ग्रामीण विकास मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

ग्रामीण विकास विभाग: वर्षांत समीक्षा

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना ने 16,000 किमी से ज़्यादा सड़कों और 900 से ज़्यादा पुलों के निर्माण के साथ ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला

दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने 2 करोड़ लखपति दीदियों बनाई

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 3.86 करोड़ घरों को मंज़ूरी मिली और 2.92 करोड़ घरों का निर्माण हुआ

पीएम-जनमन आवास: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4.71 लाख घरों को मंज़ूरी मिली, 2.42 लाख घर बने

डीडीयू-जीकेवाई: 82,000 से ज़्यादा ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया और 37,000 को नौकरियाँ मिलीं

आरएसईटीआई ने ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाया: 625 संस्थानों में 59 लाख को प्रशिक्षित किया गया और 43 लाख को रोज़गार मिला

विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) - वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 का अधिनियम, ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिनों तक का रोज़गार सुनिश्चित करेगा

एनएसएपी को 2025-26 में ₹9,652 करोड़ का आवंटन मिला, जिसमें से ₹5,564 करोड़ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए

जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) ने 1058 ज़िला-स्तरीय बैठकें आयोजित कीं; दिशा डैशबोर्ड में कुल 8 योजनाएँ शामिल है

प्रविष्टि तिथि: 01 JAN 2026 11:19AM by PIB Delhi

वर्ष 2025 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका, आवास, रोज़गार, कौशल और सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करके ग्रामीण भारत में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया हैं।

1.प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)

  • दिसंबर 2000 में प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई ने लगभग सभी पात्र ग्रामीण आबादियों को जोड़ने में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं तथा महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को सुगम बनाया है।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसव के अंतर्गत प्रत्येक घटक के तहत 01.01.2025 से 12.12.2025 की अवधि में की गई वास्तविक उपलब्धियाँ निम्नानुसार हैं:

क्र.सं.

पीएमजीएसवाई के तहत कार्यक्षेत्र

पूर्ण सड़कों की संख्या

पूर्ण सड़क लंबाई(किमी में)

पूर्ण पुलों की संख्या

1

पीएमजीएसवाई-।

180

552

72

2

पीएमजीएसवाई-II

24

62

03

3

आरसीपीएलडब्ल्यूईए

90

433

76

4

पीएमजीएसवाई-III

2121

14285

632

5

पीएमजनमन

220

1046

158

 

कुल

2635

16378

941

  • राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में 1,720 सड़क परियोजनाएं पूर्ण की गईं, जिससे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संपर्कता मज़बूत हुई।
  • 8,693.54 किलोमीटर सड़कें बनाईं गई, जिससे ग्रामीण, दूरदराज और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच में काफी सुधार हुआ।
  • 481 पुल सफलतापूर्वक पूरे किए गए, जिससे बारहमासी संपर्कता बेहतर हुई और नदियों और मुश्किल इलाकों में आवाजाही आसान हुई।
  • इस अवधि के दौरान सड़कों एवं पुलों के निर्माण पर ₹8,548.26 करोड़ का पूंजीगत व्यय किया गया।
  • इसके अतिरिक्त, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा ग्रामीण सड़कों के रखरखाव पर ₹811 करोड़ व्यय किए गए, जिससे परिसंपत्तियों की सततता सुनिश्चित हुई, सड़क आवागमन गुणवत्ता में सुधार हुआ तथा मौजूदा परिसंपत्तियों की सेवा-आयु में वृद्धि हुई।
  • 536 सड़कों के पूर्ण होने तथा सड़क नेटवर्क में 1,736.25 किलोमीटर की वृद्धि के साथ तमिलनाडु शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा।”
  • हिमाचल प्रदेश ने 1,103.77 किलोमीटर सड़क लंबाई का सर्वाधिक कार्य पूर्ण कर पर्वतीय एवं चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में सशक्त प्रदर्शन का परिचय दिया।”
  • बिहार में सर्वाधिक 173 पुलों का निर्माण पूर्ण किया गया, जिससे बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ।”
  • छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश एवं झारखंड राज्य में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई।”
  • अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख एवं उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती, पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में लक्षित आधारभूत संरचना विकास किया गया, जिससे क्षेत्रीय विकास एवं सामरिक संपर्क को सुदृढ़ समर्थन प्राप्त हुआ।”
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चरण-IV के अंतर्गत अब तक उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ तथा जम्मू-कश्मीर राज्यों हेतु कुल 5,436 किलोमीटर सड़क लंबाई की स्वीकृति प्रदान की गई है।

डिजिटल पहल

• पीएमजीएसवाई ओएमएमएएस पोर्टल को एनईएसएल के साथ एकीकृत कर इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी (ईबीजी) जारी करने की सुविधा प्रदान की गई, जिससे पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता में वृद्धि हुई।

• सड़कवार वास्तविक एवं वित्तीय लक्ष्यों तथा उपलब्धियों की निगरानी हेतु ‘डेल्टा रिपोर्ट’ प्रणाली प्रारंभ की गई, जिससे वास्तविक समय में प्रदर्शन की निगरानी संभव हुई।

• मानक निविदा दस्तावेज (एसबीडी) का पूर्ण डिजिटलीकरण किया गया, जिससे निविदा दस्तावेजों की ऑनलाइन तैयारी सुगम हुई तथा खरीद की प्रक्रिया को सरल एवं सुव्यवस्थित बनाया गया।

2.दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम)

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) की शुरुआत जून, 2011 में की गई थी। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है। डीएवाई-एनआरएलएम का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण आजीविका (आरएल) प्रभाग द्वारा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के सहयोग से किया जाता है। मिशन का उद्देश्य गरीबों की सशक्त जमीनी संस्थाओं का निर्माण के माध्यम से “गरीब परिवारों को लाभकारी स्वरोज़गार तथा कुशल मज़दूरी आधारित रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराकर गरीबी में कमी लाना है, जिससे उनकी आजीविका में सतत आधार पर उल्लेखनीय सुधार हो। मिशन अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित चार प्रमुख घटकों में निवेश करता है, अर्थात्—(क) ग्रामीण गरीबों की स्व-प्रबंधित एवं वित्तीय रूप से सतत सामुदायिक संस्थाओं का सामाजिक संगठन, संवर्धन एवं सुदृढ़ीकरण; (ख) ग्रामीण गरीबों का वित्तीय समावेशन; (ग) सतत आजीविका का संवर्धन; तथा (घ) सामाजिक समावेशन, सामाजिक विकास एवं अभिसरण।

2. कार्यक्रम के प्रमुख घटक

i. संस्थागत निर्माण एवं क्षमता संवर्धन:

यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), ग्राम संगठनों (वीओ) तथा क्लस्टर स्तरीय महासंघों (सीएलएफ) जैसी सामुदायिक संस्थाओं के गठन एवं विकास पर केंद्रित है, जिससे ग्रामीण गरीबों को पारस्परिक सहयोग, बचत तथा ऋण तक पहुँच के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराया जा सके। ये संस्थाएँ सामूहिक संसाधनों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन में सहायक सिद्ध होती हैं।

ii. सामाजिक समावेशन एवं सामाजिक विकास:

डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार (एसबीसीसी) को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि ग्रामीण समुदायों को स्वस्थ व्यवहार अपनाने एवं स्वच्छ भारत मिशन, पोषण अभियान आदि जैसी सरकारी सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। इस घटक के अंतर्गत खाद्य एवं पोषण, स्वास्थ्य, जल–स्वच्छता एवं स्वच्छता (डब्ल्यूएएसएच), लैंगिक समानता तथा पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और सामुदायिक आधारित संगठनों (सीबीओ) के साथ अभिसरण पर विशेष बल दिया जाता है।

iii. वित्तीय समावेशन:

वित्तीय सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डीएवाई-एनआरएलएम दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में महिलाओं को बीसी सखी के रूप में तैनात कर महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है, जिससे बैंकिंग सेवाओं, ऋण तथा पेंशन एवं बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की प्रभावी आपूर्ति संभव हो पाती है।

iv. आजीविका:

कृषि आधारित आजीविका: यह कार्यक्रम कृषि-पारिस्थितिक पद्धतियों, पशुपालन प्रबंधन तथा बेहतर बाज़ार पहुँच के माध्यम से महिला कृषकों को सशक्त बनाता है। उत्पादकता बढ़ाने एवं लागत में कमी लाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन को प्रोत्साहित किया जाता है।

गैर-कृषि आधारित आजीविका: कृषि के अतिरिक्त, डीएवाई-एनआरएलएम हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु स्तर के विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना हेतु महिलाओं को सहायता प्रदान करता है। यह कार्यक्रम भूमिहीन ग्रामीण महिलाओं को आय-सृजन गतिविधियाँ अपनाने में सक्षम बनाता है, विशेष रूप से ऐसे सूक्ष्म उद्यमों पर ध्यान केंद्रित करता है और जो स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं।

3. सफलता में योगदान देने वाली नवाचारी विशेषताएँ

. क्षमता संवर्धन एवं मानव संसाधन: डीएवाई--एनआरएलएम के अंतर्गत सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु सु-प्रशिक्षित मानव संसाधनों के माध्यम से क्षमता संवर्धन पर विशेष बल दिया जाता है। राज्य स्तर तथा विभागीय सहयोग से कार्यक्रम के प्रभावी निष्पादन एवं प्रबंधन में सहायता मिलती है।

ख. समुदाय-नेतृत्वित दृष्टिकोण: यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के गठन तथा उनके ग्राम संगठनों (वीओ) और क्लस्टर स्तरीय महासंघों (सीएलएफ) में संघटन के माध्यम से महिलाओं को विकास की धुरी में स्थापित करता है। निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक पूंजी का सृजन होता है तथा ग्रामीण समुदायों में विश्वास एवं सहयोग और मजबूत होता है। पशुपालन, कृषि एवं वित्तीय सेवाओं जैसे विषयगत क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

ग. संघ: स्वयं सहायता समूह डीएवाई-एनआरएलएम की आधारशिला हैं। लगभग 5.35 लाख ग्राम संगठन (वीओ) तथा 33,590 क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ) सामूहिक सशक्तिकरण को सक्षम बनाते हैं। ये संघ सामूहिक कार्रवाई, निर्णय-निर्माण एवं संसाधनों तक पहुँच के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।

घ. सहभागी योजना निर्माण: डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिसके तहत ग्राम-स्तरीय बैठकों, परामर्शों तथा सहभागी ग्रामीण आकलन के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को विकासात्मक गतिविधियों की योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से सम्मिलित किया जाता है।

ङ. बिज़नेस करेस्पॉन्डेंट एजेंट (बीसीए): डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत 1.44 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों को बिज़नेस करेस्पॉन्डेंट एजेंट (बीसीए), जिन्हें बीसी सखी भी कहा जाता है, के रूप में तैनात किया गया है। इससे जमा, ऋण, प्रेषण, पेंशन तथा बीमा सहित विभिन्न बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

च. लखपति दीदी पहल: इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत देशभर में 3 करोड़ “लखपति दीदियों” (वार्षिक ₹1 लाख या उससे अधिक आय अर्जित करने वाली महिलाएँ) के सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और अब तक देश में स्वयं सहायता समूह की 2 करोड़ से अधिक महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं।

4. परिणाम और प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव मूल्यांकन पहल (–3आई) द्वारा वर्ष 2019 में, विश्व बैंक के सहयोग से किए गए एक अध्ययन में दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के महत्वपूर्ण प्रभावों को रेखांकित किया गया है, जो इस प्रकार हैं-

  • आय में वृद्धि: आधार राशि की तुलना में आय में 19 प्रतिशत की वृद्धि।
  • अनौपचारिक ऋणों में कमी: अनौपचारिक स्रोतों से लिए जाने वाले ऋण पर निर्भरता में 20 प्रतिशत की कमी।
  • बचत में वृद्धि: लाभार्थियों की बचत में 28 प्रतिशत की वृद्धि।
  • श्रमबल भागीदारी में सुधार: द्वितीयक आजीविका गतिविधियों में संलग्न महिलाओं की संख्या में 4 प्रतिशत की वृद्धि।
  • सरकारी योजनाओं तक बेहतर पहुंच: उपचार क्षेत्रों में आधारभूत आंकड़ों की तुलना में सामाजिक कल्याण योजनाओं तक पहुंच में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि।

5. निष्कर्ष

डीएवाई-एनआरएलएम ग्रामीण महिलाओं और समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कार्यक्रम सिद्ध हुआ है। सामाजिक संगठन, वित्तीय समावेशन, आजीविका संवर्धन तथा सामाजिक विकास पर केंद्रित इस कार्यक्रम ने लाखों ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है, गरीबी में कमी की है तथा भारत में समावेशी विकास को बढ़ावा दिया है। कार्यक्रम की सफलता का आधार इसका समुदाय-प्रेरित दृष्टिकोण, क्षमता निर्माण तथा महिला-केंद्रित पहलें हैं, जिनका उद्देश्य एक सतत एवं सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।

तालिका: डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत प्रगति की संक्षिप्त स्थिति

2011-12 से 2024-25 तक (30 नवंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार)

क्र.सं.

सूचक

वित्त वर्ष 2011-12 से वित्त वर्ष 2013-14 तक की प्रगति

वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक की प्रगति (30 नवंबर 2025 तक),

संचयी उपलब्धि

30 नवंबर 2025 तक

1

एसएचजी में शामिल महिलाओं की संख्या (करोड़ में)

2.37

7.68

10.05

2

संवर्धन किए गए एसएचजी की संख्या (लाख में)

21.31

69.59

90.90

3

वितरित ऋण राशि ( करोड़ रुपये )

22,944.16

1166927.52

11.89 लाख करोड़

4

प्रदान की गई पूंजीकरण सहायता राशि (परिक्रामी निधि + सामुदायिक निवेश निधि) ( करोड़ रुपये )

1,501.58

49,866.81

62,339.75 करोड़

5

गैर-निष्पादित आस्तियाँ (एनपीए)

9.58 % (31 मार्च, 2014 तक)

1.76% (आज की तारीख तक)

6

तैनात बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी / डिजीपे सखी की संख्या (एनआरएलएम+एनआरईटीपी)

-

 

1.49 लाख

  1.  

