इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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विज्ञान के लिए एआई (एआई4एस) पर आयोजित सम्मेलन ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले खुले, निष्पक्ष और प्रभाव-चालित अनुसंधान के  लिए एजेंडा निर्धारित किया

प्रविष्टि तिथि: 08 JAN 2026 5:30PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारियों के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में आज आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क में विज्ञान के लिए एआई (एआई4एस) - कार्य समूह की बैठक आयोजित की गई। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत इंडियाएआई ने महाराष्ट्र सरकार और आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से इसका आयोजन किया। इस एक दिवसीय हाइब्रिड सम्मेलन में अग्रणी वैज्ञानिक, नीति निर्माता, प्रौद्योगिकीविद और नवप्रवर्तक एक साथ आए और इस बात पर चर्चा की कि एआई वैज्ञानिक खोज को गति देने और सामाजिक समाधान प्रदान में कैसे मदद कर सकती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में गठित विज्ञान कार्य समूह ने एक ऐसे भविष्य की साझा परिकल्पना प्रस्तुत की, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) खुले, पारदर्शी और न्यायसंगत सहयोग के माध्यम से विज्ञान को आगे बढ़ाएगी और क्षमता एवं भागीदारी में वैश्विक असमानताओं को दूर करेगी। समूह ने सामूहिक समझ और साझा मानदंडों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया ताकि एआई वैश्विक विज्ञान की सीमाओं को संकुचित करने के बजाय विस्तारित करे।

विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने अपने मुख्य भाषण में कहा, “विज्ञान में एआई का उपयोग पहले से ही महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है, विशेष रूप से परिकल्पना निर्माण और विश्लेषण में। जैसे-जैसे वैज्ञानिक खोज में और अधिक परिवर्तन आएगा, इसका प्रभाव वर्तमान में एआई आधारित अनुप्रयोगों से जुड़े प्रभावों से कहीं अधिक व्यापक होगा। इसके लिए मजबूत वैज्ञानिक आधार पर आधारित गहन तकनीकी नवाचार की जरूरत है।

अपने संबोधन में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (सीडी) श्री अमित शुक्ला ने कहा, “एआई वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रकृति और गति को बदल रहा है। यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि इसका उपयोग वैश्विक प्रगति के लिए एक शक्ति के रूप में हो, और इसे जिम्मेदारीपूर्वक, समावेशी रूप से और सार्वजनिक हित के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग में प्रधान सचिव (लेखा एवं कोषागार) डॉ. ऋचा बागला ने कहा, "हम प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की उम्मीद करते हैं ताकि मिलकर ऐसे समाधान निर्मित किए जाएं जो विस्तार योग्य, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित हों।"

महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने विशेष संबोधन में कहा, “विज्ञान में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित शामिल हैं और एआई ने सफलतापूर्वक इन विषयों में अपनी जगह बना ली है, जिससे नई खोजें प्रेरित हुई हैं। इसका प्रभाव अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। यही कारण है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमारी संप्रभुता को मजबूत करता है और हमें एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है।

इंडियाएआई के निदेशक श्री मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने कहा, "इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एआई को लोकतांत्रिक बनाने, डिजिटल विभाजन को पाटने और स्वदेशी समाधान विकसित करने के लिए एक वैश्विक मंच है। इसके साथ ही वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बिठाने और वैश्विक एआई चर्चा में हर आवाज को सशक्त बनाने का भी एक मंच है।"

आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर मणि भूषण ने कहा, "नीति, शिक्षा जगत, उद्योग और छात्रों को एक साथ लाकर यह सम्मेलन विज्ञान के लिए एआई (एआई4एस) को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।"

आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “हमें एआई को अपनाना तो चाहिए, उपयोग सावधानी से करना चाहिए। अहम सवाल यह है कि हम शोधकर्ताओं की भूमिका को प्रासंगिक कैसे बनाए रखें। इसका जवाब एआई के विशिष्ट क्षेत्र-आधारित अनुप्रयोगों में निहित है, जहां एआई एक एकीकृत शक्ति के रूप में कार्य करता है, जो सभी को उनकी पहचान खोए बिना साथ लेकर चलता है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अमित शेठ का भाषण था, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और विनिर्माण क्षेत्रों में अनुप्रयोगों के माध्यम से सशक्त और विश्वसनीय एआई के लिए न्यूरो-सिम्बॉलिक दृष्टिकोण को समझाया। उन्होंने एआई और इंजीनियरिंग के बीच एक द्विदलीय सहजीवी संबंध की रूपरेखा प्रस्तुत की और इसे एक रणनीतिक राष्ट्रीय अनिवार्यता के रूप में परिभाषित किया।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन के प्रोफेसर प्रमोद खरगोनकर ने एआई के प्रति उत्साही लोगों से भरी सभा को एआई और इंजीनियरिंग के भविष्य के बारे में बताया। उन्होंने मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता को समझाया, जहां मनुष्य और मशीनें क्षमताओं को बढ़ाने, खोजों को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग करें।

प्रोफेसर डी. मंजुनाथ (आईआईटी बॉम्बे) के संचालित पैनल चर्चा 'सभी के लिए एआई: स्थानीय चुनौतियों के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाना' में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि वैश्विक एआई सहयोग को स्थानीय वैज्ञानिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप कैसे ढाला जा सकता है। पैनल में शामिल विद्वानों ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत के व्यापक संसाधनों, विविधता और जमीनी स्तर पर एआई के उपयोग का लाभ उठाते हुए, स्वतंत्र, सहयोगात्मक और उत्पाद-उन्मुख एआई विकास की जरूरत पर जोर दिया।

आईआईएसईआर पुणे के प्रोफेसर अमित आप्टे ने अपने भाषण में मौलिक वैज्ञानिक खोज में एआई की भूमिका पर एक सतर्क और सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने गणितीय सटीकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूसरे पैनल का शीर्षक 'सार्वजनिक एआई निवेश को कारगर बनाना: मूल्यांकन, वित्तपोषण और प्रभावशाली कार्यान्वयन के मार्ग' था। इसका संचालन प्रोफेसर रवि गुडी (आईआईटी बॉम्बे) ने किया। इस पैनल में इस बात पर चर्चा हुई कि एआई में सार्वजनिक वित्तपोषण का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है और इसे वास्तविक परिणामों में कैसे बदला जा सकता है। वक्ताओं ने संप्रभु, समावेशी और जिम्मेदार एआई पर जोर दिया, जो मजबूत शासन, समग्र सार्वजनिक निवेश और भारत तथा विकासशील देशों के लिए सुरक्षा, विस्तारशीलता और वास्तविक प्रभाव पर केंद्रित हो।

सम्मेलन का समापन एक बंद कमरे में हुई कार्य समूह की बैठक के साथ हुआ, जिसके बाद प्रोफेसर राघवन बी. सुनोज (आईआईटी बॉम्बे), श्री विकास रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि), महाराष्ट्र सरकार और श्रीमती कविता भाटिया, सीओओ, इंडियाएआई की अध्यक्षता में एक समापन सत्र आयोजित किया गया।

परिणामों का सारांश प्रस्तुत करते हुए, श्रीमती कविता भाटिया, वैज्ञानिक जी, जीसी, इलेक्ट्रॉनिकी और एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सीओओ, इंडियाएआई ने कहा, “विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में एआई तेजी से एक सहायक क्षमता बन रहा है। इस संदर्भ में, विज्ञान में खोजों को गति देने, अनुसंधान उत्पादकता में सुधार करने और अनुसंधान को मापने योग्य सार्वजनिक मूल्य वाले अनुप्रयोगों में बदलने की क्षमता है। इस पृष्ठभूमि में, विज्ञान के लिए एआई कार्य समूह का विशेष महत्व है। यह कार्य समूह साझा प्राथमिकताओं की पहचान करने, साझेदारी बनाने और ऐसे व्यावहारिक सुझाव विकसित करने के लिए एक संरचित मंच प्रदान करता है जो भारत के अनुसंधान परितंत्र को मजबूत कर सकते हैं और मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।

विज्ञान के लिए एआई पर आयोजित सम्मेलन ने एक जिम्मेदार, सहयोगात्मक और प्रभाव-उन्मुख वैश्विक एआई परितंत्र को आकार देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया, जिससे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में होने वाली चर्चाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ।

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पीके/केसी/एके/एसवी


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