मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
वर्ष 2025 के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग की वर्षांत समीक्षा
माननीय प्रधानमंत्री ने 33.80 करोड़ रुपए के निवेश से मोतिहारी में स्थापित देशी नस्लों के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन किया
उत्तर पूर्वी क्षेत्री की पहली आईवीएफ प्रयोगशाला से दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार की ओर,75000 पशुओं का जीनोटाइप
पशुधन क्षेत्र भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को लगातार सुदृढ़ कर रहा है; 2014-15 से यह 12.77 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है
टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से देश भर में 4019 एमवीयू जानवरों का इलाज कर रही है,पशु चिकित्सा कॉलेज की संख्या 84 हुई
प्रविष्टि तिथि:
07 JAN 2026 10:00PM by PIB Delhi
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग की वर्ष 2025 की प्रमुख पहल और उपलब्धियों का विवरण:
1. क्षेत्र में वृद्धि
पशुधन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का एक महत्वपूर्ण उपक्षेत्र है। यह वर्ष 2014-15 से वर्ष 2023-24 तक 12.77% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है। कुल कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में पशुधन का योगदान वर्ष 2014-15 में 24.38% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 30.87% (वर्तमान मूल्य पर) हो गया। वर्ष 2023-24 के कुल जीवीए में पशुधन क्षेत्र का योगदान 5.49% (वर्तमान मूल्य पर) रहा।
भारत दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और वैश्विक दूध उत्पादन में इसका योगदान 25% है। पिछले 11 वर्षों में दूध उत्पादन 5.41% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है, जो वर्ष 2014-15 में 146.31 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 247.87 मिलियन टन हो गया। विश्व दूध उत्पादन में वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 (अनुमानित) में 1.12% (फूड आउटलुक नवंबर 2025) की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि विश्व औसत वर्ष 2024 (अनुमानित) में 328 ग्राम प्रतिदिन (फूड आउटलुक नवंबर 2025) है।
खाद्य एवं कृषि संगठन कॉर्पोरेट सांख्यिकी डेटाबेस (FAOSTAT) के उत्पादन आंकड़ों (2023) के अनुसार, भारत अंडा उत्पादन में विश्व में दूसरे और मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर है। देश में अंडा उत्पादन वर्ष 2014-15 में 78.48 बिलियन अंडों से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 149.11 बिलियन हो गया है। पिछले 11 वर्षों से यह 6.63% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर से (CAGR) बढ़ रहा है। प्रति व्यक्ति अंडा उपलब्धता वर्ष 2014-15 में 62 अंडे की तुलना में वर्ष 2024-25 में 106 अंडे प्रति वर्ष है। देश में मांस उत्पादन वर्ष 2014-15 में 6.69 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 10.50 मिलियन टन हो गया है। पिछले 11 वर्षों से यह 4.61% वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है।
पशुपालन और डेयरी योजनाएं
2. देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा बोवाइन पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की गई है।
2.1 वर्ष 2025 के प्रमुख लॉन्च/उद्घाटन
• दिनांक 3 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में "डेयरी क्षेत्र में धारणीयता (Sustainability) और चक्रीयता (Circularity) पर कार्यशाला" का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया और इस अवसर पर डेयरी क्षेत्र में धारणीयता के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए।
• भारत में नस्ल विकास संबंधी कार्यशाला दिनांक 12 जुलाई, 2025 को लखनऊ में आयोजित की गई। देश भर में नस्ल संरक्षण को मजबूत करने और संगठित प्रजनक नेटवर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उसी दिन प्रजनक एसोसिएशनों की स्थापना के लिए रूपरेखा भी लॉन्च की गई।
• दिनांक 15 जुलाई, 2025 को माननीय प्रधानमंत्री ने 33.80 करोड़ रुपए के निवेश से मोतिहारी में स्थापित देशी नस्लों के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन किया।
• बिहार के पूर्णिया स्थित सीमन केंद्र में स्थित देशी रूप से विकसित सेक्स-सॉर्टेड सीमन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिनांक 15.9.2025 को किया गया। पूर्वी और उत्तर पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए उचित दरों पर सेक्स-सॉर्टेड सीमन उपलब्ध है।