कृषि-पारिस्थितिक पद्धतियों (एईपी) के अंतर्गत कवर की गई महिला कृषकों की संख्या (लाख में)

24.27

420.73

487

8

महिलाओं की संख्या जिनेक पास

कृषि-पोषक उद्यान हैं (लाख में)

0

328

9

एसवीईपी के तहत समर्थित उद्यमों की संख्या (लाखों में)

-

4.02

10

लखपतियों दीदी की संख्या

0

1.48 करोड़

 

1 जनवरी से 30 नवंबर, 2025 तक डीएवाई-एनआरएलएम की प्रगति

क्र.सं.

सूचक

1 जनवरी से 30 नवंबर, 2025 तक की प्रगति

1

एसएचजी में शामिल महिलाओं की संख्या (करोड़ में)

3,117

2

संवर्धन किए गए एसएचजी की संख्या (लाख में)

387

3

वितरित ऋण राशि ( करोड़ रुपये )

2,06,563

(1 जनवरी से 31 अक्टूबर 2025)

4

प्रदान की गई पूंजीकरण सहायता राशि (परिक्रामी निधि + सामुदायिक निवेश निधि) ( करोड़ रुपये )

12,669.53

 

5

गैर-निष्पादित आस्तियाँ (एनपीए)

1.79% (आज की तारीख तक)

6

तैनात बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी / डिजीपे सखी की संख्या (एनआरएलएम+एनआरईटीपी)

12,241

7

कृषि-पारिस्थितिक पद्धतियों (एईपी) के अंतर्गत कवर की गई महिला कृषकों की संख्या (लाख में)

76.45

8

महिलाओं की संख्या जिनके पास

कृषि-पोषक उद्यान हैं (लाख में)

51.25

9

एसवीईपी के तहत समर्थित उद्यमों की संख्या (लाखों में)

71,833

10

लखपतियों दीदी की संख्या

2 करोड़ संचयी

 

3. प्रधान मंत्री आवास योजना - ग्रामीण

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) भारत सरकार के मुख्य कार्यक्रमों में से एक है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2029 तक ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बिना आवास वाले परिवारों और कच्चे और जीर्ण-शीर्ण आवासों में रहने वाले परिवारों को अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण करके मूलभूत सुविधाओं वाले 4.95 करोड़ पक्के आवास प्रदान करके "सभी के लिए आवास" के लक्ष्य को प्राप्त करना है। इस योजना के तहत शुरुआती लक्ष्य मार्च, 2024 तक 2.95 करोड़ आवासों के निर्माण में सहायता देना था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9 अगस्त, 2024 को इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए अनुमोदित किया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की संख्या बढ़ने के कारण आवास की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 से वित्तीय वर्ष 2028-29 के दौरान 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण आवास बनाए जा सकें।

दिनांक 09.12.2025 तक, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 4.14 करोड़ आवासों का संचयी लक्ष्य आवंटित किया गया है, जिसमें से 3.86 करोड़ आवासों को स्वीकृति दी गई है और 2.92 करोड़ आवासों को पूरा किया गया है।

इस योजना की कुल वास्तविक प्रगति इस प्रकार है:

स्वीकृत किए गए आवासों की कुल संख्या

3,86,31,160

जारी की गई 1 किस्त की संख्या

3,60,69,568

पूर्ण कुल आवास

291,90,774

 

वर्ष 2025 के लिए योजना के तहत वास्तविक उपलब्धि, अर्थात 1 जनवरी, 2025 से शुरू होकर, नीचे दी गई है:

2025 में स्वीकृत आवासों की कुल संख्या

63,92,689

जारी की गई पहली किस्त की कुल संख्या

55,72,041

पूर्ण कुल आवास

23,43,066

 

क्षेत्रीय ग्रामीण कार्यशालाएं: मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पीएमएवाई-जी, मानव संसाधन स्थिति और पीएमएवाई-जी और पीएम - जनमन के तहत आवास + 2024 सर्वेक्षण के तहत वास्तविक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा करने के लिए गोवा और सिक्किम (जिसमें राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के अधिकारियों ने भाग लिया था) में क्षेत्रीय ग्रामीण कार्यशालाओं का आयोजन किया।

पहल:

इस योजना की पूर्णत: ई-गवर्नेंस सॉल्यूशन, आवाससॉफ्ट और आवासऐप के माध्यम से कार्यान्वित और निगरानी की जा रही है। आवाससॉफ्ट इस योजना के कार्यान्वयन पहलुओं से संबंधित कई आंकड़ों के डेटा प्रविष्टि और निगरानी के लिए कार्यात्मकता प्रदान करता है। इन आंकड़ों में वास्तविक प्रगति (पंजीकरण, स्‍वीकृति, आवास का पूरा होना और किस्तों को जारी करना आदि) शामिल हैं। वित्तीय प्रगति, अभिसरण की स्थिति आदि। वर्ष 2016 में इस योजना की शुरुआत के बाद से, नई पहलों द्वारा योजना को और अधिक लाभार्थी-उन्मुख बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में मंत्रालय द्वारा की गई प्रमुख पहलें निम्नानुसार हैं:

i. तकनीकी कार्यकलाप

पीएमएवाई-जी योजना के प्रभावी और पारदर्शी प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शुरू करने में हमेशा अग्रणी रहा है। नए चरण को कार्यान्वित करने के साथ पीएमएवाई-जी ने पारदर्शिता को अधिकतम करने और आवासों की पहचान से लेकर निर्माण पूरा होने तक प्रक्रिया में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए कई विशेषताएं लाई गई की हैं। नई विशेषताएं इस प्रकार है:

  1. आवास+ 2024 सर्वे- पीएमएवाई-जी के तहत संभावित पात्र परिवारों की पहचान के लिए आवास+ 2024 परिवार सर्वेक्षण सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में विशेष रूप से बनाए गए आवास+ 2024 मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके किया गया है, ताकि उन्हें पीएमएवाई-जी (वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29) के लाभार्थी डेटाबेस में शामिल किया जा सके। आवास प्लस मोबाइल ऐप में पूर्व-पंजीकृत सर्वेक्षकों, आवास प्रौद्योगिकी चयन, चेहरा प्रमाणीकरण, आधार आधारित ई-केवाईसी, आवास का डेटा लेना, वर्तमान आवास की शर्तें, टाइम स्टैम्प्ड और प्रस्तावित निर्माण कार्यस्थल के वर्तमान आवास का जियो टैग किए गए फोटो दर्ज के माध्यम से स्व-सर्वेक्षण और सहायता प्राप्त सर्वेक्षण दोनों सुविधाएं हैं। यह ऐप ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में कार्य करता है।
  2. पहल - पीएमएवाई-जी के लाभार्थियों को राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा आवास के निर्माण में सहायता प्रदान की जा रही है, जिसमें आपदारोधी सुविधाओं सहित आवास के विभिन्न प्रकार के डिजाइन टाइपोलॉजी है जो उनकी स्थानीय भू-जलवायु स्थितियों के लिए उपयुक्त हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सीएसआईआर-सीबीआरआई के सहयोग से आवास ऐप के माध्यम से लाभार्थियों को आदर्श आवास डिजाइन की सिफारिश करने के लिए 3डी डिजाइन टाइपोलॉजी पहल संग्रह के आधार पर एक ऐप विकसित करने की पहल की है।
  3. ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण- पीएमएवाई-जी के कौशल हस्तांतरण के ऑन-साइट मॉडल के साथ, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (आरएसईटीआई) के माध्यम से ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी चालू वित्तीय वर्ष से शुरू किया गया है। आरएसईटीआई राष्ट्रीय आरयूडीएसईटीआई अकादमी (एनएआर) द्वारा संरचित एक केम्पस-आधारित प्रशिक्षण वातावरण प्रदान करता है, जिसे राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) दोहरी निर्णय देने वाली संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है। पाठ्यक्रम में चिनाई और कंक्रीट कार्य (एनएआरक्यू30055) - नींव, गारा मिश्रण, ईंट/ब्लॉक/पत्थर चिनाई, प्लास्टरिंग, डीपीसी, फर्श को कवर करने वाले 240 घंटे का एक एनएसक्यूएफ स्तर 1 कार्यक्रम है, और इसमें उद्यमिता विकास जैसे वित्तीय साक्षरता और सूक्ष्म उद्यम प्रबंधन के घटक शामिल हैं। सफल मूल्यांकन पर जारी प्रमाणपत्रों के साथ एनएआर द्वारा निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाता है। अब तक आरएसईटीआई मार्ग के माध्यम से कुल 7,700 उम्मीदवारों को प्रमाणित किया गया है, जिससे प्रशिक्षित युवाओं के लिए स्थानीय आजीविका विकल्प सुदृढ़ हुए है।

