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दूरसंचार घनत्‍व 86.76 प्रतिशत पहुंचा और 5-जी सेवाएं अब देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध


भारत स्‍वायत्‍त सेटेलाइट डॉकिंग क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बना

जल जीवन मिशन के अंतर्गत 81 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से स्‍वच्‍छ जल की सुविधा उपलब्‍ध  

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 1:34PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, स्‍वच्‍छ ऊर्जा तंत्र, सुगम जल प्रबंधन और भविष्‍य के लिए तैयार तकनी‍कों को पाने के लिए आधारभूत अवसंरचना का विस्‍तार हो रहा है। पिछले 11 वर्ष पारंपरिक अवसंरचना जैसे- राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा तंत्र का केवल विस्‍तार ही नहीं बल्कि भविष्‍य के लिए तैयार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर (डीपीआई), डेटा सिस्‍टम और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ संसाधनों को एकीकृत करने का विस्‍तार है।

भविष्‍य के लिए तैयार डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर  

दूरसंचार

भारत का दूरसंचार क्षेत्र उल्‍लेखनीय परिवर्तन से गुजर चुका है जो सरकार के डिजिटल रूप से सशक्‍त राष्‍ट्र के दृष्टिकोण को दर्शाता है। ये सभी प्रयास दूरसंचार इकोसिस्‍टम को तैयार करने जैसे- समावेशित (समावेशी विकास को गति प्रदान करने के लिए संपर्क स्‍थापित करना), विकसित (प्रदर्शन, सुधार और परिवर्तन)त्‍वरित (तेज विकास और आसान समाधान) और सुरक्षित (सुरक्षित और संरक्षित) पर केंद्रित थे।

इसके परिणामस्‍वरूप दूरसंचार घनत्‍व के 75.23 प्रतिशत से बढ़कर 86.76 प्रतिशत विस्‍तार के साथ पिछले दशक में भारत के दूरसंचार क्षेत्र का तेजी से विस्‍तार हुआ और गांव तथा शहर के बीच बंटी हुई पहुंच की दूरी को कम किया। वायरलैस, डेटा की कीमतों में तेजी से गिरावट औसत मासिक डेटा खपत के बढ़ने से संबंधित थी जो ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों द्वारा डिजिटलीकरण की सुलभता की भूमिका को उजागर करता है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि दूरसंचार घनत्‍व बढ़कर 86.76 प्रतिशत हुआ और 5जी सेवाएं अब देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्‍ध है।

सूचना प्रौद्योगिकी

भारत की सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना डिजिटल शासन, आर्थिक गतिविधि और आधुनिक तकनीक का आधार है। औद्योगिक अनुमान के अनुसार जून 2025 तक भारत की स्‍थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1280 मेगावॉट थी, जिसमें लगभग 130 निजी तौर पर संचालित डेटा सेंटर और केंद्र तथा राज्‍य स्‍तर पर सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित 49 डेटा सेंटर थे। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार तेजी से डिजिटलीकरण और क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईओटी और 5जी जैसी तकनीकों के अपनाने से प्रेरित होकर औद्योगिक अनुमानों के अनुसार डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक बढ़कर लगभग 4 गीगावॉट होने का अनुमान है। 

सामाजिक और उभरते क्षेत्र की अवसंरचना

ग्रामीण पेयजल और स्‍वच्‍छता

भारत ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत उल्‍लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जिसमें अक्‍टूबर 2025 तक जल जीवन मिशन के अंतर्गत 81 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण आवासीय परिवारों को स्‍वच्‍छ नल से जल उपलब्‍ध कराया है।

जल संसाधन प्रबंधन क्षेत्र

जल संसाधन प्रबंधन की मुख्‍य पहलों में नमामि गंगे कार्यक्रम, कमांड क्षेत्र का आधुनिकीकरण (एम-सीएडीडब्‍ल्‍यूएम) सी-बाढ़ प्‍लेटफॉर्म,  राष्‍ट्रीय विशिष्‍ट बांधों का रजिस्‍टर 2025रिवर सिटीज एलाएंस (आरसीए) एक्‍शन प्‍लान 2025 और राष्‍ट्रीय जल संसाधन जनगणना शामिल है।

पर्यटन

भारत सरकार ने स्‍वदेश दर्शन योजना को स्‍वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0) के रूप में नया रूप दिया है, जिसका उद्देश्‍य सतत और जिम्‍मेदार पर्यटन स्‍थलों का विकास करना है। राष्‍ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्‍प और आध्‍यात्मिक,  विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) को चयनित तीर्थयात्रा और विकास स्‍थलों के एकीकृत विकास का समर्थन करने के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में शुरू किया है।

अंतरिक्ष क्षेत्र

भारत वर्तमान में 56 सक्रिय अंतरिक्ष संपत्तियों का संचालन कर रहा है जिसमें 20 संचार उपग्रह, 8 नेविगेशन उपग्रह, 04 वैज्ञानिक उपग्रह, 21 पृथ्‍वी–अवलोकन ग्रह और 03 प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियान शामिल हैं। अंतरिक्ष अवसंरचना को मजबूत करने के साथ वर्ष 2025 के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है जिसमें भारत स्‍वायत्‍त उपग्रह डॉकिंग (स्‍पाडैक्‍स) हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है और साथ ही अंतरिक्ष मिशनों का विस्‍तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है।  इसके अतिरिक्‍त स्‍वदेशी क्रायोजनिक चरण वाले जीएसएलवी-एफ15 ने 29 जनवरी, 2025 को एनवीएस-02 उपग्रह का प्रक्षेपण किया था जो श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण था।

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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई - 32

 


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