संस्कृति मंत्रालय
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र भारत की लोकप्रिय आवाजों के दस्तावेजीकरण के लिए ‘आवाज़ों के जुगनू’ का शुभारंभ करेगा
प्रविष्टि तिथि:
07 JAN 2026 7:51PM by PIB Delhi
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्था, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आई जी एन सी ए), भारत की चुनिंदा सबसे मशहूर आवाज़ों को रिकॉर्ड किए गए साक्षात्कारों और असली प्रकाशनों के माध्यम से डॉक्यूमेंट करने और उन्हें सहेजने के लिए एक विशेष पहल की शुरूआत करने जा रहा है। वर्षों से निरंतर चल रही तलाश और ऑडियो और वीडियो खंगालने की कोशिशों के बाद, इस पहल को 8 जनवरी 2026 को शाम 4.00 बजे 'आवाज़ों के जुगनू' टाइटल के अंतर्गत पुस्तक और स्वर दोनों प्रारूप में औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। इसमें आकाशवाणी, एफ एम चैनलों, वॉइस-ओवर इंडस्ट्री, प्रसारण और काव्य पाठ मंचन की परंपरा से जुड़े 31 लोगों के सफर को समेटने का प्रयास किया गया है।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी करेंगे। जाने-माने प्रसारक और वॉइस एक्टर श्री हरीश भिमानी मुख्य अतिथि के तौर पर इस अवसर की शोभा बढ़ाएंगे, जबकि जाने-माने प्रसारक और वॉइस एक्टर श्री शम्मी नारंग विशिष्ट अतिथि होंगे। आवाज की दुनिया से जुड़ी सुश्री सोनल कौशल विशेष अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के मीडिया सेंटर के कंट्रोलर श्री अनुराग पुनेठा स्वागत भाषण देंगे, और पुस्तक में संकलन कर्ता और संपादक डॉ. शेफाली चतुर्वेदी प्रकाशन का परिचय देंगी।
यह प्रकाशन रेडियो और आवाज़ पर आधारित कहानी कहने के लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक महत्व, एक ऐसी परंपरा जिसने दर्शकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाया है, को सामने लाने वाला है। अनेकों पीढ़ियों में आवाज़ों के ज़रिए कहानियों, किरदारों और भावनाओं को पहुँचाने से जुड़ी यह परियोजना सामूहिक संस्मरण, गर्मजोशी और भरोसे को आकार देने में आवाज़ की अनोखी शक्ति पर विचार करने का एक अवसर देने वाली है। यहाँ तक कि वर्तमान समय के डिजिटल युग में भी, वॉइस-ओवर की कला कहानी कहने के पुराने और नए तरीकों को जोड़ते हुए एक आवश्यक और प्रासंगिक सांस्कृतिक माध्यम बनी हुई है।
सुप्रसिद्ध स्वरों को लिपिबद्ध करने और एक स्वर युग्म का शुभारंभ करने का यह कार्यक्रम, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के प्रति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की सांस्कृतिक की निरंतर प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण पल होगा। इस अवसर पर कला केंद्र विद्वजनों, कलाकारों और आम लोगों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है, जो भारत की समृद्ध वाचन (स्वर) परंपराओं की विरासत और उनकी वर्तमान में प्रासंगिकता के साथ एक सार्थक जुड़ाव की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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पीके/केसी/डीटी
(रिलीज़ आईडी: 2212228)
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