 

ii. पीएम-जनमन पहल और उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित पीएम-जनमन में ग्रामीण विकास मंत्रालय सहित भारत सरकार के 9 मंत्रालयों को कवर करने वाले 11 महत्वपूर्ण कार्यकलाप शामिल हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षित आवास, सड़क संपर्कता, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, दूरसंचार कनेक्टिविटी, बिजली और स्थायी आजीविका के अवसरों जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ पीवीटीजी परिवारों और बसावटों की संतृप्ति प्राप्त करना है। इस योजना के तहत आवास कार्यकलाप पीएमएवाई-जी के माध्यम से कवर किया गया है। 09 दिसंबर 2025 तक, 4,71,486 आवासों को स्वीकृति दी गई है और राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में 2,42,811 आवासों को पूरा किया गया है। हालांकि, 1 जनवरी 2025 से अब तक 1,24,204 आवासों को स्वीकृति दी गई है और राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में 1,71,719 आवासों को पूरा किया गया है।

 

4. दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई)

1. कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण

मजदूरी रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों को वैश्‍विक मानकों के आधार पर तैयार करने के महत्‍वाकांक्षी उद्देश्‍य के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय ने रोजगार से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम को राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दीन दयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल्‍य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के रूप में 25 सितंबर, 2014 को पुनर्गठित किया। डीडीयू-जीकेवाई का उद्देश्‍य देश के अन्‍य प्रमुख कार्यक्रमों में महत्‍वपूर्ण योगदान देते हुए भारत को वैश्‍विक स्‍तर पर उत्‍पादन केंद्र के रूप में स्‍थापित करने वाले प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया अभियान में योगदान करना है।

डीडीयू-जीकेवाई एक राज्य आधारित योजना है जिसे मांग आधारित लक्ष्य मंजूरी प्रक्रिया के आधार पर पीपीपी मोड में लागू किया जा रहा है। यह कार्यक्रम अन्य कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बीच एक विशिष्‍ट स्थान रखता है क्योंकि इसका ध्यान ग्रामीण गरीब युवाओं पर है और यह नियोजन पश्चात ट्रैकिंग, प्रतिधारण और करियर प्रगति को दी जाने वाली प्रमुखता और प्रोत्साहन के माध्यम से स्थायी रोजगार पर जोर देता है। गुणवत्ता का पालन सुनिश्चित करने के लिए, डीडीयू-जीकेवाई प्रत्येक प्रशिक्षु के कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण का आकलन करने के लिए एनएसडीसी के सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) के माध्यम से स्वतंत्र तृतीय पक्ष प्रमाणन को अनिवार्य बनाता है। डीडीयू-जीकेवाई के तहत दो विशेष कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। अर्थात; रोशनी कार्यक्रम 9 राज्यों के 27 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए अनिवार्य आवासीय पाठ्यक्रम के साथ लागू किया जा रहा है जिसमें महिला 40% महिला अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है और हिमायत- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र के सभी युवा 100% केंद्रीय वित्त पोषण वाली इस योजना के तहत शामिल किए गए हैं।

 

2. मुख्य विशेषताएं:

  • राज्य के नेतृत्व वाली योजना।
  • सार्वजनिक निजी भागीदारी मोड में कार्यान्वयन।
  • नियोजन संबंधी कौशल विकास कार्यक्रम।
  • अनिवार्य सामाजिक समावेशन: अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (50%), महिलाएं (33%), और विकलांग व्यक्ति (5%)।
  • न्यूनतम 70% नियोजन (न्यूनतम 50% वेतन रोजगार और अधिकतम 20% स्व-रोजगार)।
  • नियुक्त अभ्यर्थियों को न्यूनतम वेतन या उससे अधिक के अनुसार वेतन दिया जाता है। नियुक्त अभ्यर्थियों को नियोजन पश्चात सहायता और प्रतिधारण सहायता।

3. लक्षित समूह:

डीडीयू-जीकेवाई के लिए लक्षित समूह 15-35 आयु वर्ग के गरीब ग्रामीण युवा हैं। हालांकि, महिला अभ्यर्थियों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी), विकलांग व्यक्तियों (पीडब्लूडी), ट्रांसजेंडर और अन्य विशेष समूहों जैसे पुनर्वासित बंधुआ मजदूर, तस्करी के शिकार व्यक्ति, हाथ से मैला ढोने वाले, ट्रांसजेंडर, एचआईवी प्रभावित लोगों आदि के लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष होगी।

 

4. मुख्य उपलब्धियां:

  • डीडीयू-जीकेवाई वर्तमान में 27 राज्यों और 4 संघ राज्य क्षेत्रों में लागू की जा रही है और 466 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझेदारी में 606 परियोजनाओं के तहत इसके 2369 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र (तथापि, 611 कार्यात्मक) हैं, जो 37 क्षेत्रों की 816 से अधिक रोजगार भूमिकाओं से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
  • वास्तविक प्रगति: डीडीयू-जीकेवाई की शुरुआत से लेकर 31.10.2025 तक कुल 17.92 लाख अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, और 11.64 लाख अभ्यर्थियों (जिसमें 575 विदेशी नियोजन शामिल हैं) को नियोजित किया गया है ।
  • वित्तीय प्रगति: डीडीयू-जीकेवाई की शुरुआत से लेकर 31.10.2025 तक कुल ₹779667.03 लाख की राशि जारी की गई है।
  • कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान, 31.10.2025 तक कुल 82272 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, और 37035 अभ्यर्थियों को नियोजित दिया गया है।

5.ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI)

