मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
भारत की समुद्री खाद्य निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए मजबूत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह
समुद्री खाद्य निर्यात प्रोत्साहन पर राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ गोलमेज सम्मेलन का नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजन
प्रविष्टि तिथि:
21 JAN 2026 11:48PM by PIB Delhi
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की अध्यक्षता में समुद्री खाद्य निर्यात प्रोत्साहन पर गोलमेज सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस अवसर पर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल भी उपस्थिति थे।

इस सम्मेलन में अल्बानिया, अंगोला, चीन, कोलंबिया, इक्वाडोर, फिजी, घाना, ग्वाटेमाला, आइसलैंड, ईरान, जमैका, जॉर्डन, मलेशिया, मालदीव, मोरक्को, पनामा, पेरू, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, उरुग्वे, सेनेगल, मोल्दोवा, टोगो, बेनिन, कतर, मैक्सिको, वेनेजुएला, वियतनाम, मिस्र, फ्रांस, इंडोनेशिया, इराक, माली, नॉर्वे, गिनी गणराज्य, रूस, स्पेन, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब सहित 40 देशों के राजनयिकों ने भाग लिया। ये राजनयिक एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र से हैं। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), एजेंस फ्रांसेज़ डे डेवलपमेंट (एएफडी), ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसामेनार्बीट (जीआईजेड), बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में सहभागिता की। इस मौके पर मत्स्य विभाग और विभिन्न संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

व्यापक प्रतिनिधित्व के माध्यम से मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य क्षेत्र में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को रेखांकित किया गया। जलवायु परिवर्तन और महासागर स्वास्थ्य, स्थिरता, उत्तरदायी मत्स्य पालन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, हरित नवाचार, क्षमता निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला विकास और सजावटी मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल की खेती जैसे उभरते क्षेत्र बेहतर सहयोग के प्रमुख स्तंभों के रूप में सामने आए।
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इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने अपने संबोधन में मजबूत नीतियों, प्रसंस्करण क्षमता एवं रसद के बल पर भारत के एक प्रमुख वैश्विक मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले एक दशक में समुद्री खाद्य निर्यात का मूल्य दोगुना हो गया है। उन्होंने कहा कि नेशनल फ्रेमवर्क ऑन ट्रेसबिलिटी (2025), ईईजेड नियम (2025) और अद्यतन उच्च समुद्री मत्स्य पालन दिशानिर्देश (2025) के माध्यम से भारत अनुपालन और पारदर्शिता को सशक्त कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपों में सतत, निर्यात-उन्मुख विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने उन्नत जलीय कृषि एवं समुद्री कृषि प्रौद्योगिकियों, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पोत डिजाइन, डिजिटल निगरानी, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, सतत मत्स्य प्रबंधन, व्यापार विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी में व्यापक सहयोग के अवसरों पर भी बल दिया।

मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने इस बात पर बल दिया कि समुद्री भोजन पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का मत्स्य पालन विभाग इस क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर निर्यात तक एक व्यापक मूल्य-श्रृंखला दृष्टिकोण अपना रहा है ।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने भारत में मत्स्य पालन की तीव्र वृद्धि का उल्लेख करते हुए उत्पादन में हुई मजबूत वृद्धि तथा विभाग के समुद्री खाद्य निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने की आकांक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने इस सार्थक संवाद को संभव बनाने में सहयोग और साझेदारी के लिए सहभागी देशों को धन्यवाद भी दिया।
मत्स्य पालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि औपचारिकीकरण और डिजिटलीकरण में वृद्धि के कारण भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में तीव्र वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि और निर्यात की मात्रा में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि आज यह क्षेत्र गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग, नियामक समन्वय और मजबूत ट्रेसिबिलिटी सिस्टम द्वारा परिभाषित है। चर्चाओं को अत्यंत सार्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में पहले से ही कई संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) मौजूद हैं और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय चर्चाएं भी शुरू की जाएंगी।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा ने भारत की वैश्विक समुद्री खाद्य उपस्थिति को मजबूत करने के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए खाद्य सुरक्षा, जानकारी लेने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के प्रति विभाग की दृढ़ प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य स्थिरता, निवेश के अवसरों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सार्थक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
भाग लेने वाले देशों ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में भारत के साथ गहन सहयोग में गहरी रुचि व्यक्त की। कई देशों ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, ज्ञान आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और संयुक्त उद्यमों में अवसरों की चर्चा की, जबकि चीन, मलेशिया, फ्रांस, स्पेन, सेशेल्स और सिंगापुर सहित कई देशों ने एक विश्वसनीय समुद्री खाद्य व्यापार भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका पर बल दिया। कई देशों ने स्थिरता, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, पता लगाने की क्षमता और मूल्यवर्धन में साझा प्राथमिकताओं पर बल दिया। अन्य देशों ने प्रसंस्करण, प्रमाणीकरण, जलीय कृषि विविधीकरण और अवसंरचना विकास में साझेदारी की मांग की।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने हस्तक्षेपों ने सतत मत्स्य प्रबंधन, मूल्य-श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, गहरे समुद्र संसाधन विकास, नियामक सहयोग और वैज्ञानिक सहयोग पर भारत के साथ मिलकर कार्य करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाया।
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एफएओ के सहायक प्रतिनिधि (एफएओआर) श्री कोंडा चाव्वा ने डिजिटल ट्रेसबिलिटी, प्रमाणन प्रणालियों और उच्च-मूल्य वाले बाजारों तक पहुंच को मजबूत करने में देशों का समर्थन करने के लिए एफएओ की प्रतिबद्धता पर बल दिया, साथ ही अवैध तरीके से मछली पकड़ने की रोकथाम के वैश्विक प्रयासों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एफएओ उन निवेश प्रस्तावों का समर्थन और वित्तपोषण करने के लिए तैयार है जो भारत के मत्स्य पालन विकास को गति दे सकते हैं, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकते हैं और भारत के व्यापक ब्लू इकोनॉमी विजन के अनुरूप हो सकते हैं।
समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अध्यक्ष श्री डोड्डा वेंकट स्वामी ने भारत के समुद्री खाद्य निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए व्यापार, विश्वास और प्रौद्योगिकी पर एमपीईडीए के लक्ष्य की जानकारी देते हुए बताया कि भारत मत्स्यपालन में उन्नत प्रौद्योगिकियों पर कई देशों के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने घनिष्ठ भागीदारी और सतत साझेदारी के माध्यम से वैश्विक सहयोग को गहरा करने के लिए एमपीईडीए की प्रतिबद्धता को दोहराया।
एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए माननीय केंद्रीय मंत्रियों, राजदूतों, उच्चायुक्तों, काउंसलरों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को इस कार्यक्रम में उनकी गरिमामय उपस्थिति और बहुमूल्य योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इन वार्ताओं के दौरान प्राप्त जानकारियां अधिक प्रतिस्पर्धी, विविध और स्थायी समुद्री खाद्य निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहायक होंगी, जिससे आजीविका में सुधार होगा, अंतर्राष्ट्रीय बाजार संबंध मजबूत होंगे और भारत के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास होगा।
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पीके/केसी/एसएस/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2217199)
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