सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद का प्रथम अग्रिम अनुमान जारी
वास्तविक जीडीपी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, जो वित्त वर्ष 2024-25 की 6.5 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है
सेवा क्षेत्र में तेज वृद्धि के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीवीए में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की
प्रविष्टि तिथि:
07 JAN 2026 4:00PM by PIB Delhi
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने इस प्रेस नोट में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रथम अग्रिम अनुमानों को व्यय घटकों सहित स्थिर (2011-12) और वर्तमान दोनों कीमतों पर जारी किया है। विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए मूल कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के वार्षिक अनुमानों के साथ-साथ वर्ष-दर-वर्ष प्रतिशत परिवर्तन, जीडीपी के व्यय घटक, सकल/शुद्ध राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय के वित्त वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के वार्षिक अनुमान स्थिर और वर्तमान कीमतों पर अनुलग्नक ए के विवरण 1 से 4 में दिए गए हैं।
मुख्य बिन्दु:
- वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत थी।
- वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
- सेवा क्षेत्र में हुई तेज वृद्धि को वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 7.3 प्रतिशत की वास्तविक जीवीए वृद्धि दर में एक प्रमुख कारक माना गया है।
- तृतीयक क्षेत्र में वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएं तथा लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं के वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर 9.9 प्रतिशत की पर्याप्त वृद्धि दर प्राप्त करने का अनुमान है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण क्षेत्र से संबंधित सेवाओं में स्थिर कीमतों पर 7.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
- द्वितीयक क्षेत्र में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर 7.0 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने का अनुमान लगाया गया है।
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (3.1 प्रतिशत) तथा बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवा क्षेत्र ( 2.1 प्रतिशत) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान स्थिर कीमतों पर जीवीए में मध्यम वृद्धि दर दर्ज की है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान वास्तविक निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान स्थिर कीमतों पर सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत थी।
I. वार्षिक अनुमान और वृद्धि दरें
वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी का वित्त वर्ष 2025-26 में 201.90 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी का अनंतिम अनुमान (पीई) 187.97 लाख करोड़ रुपये था, जो 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है । नॉमिनल जीडीपी या वर्तमान कीमतों पर जीडीपी का वित्त वर्ष 2025-26 में 357.14 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 330.68 लाख करोड़ रुपये था, जो 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है ।
वित्त वर्ष 2025-26 में जीवीए 184.50 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनंतिम अनुमान (पीई) 171.87 लाख करोड़ रुपये था, जो 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। नॉमिनल जीवीए के वित्त वर्ष 2025-26 में 323.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह 300.22 लाख करोड़ रुपये था, जो 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
चित्र 1: स्थिर कीमतों पर वार्षिक जीडीपी और जीवीए अनुमान तथा वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दरें


चित्र 2: वार्षिक जीवीए की क्षेत्रीय संरचना और वृद्धि दरें
वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीवीए की क्षेत्रीय संरचना


