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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में युवाओं से विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की यात्रा का नेतृत्व करने का आह्वान किया


बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है, अनुकूलनशीलता ही सफलता की कुंजी है: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने माता-पिता और शिक्षकों के प्रति आजीवन आभारी रहने का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 09 JAN 2026 7:53PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और युवाओं से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा में पेशेवर उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

विकसित भारत @2047 के विजन के बारे में बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी आजादी की शताब्दी की दिशा में बढ़ते हुए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी लेकिन हासिल किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि यह विजन सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास भी शामिल है। इस विजन की सफलता काफी हद तक युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करती है।

एक बड़ी वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरने की भारत की आकांक्षा को स्पष्ट करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उद्देश्य छोटे देशों पर अपनी शर्तें थोपना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित  करना है कि कोई अन्य देश भारत पर अपनी शर्तें न थोप सके।

तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जो चीज पांच  वर्ष पहले जरूरी थी, वह जल्द ही अपनी प्रासंगिकता खो सकती है। उन्होंने कहा कि बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है और निरंतर सफलता के लिए अनुकूलनशीलता एवं आजीवन सीखते रहने की ललक आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से कभी न करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग जीवन यात्रा और गति होती है। अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, लगन और ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को साधारण शुरुआत से बड़ी जिम्मेदारी वाले पदों तक ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ अपने लिए ही जीने से जीवन का बड़ा उद्देश्य खत्म हो जाता है।

विद्यार्थियों के लिए आवश्यक तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों के बारे में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे समय का प्रभावी प्रबंधन करने, दीर्घकालिक सफलता को नुकसान पहुंचाने वाले शॉर्टकट से बचने तथा कभी हार न मानने का आग्रह किया और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक कथन  - “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” - की याद दिलाई।

उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी की जय जवान स्कॉलरशिप की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के जवानों एवं उनके परिवारों के बलिदानों को सार्थक शैक्षिक सहायता देकर सम्मानित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिवर्सिटी के काम का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी पहलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि विश्वविद्यालय सिर्फ सीखने के केन्द्र भर नहीं होते, बल्कि वे ऐसी संस्थाएं हैं जो राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में मदद करती हैं।

विश्वविद्यालय परिसरों में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए, उपराष्ट्रपति ने इसे युवाओं और समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया और विद्यार्थियों से अनुशासन, सार्थक उद्देश्य और स्वास्थ्य जीवनशैली चुनकर मादक पदार्थों को साफ और सीधे तौर पर “ना” कहने की अपील की।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति सदा आभारी रहें, जिनका मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्य उनके चरित्र एवं भविष्य को आकार देते हैं।

दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया; पंजाब सरकार में रक्षा सेवा कल्याण, स्वतंत्रता सेनानी तथा बागवानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत; और सांसद (राज्यसभा) तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

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पीके/केसी/आर/डीके


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