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केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड ने आईसीएआर के सहयोग से अविकानगर में "भारतीय ऊन क्षेत्र की चुनौतियां, अवसर और भविष्य की संभावनाएं" विषय पर चिंतन शिविर का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 16 JAN 2026 10:01PM by PIB Delhi

केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (सीडब्ल्यूडीबी), वस्त्र मंत्रालय ने आईसीएआर-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्लूआरआई) के सहयोग से भारतीय ऊन क्षेत्र की चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की संभावनाओं पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आज राजस्थान के अविकानगर में आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती नीलम शमी राव, सचिव (वस्त्र) ने मुख्य अतिथि के तौर पर की। वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती पद्मिनी सिंगला ने विशिष्ट अतिथि के रूप में इसमें हिस्‍सा लिया।

चिंतन शिविर में भारत सरकार के ऊन क्षेत्र से संबंधित विभागों के अधिकारियों और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब सहित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने व्यापक भागीदारी दिखाई। वस्त्र समिति, अनुसंधान संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और गैर-सरकारी संगठनों जैसे अन्य हितधारक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और विचार-विमर्श में अपना योगदान दिया।

चिंतन शिविर के दौरान चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिनमें विशेषज्ञ पैनलों ने भेड़ पालन, ऊन उत्पादन, ऊन पूर्व-प्रसंस्करण, अनुसंधान और विकास, सतत विकास, मूल्यवर्धन, साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी), मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और ऊन तथा ऊनी उत्पादों के विपणन एवं ब्रांडिंग सहित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस कार्यक्रम में वर्तमान चुनौतियों, उपलब्ध अवसरों और भविष्य की रणनीतियों एवं कार्य योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

श्रीमती नीलम शमी राव, सचिव (वस्त्र) ने विचार-विमर्श से उभरे प्रमुख सुझावों का सारांश प्रस्तुत करते हुए भारतीय ऊन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऊन उत्पादन और प्रसंस्करण के आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान एवं विकास कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऊन क्षेत्र में सामूहिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और सार्वजनिक-निजी पहलों के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि ऊन क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके।

श्रीमती पद्मिनी सिंगला, संयुक्त सचिव (वस्त्र) ने अपने मुख्‍य भाषण में ऊन उत्पादन, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और संवर्धन को एक एकीकृत मूल्य श्रृंखला के रूप में देखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने ऊन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए संपूर्ण विश्लेषण और रणनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

लेह-लद्दाख के पशुपालन विभाग के सचिव श्री रुद्र गौर ने सभा को संबोधित करते हुए लद्दाख में ऊन क्षेत्र के सामने आने वाली क्षेत्रीय चुनौतियों का उल्‍लेख किया। उन्होंने ऊन क्षेत्र को अन्य कृषि उत्पादों के समान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया और ऊन क्षेत्र के विकास पर विशेष रूप से केंद्रित एक समर्पित संस्थागत तंत्र के निर्माण पर जोर दिया।

चिंतन शिविर के प्रमुख परिणामों में ऊन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व सिफारिशें शामिल थीं, जिनमें संग्रहण, ग्रेडिंग और सफाई जैसी पूर्व-प्रसंस्करण गतिविधियां; ब्रांडिंग के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना; आर्थिक विश्लेषण के आधार पर रणनीतिक रूप से स्थित सीएफसी का निर्माण; भारतीय ऊन और ऊनी उत्पादों की ब्रांडिंग; और अनुसंधान और विकास पहलों को मजबूत करना शामिल है।

आईसीएआर-सीएसडब्लूआरआई, अविकानगर के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने संस्थान द्वारा विकसित ऊनी उत्पादों को प्रस्तुत करके सभी गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने अतिथियों को ऊन उत्पादन और उन्नत ऊनी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संस्थान की अनुसंधान एवं विकास पहलों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड, जोधपुर के कार्यकारी निदेशक श्री गोपाल सिंह भाटी ने चिंतन शिविर के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की और देश भर के भेड़ पालकों के कल्याण और उत्थान के लिए सीडब्लूडीबी द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों  के बारे में जानकारी दी।

चिंतन शिविर के साथ-साथ एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें भेड़ और खरगोश की विभिन्न नस्लों, परिधान-श्रेणी के ऊनी उत्पादों, मोटे ऊन से बने तकनीकी वस्त्र उत्पादों और विभिन्न अनुसंधान संगठनों द्वारा विकसित नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। कई स्टार्टअप्स ने भी अपने उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया। गणमान्य व्यक्तियों ने प्रदर्शनी, वस्त्र इकाई और आईसीएआर-सीएसडब्ल्यूआरआई स्थित कृषि व्यवसाय इनक्यूबेशन केंद्र का दौरा किया।

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पीके/केसी/जेके/एसएस


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