औषधि विभाग
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इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 ने संपूर्ण मेडटेक इकोसिस्टम का प्रदर्शन किया, जिससे वैश्विक मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई


प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत नवंबर 2025 तक 1409.32 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई; फॉर्म भरने की सुगमता और जियो-टैगिंग के साथ लाइव ट्रैकिंग के लिए ऑनलाइन वेब पोर्टल को नया रूप दिया गया

फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना के तहत 40,294 करोड़ रुपये का निवेश किया गया; 726 एपीआई/केएसएम/डीआई का निर्माण हुआ, जिनमें से 191 का पहली बार निर्मित किए गए

एनआईपीईआर देश के शीर्ष 30 फार्मेसी संस्थानों में अपनी रैंकिंग बनाए हुए हैं; 40 संकाय सदस्य प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल

फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली (पीआरआईपी) योजना के तहत उत्कृष्टता केंद्रों ने 111 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता हेतु आवेदन मूल्यांकन प्रक्रिया जारी है

प्रविष्टि तिथि: 06 JAN 2026 5:02PM by PIB Delhi

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग की वर्ष 2025 के दौरान की प्रमुख पहलें और उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  1. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)

इसे फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है। अब तक कुल 17,610 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 2202 केंद्र 2025 में खोले गए। पीएमबीजेपी की उत्पाद सूची में 2110 दवाएं, 315 चिकित्सा उपकरण और उपभोग्य वस्तुएं शामिल हैं, जो 29 चिकित्सीय समूहों को कवर करती हैं, जैसे कि संक्रमणरोधी, मधुमेहरोधी, हृदय रोगरोधी, कैंसररोधी, पाचन संबंधी दवाएं आदि।

जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन 1 रुपये प्रति पैड की दर से जेएकेएस के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। अब तक 96.30 करोड़ से अधिक सुविधा सैनिटरी पैड बेचे जा चुके हैं, जिनमें से 17.90 करोड़ से अधिक पैड 2025 में बेचे गए।

वर्ष 2024-25 में पीएमबीआई ने 2022.47 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की, जिससे नागरिकों को लगभग 8000 करोड़ रुपये की बचत हुई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 30.11.2025 तक पीएमबीआई ने 1409.32 करोड़ रुपये की बिक्री की है, जिससे नागरिकों को लगभग 5637 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

प्रगति रिपोर्ट (दिनांक 30.11.2025 तक)

वित्तीय वर्ष

चालू जेएके की संख्या

एमआरपी मूल्य पर बिक्री (करोड़ रुपये में)

वार्षिक वृद्धि

संचयी

2024-25

4142

15,403

2022.47

2025-26

2207

17,610

1409.32

नई पहलें:

  • ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को नया रूप दिया गया है। एक आसान वेब और मोबाइल आधारित ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) उपयोगकर्ताओं को निर्बाध रूप से फॉर्म भरने, दस्तावेज़ अपलोड करने और लाइव ट्रैकिंग करने में सक्षम बनाता है, साथ ही इसमें जियो-टैगिंग की सुविधा भी जोड़ी गई है।
  • जन औषधि केंद्र के आवेदक और जन औषधि केंद्र के स्वामी "जन समर्थ पोर्टल" पर पंजीकरण कराकर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 20 लाख रुपये तक के व्यावसायिक गतिविधि ऋण का लाभ उठा सकते हैं।
  • वितरक नेटवर्क का विस्तार 36 वितरकों से बढ़कर 39 वितरकों तक हुआ।
  • आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के अंतर्गत गोदाम में माल की आवक और क्षमता बढ़ाने के लिए डीडब्ल्यूएस (आयाम निर्धारण, वजन और स्कैनिंग) प्रणाली की तैनाती की गई। यह प्रणाली कुछ ही सेकंडों में आयाम, वजन और बारकोड डेटा को स्वचालित रूप से कैप्चर करके माल की आवक को तेज करती है; प्रति घंटे अधिक कार्टन मात्रा के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाती है; माप और स्टॉक कीपिंग यूनिट (एससीयू) की पहचान में मैन्युअल त्रुटियों को समाप्त करके सटीकता में सुधार सुनिश्चित करती है; कुशल भंडारण निर्णयों के लिए गोदाम प्रबंधन प्रणाली (डब्ल्यूएमएस) के साथ निर्बाध रीयल-टाइम एकीकरण प्रदान करती है; और बेहतर भंडारण योजना के लिए सटीक आयामी डेटा के साथ स्थान उपयोग को अनुकूलित करती है। यह नई प्रणाली गोदामों को डेटा की विश्‍वसनीयता बनाए रखते हुए समान संसाधनों के साथ अधिक मात्रा में माल संभालने में सक्षम बनाएगी।
  • प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना ने नई दिल्ली में दो प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लिया: इंडिया मेड टेक एक्सपो 2025 और प्रगति मैदान में आयोजित 44 वां भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2025

