जनजातीय कार्य मंत्रालय
जनजातीय मामलों के मंत्रालय (एमओटीए) ने महाराष्ट्र के नासिक में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के बाद क्षेत्रीय संपर्क के माध्यम से वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास को आगे बढ़ाया
प्रविष्टि तिथि:
02 JAN 2026 8:21PM by PIB Delhi
जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एक एकीकृत, संपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास के संबंध में लिए गए निर्णयों के अनुसरण में मंत्रालय एफआरए शासन के लिए डिजिटलीकरण, भू-स्थानिक एकीकरण और निर्णय-समर्थन प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार-संचालित पहलों में सक्रिय रूप से प्रयासरत है।
इस संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ ने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआईएच) 2025 के 8वें आठवें आयोजन का शुभारंभ किया है। यह एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के माध्यम से जटिल शासन संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए छात्रों के नवाचार का उपयोग करना है। सॉफ्टवेयर श्रेणी के अंतर्गत जनजातीय मामलों के मंत्रालय (एमओटीए) ने व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर), सामुदायिक अधिकार (सीआर) और सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) अधिकारों की एकीकृत निगरानी में सहयोग हेतु एआई-संचालित एफआरए एटलस और वेबजीआईएस-आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) के विकास के लिए एक समस्या विवरण प्रस्तुत किया है। यह विकास मंत्रालय के एफआरए रिकार्डों के डिजिटलीकरण, जियोटैगिंग और संयोजन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
हैकाथॉन के बाद के सहभागिता कार्यक्रम के अंतर्गत और उपरोक्त निर्णयों को जमीनी स्तर पर मान्य करने के लिए 2 जनवरी 2026 को नासिक स्थित कलेक्टर कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनजातीय मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र राज्य जनजातीय विकास विभाग के अधिकारी और पुणे, कुरनूल और इंदौर से भाग लेने वाली एसआईएच छात्र टीमों के सदस्य शामिल हुए। सत्र के दौरान राज्य सरकार ने महाराष्ट्र एफआरए पोर्टल की प्रस्तुति दी जिसमें इसकी कार्यप्रणाली, एफआरए कार्यान्वयन और निगरानी में इसकी व्यावहारिक उपयोगिता, और राज्य से उभरने वाली सर्वोत्तम विधियों पर प्रकाश डाला गया। इनमें मान्यता प्राप्त पट्टा धारकों की सफलता की कहानियां और महाराष्ट्र में एफआरए कार्यान्वयन की समग्र स्थिति के बारे में जानकारी दी गई।
प्रस्तावित राष्ट्रीय वन आधिकार अधिनियम डिजिटल प्लेटफॉर्म के साक्ष्य-आधारित डिज़ाइन को और मज़बूत करने की दिशा में हिस्सेदार छात्र टीमों के लिए नासिक जिले के चयनित एफआरए-कार्यान्वित गांवों में दो दिवसीय क्षेत्रीय दौरा निर्धारित किया गया। इस क्षेत्रीय अभ्यास से ग्राम सभा सदस्यों और जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और जमीनी स्तर के डेटा, कार्यप्रवाह और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों के संग्रह और दस्तावेज़ीकरण में सहायता मिलेगी। इन जानकारियों से स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआईएच) 2025 के तहत परिकल्पित एआई-सक्षम एफआरए एटलस और वेबजीआईएस-आधारित डीएसएस को परिष्कृत करने में मदद मिलेगी जिससे जमीनी हकीकत और वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। इसके बाद भाग लेने वाली टीमें नई दिल्ली जाएंगी, जहां राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान (एनटीआरआई) में दो दिवसीय हैकाथॉन का आयोजन किया जाएगा। इस चरण के दौरान छात्र टीमें जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सचिव के मार्गदर्शन में एफआरए वेब पोर्टल के कार्यात्मक डिज़ाइन और विशेषताओं को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगी।
एसआईएच के बाद की यह पहल मंत्रालय की वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के डिजिटलीकरण संबंधी नीतिगत निर्णयों को व्यावहारिक और जमीनी स्तर पर प्रमाणित डिजिटल समाधानों में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समावेशी विकास और सशक्त जनजातीय समुदायों के माध्यम से विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री के डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर भी बल देती है। इसके साथ ही वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने और समावेशी एवं सतत जनजातीय विकास को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी संस्थानों, शिक्षाविदों और जनजातीय समुदायों के बीच सहयोगात्मक शिक्षण को बढ़ावा देती है।




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पीके/केसी/जेके/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2211040)
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