योजना की पृष्ठभूमि एवं अवलोकन

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) सार्वजनिक क्षेत्र/निजी बैंकों के प्रायोजन में, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के सहयोग से स्थापित जिला-स्तरीय समर्पित प्रशिक्षण केंद्र हैं। यह योजना ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क, अल्पकालिक, आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिसमें आवास एवं भोजन की सुविधाएँ शामिल हैं। प्रशिक्षण मांग-आधारित है तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) अनुरूप पाठ्यक्रमों के अनुरूप संचालित किया जाता है, जिसमें कृषि, उद्योग, सेवाएँ एवं स्थानीय आवश्यकता के अनुसार प्रासंगिक व्यवसाय/व्यापार सम्मिलित हैं।
प्रशिक्षण उपरांत, स्वरोजगार, सूक्ष्म उद्यम स्थापना अथवा वेतन रोजगार को सुगम बनाने हेतु प्रशिक्षार्थियों को निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया जाता है, जिसमें बैंकों के माध्यम से ऋण संयोजन पर विशेष बल दिया जाता है। आरसेटी अन्य कौशल कार्यक्रमों से इस दृष्टि से भिन्न हैं कि इनके पास स्वयं का समर्पित आधारभूत ढाँचा (भूमि एवं भवन—भारत सरकार के अनुदान से समर्थित) उपलब्ध है, जबकि अन्य कार्यक्रम प्रायः किराये की सुविधाओं पर निर्भर होते हैं।

योजना के उद्देश्य

• 18–50 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को निःशुल्क, आवासीय एवं मांग-आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।
• उद्यमिता विकास एवं बैंकों के साथ ऋsण संयोजन के माध्यम से प्रशिक्षार्थियों को स्वरोजगार उद्यम अपनाने में सक्षम बनाना।
• प्रशिक्षण उपरांत 1–2 वर्षों तक सहायता प्रदान कर सतत आजीविका सुनिश्चित करना।
• अधिकतम परिणाम प्राप्त करने हेतु अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों (एनआरएलएम, पीएमएवाई-जी, एमजीएनरेगा-उन्नति, पीएम-वीकास, एमएसडीई, एमएसएमई, जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), केवीआईसी आदि) के साथ अभिसरण करना।

योजना की विशिष्ट विशेषताएँ

• आवास एवं भोजन तथा यात्रा भत्ता सहित निःशुल्क, पूर्णकालिक आवासीय प्रशिक्षण।
• पारदर्शिता हेतु आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)।
• कौशल पंजी ऐप के माध्यम से अभ्यर्थी पंजीकरण।
• 70 पाठ्यक्रम (65 एनएसक्यूएफ-संरेखित + 5 विशेष पाठ्यक्रम, जिन्हें MoRD द्वारा अनुमोदित)।
• स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित प्रशिक्षण मॉड्यूल।
• निपटान/स्थापना सुनिश्चित करने हेतु प्रशिक्षण उपरांत अधिकतम 2 वर्षों तक सहायता और अनुवर्ती कार्रवाई।
• बैंकों के साथ ऋण संयोजन की सुविधा; उद्यमिता पर सशक्त फोकस।
• महिलाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजनों (PwDs), स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों एवं अल्पसंख्यकों के लिए विशेष प्रावधान।

भौतिक उपलब्धियाँ (अक्टूबर, 2025 तक)

• कुल संस्थान: 27 राज्यों एवं 6 केंद्र शासित प्रदेशों में 625 आरसेटी, जो 612 जिलों को आच्छादित करते हैं।
• कुल प्रशिक्षित: 59 लाख ग्रामीण युवा।
• कुल निपटान/स्थापना: 43 लाख (स्वरोजगार/वेतन रोजगार के माध्यम से)।

आरसेटी 2.0 के अंतर्गत प्रमुख परिवर्तन (वित्त वर्ष 2025–26 से प्रभावी)

• ऋण संयोजन का लक्ष्य बढ़ाकर 50%।
• वास्तविक समय में पारदर्शिता के लिए डिजिटल शासन प्रणाली।
• राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) -संरेखित पाठ्यक्रमों की विस्तारित सूची।

6. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा योजना)

वित्त वर्ष 2025-26 की महत्वपूर्ण उपलब्धियां और पहलें

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा योजना) एक ऐसा अधिनियम है जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल श्रमकार्य करने के इच्छुक हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा में वृद्धि करना है।

उद्देश्य

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा योजना) के उद्देश्य निम्‍न हैं:

1. मांग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम  100 दिनों का अकुशल श्रम रोजगार प्रदान करना जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित गुणवत्ता और स्थायित्व की उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण होता है;

2. गरीबों के आजीविका संसाधन आधार को मजबूत करना;

3. सामाजिक समावेशन को सक्रिय रूप से सुनिश्चित करना; तथा

4. पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) को मजबूत बनाना।

 

महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत उपलब्धियां:

क्र. सं.

संकेतक

वित्तीय वर्ष 2025-26

(01 ​​अप्रैल से 02.12.2025 तक)

1.

सृजित श्रम दिवस (करोड़ में)

161.6

2.

जारी कुल केंद्रीय राशि (करोड़ रुपये में)

69,194.59

3.

8 दिनों के भीतर तैयार किए गए एफटीओ का %

95.31

4.

पूरे किए गए कार्यों की संख्या (लाख में)

49.62

5.

कुल में से महिला श्रम दिवस का %

56.73

6.

कुल श्रम दिवसमें से अ.जा. श्रम दिवस का %

17.37

7.

कुल श्रम दिवसमें से अ.ज.जा. श्रम दिवस का %

19.03

8.

श्रेणी ख कार्यों का %

60.59

महात्मा गांधी नरेगा में प्रमुख पहल/प्रमुख कार्यकलाप:

  1. राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी सेवा (एनएमएमएस): जियो-टैग किए गए और दिन में दो बार टाइम-स्टैम्प वाले फोटोग्राफ के साथ महात्मा गांधी नरेगा कार्यस्थलों (व्यक्तिगत लाभार्थी कार्यों को छोड़कर) पर श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा प्रदान करती है। नवंबर माह में एनएमएमएस ऐप के उपयोग के माध्यम से 95.09% (पहला पखवाड़ा) और 91.50% (दूसरा पखवाड़ा) उपस्थिति दर्ज की गई है।
  2. एरिया ऑफिसर निगरानी दौरा एप्लिकेशन: यह ऐप राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के अधिकारियों को अपने फील्ड दौरे के निष्कर्षों को ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है और अधिकारियों को दौरा किए गए सभी कार्यस्थलों के लिए टाइम स्टैम्प लगे हुए और जियो टैग किए गए फोटोग्राफ रिकॉर्ड करने की सुविधा प्रदान करता है। क्षेत्र अधिकारी निरीक्षण ऐप के उपयोग के माध्यम से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा सभी राज्यों में वित्त वर्ष 2025-26 में माह नवंबर, 25 तक कुल 16,67,847 कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया है।
  3. युक्तधारा: जीआईएस आधारित योजना निर्माण उपकरण - ग्राम पंचायत स्तर पर जीआईएस आधारित योजना निर्माण को सरल बनाने के लिए, इसरो-एनआरएससी के सहयोग से एक भू-स्थानिक योजना पोर्टल युक्तधारा विकसित किया गया है। युक्तधारा का उपयोग करके ग्राम पंचायत योजना निर्माण पायलट आधार पर शुरू किया गया है, जिसमें प्रति ब्लॉक एक ग्राम पंचायत को शामिल किया गया है। कुल 6,709 ग्राम पंचायतों की पहचान की गई है और उन सभी ने युक्तधारा का उपयोग करके अपनी योजना निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।