 

 

2. थोक दवाओं के लिए आयात पर निर्भरता कम करना:

  • महत्वपूर्ण प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम)/औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना के तहत 26 एपीआई/केएसएम के विनिर्माण के लिए 35 परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें किण्वन-आधारित उत्पाद जैसे पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन शामिल हैं, जिनका पहले मुख्य रूप से आयात किया जाता था।
  • सितंबर 2025 तक 4,330 करोड़ रुपये के लक्षित निवेश के मुकाबले 4,763.34 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है।
  • सितंबर 2025 तक इस योजना के तहत 2,315.44 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री की गई है, जिसमें 508.12 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है, जिससे वित्त वर्ष 2022-23 में योजना की शुरुआत के बाद से 1807.32 करोड़ रुपये के आयात से बचा जा सका है।
  • सितंबर 2025 तक 4,929 व्यक्तियों के लिए रोजगार सृजित किया गया है।

3. फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाना:

  • फार्मास्युटिकल्स के लिए पीएलआई योजना के तहत सितंबर 2025 तक 40,294 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जो 17,275 करोड़ रुपये के लक्षित निवेश से काफी अधिक है।
  • इस योजना ने जैव औषधीय उत्पादों, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट/गैर-पेटेंट दवाओं आदि जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण का समर्थन किया, जिससे शुरूआत से लेकर सितंबर 2025 तक कुल 3,08,408.60 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है, जिसमें 1,98,509.49 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।
  • परियोजना की शुरुआत से लेकर सितंबर 2025 तक अपेक्षित 20,000 व्यक्तियों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने के मुकाबले संविदा और प्रशिक्षु श्रमिकों सहित लगभग 97,000 व्यक्तियों के लिए रोजगार पैदा किया गया।
  • इस योजना के तहत स्थापित 28 ग्रीनफील्ड स्थानों सहित 350 से अधिक विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से उत्पादन हो रहा है।
  • इस योजना के तहत 726 एपीआई/केएसएम/डीआई का विनिर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 191 का विनिर्माण इस योजना के तहत पहली बार किया गया है।
  • वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल थोक दवा निर्यात का 30% और कुल फॉर्मूलेशन निर्यात का 26.5% हिस्सा इस योजना के तहत उत्पादन के माध्यम से हासिल किया गया है।

4. औषधि उद्योग को सुदृढ़ करने की योजना (एसपीआई):

केंद्रीय क्षेत्र योजना औषधीय उद्योग को सुदृढ़ बनाना (एसपीआई) में निम्नलिखित उप-योजनाएं शामिल हैं:

(i) साझा सुविधाओं के लिए फार्मास्युटिकल उद्योग को सहायता (एपीआई-सीएफ): मौजूदा फार्मास्युटिकल क्लस्टरों की सतत वृद्धि के लिए साझा सुविधाएं बनाकर उनकी क्षमता को मजबूत करना। इस योजना के तहत नवंबर 2025 तक 8 परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति दी गई।

(ii) संशोधित फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन सहायता योजना (आरपीटीयूएएस): इस योजना के अंतर्गत 30.11.2025 तक 433 पंजीकरण किए गए और 380 आवेदन प्राप्त हुए। इन 380 आवेदनों में से योजना संचालन समिति ने 192 आवेदनों को मंजूरी दी, जिनमें वित्त वर्ष 2025-26 के 167 आवेदन शामिल हैं।

