रक्षा मंत्रालय
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया
रक्षा अधिग्रहण परिषद और सेवा खरीद बोर्ड ने 2025 में भारतीय उद्योगों द्वारा निर्मित लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपए की डीआरडीओ प्रणालियों को शामिल करने के लिए आवश्यकता स्वीकृति दी है जो एक वर्ष में अब तक का सबसे उच्चतम आंकड़ा है: डीआरडीओ अध्यक्ष
26,000 करोड़ रुपए मूल्य के अधिग्रहण के लिए डीआरडीओ के उत्पादन भागीदारों के साथ 11 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए
प्रविष्टि तिथि:
01 JAN 2026 9:26PM by PIB Delhi
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 1 जनवरी, 2026 को अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा किया और 2025 में डीआरडीओ की उपलब्धियों और 2026 के लिए तय किए गए लक्ष्यों की समीक्षा की। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने डीआरडीओ भवन में डीआरडीओ के सभी कर्मचारियों को संबोधित किया। इसका सीधा प्रसारण डीआरडीओ की सभी प्रयोगशालाओं में किया गया।
डॉ. कामत ने डीआरडीओ कर्मचारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डीआरडीओ के प्रयासों ने 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित अगली पीढ़ी की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ के अनुसंधान एवं विकास से उत्पन्न अपार क्षमता रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम कर रही है।
डीआरडीओ के अध्यक्ष ने 2025 में संगठन की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए बताया कि विकसित की गई कई प्रणालियां उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाई जा चुकी हैं, उनका समावेश किया गया है या उन्हें सौंपा गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डीआरडीओ को देश की भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए रक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने संतोष जताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) और सेवा खरीद बोर्ड (एसपीबी) ने डीआरडीओ द्वारा विकसित लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपए की विभिन्न प्रणालियों को शामिल करने के लिए 22वीं आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की है, जिनका निर्माण भारतीय उद्योगों के माध्यम से किया जाएगा। यह किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड है।
जिन उल्लेखनीय प्रणालियों के लिए एनओएन प्रदान किया गया है, उनमें इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (आईएडीडब्ल्यूएस), कन्वेंशनल बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम, क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम 'अनंत शास्त्र', लॉन्ग रेंज एयर टू सरफेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (एलआरएएससीएम), इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (आईडीडीआईएस) एमके II, बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएएम) एस्ट्रा एमके-II, एंटी-टैंक एनएजी मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2, एडवांस्ड लाइट वेट टॉरपीडो, प्रोसेसर-बेस्ड मोर्ड माइन - नेक्स्ट जेनरेशन (पीबीएमएम एनजी), एयर-बोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) एमके-1 ए, माउंटेन रडार, फुल मिशन सिमुलेटर फॉर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) एमके-1 ए शामिल हैं।

डॉ. कामत ने बताया कि नाग मिसाइल प्रणाली, अश्विनी लो लेवल ट्रांसपोर्टेबल रडार, हवाई रक्षा अग्नि नियंत्रण रडार (एडीएफसीआर), एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए एरिया डिनायल मुनिशन (एडीएम) टाइप-1 और हाई एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड (एचईपीएफ) एमके-आई (उन्नत), इन्फैंट्री फुट ब्रिज फ्लोटिंग, वारगेमिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर एंड अलार्म (एसीएडीए) और एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएटीजीएस) के लिए डीआरडीओ के उत्पादन भागीदारों के साथ 26,000 करोड़ रुपए मूल्य के 11 अधिग्रहण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित कई उत्पादों को 2025 में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की सेवाओं में शामिल किया गया था।
डीआरडीओ अध्यक्ष ने यह भी बताया कि कई प्रणालियों के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण या तो 2025 में पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। इनमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल 'प्रलय', सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश एनजी, निर्देशित विस्तारित दूरी की रॉकेट 'पिनाका', उन्नत हल्के वजन का टॉरपीडो, पनडुब्बियों के लिए एकीकृत लड़ाकू सूट, विस्तारित दूरी की पनडुब्बी रोधी रॉकेट (ईआर-एएसआर), मानव-चालित टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल (एमपीएटीजीएम), मैदानी और रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सीमा निगरानी प्रणाली (बीओएसएस), भारतीय सेना के लिए सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो और सीबीआरएन जल शोधन प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई अन्य प्रणालियों के विकास परीक्षण या तो पूरे हो चुके हैं या विभिन्न चरणों में हैं। इनमें भारतीय लाइट टैंक, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण लघु दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल, लघु दूरी की नौसेना रोधी मिसाइल, भूमि पर हमला करने वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल, वायु से सतह पर मार करने वाली मिसाइल रुद्रम-2, यूएवी द्वारा प्रक्षेपणित सटीक निर्देशित मिसाइल-V3, एमबीटी अर्जुन के लिए तोप द्वारा प्रक्षेपणित रोधी टैंक निर्देशित मिसाइल, लंबी दूरी का ग्लाइड बम 'गौरव', लंबी दूरी का रडार, वीएचएफ निगरानी रडार, उच्च शक्ति माइक्रोवेव प्रणाली, मध्यम दूरी के माइक्रोवेव ऑब्स्क्यूरेंट चैफ रॉकेट, एलसीए पर ऑन बोर्ड ऑक्सीजन जनरेटिंग सिस्टम-केंद्रित एकीकृत जीवन समर्थन प्रणाली और डॉर्नियर-228 विमान में स्वचालित अग्नि सुरक्षा प्रणाली शामिल हैं।
डॉ. कामत ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रयोगशालाएं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगी कि उपयोगकर्ता परीक्षणों और विकासात्मक परीक्षणों के अंतिम चरण में मौजूद अधिकांश प्रणालियां 2026 तक उपयोगकर्ताओं द्वारा स्वीकार कर ली जाएं ताकि वे उपयोग के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने यह भी बताया कि डीआरडीओ अपनी प्रणालियों, उप-प्रणालियों और घटकों के निर्माण के लिए उद्योग जगत के साथ साझेदारी कर रहा है और अब तक भारतीय उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए 2,201 लाइसेंसिंग समझौते (एलएटीओटी) सौंपे जा चुके हैं। इनमें से 245 एलएटीओटी पर 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे। पिछले वर्ष मिशन मोड परियोजनाओं के लिए 13 नए डीसीपीपी/पीए चुने गए थे। अब तक कुल 145 डीसीपीपी स्वीकृत किए जा चुके हैं।
डीआरडीओ ने अब उद्योगों के लिए भी अपनी परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध करा दी हैं और 2025 में निजी उद्योगों/डीपीएसयू के लिए 4,000 से अधिक परीक्षण किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डीआरडीओ के 15 उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र चिन्हित अनुसंधान क्षेत्रों में प्रवर्तक अनुसंधान गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं और बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। 2025 में, 228 करोड़ रुपए की लागत वाली 66 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें 214 शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। इससे कुल स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या 341 हो गई हैं जिनकी लागत 1,218 करोड़ रुपए है और इनमें 1,255 शोधकर्ता और 65 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। उन्होंने 2025 में लागू किए गए सुधार उपायों का भी जिक्र किया।
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पीके/केसी/बीयू/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2210756)
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