राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, भारत का चार सप्ताह का विंटर इंटर्नशिप प्रोग्राम संपन्न


देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 80 छात्रों ने इंटर्नशिप प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा किया

समापन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने कहा कि इंटर्नशिप का उद्देश्य छात्रों में जिज्ञासा जागृत करना और जीवन में मकसद खोजने के लिए सीखने की ललक पैदा करना है

प्रविष्टि तिथि: 09 JAN 2026 8:36PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत का चार सप्ताह का विंटर इंटर्नशिप प्रोग्राम (डब्ल्यूआईपी) आज नई दिल्ली में संपन्न हुआ। देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 1,485 से ज़्यादा आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से 80 छात्रों को चुना गया और इन छात्रों ने इस प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा किया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए, एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने कहा कि इस प्रोग्राम का मकसद प्रशिक्षुओं की सोच को व्यापक बनाना और आत्मनिरीक्षण को बढ़ावा देना है ताकि इंसान के तौर पर उनके जीवन में कुछ मूल्य जुड़ सके। इसका उद्देश्य जिज्ञासा जागृत करना और जीवन में मकसद खोजने के लिए सीखने की ललक पैदा करना है। आज आप जो इंसान हैं और कल जो इंसान थे, उनके बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।

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इस बात पर ज़ोर देते हुए कि हर चीज़ से सीखा जा सकता है, न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने कहा कि जीवन में खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि इंसान जो काम करना पसंद करता है, उसे पूरी लगन और ध्यान से करे। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे इंटर्नशिप के दौरान हासिल किए गए ज्ञान का प्रसार करें और मानवाधिकारों के एम्बेसडर बनें।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु (इंटर्न) देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। इस तरह, इंटर्नशिप एक-दूसरे को जानने और समझने का अवसर प्रदान करती है कि हमारा देश कैसा है। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मां और मातृभूमि से बड़ा कोई स्वर्ग नहीं है और उन्हें अपने देश से प्यार करना चाहिए।

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प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए, एनएचआरसी के सदस्य, न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि इस इंटर्नशिप के माध्यम से इंसानों और मानवाधिकारों के प्रति समझ पैदा की गई हैं। उन्हें कुछ बेहतरीन लोगों से सीखने का अवसर मिला, जिन्होंने मानवाधिकार तंत्र के बारे में अपना ज्ञान और विचार साझा किए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे समाज की बेहतरी के लिए सार्थक योगदान देंगे।

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इससे पहले, एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि अच्छा इंसान बनने के लिए कुछ पूर्वाग्रहों और गलत धारणाओं को भूलना उतना ही ज़रूरी है जितना कि सीखना। एनएचआरसी के साथ इंटर्नशिप जैसे अवसर जीवन, गरिमा, सम्मान और शिष्टाचार के बारे में हमारी समझ को बढ़ाते हैं। आखिर में, ये वो मूल्य होते हैं जो हम अपनाते हैं, वही सब कुछ बदल देते हैं। बिना उद्देश्य और मूल्यों के कौशल व ज्ञान का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे जीवन में ज्ञान, कौशल, मूल्य और उद्देश्य के साथ आदर्श नागरिक बनें। महासचिव ने कहा कि इंटर्नशिप के बाद, प्रशिक्षु मानवाधिकार रक्षक हैं। उन्हें समाज को बेहतर बनाने के लिए गलत चीज़ों के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।

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एनएचआरसी की संयुक्त सचिव सैदिंगपुई छकछुआक ने इंटर्नशिप रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें प्रोग्राम की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया और पुस्तक समीक्षा, ग्रुप रिसर्च प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन व भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की गई। उन्होंने पूरे प्रोग्राम के दौरान प्रशिक्षुओं की प्रतिबद्धता, लगन और सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने उनसे सभी के लिए न्याय, गरिमा और समानता के विचार को अपनाने का भी आग्रह किया।

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समारोह का समापन एनएचआरसी के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेंद्र सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर एनएचआरसी के वरिष्ठ अधिकारी श्री जोगिंदर सिंह, रजिस्ट्रार (विधि) और श्री गौरव गर्ग, डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (जांच) सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

इंटर्नशिप प्रोग्राम में एनएचआरसी के अध्यक्ष, सदस्यों व वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न आयोगों और मंत्रालयों के सेवारत और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों, सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा अन्य विशेषज्ञों सहित जाने-माने वक्ताओं के सत्र शामिल थे। प्रशिक्षुओं ने तिहाड़ जेल, पुलिस स्टेशन और एसएचईओडब्ल्यूएस एनजीओ का फील्ड विजिट भी किया ताकि वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों और मानवाधिकारों से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की प्रत्यक्ष समझ भी हासिल कर सके।

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पीके/केसी/एसके


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