(iii) फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइसेस प्रमोशन और डेवलपमेंट स्कीम (पीएमपीडीएस): इसके अंतर्गत नवंबर 2025 तक 63 कार्यक्रम/कार्यशालाएं/सेमिनार/वेबिनार और 24 अध्ययन किए जा चुके हैं।

5. थोक औषधि पार्कों को बढ़ावा देने की योजना:

इस योजना के तहत विभाग को 13 राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मूल्यांकन के बाद गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। चयनित प्रत्येक राज्य के लिए 1000 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीनों चयनित पार्कों में निर्माण कार्य प्रगति पर है। चयनित बल्क ड्रग पार्कों में जारी और उपयोग की गई धनराशि की स्थिति इस प्रकार है:

राज्य

कुल परियोजना लागत

(करोड़ रुपये में)

कुल

सीआईएफ लागत

(करोड़ रुपये में)

केंद्र सरकार द्वारा जारी अनुदान ( करोड़ रुपये में )

राज्य द्वारा जारी की गई निधि

(करोड़ रुपये में )

 

नवंबर 2025 तक उपयोग की गई धनराशि, जिसमें राज्य का हिस्सा भी शामिल है ( करोड़ रुपये में )

गुजरात

2507.02

1457.01

600.00

137.10

427.92

हिमाचल प्रदेश

1923

1118.46

225.00

35.54

50.76

आंध्र प्रदेश

1876.66

1438.89

225.00

132.30

268.75

 

6. चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना:

इस योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करना है।

इस योजना के अंतर्गत उत्पादों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. कैंसर देखभाल / रेडियोथेरेपी चिकित्सा उपकरण
  2. रेडियोलॉजी और इमेजिंग चिकित्सा उपकरण (आयनकारी और गैर-आयनकारी विकिरण उत्पाद दोनों) और परमाणु इमेजिंग उपकरण
  3. एनेस्थेटिक्स और कार्डियो-रेस्पिरेटरी मेडिकल उपकरण, जिनमें कार्डियो रेस्पिरेटरी श्रेणी के कैथेटर और रीनल केयर मेडिकल उपकरण शामिल हैं
  4. प्रत्यारोपण योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित सभी प्रत्यारोपण

इस योजना के तहत आवेदकों द्वारा की गई कुल बिक्री 12,344.37 करोड़ रुपये है (जिसमें 5,869.36 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है), जो सितंबर 2025 तक हुई है।

7. कॉमन फैसिलिटीज फॉर मेडिकल डिवाइसेस क्लस्टर्स (सीएफएमडीसी) योजना मौजूदा और नए मेडिकल डिवाइस क्लस्टर्स को मजबूत करने के लिए कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने और अधिक मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग लैबोरेटरीज की उपलब्धता में सुधार करने के लिए है।

विवरण

संख्‍या

अनुदान सहायता (करोड़ रुपये)

सैद्धांतिक स्वीकृति

10

90.92

अंतिम स्वीकृति

7

40.72

अदायगी

7

10.18

अगले एसएससी में स्वीकृत किए जाने वाले 2 मामलों के प्रस्‍तावों को अंतिम मंजूरी मिल गई है।

2

31.71

योजना के अंतर्गत उपलब्ध शेष राशि

-

37.57

 

8. इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025

भारत मेडटेक एक्सपो 2025, चिकित्सा उपकरण क्षेत्र पर दूसरी अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, जिसका विषय था वैश्विक मेडटेक विनिर्माण केंद्र: सटीक इंजीनियरिंग फिर भी किफायती भारत को वैश्विक मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, 4 से 6 सितंबर 2025 तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने किया तथा रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग (डीओपी) के सचिव श्री अमित अग्रवाल ने संबोधित किया।

इसमें भारत के संपूर्ण मेडटेक इकोसिस्टम को प्रदर्शित किया गया, जिसमें स्टार्टअप्स, फ्यूचर पवेलियन, आर एंड डी पवेलियन, एमएसएमई, बड़े उद्यम, अनुसंधान एवं विकास संस्थान, अस्पताल और अकादमिक संस्थान शामिल थे। इसने वैश्विक सहयोग, प्रौद्योगिकी नवाचार और निवेश के लिए उत्प्रेरक का काम किया, जो भारत को वैश्विक मेडटेक हब के रूप में स्थापित करने के भारत सरकार के विजन 2047 के अनुरूप था।