• पशुपालन क्षेत्र के लिए IGoM के चार स्तंभों (विधायी, नीति, संस्थागत एवं प्रक्रिया सुधार) पर सुझाव आमंत्रित करने के लिए दिनांक 22.09.2025 को पशुपालन और डेयरी विभाग के लिए सामाजिक, कल्याण तथा सुरक्षा क्षेत्रों से संबंधित अनौपचारिक मंत्री समूह (IGoM) के अंतर्गत हितधारकों की परामर्श बैठक आयोजित की गई।
• असम के गुवाहाटी में आरजीएम के अंतर्गत 28.93 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित उत्तर पूर्वी क्षेत्र की पहली आईवीएफ प्रयोगशाला का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिनांक 11.10.2025 को किया गया। यह अत्याधुनिक सुविधा उत्तर पूर्वी राज्यों में दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार को महत्वपूर्ण गति प्रदान करेगी।
• सुरभि चयन श्रृंखला: DAHD ने देश भर में श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म का पता लगाने और प्रसार के लिए सुरभि चयन श्रृंखला नामक एक व्यापक निष्पादन रिकॉर्डिंग कार्यक्रम शुरू किया है। सुरभि चयन शृंखला के अंतर्गत 5 लाख पशुओं की प्रारंभिक पहचान पूरी कर ली गई है।
2.2 पुरस्कार
राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार, पशुधन और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है। वर्ष 2024 से, विभाग ने तीनों श्रेणियों में उत्तर पूर्वी क्षेत्र (NER) राज्यों के लिए एक विशेष पुरस्कार शामिल किया है। 26 नवंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस की पूर्व संध्या पर 15 पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया गया।
2.3 वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियाँ:
• इस वर्ष दूध उत्पादन 247.87 मिलियन मीट्रिक टन के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया और पिछले 11 वर्षों में इसमें 69.4% की वृद्धि हुई।
• उत्पादकता में भारी वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2013-14 में 1648.17 किलोग्राम/पशु/वर्ष से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 2079 किलोग्राम/पशु/वर्ष हो गई, जो 27% की वृद्धि से विश्व में उच्चतम उत्पादकता वृद्धि दर है।
• वर्ष 2023-24 के दौरान दूध उत्पादन का मूल्य 12.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो मूल्य के अनुसार इसे सबसे महत्वपूर्ण कृषि वस्तु बनाता है।
• 50% से कम कृत्रिम गर्भाधान कवरेज वाले 623 जिलों में राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम कार्यान्वित किया गया और 623 में से 126 जिलों को 50% से अधिक कृत्रिम गर्भाधान कवरेज वाले जिलों की श्रेणी में लाया गया। इस पहल के साथ, देश में कृत्रिम गर्भाधान (AI) कवरेज 25% से बढ़कर 40% प्रजनन योग्य मादा बोवाइन हो गया है।
• गोपशुओं और भैंसों के आनुवंशिक सुधार को गति देने के लिए विभाग ने, एकीकृत जीनोमिक चिप्स विकसित किए हैं - देशी गोपशुओं के लिए गौ चिप और भैंसों के लिए महिष चिप, जिन्हें विशेष रूप से देश में जीनोमिक चयन शुरू करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। संदर्भ आबादी तैयार करने के लिए अब तक 75,000 पशुओं का जीनोटाइप किया जा चुका है।
3. दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, दूध की खरीद, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन के उद्देश्य से विभाग, केंद्रीय क्षेत्र की योजना राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) कार्यान्वित कर रहा है। एनपीडीडी (घटक क) के अंतर्गत, 28 राज्यों और 3 संघ राज्य क्षेत्रों में 253 परियोजनाओं को वर्ष 2014-15 से वर्ष 2025-26 (दिनांक 30.11.2025 तक) तक कुल 4110.98 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा 2979.56 करोड़ रुपये) की लागत से अनुमोदित किया गया है। इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए कुल 2410.99 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एनपीडीडी (घटक क) के अंतर्गत प्राप्त प्रमुख उपलब्धियाँ: (i) परियोजना संस्वीकृति समिति (PSC) ने दिनांक 16.06.2025 को अपनी बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान एनपीडीडी योजना के अंतर्गत 21902 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन को (सैद्धांतिक रूप से) अनुमोदन दे दिया है और राज्य के प्रस्ताव/पात्रता के अनुसार, 17 राज्यों में 8836 डेयरी सहकारी समितियों की परियोजनाओं को 142.65 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय (केंद्रीय हिस्सा 75.86 करोड़ रुपये) के साथ अनुमोदन दिया गया है और इसमें से 37.93 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा राज्यों को कार्यान्वयन के लिए जारी किया जा चुका है। (ii) पीएससी ने अपनी बैठक में 8 