के तहत भाग लेने तथा अपने मौलिक विचार प्रस्तुत करने के लिए पात्र हैं।
विभाग ने राजसमंद लोकसभा क्षेत्र सहित पूरे राजस्थान में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की हैं। इनमें शिक्षकों और जिला/राज्य नोडल अधिकारियों के लिए अभिविन्यास कार्यशालाओं का आयोजन, स्कूलों में ऑडियो-विजुअल प्रचार सामग्री व ब्रोशर का वितरण तथा नामांकन एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं को सहज बनाने हेतु क्लाउड-आधारित वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप का संचालन शामिल है। नवाचारों की गुणवत्ता सुदृढ़ करने के लिए एक प्रायोगिक शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है। पिछले पांच वर्षों में राजस्थान भर में कुल 42 जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं, जिनमें राजसमंद के लिए विशेष रूप से आयोजित पांच ऑनलाइन कार्यशालाएं भी शामिल हैं, जिनसे लगभग 3,500 शिक्षकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है।
इंस्पायर पुरस्कार विजेताओं के लिए मेंटरिंग, इनक्यूबेशन, प्रोटोटाइप विकास और उद्योग संपर्क को मजबूत करने हेतु सरकार ने एक सुव्यवस्थित मेंटरिंग और क्षमता-निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेताओं को राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) के सहयोग से आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे प्रमुख संस्थानों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। पिछले पांच वर्षों में 119 मेंटरशिप कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं, जिनसे 1,823 विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को सुधारने, प्रोटोटाइप विकसित करने और तकनीकी समझ को गहराई देने में प्रत्यक्ष लाभ मिला है। आशाजनक विचारों को इनक्यूबेशन लिंकेज, तकनीकी सहयोग और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा संबंधी समर्थन उपलब्ध कराकर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 195 पेटेंट दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 38 पेटेंट विद्यार्थी नवप्रवर्तकों के नाम पर स्वीकृत किए गए हैं।
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पीके/केसी/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2202056)
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