इस आयोजन में विभिन्न हितधारकों की सशक्त भागीदारी देखने को मिली, जिसमें तीन दिनों में कुल 12,106 आगंतुक आए और 2,980 बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) खरीदार-विक्रेता बैठकें हुईं, जो उद्योग की मजबूत सहभागिता और निर्यात क्षमता को दर्शाती हैं। प्रदर्शनी में 65 भारतीय और वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप्स और अकादमिक प्रयोगशालाओं ने भाग लिया, साथ ही स्टेट पवेलियन, आर एंड डी पवेलियन, स्टार्टअप पवेलियन और फ्यूचर पवेलियन सहित समर्पित पवेलियनों में 74 लाइव और डिजिटल प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं। एक अंतर्राष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता सम्मेलन ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया।

9. चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण (एसएमडीआई) योजना:

(i) चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में क्षमता निर्माण और कौशल विकास योजना (100 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान में मौजूद कमियों को दूर करना तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षण और उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है, ताकि तेजी से विकसित हो रहे बहु-विषयक चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सके और साथ ही इस क्षेत्र के लिए अनुसंधान एवं विकास इको-सिस्‍टम को सुगम बनाया जा सके। इस उप-योजना के अंतर्गत घटक-ए के लिए 13 प्रस्तावों और घटक-बी के लिए 5 प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। मास्टर्स प्रोग्राम के लिए कंपोनेंट ए और सर्टिफिकेट/पीजी डिप्लोमा के लिए कंपोनेंट बी के तहत प्रस्तावों का कार्यान्वयन शुरू हो गया है और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों का नामांकन पूरा हो चुका है। स्वीकृत कार्यक्रमों के तहत कुल 750 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।

(ii) आयात निर्भरता कम करने हेतु सीमांत निवेश योजना (180 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों, जिनमें इन-विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरण भी शामिल हैं, के निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख घटकों, कच्चे माल और सहायक उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं की आयातित प्रमुख घटकों और कच्चे माल पर निर्भरता को कम करना और हमारी मूल्य श्रृंखलाओं की गहराई को बढ़ाना है। इस योजना के तहत कुल 15 आवेदकों को लगभग 88 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। उप-योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 10.12.2025 से 10.1.2026 तक पुनः खोल दी गई है और नए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

(iii) चिकित्सा उपकरण नैदानिक ​​अध्ययन सहायता योजना (100 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण उद्योग को नैदानिक ​​प्रमाणों पर आधारित उपकरणों के विकास को बढ़ावा देकर और भारत में निर्मित उपकरणों की सुरक्षा और प्रभावकारिता को प्रदर्शित करने वाले नैदानिक ​​डेटा के सृजन द्वारा सहायता प्रदान करना है। एसएससी द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए कुल 18 प्रस्तावों पर विचार किया गया है। उप-योजना के लिए आवेदन विंडो 10.12.2025 से 10.1.2026 तक पुनः खोल दी गई है और नए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

  1. भारत में विदेशी निवेश के लिए शीर्ष दस आकर्षक क्षेत्रों में से एक फार्मास्युटिकल क्षेत्र है।

2024-25 के दौरान दवा क्षेत्र (दवाओं और चिकित्सा उपकरणों दोनों में) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह 12,753 करोड़ रुपये रहा। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक एफडीआई प्रवाह (दवाओं और चिकित्सा उपकरणों दोनों में) 13,193 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 8,103 करोड़ रुपये था।

11. भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग और नीदरलैंड के स्वास्थ्य, कल्याण एवं खेल मंत्रालय के बीच औषधि एवं चिकित्सा उपकरण उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर 19 जून, 2025 को हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता ज्ञापन फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है, जिसे एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।

12. राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर):

  • शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के अनुसार, 'फार्मेसी' श्रेणी के अंतर्गत सभी सात एनआईपीईआर देश के शीर्ष 30 फार्मेसी संस्थानों में शामिल हैं। एनआईआरएफ 2025 में हैदराबाद को 5 वां , मोहाली को 9 वां , गुवाहाटी को 12 वां , रायबरेली को 17 वां , अहमदाबाद को 21 वां , कोलकाता को 29 वां और हाजीपुर को 30 वां स्थान प्राप्त हुआ है। संकाय की योग्यता के मामले में भी इनका स्थान उच्च है, जिसमें 40 ऐसे संकाय सदस्य शामिल हैं, जो प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड के शीर्ष 2 % वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं।
  • अब तक एनआईपीईआर से 10,974 छात्रों ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की है, जिनमें 721 डॉक्टरेट छात्र, 8,894 स्नातकोत्तर छात्र और 1359 एमबीए डिग्री धारक शामिल हैं।
  • इसका प्रमाण एनआईपीईआर संस्थानों की उच्च प्लेसमेंट दर में मिलता है, जहां इस वर्ष यानी 2025 में एनआईपीईआर अहमदाबाद, एनआईपीईआर हाजीपुर और एनआईपीईआर रायबरेली की औसत प्लेसमेंट दर 89.28% रही। एनआईपीईआर मोहाली, कोलकाता, गुवाहाटी और हैदराबाद में प्लेसमेंट प्रक्रिया जारी है।
  • अकादमिक-उद्योग संपर्क के हिस्से के रूप में 31.10.2025 तक एनआईपीईआर ने उद्योगों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ 346 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, 476 पेटेंट दाखिल किए हैं (जिनमें से 202 पेटेंट स्वीकृत किए गए हैं और 11 पेटेंट व्यावसायीकृत किए गए हैं) और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 8,766 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।
  • वित्त वर्ष 2025-2026 के दौरान 31.10.2025 तक एनआईपीईआर द्वारा 378 शोध पत्र प्रकाशित किए गए, 33 पेटेंट दाखिल किए गए और 22 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • हैदराबाद, कोलकाता, रायबरेली और हाजीपुर में एनआईपीईआर परिसरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 31.10.2025 तक एनआईपीईआर हाजीपुर में 72%, एनआईपीईआर हैदराबाद में 62%, एनआईपीईआर कोलकाता में 73% और एनआईपीईआर रायबरेली में 93% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

7 एनआईपीईआर के प्रमुख बिंदु/उपलब्धियां:

एनआईपीईआर अहमदाबाद

  • एनआईपीईआर -अहमदाबाद ने 18.1.2025 को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा की उपस्थिति में एक उद्योग-अकादमिक संवाद सत्र का आयोजन किया।
  • 18.1.2025 को श्री जगत प्रकाश नड्डा ने एनआईपीईआर अहमदाबाद में छात्र यूटिलिटी सेंटर की आधारशिला रखी।
  • एनआईपीईआर-अहमदाबाद में चिकित्सा उपकरणों (हिप इम्प्लांट) के यांत्रिक परीक्षण के लिए देश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला एनआईपीईआर-ए टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनटीएल) का उद्घाटन किया गया।
  • एनआईपीईआर अहमदाबाद ने तेजी से विस्तार कर रही लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) ट्राइडेंट लाइफलाइन लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक गठबंधन किया है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप से संपन्न हुई यह साझेदारी कैंसर की महत्वपूर्ण दवा वोरिनोस्टैट को भारतीय रोगियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

एनआईपीईआर गुवाहाटी

  • गुवाहाटी के एनआईपीईआर में स्थित अटल इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन 18.6.2025 को किया गया और इसे भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के तहत मेजबान संस्थान के रूप में मान्यता दी गई।
  • गुवाहाटी के एनआईपीईआर के चिकित्सा रसायन विभाग ने मानव खेल डोपिंग परीक्षण के लिए 13 संदर्भ अणुओं का सफलतापूर्वक संश्लेषण किया है और इन्हें भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय डोपिंग परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल), नई दिल्ली को प्रदान किया है, जिसे विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
  • गुवाहाटी स्थित एनआईपीईआर ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से शुरू होने वाले चिकित्सा उपकरणों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम के शुरू करने की घोषणा की है।