चित्र 3: व्यापक क्षेत्रों में वार्षिक जीवीए की संरचना और वृद्धि दरें


[प्राथमिक क्षेत्र: कृषि, पशुधन, वानिकी एवं मत्स्य पालन तथा खनन एवं उत्खनन]
द्वितीयक क्षेत्र : विनिर्माण, विद्युत, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाएं तथा निर्माण
तृतीयक क्षेत्र : व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाएं, वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएं तथा लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं]
II. कार्यप्रणाली और प्रमुख डेटा स्रोत:
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अग्रिम अनुमान संकेतक आधारित होते हैं और इन्हें बेंचमार्क-संकेतक पद्धति का उपयोग करके संकलित किया जाता है, अर्थात् पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) के लिए उपलब्ध अनुमानों को संबंधित संकेतकों का उपयोग करके बहिर्वेशित किया जाता है, जो क्षेत्रों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/निजी एजेंसियों से प्राप्त डेटा इन अनुमानों के संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्षेत्र-वार अनुमानों को निम्नलिखित संकेतकों/डेटा स्रोतों का उपयोग करके संकलित किया गया है: (i) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), (ii) 2025-26 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए इन कंपनियों के उपलब्ध त्रैमासिक वित्तीय परिणामों के आधार पर सूचीबद्ध कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन, (iii) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रदान किए गए 2025-26 के लिए प्रमुख कृषि फसलों के अनुमान, (iv) 2025-26 के लिए प्रमुख पशुधन उत्पादों के ग्रीष्म और वर्षा ऋतु उत्पादन अनुमान; (v) मछली उत्पादन, (vi) कोयला, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, सीमेंट का उत्पादन और इस्पात की खपत, (vii) रेलवे के लिए शुद्ध टन किलोमीटर और यात्री किलोमीटर, (viii) नागर विमानन द्वारा संचालित यात्री और माल यातायात, (ix) प्रमुख और लघु समुद्री बंदरगाहों पर संचालित माल यातायात, (x) वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री, (xi) बैंक जमा और ऋण, (xii) जीवन और गैर-जीवन बीमा कंपनियों की प्रीमियम संबंधी जानकारी, (xiii) नवंबर 2025 तक जीएसटीएन से उपलब्ध वस्तुओं और सेवाओं की जावक आपूर्ति पर डेटा, (xiv) केंद्र और राज्य सरकारों के खाते, (xv) वित्त वर्ष 2025-26 की नवीनतम अवधि तक उपलब्ध वस्तु एवं सेवा कर संग्रह आदि। अनुमान में प्रयुक्त मुख्य संकेतकों की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर (प्रतिशत) अनुलग्नक बी में दी गई है।
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संकलन के लिए उपयोग किए गए कुल कर राजस्व में गैर-जीएसटी राजस्व के साथ-साथ जीएसटी राजस्व भी शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर राजस्व के बजट अनुमानों के साथ-साथ लेखा महानियंत्रक (सीजीए) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वेबसाइटों से उपलब्ध नवीनतम जानकारी का उपयोग वर्तमान कीमतों पर उत्पादों पर करों का अनुमान लगाने के लिए किया गया है। स्थिर कीमतों पर उत्पादों पर करों का संकलन करने के लिए कर योग्य वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा वृद्धि का उपयोग करके मात्रा बहिर्वेशन किया जाता है। वर्तमान कीमतों पर कुल उत्पाद सब्सिडी का संकलन सीजीए वेबसाइट पर उपलब्ध केंद्र सरकार की प्रमुख सब्सिडी जैसे खाद्य, यूरिया, पेट्रोलियम और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी और सीएजी वेबसाइट पर उपलब्ध नवंबर 2025 तक अधिकांश राज्यों द्वारा सब्सिडी पर किए गए व्यय के साथ-साथ 2025-26 के लिए केंद्र/राज्य-वार बीई प्रावधान का उपयोग करके किया गया है।
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के व्यय घटकों के संकलन के लिए उपयोग किए जाने वाले संकेतक उत्पादन पद्धति में उपयोग किए जाने वाले संकेतकों के एक उप-समूह पर आधारित हैं। हालांकि, वस्तुओं और सेवाओं का आयात, वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात, मूल्यवान वस्तुएं, पूंजीगत वस्तुओं का आयात और निर्यात जैसे घटकों का संकलन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक से प्राप्त मासिक आयात और निर्यात आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। सीजीए और सीएजी के वेबसाइटों से राजस्व व्यय, ब्याज भुगतान, सब्सिडी आदि पर उपलब्ध जानकारी का उपयोग सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) का अनुमान लगाने के लिए किया गया था। विसंगति उत्पादन और व्यय पद्धति द्वारा जीडीपी के बीच के अंतर को संदर्भित करती है। विभिन्न प्रकार के डेटा स्रोतों और डिफ्लेटर का उपयोग करके विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के अनुमानों, साथ ही व्यय घटकों ने विसंगति की मात्रा और दिशा में योगदान दिया।
यह सूचित किया जाता है कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय वर्तमान में राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के आधार वर्ष को वित्त वर्ष 2011-12 (वर्तमान श्रृंखला) से वित्त वर्ष 2022-23 (नई श्रृंखला) में संशोधित करने की प्रक्रिया में है। अतः वर्तमान और स्थिर कीमतों पर अनुमान लगाने की पद्धति में परिवर्तन, अद्यतन एवं नए डेटा स्रोतों को शामिल करने, वार्षिक बेंचमार्क को अद्यतन करने आदि के कारण अग्रिम एवं त्रैमासिक अनुमानों में संशोधन होगा। उपयोगकर्ताओं को बाद के संशोधित अनुमानों की व्याख्या करते समय इन कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के द्वितीय अग्रिम अनुमान पिछले 3 वित्त वर्षों के जीडीपी अनुमानों के साथ-साथ नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी अनुमान 27.02.2026 को जारी किए जाएंगे।
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अनुलग्नक ए




अनुलग्नक बी
प्रमुख संकेतकों में वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर (प्रतिशत)

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(रिलीज़ आईडी: 2212192)
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