श्रम और रोजगार मंत्रालय
डीजीएमएस ने खान सुरक्षा और श्रमिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के 125 वर्ष पूरे किये
खनन क्षेत्र में एकसमान सुरक्षा मानक आवश्यक: श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे
श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और प्रौद्योगिकी का उपयोग खान सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा: श्रीमती करंदलाजे
प्रविष्टि तिथि:
07 JAN 2026 2:08PM by PIB Delhi
भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने आज झारखंड के धनबाद स्थित अपने मुख्यालय में अपना 125वां स्थापना दिवस मनाया, जो पूरे देश में खदान श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने की दिशा में एक सदी से अधिक की समर्पित सेवा को चिन्हित करता है। इस कार्यक्रम में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। डीजीएमएस के महानिदेशक श्री उज्ज्वल ताह, श्रम और रोजगार मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती दीपिका कच्छल, डीजीएमएस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रालय के अधिकारी, खनन उद्योग के प्रतिनिधि और इस क्षेत्र के हितधारक भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि डीजीएमएस की 125 वर्षों की यात्रा अधिकारियों और खदान श्रमिकों के समर्पित प्रयासों और बलिदान को दर्शाती है। अतीत में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वालों के योगदान को स्वीकार करते हुए सुश्री शोभा करंदलाजे ने इस बात पर जोर दिया कि आज खनन गतिविधियां भारत की विकास गाथा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। मंत्री महोदया ने खदान श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका साहस और समर्पण- अक्सर जीवन के गंभीर जोखिमों के साथ- खनन को संभव बनाता है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है।

मंत्री ने दोहराया कि श्रमिकों की सुरक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सर्व प्रथम सुरक्षा" के विजन के अनुरूप है। उन्होंने सभी खनन कार्यों में एकसमान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में डीजीएमएस की भूमिका को रेखांकित किया तथा सुरक्षा मानदंडों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र-राज्य के समन्वित प्रयासों और डीजीएमएस के क्षेत्रीय कार्यालयों की मजबूत भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
श्रम सुधारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि चार श्रम संहिताएं, जिन्होंने 29 कानूनों को समेकित और प्रतिस्थापित किया, का उद्देश्य विकसित भारत का निर्माण करना और संविदा श्रमिकों सहित सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने डीजीएमएस से इन संहिताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और खान सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने का आग्रह किया तथा अधिक सुरक्षित और सतत खनन के लिए डीजीएमएस को मजबूत करने हेतु मंत्रालय की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

सुश्री शोभा करंदलाजे ने प्रदर्शनी, पुराने अभिलेख अनुभाग और मॉडल गैलरी का दौरा किया, जो भारत में खान सुरक्षा प्रथाओं की समृद्ध विरासत और विकास को प्रदर्शित करना है। इस समारोह के हिस्से के रूप में गणमान्य व्यक्तियों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जो पर्यावरण स्थिरता के प्रति डीजीएमएस की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि करता है।

कार्यक्रम के दौरान डीजीएमएस के ऐतिहासिक उपलब्धियों, इसके विनियामक ढांचे और खान सुरक्षा में प्रौद्योगिकीय प्रगति को दर्शाने वाली एक लघु फिल्म दिखाई गई। इस अवसर पर श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने डीजीएमएस का नया लोगो जारी किया, जिसने पुराने लोगो का स्थान लिया है। उन्होंने डीजीएमएस का थीम सॉन्ग और संगठन की यात्रा एवं योगदान को दर्शाने वाली एक डिजिटल कॉफी टेबल बुक भी जारी की। खान सुरक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं की एक सौवेनियर/डिजिटल संग्रह भी जारी किया गया।
वीरता और सेवा को मान्यता देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आपातकालीन स्थितियों के दौरान खनिकों के जीवन की रक्षा में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए बचाव दल के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
1902 में स्थापित डीजीएमएस भारत में खान सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों के विनियमन में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा खदान श्रमिकों के कल्याण और खनन उद्योग के सतत विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
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पीके/केसी/आईएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2212106)
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