एनआईपीईआर हाजीपुर

  • राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस रैंकिंग के तहत एनआईपीईआर हाजीपुर लगातार भारत के शीर्ष 10 प्रदर्शन करने वाले केंद्रों में शुमार है जो भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) और भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपीआई) दोनों में योगदान दे रहा है
  • एनआईपीईआर हाजीपुर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स ने 31.1.2025 को "बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स में अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अच्छी प्रयोगशाला पद्धति" विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर का एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
  • एनआईपीईआर हाजीपुर ने 2025 में स्नातक होने वाले बैच के लिए 84.25% का प्लेसमेंट रिकॉर्ड हासिल किया, जो इसके मजबूत उद्योग संबंधों और इसके स्नातकों की रोजगार क्षमता को दर्शाता है।

एनआईपीईआर हैदराबाद

  • स्वच्छ खेल और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मिशन को आगे बढ़ाने में एनएडीए परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए एनआईपीईआर हैदराबाद ने राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की।
  • एनआईपीईआर हैदराबाद ने इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) के सहयोग से 17.9.2025 को एक उद्योग-अकादमिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
  • एनआईपीईआर हैदराबाद ने 27-28 मार्च 2025 को बल्क ड्रग्स संबंधी नवोन्मेषी प्रक्रिया सम्मेलन (आईपीबीडी- 2025) का आयोजन किया। यह सम्मेलन एनआईपीईआर हैदराबाद में बल्क ड्रग्स में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की स्थापना की दिशा में की जा रही गतिविधियों के एक भाग के रूप में आयोजित किया गया था।

एनआईपीईआर कोलकाता

  • संस्थान ने 25.04.2025 को "फार्मास्युटिकल्स का निरंतर उत्पादन" विषय पर एक आमंत्रित वार्ता का आयोजन किया।
  • एनआईपीईआर कोलकाता ने 2 सितंबर 2025 को "स्मार्ट खानपान, स्वस्थ जीवन: मोटापे को रोकने के लिए संतुलित भोजन विकल्पों की संस्कृति का निर्माण" विषय पर एक आमंत्रित वार्ता का आयोजन किया।
  • संस्थान ने 13.10.2025 को अनुसंधान एवं विकास प्रस्ताव लेखन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।

एनआईपीईआर मोहाली

  • एनआईपीईआर मोहाली ने 4.9.2025 को डॉ. चिगुरुपति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इनोवेटिव एंड सस्टेनेबल फार्मास्युटिकल डेवलपमेंट (सीसीई-आईएसपीडी) की स्थापना की है।
  • एनआईपीईआर मोहाली ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) - विदेश मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में दो प्रशिक्षण आयोजित किए हैं।

एनआईपीईआर रायबरेली

  • एनआईपीईआर रायबरेली ने सन फार्मा साइंस फाउंडेशन के सहयोग से 18.8.2025 को लखनऊ में "बुजुर्गों के लिए आयु-उपयुक्त चिकित्सा पद्धतियों में नवाचार: चुनौतियां और अवसर" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

13. फार्मा मेडटेक सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की योजना (पीआरआईपी)

  • इस योजना का उद्देश्य अनुसंधान, उत्पाद विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग के लिए समर्थन के माध्यम से जेनेरिक दवाओं के निर्माण से हटकर नवाचार-आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित करके भारत के फार्मास्युटिकल और मेडटेक इको-सिस्‍टम को मजबूत करना है।
  • इस योजना के दो घटक हैं, अर्थात् घटक ए और घटक बी।
  • घटक '' के ​​तहत राष्ट्रीय औषध विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में से प्रत्येक में एक-एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो विशिष्ट क्षेत्रों में 700 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ बनाए गए हैं।
  • इन उत्कृष्टता केंद्रों ने नवंबर 2025 तक इस योजना के तहत शुरू की जाने वाली 111 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसके अलावा, छियालीस शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और छह पेटेंट दाखिल किए गए।
  • घटक बी के तहत फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • घटक बी के तहत संशोधित योजना और दिशानिर्देश 1 अक्‍टूबर, 2025 को अधिसूचित किए गए थे और एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
  • प्राप्त आवेदनों/परियोजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में चल रहा है और पात्र आवेदकों को धनराशि जारी करने की प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।

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पीके/केसी/आईएम/केके


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