स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने राजस्थान और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की


श्री जे.पी. नड्डा ने किफायती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों की सराहना की

श्री जे.पी.नड्डा ने जन औषधि केन्द्रों और अमृत फार्मेसी के विस्तार पर जोर दिया

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर अंतिम छोर की आपूर्ति तक दवाओं के मजबूत विनियमन की जरूरत पर जोर दिया

श्री जे.पी. नड्डा ने टीबी मुक्त भारत के लिए राष्ट्रीय संकल्प को दोहराया और जिला एवं ब्लॉक स्तर की रणनीतियों का आह्वान किया

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सक्रिय तालमेल बढ़ाने हेतु विधायकों के लिए कार्यशाला का प्रस्ताव दिया

श्री नड्डा ने क्षय रोग के उन्मूलन में तेजी लाने में पीपीपी मॉडल और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण की भूमिका को रेखांकित किया

प्रविष्टि तिथि: 02 JAN 2026 7:19PM by PIB Delhi

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने स्वास्थ्य सेवा के आपूर्ति तंत्र का मूल्यांकन करने और प्राथमिकता वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी पहलों के कार्यान्वयन में तेजी लाने हेतु आज राजस्थान और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की। चर्चा सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, रोगी-केन्द्रित सेवाओं को बेहतर बनाने, नियामक ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में क्षय रोग के उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने पर केन्द्रित  थी।

समीक्षा के दौरान, श्री नड्डा ने दवाओं के विनियमन से जुड़ी एक मजबूत एवं सतर्क प्रणाली की अहम भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि गुणवत्ता, सुरक्षा और जनता का भरोसा सुनिश्चित करने हेतु मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर अंतिम छोर की आपूर्ति तक की प्रक्रिया में समग्र निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने नियामक संबंधी उत्कृष्ट तरीकों को अपनाने का आहवान किया और मरीजों की संतुष्टि, नियमों के पालन तथा नियामक संबंधी निगरानी को लगातार एवं निरंतर प्रयास के तौर पर किए जाने पर जोर दिया चाहिए। मुफ्त दवाओं एवं निदान संबंधी  पहलों की प्रगति का समीक्षा करते हुए, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दोनों राज्यों से आपूर्ति – श्रृंखला की कमियों को दूर करने और निगरानी व्यवस्था में मौजूद कमियों को ठीक करने का आग्रह किया।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन राज्यों में और अधिक जन औषधि केन्द्र और अमृत फार्मेसी स्टोर स्थापित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क को मजबूत करने से इन राज्यों के लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाली और सस्ती दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। बैठक के दौरान, राजस्थान राज्य ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना आबादी के हिसाब से, खासकर बिखरी हुई बस्तियों को ध्यान में रखते हुए होनी चाहिए ताकि कारगर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कवरेज सुनिश्चित की जा सके।

श्री नड्डा ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि समय पर और अच्छी गुणवत्ता वाली जांच प्रभावी स्वास्थ्य सेवा की आपूर्ति की आधारशिला है और प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक, सभी स्तर की देखभाल में इसका मजबूती से समावेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां क्लिनिकल सेवाएं डॉक्टरों पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन और नियामक संबंधी अनुपालन के लिए पेशेवर प्रबंधन संरचना की जरूरत होती है। ब्लड बैंक, अस्पताल के कामकाज और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर नियामक संबंधी निगरानी को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया।

क्षय रोग के उन्मूलन के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराते हुए, श्री नड्डा ने जिला और प्रखंड स्तर पर विशिष्ट रणनीतियों, जिसमें गहन जांच, निदान, इलाज का पालन और पोषण संबंधी सहायता शामिल है, की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी उन्मूलन के प्रयासों को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए और जमीनी स्तर पर करीबी एवं नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

 

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित करने का भी प्रस्ताव दिया, ताकि उन्हें व्यवथित समीक्षा प्रणाली के जरिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और प्रखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने इस बात को दोहराया कि जवाबदेही को मजबूत करने, स्वास्थ्य संबंधी नतीजों को बेहतर बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में विश्वास बनाने के लिए जन भागीदारी बेहद जरूरी है।

राजस्थान और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्रियों ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पूरा सहयोग देने और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर सभी प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लागू करने तथा उनके नतीजों को बेहतर बनाने के लिए काम करने का भरोसा दिलाया।

श्री जेपी नड्डा ने क्षय रोग के उन्मूलन में तेजी लाने और स्वास्थ्य प्रणाली के उपायों को मजबूत करने में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उपायों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल, चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित सहायता के जरिए दोनों राज्यों को केन्द्र सरकार के लगातार समर्थन को भी दोहराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केन्द्र सरकार राज्य-विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए तकनीकी सहायता, क्षमता  निर्माण और मार्गदर्शन संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण के तहत आने वाले दिनों में अन्य राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की परामर्श बैठकें की जाएंगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले पखवाड़े में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्रियों से मुलाकात की थी।

बैठक का समापन दवाओं के विनियमन को बेहतर बनाने, निदान सेवाओं को मजबूत करने, अस्पताल प्रबंधन को पेशेवर बनाने, चिकित्सा सेवा का विस्तार करने और टीबी-मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को तेज करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है।

बैठक में मौजूद राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों में चिकित्सा एवं  स्वास्थ्य विभाग के मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर; चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव सुश्री गायत्री ए. राठौड़; राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) राजस्थान के मिशन डायरेक्टर डॉ. अमित यादव; खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त व  एडिशनल मिशन डायरेक्टर (एनएचएम) राजस्थान डॉ. टी. शुभमंगला; चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल; तथा चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के डायरेक्टर डॉ. रवि प्रकाश शर्मा शामिल थे।

महाराष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल में जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री प्रकाश अबितकर; जन स्वास्थ्य विभाग के सचिव-2 श्री ई. रविंद्रन; स्वास्थ्य सेवा आयुक्त एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) महाराष्ट्र की प्रबंध निदेशक डॉ. कादंबरी बलकावडे; और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. नितिन अम्बाडेकर शामिल थे।

बैठक में केन्द्रीय  स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; अपर सचिव एवं मिशन निदेशक (एनएचएम) सुश्री आराधना पटनायक; भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रजित पुन्हानी; और भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी सहित केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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पीके/केसी/आर 


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