iv. सिक्योर - रोजगार की ग्रामीण दरों का उपयोग करके अनुमानित गणना करने के लिए सॉफ्टवेयर: योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों की गणना के अनुमान के लिए ऐप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है।

v. जियोमनरेगा: इस एप को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करके परिसंपत्ति निर्माण के "पहले", "दौरान" और "बाद" के चरणों में जियोटैगिंग करके परिसंपत्तियों के निर्माण की स्थिति का पता लगाने के लिए विकसित किया गया है। अब तक कुल 6.44 करोड़ परिसंपत्तियों को जियोटैग किया जा चुका है।

vi. जलदूत ऐप: यह ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) को वर्ष में दो बार (मानसून पूर्व और मानसून के बाद) चयनित कुओं के जल स्तर को मापने की सुविधा प्रदान करता है। वर्ष 2025 में अब तक, 2.57 लाख गांवों और 1.08 लाख ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए मानसून के बाद में लगभग 3.92 लाख कुओं के जलस्तर का डाटा रिकॉर्ड किया गया है।

vii. जनमनरेगा ऐप: यह अपने नागरिकों को सूचना के सक्रिय प्रकटीकरण में सहायक होने  के साथ-साथ महात्मा गांधी नरेगा योजना के कार्यान्वयन के संबंध में एक प्रतिक्रिया तंत्र भी है।

viii. मिशन अमृत सरोवर: माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिनांक 24 अप्रैल 2022 को मिशन अमृत सरोवर का शुभारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण को मजबूत करने हेतु प्रत्येक ग्रामीण जिले (दिल्ली, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप को छोड़कर) में 75 अमृत सरोवर का निर्माण या कायाकल्प करना है, जिसमें 15 अगस्त 2023 तक देश भर में 50,000 सरोवर को लक्षित किया गया है। पहले चरण के तहत, 68,000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण या कायाकल्प किया गया था, जिसमें 46,000 से अधिक का कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजना के माध्यम से पूरा किया गया था। जैसे-जेसे हम इस मिशन के लिए अपने विस्तारित लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे, सामुदायिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए और अधिक सरोवरों का निर्माण और कायाकल्प किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि ये सरोवर न केवल स्थयी जल संसाधनों के रूप में काम करें, बल्कि मिशन अमृत सरोवर के चरण-II में जीवंत सामुदायिक केंद्र भी बनें।

माह नवंबर 2025 तक, चरण-II के तहत, 15,892 से अधिक कार्यस्थलों की पहचान की गई है और 1,818 कार्य शुरू हो गए हैं। अमृत सरोवर स्थलों पर 11.5 लाख से अधिक लोगों की सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के साथ विश्व पर्यावरण दिवस और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, 12 लाख से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करते हुए "एक सरोवर, एक संकल्प - जल संरक्षण का" उद्देश्य के साथ स्वतंत्रता दिवस 2025 मनाया गया, और संविधान दिवस (26 नवंबर 2025) को संवैधानिक मूल्यों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियानों से संबंधित कार्यकलापों के साथ मनाया गया।

x.   प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी): प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए, मजदूरी भुगतान में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली को अपनाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत, मजदूरी के 99% से अधिक भुगतान इलेक्ट्रॉनिक रूप से डीबीटी प्रणाली के माध्यम से श्रमिकों के खातों में जमा किए जाते हैं।

Xi     आधार भुगतान ब्रिज सिस्टम: डीबीटी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लाभार्थियों के खातों में आधार भुगतान ब्रिज सिस्टम के माध्यम से मजदूरी का भुगतान किया जाता है। कुल 12.17 करोड़ सक्रिय श्रमिकों की तुलना में 99.67% सक्रिय श्रमिकों का आधार जोड़ा गया है।

xii.   आधार आधारित ई-केवाईसी सत्यापन: महात्मा गांधी नरेगा के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और प्रामाणिकता को सुदृढ़ करने के लिए, सभी सक्रिय श्रमिकों का आधार आधारित ई-केवाईसी सत्यापन एनएमएमएस ऐप के माध्यम से शुरू किया गया है।

यह सुधार श्रमिकों की प्रामाणिक पहचान सुनिश्चित करता है, डुप्लिकेट या नकली जॉब कार्ड को समाप्त करता है, और आधार प्रमाणीकरण को सीधे क्षेत्र संचालन में एकीकृत करके सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाता है। परिणामतः केवल वास्तविक श्रमिक ही मजदूरी प्राप्त करने में सक्षम होते हैं, जिससे धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और गलत रिपोर्टिंग काफी कम हो जाती है। ई-केवाईसी प्रक्रिया तेज, अधिक विश्वसनीय क्षेत्र सत्यापन की सुविधा भी देती है और उपस्थिति और मजदूरी संवितरण प्रणालियों की सटीकता को बढ़ाती है, जो योजना के कार्यान्वयन में अधिक दक्षता और जवाबदेही में योगदान देती है। महात्मा गांधी नरेगा के तहत दिनांक 30.12.2025 तक सक्रिय श्रमिकों की ई-केवाईसी पूर्णता की स्थिति 71.48% है।

  1. सामाजिक लेखा परीक्षा ग्राम सभा में पंचायत निर्माण ऐप (पीएनए) के साथ एकीकरण: पंचायत निर्माण ऐप (पीएनए) के साथ एकीकृत सामाजिक लेखा परीक्षा इकाइयां सामाजिक लेखा परीक्षा ग्राम सभा की रियल टाइम, जियो-टैग वाली तस्वीरों, वीडियो और प्रस्तावों तथा उपस्थिति को कैप्चर कर रही हैं। इस पहल के चरण I के तहत, 27 एसएयू में से प्रत्येक से एक ग्राम पंचायत का चयन किया गया और प्रायोगित रोलआउट के भाग के रूप में सफलतापूर्वक कवर किया गया। इसी आधार पर चरण II को 1 मई 2025 को शुरू किया गया था, जिसमें सितंबर 2025 तक सभी भाग लेने वाले राज्यों में प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक ग्राम पंचायत को कवर करने के लिए एक व्यापक अधिदेश था। चरण II का दूसरा चक्र वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश भर में 100% ग्राम पंचायतों को कवर करने की पहल को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ दायरे को और विस्तृत करता है। यह संरचित और प्रौद्योगिकी-सक्षम दृष्टिकोण देश भर में सामाजिक लेखा परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही को अधिक सुदृढ़ बना रहा है। अब तक, 39,252 ग्राम पंचायतों को पीएनए प्लेटफॉर्म पर मैप किया गया है, जिनमें से 28,369 को पहले ही सामाजिक लेखा परीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से कवर किया जा चुका है।
  2. केंद्रीय टीमों द्वारा निरीक्षण दौरा: महात्मा गांधी नरेगा के कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 में 25 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 55 जिलों में विशेष निगरानी की गई है। निगरानी टीमों द्वारा 1000 से अधिक कार्यस्थलों का दौरा किया गया है। इन दौरों के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
  1. गैर-अनुमेय कार्यों को करना
  2. कार्यों का विभाजन
  3. कार्यों की पुनरावृत्ति/दोहराव
  4. कार्यों की खराब गुणवत्ता और स्थायित्व
  5. मंत्रालय द्वारा जारी प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन न करना