राज्यों की परियोजनाओं को 290.95 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय (185.36 करोड़ रुपये) के साथ अनुमोदन प्रदान कर दिया है। (iii) वर्ष 2025-26 के दौरान, 467 टीएलपीडी क्षमता वाली बीएमसी और 2330 इलेक्ट्रॉनिक दूध मिलावट परीक्षण मशीनें लगाई गईं, 16 डेयरी संयंत्र स्तरीय प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया गया और 2526 डेयरी सहकारी समिति (DCS)/दूध पूलिंग केंद्र (MPP) चालू किए गए। पशुपालन और डेयरी विभाग किसानों की संगठित बाजार तक पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन अवसंरचना को उन्नत करके तथा उत्पादक स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता बढ़ाकर दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अब तक 1617.15 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 42 परियोजनाओं को अनुमोदन दे दिया गया है। अब तक, एनपीडीडी के घटक ख के तहत, 6516 नई डीसीएस का सृजन किया गया, 6480 डीसीएस को सुदृढ़ किया गया और 9973 एएमसीयू/डीपीएमसीयू स्थापित की गई हैं। इसके अलावा, 243 एलएलपीडी मूल्यवर्धित उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए अवसंरचना स्थापित की गई है। डेयरी कार्यकलापों में लगी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों को सहायता (SDCFPO) योजना के तहत पात्र सहभागी एजेंसियों (PAs) द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कार्यशील पूंजीगत ऋणों पर 2% प्रति वर्ष का ब्याज सबवेंशन प्रदान किया जाता है। दिनांक 31.10.2025 तक, देश भर के 64 दुग्ध संघों के लिए 80,048 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजीगत ऋण राशि के लिए 680.68 करोड़ रुपये का ब्याज सबवेंशन (358.29 करोड़ रुपये नियमित ब्याज सबवेंशन और 322.39 करोड़ रुपये अतिरिक्त ब्याज सबवेंशन के रूप में) प्रदान किया गया था।
4. राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM): इस योजना का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि करना और इस प्रकार मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन के उत्पादन को बढ़ाना है। दिनांक 21.02.2024 से ऊंट, घोड़ा, गधा और खच्चर के विकास जैसे नए कार्यकलाप शामिल करने के लिए इस योजना में संशोधन किया गया है। व्यक्तिगत, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG), संयुक्त देयता समूहों (JLG), किसान सहकारी संगठनों (FCO) और धारा 8 कंपनियों को प्रोत्साहन देकर पहली बार इन पशुओं को प्रजनन फार्म स्थापित करने के लिए चुना गया है। हरे चारे की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, साझा चरागाह भूमि, अवक्रमित वन भूमि, बंजर भूमि और वन भूमि में चारा उत्पादन के लिए कार्यकलाप चलाए जा रहे हैं। इससे चारा खेती के लिए क्षेत्रफल बढ़ाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने पशुधन बीमा कार्यक्रम को भी सुव्यवस्थित किया है। लाभार्थी द्वारा प्रीमियम के रूप में दी जाने वाली राशि को घटाकर 15% कर दिया गया है, जो पहले विभिन्न लाभार्थी श्रेणियों और राज्यों में 20% से 50% तक थी। अब लाभार्थी केवल 15% प्रीमियम राशि का योगदान देकर अपने पशुओं का बीमा करा सकते हैं और शेष प्रीमियम राशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा क्रमशः 60:40, 90:10 और 100% के अनुपात में दी जाएगी। साथ ही, एक लाभार्थी द्वारा बीमा किए जा सकने वाले पशुओं की संख्या भी 5 पशु इकाई (1 पशु इकाई = एक बड़ा पशु या 10 छोटे पशु) से बढ़ाकर 10 पशु इकाई कर दी गई है। अब एक लाभार्थी 100 छोटे पशुओं और 10 बड़े पशुओं का बीमा करा सकता है। हालांकि, सुअर और खरगोश के लिए यह संख्या 5 पशु इकाई होगी। वर्तमान में, बीमा प्रतिशत केवल 0.98% है, सरकार ने देश की कुल पशु आबादी के 5% को कवर करने के लिए पहलें की हैं।
वित्तीय प्रगति: वर्ष 2025-26 के लिए 240 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से अब तक 160 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है। अब तक, DAHD द्वारा 3843 आवेदनों को अनुमोदित किया गया है और 2014 लाभार्थियों को सब्सिडी के रूप में 474.06 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
5. पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF): पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) योजना का उद्देश्य व्यक्तिगत उद्यमियों, निजी कंपनियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और धारा 8 की कंपनियों को पशुपालन के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इनमें मूल्यवर्धन सहित डेयरी और मांस प्रसंस्करण, पशु आहार संयंत्र, नस्ल सुधार तकनीकों और वृद्धि फार्मों, पशु चिकित्सा टीकों और दवा उत्पादन सुविधाओं, पशु अपशिष्ट से सम्पति प्रबंधन और प्राइमरी ऊन प्रसंस्करण अवसंरचना शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान इसे अनुमोदन दिया गया। इसके अतिरिक्त, डेयरी अवसंरचना विकास निधि (DIDF) को फरवरी 2024 में AHIDF में शामिल कर लिया गया है, जिससे संशोधित परिव्यय बढ़कर 29,610 करोड़ रुपये हो गया है। इस अग्रणी योजना की मुख्य विशेषताओं में 90% तक ऋण पर 3% ब्याज सबवेंशन, लाभार्थियों के लिए ऋण राशि पर कोई सीमा नहीं और MSME के लिए EBLR + 200 आधार अंक की ब्याज दर शामिल हैं। दिनांक 10 दिसंबर 2025 तक, इस योजना के तहत कुल 465 परियोजनाओं को अनुमोदन दिया गया है, जिनकी कुल परियोजना लागत 21,562.85 करोड़ रुपये है और ब्याज सबवेंशन 669.59 करोड़ रुपये है।
6. पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) प्रमुख पशुधन रोगों पर ध्यान देता है और पशुधन उत्पादकता में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सुदृढ़ करता है। प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
6.1 राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP): वर्ष 2019 में शुरू की गई NADCP, वर्ष 2030 तक एफएमडी और ब्रुसेलोसिस को समाप्त करने की विश्व की सबसे बड़ी पहल है। 125.75 करोड़ से अधिक एफएमडी टीके लगाए जा चुके हैं, जिससे 26.27 करोड़ किसानों को लाभ हुआ है। पीपीआर और सीएसएफ के लिए टीकाकरण अभियान ने भी सुदृढ़ कवरेज हासिल की। वर्ष 2025 में, एफएमडी टीकाकरण को चरवाहों की भेड़ और बकरियों तक विस्तारित किया गया।
6.2 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ (MVU): 29 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में 4,019 एमवीयू कार्यरत हैं, जो टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से घर-घर जाकर पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इनसे 119.77 लाख किसानों को लाभ हुआ है और 245.05 लाख पशुओं का उपचार किया गया है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और पशुधन क्षेत्र को एक व्यवहार्य उद्यम के रूप में समर्थन मिला है।
6.3 पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता (ASCAD): यह राज्यों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर, प्राथमिकता प्राप्त रोगों के नियंत्रण, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यकलापों के आयोजन के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
7. पशु चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार: योग्य पशु चिकित्सकों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए, आईवीसी अधिनियम, 1984 के तहत नए कॉलेजों की अनुमति दी गई है। पशु चिकित्सा कॉलेजों की संख्या वर्ष 2014 में 36 से बढ़कर वर्ष 2025 में 84 हो गई है। प्रवेश NEET स्कोर के आधार पर ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली द्वारा होता है।
8. पशुधन संगणना और एकीकृत नमूना सर्वेक्षण योजना:
8.1 एकीकृत नमूना सर्वेक्षण: दूध, अंडा, मांस और ऊन जैसे प्रमुख पशुधन उत्पादों (MLP) का अनुमान लगाने के लिए। ये अनुमान विभाग के मुलभूत पशुपालन सांख्यिकी (BAHS) के वार्षिक प्रकाशन में प्रकाशित किए जाते हैं। हाल ही में, वर्ष 2024-25 की अवधि के लिए मूलभूत पशुपालन सांख्यिकी (BAHS)-2025 प्रकाशित की गई है।.
8.2 पशुधन संगणना: 21वीं पशुधन संगणना का शुभारंभ माननीय मंत्री, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा 25 अक्टूबर, 2024 को किया गया। पशुधन एवं पोल्ट्री संबंधी 21वीं पशुधन संगणना के आंकड़ों के लिए जमीनी कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में आंकड़ों का सत्यापन एवं रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।
9. देश में घुड़सवारी कार्यकलापों को सुगम बनाने के लिए जीवित घोड़ों की आयात के बाद की संगरोध अवधि को घटाकर 21 दिन कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा से मुक्त 44 भारतीय पोल्ट्री प्रतिष्ठानों की सूची विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) को अधिसूचित कर दी गई है। WOAH को दी गई अधिसूचना पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात को सुकर बनाती है।
10. दुग्ध सहकारी समितियों और दुग्ध उत्पादक कंपनियों के डेयरी किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): दिनांक 21.11.2025 तक, AHD किसानों के लिए 45.60 लाख से अधिक नए KCC संस्वीकृत किए गए।
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J P
(रिलीज़ आईडी: 2212291)
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