कार्यस्थलों की निगरानी के निष्कर्षों के आधार पर, मंत्रालय ने महात्मा गांधी नरेगा के बेहतर कार्यान्वयन के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को विभिन्न एड़वाइजरी जारी किए, जिसमें निजी लाभार्थी कार्यों संबंधी परामर्श, ग्रामीण संपर्कता कार्यों के बेहतर कार्यान्वयन के लिए परामर्श और भूमि विकास कार्यों के कार्यान्वयन और समीक्षा/सत्यापन से संबंधित परामर्श शामिल थी।

इसके अलावा, मनरेगा के तहत अधिक खतरे वाले या संदिग्ध कार्यों की पहचान करने के लिए कार्य निगरानी मॉड्यूल (डब्ल्यूएमएम) विकसित करने का भी निर्णय लिया गया था, जिसके लिए बारीकी से जांच, निरीक्षण और क्षेत्र सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है। कई अनुप्रयोगों और निगरानी प्रणालियों से चिन्हित कार्यों को कैप्चर और समेकित करके, डब्ल्यूएमएम यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे कार्यों को तुरंत प्राथमिकता दी जाए, व्यवस्थित रूप से सत्यापित किया जाए और उचित रूप से कार्रवाई की जाए। एक बार जब इस ढांचे के तहत कार्य को हरी झंडी मिल जाती है, तो आगे के वास्तविक  भुगतान को फ्रीज कर दिया जाएगा और नरेगासॉफ्ट के माध्यम से किसी भी भुगतान की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि क्षेत्र सत्यापन कम से कम कार्यक्रम अधिकारी स्तर पर पूरा नहीं हो जाता, इसके बाद वर्कफ्लो आधारित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत नही की जाती और उच्च अधिकारियों द्वारा उनकी स्वीकृति नहीं दी जाती।

विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी - वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 का अधिनियमन

इस वर्ष के दौरान, सरकार ने ग्रामीण रोजगार, स्थायी आजीविका और सत्तत सार्वजनिक संपत्ति के निर्माण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी - वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की  शुरूआत करके एक परिवर्तनकारी नीति पहल की। मनरेगा से संस्थागत सीख के आधार पर, अधिनियम ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक की मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है।

नए अधिनियम में परिकल्पित आयोजना विकेंद्रीकृत, सहभागी और अंतिम स्तर पर है। ग्राम पंचायतों द्वारा ग्राम सभा के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (वीजीपीपी) तैयार की जाएंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समुदाय से ही प्राथमिकताएं सामने आएं। इन योजनाओं को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्टैक (वीबीएनआरआई) में समेकित किया गया है। - वीजीपीपी से आने वाले प्रस्तावित कार्यों का समेकित एकत्रीकरण, जिला और राज्य स्तरों पर एकत्रित किया गया है, और कार्यों के चार विषयगत डोमेन अर्थात्: जल सुरक्षा, कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा, और अति खराब मौसम की घटनाओं और आपदाओं को कम करने के लिए विशेष कार्य  के साथ संरेखित किया गया है। इसकी रुपरेखा स्थायी और उत्पादक ग्रामीण संपत्ति बनाने के लिए क्षेत्रों में अभिसरण को भी बढ़ावा देता है। अधिनियम की एक प्रमुख विशेषता सार्वजनिक कार्यों के माध्यम से सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण और संतृप्ति पर ध्यान केंद्रित करना है जो सामूहिक रूप से एक व्यापक ग्रामीण बुनियादी ढांचे के पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करते हैं।

अधिनियम मानक आवंटन को संस्थागत बनाता है, जवाबदेही को सुदृढ़ करता है, और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जीआईएस/अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी-आधारित सत्यापन, रीयल-टाइम एमआईएस निगरानी और सुदृढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा तंत्र सहित कई प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों को सुदृढ़ करता है। इन सुधारों को निधियों के  उपयोग में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और रिसाव को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

वीबी-जी राम जी अधिनियम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता  है कि ग्रामीण रोजगार उच्च आय, अनुकूल आजीविका और सुदृढ़ ग्राम अर्थव्यवस्थाओं में परिवर्तित हो। इसकी  शुरुआत विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ ग्रामीण रोजगार, बुनियादी ढांचे के विकास और आजीविका सुरक्षा को संरेखित करने में एक प्रमुख मील का पत्थर साबित होगा।

7. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी)

भारत के संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा के भीतर बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और अक्षमता के मामले में और अवांछित अभाव के अन्य मामलों में अपने नागरिकों को सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का निर्देश देता है। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करने की दिशा में दिनांक 15 अगस्त, 1995 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) प्रभावी हुआ। एनएसएपी का उद्देश्य इस कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा निर्धारित किए गए गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) परिवारों के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग व्यक्तियों तथा मुख्य जीविकोपार्जक की मृत्यु होने की दशा में बेसहारा परिवारों को आधारभूत स्तर की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

2. यह कार्यक्रम वर्षों के दौरान अपनी संरचना, पात्रता मानदंड और वित्त पोषण पैटर्न के संदर्भ में कई बदलावों से गुजरा है। वर्तमान में, इसमें पाँच अलग-अलग योजनाएँ शामिल हैं। इन योजनाओं में से प्रत्येक के तहत पात्रता मानदंड और प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता की मात्रा का ब्यौरा इस प्रकार है:

 

योजना

सहायता राशि

पात्रता मानदंड

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना

200 रु

60-79 वर्ष के आयु वर्ग के बीपीएल वरिष्ठ नागरिक

500 रु

80 वर्ष और उससे अधिक आयु के बीपीएल वरिष्ठ नागरिक

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

300 रु

40-79 वर्ष के आयु वर्ग की बीपीएल विधवाएं

500 रु

80 वर्ष और उससे अधिक आयु की बीपीएल विधवा

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना

300 रु

18-79 वर्ष के आयु वर्ग के 80% विकलांगता वाले बीपीएल व्यक्ति

500 रु

80 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के बीपीएल विकलांगता पेंशनभोगी

राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (एनएफबीएस)*

20,000 रु

18-59 वर्ष की आयु वाले मुख्य आय अर्जक की मृत्यु पर बीपीएल परिवारों के उत्तरजीवी मुखिया के लिए

अन्नपूर्णा*

10 किलोग्राम खाद्यान प्रति माह

उन बीपीएल वरिष्ठ नागरिकों को जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही है।

* एनएफबीएस और अन्नपूर्णा मांग आधारित योजनाएं हैं।

 

3. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से अनुरोध किया गया है कि वे तीन पेंशन योजनाओं के तहत कम से कम समान योगदान दें। वर्तमान में, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र ₹50 से ₹5700 प्रति माह तक का योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में, एनएसएपी 3.09 करोड़ बीपीएल लाभार्थियों को शामिल करती है, जिसमें प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए लाभार्थियों की संख्या पर योजना-वार एक अधिकतम सीमा निर्धारित है। एनएसएपी के तहत योजना-वार सहायता डिजिटल लाभार्थियों की संख्या या राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की निर्धारित सीमा, जो भी कम हो, उस आधार पर स्वीकृत की जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान, एनएसएपी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को ₹9652 करोड़ की राशि जारी की गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एनएसएपी योजना हेतु ₹9652.00 करोड़ की राशि आवंटित की गई है, जिसमें से 30.11.2025 तक राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को ₹5564.00 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

कार्यक्रम के तहत प्रमुख पहले और उपलब्धियां

  • एनएसएपी को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए कई प्रयास (नीतिगत सुधार, बजटीय आवंटन में वृद्धि, सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग आदि) किए गए हैं। अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 (30.11.2025 तक) तक इस कार्यक्रम की उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्यौरा नीचे दिया गया है:
  • एनएसएपी की योजनाओं के तहत शामिल किए गए लाभार्थियों की संख्या और अप्रैल से नवंबर 2025 (30.11.2025 तक) तक जारी की गई निधि के संदर्भ में वास्तविक और वित्तीय उपलब्धियां नीचे दी गई हैं।

वर्ष

2025-26 (अप्रैल 2025 से नवंबर 2025)

शामिल लाभार्थी (लाख में)

301.06

जारी निधि (रु करोड़ में)

5564.00

  • एनआईसी, ग्रामीण विकास विभाग ने एक केंद्रीय एमआईएस – राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम -पेंशन पेंशन भुगताण प्रणाली (एनएसएपी-पीपीएस) विकसित किया है, जो स्रोत बिंदु से लेकर भुगतान बिंदु तक शुरू से अंत तक के लेनदेन को सुगम बनाता है। यह वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग लाभार्थियों का विवरण भी प्रदान करता है।
  • लाभार्थियों का डेटा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा डिजिटाइज़ किया जाता है। राज्यों को निधि एनएसएपी पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटाइज़्ड लाभार्थियों की संख्या के आधार पर जारी की जाती है। पिछले कुछ वर्षों के निरंतर प्रयासों से डिजिटलीकरण कुल राज्य सीमा के 96-97% तक पहुँच गया है। वर्तमान में, लगभग सभी संभावित लाभार्थियों का 100% डेटा डिजिटाइज़ किया जा चुका है।
  • वर्तमान में, 18 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र समग्र भुगतान के लिए एनएसएपी-पीपीएस का उपयोग कर रहे हैं और 14 अन्य राज्य वेब सर्विस के माध्यम से एनएसएपी-पीपीएस पर लेनदेन संबंधी डेटा की रिपोर्ट कर रहे हैं।
  • 4 और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों, नामत: अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली और दमन एवं दीव संघ राज्य क्षेत्रों को इस सिस्टम से जोड़ने के प्रयास जारी हैं।
  • एनएसएपी-पीपीएस राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को एनएसएपी लाभार्थियों के आधार और एसईसीसी टीआईएन नंबर दर्ज करने की सुविधा भी देता है। वर्तमान में, पंजीकृत पेंशनभोगियों के आधार और एसईसीसी टीआईएन की सीडिंग की स्थिति क्रमशः 91.45% और 28.83% है।
  • ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा एनएसएपी पेंशन लाभार्थियों के डिजिटल जीवन प्रमाणन के लिए आधार-आधारित मोबाइल एप्लिकेशन 15 जुलाई, 2025 को शुरू किया गया था। डीएलसी दिशानिर्देश और उपयोगकर्ता पुस्तिका राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भेज दी गई है। दिनांक 10.12.2025 तक पूरे भारत में कुल 44.00 लाख लाभार्थियों का डीएलसी के माध्यम से सत्यापन किया जा चुका है। एनएसएपी-पीपीएस से जुड़े कुछ राज्यों ने डीएलसी एप्लिकेशन के माध्यम से राज्य की योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन को भी शामिल करने का अनुरोध किया है। सचिव (ग्रामीण विकास) ने एनएसएपी-पीपीएस पर मौजूद राज्यों के लिए राज्य पेंशन योजनाओं को डीएलसी सत्यापन में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे सभी मौजूदा लाभार्थियों का डीएलसी दिनांक 05.01.2026 से पहले अनिवार्य रूप से पूरा करने के लिए विशेष अभियान आयोजित करें।
  • तकनीकी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, एक नागरिक केंद्रित मोबाइल ऐप 'उमंग' विकसित किया गया है ताकि लाभार्थियों को (i) राज्य के अतिरिक्त योगदान के साथ एनएसएपी योजनाओं, (ii) नए आवेदकों के नामांकन, आवेदनों की ट्रैकिंग और स्वीकृति तथा भुगतान की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान की जा सके।

 

8. जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा)

सतत और एकीकृत ग्रामीण विकास के लिए, एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना और अभिसरण के माध्यम से त्वरित ग्रामीण विकास के लिए एक समान लक्ष्य के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों की गैर-वैधानिक योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना अनिवार्य है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, संसद में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय सरकारों (पंचायती राज संस्थानों/नगर निकायों) के बीच कुशल और समयबद्ध विकास की प्राप्ति हेतु बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सांसदों की अध्यक्षता में 776 जिलों में जिला स्तरीय दिशा समितियों का गठन किया गया है। इसी तरह, राज्य सरकारों द्वारा राज्य में उच्चतम स्तर पर हल किए जाने वाले मामलों में भाग लेने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री सहित राज्य स्तरीय दिशा समितियों का गठन किया जाता है। दिशा, विकास कार्यक्रमों के समन्वित कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय, राज्य और स्थानीय प्रयासों को समेकित करके समग्र सरकारी दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। मंत्रालय ने इन दिशा समितियों को मजबूती देने के लिए 35 मंत्रालयों की 101 योजनाओं वाला एक अत्याधुनिक डैशबोर्ड भी तैयार किया है जो सबसे निचले स्तर (गांव तक) योजनाओं की समय श्रृंखला प्रगति डेटा प्रदान करता है जिसमें रुझान, अन्य भौगोलिक सीमाओं के साथ तुलनात्मक विश्लेषण, विभिन्न प्रकार के चार्ट, टेबल आदि शामिल हैं।

दिशा समितियां सार्वजनिक प्रतिनिधियों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और सरकारी अधिकारियों को एक साथ लाते हुए विभिन्न केंद्रीय योजनाओं से संबंधित कार्यान्वयन चुनौतियों को हल करने के लिए सहकारी संघवाद का अनुकरणीय मॉडल हैं। इसके गठन के बाद, शासन और जवाबदेही को मजबूती देने में उनकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित करते हुए, देश भर में 7800 से अधिक जिला स्तरीय बैठकें और 38 राज्य स्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं। दिशा समितियों की बढ़ती लोकप्रियता मंत्रालयों द्वारा इस व्यापक आधार के तहत अपनी योजनाओं को शामिल करने के बढ़ते अनुरोधों से स्पष्ट होती है।

1 जनवरी 2025 से अब तक की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • वर्ष के दौरान जिले के माननीय सांसद की अध्यक्षता में जिला स्तरीय दिशा बैठकों की कुल 1071 बैठकें बुलाई गईं।
  • वर्ष के दौरान राज्य/जिला स्तरीय दिशा समितियों के लिए कुल 286 गैर-आधिकारिक सदस्यों को नामित किया गया।
  • राज्य के माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कुल 8 राज्य स्तरीय दिशा समिति की बैठकें आयोजित की गईं।
  • जिला स्तरीय दिशा समितियों के लिए कुल 27 माननीय राज्य सभा सदस्यों को अध्यक्ष/सह-अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया।
  • वर्ष 2025 के दौरान दिशा डैशबोर्ड में कुल 9 योजनाएं शामिल हैं ।

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MS


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