वित्त मंत्रालय
भारत विश्व में प्रेषण प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता देश बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में प्रेषण अंतर्वाह बढ़कर 135.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया
16 जनवरी 26 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 701.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो लगभग 11 माह के आयात और विदेशी ऋण के 94 प्रतिशत से अधिक हिस्से को कवर करता है
भारत दक्षिण एशियाई देशों में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है तथा अंकटाड के अनुसार इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों से आगे निकल गया है
भारत 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ वर्ष 2020-24 के बीच ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश का सबसे बड़ा गंतव्य है
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 1:38PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार ‘बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है, निर्यात, निर्बाध सेवा व्यापार और व्यापार नेटवर्क के विस्तार में मजबूती द्वारा वैश्विक एकीकरण पर आधारित है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक मांग के कारण बढ़ती प्रतिस्पर्धा विविधता और अनुकूलता बढ़ी है।’
चालू खाता
भारत का चालू खाता घाटा सीमित बना रहा, जिससे सेवा निर्यात और प्रेषण से होने वाले तेज निवल अंतर्वाह में वृद्धि दर्ज की गई, जिसने वस्तु व्यापार घाटे की भरपाई की। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में, 25.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 0.8 प्रतिशत) होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारत न्यूजीलैंड, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा से उच्च घाटे में बेहतर बना रहा।
आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत विश्व में प्रेषण प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता देश बना रहा। वित्त वर्ष 2025 में प्रेषण अंतर्वाह बढ़कर 135.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिससे विदेशी खाते की स्थिरता को समर्थन प्राप्त हुआ। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले प्रेषणों का हिस्सा बढ़ा, जो कुशल और पेशेवर श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
पूंजी खाता
भारत वित्त वर्ष 2025 में वैश्विक वित्तीय स्थिति में प्रतिकूलता के बावजूद जीडीपी का 18.5 प्रतिशत सकल अंतरवाह निवेश के साथ नियमित रूप से आकर्षित करता रहा। अंकटाड के डेटा के अनुसार, इंडोनेशिया और वियतनाम तथा दक्षिणी एशियाई देशों में सकल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश अंतर्वाह में भारत सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है।
2024 की घोषणा में भारत वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में चौथे स्थान पर पहुंचा। 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर आकर्षण के साथ वर्ष 2020-24 के बीच ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश के लिए भारत 1000 से अधिक प्रोजेक्ट्स के साथ सबसे बड़ा आकर्षक केंद्र बना हुआ है। अप्रैल-नवंबर 2024 में 55.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान कुल एफडीआई अंतर्वाह 64.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मजबूती दर्ज किया। यह प्रतिकूल वैश्विक वातावरण के बावजूद निवेशकों के निरंतर विश्वास बना हुआ है। भारत के डिजिटल अर्थव्यवस्था में मजबूती को दर्शाता है।
भारत का एफपीआई पैटर्न अंतर्वाह और बहिर्प्रवाह के आवर्ती चक्रों को दर्शात है, जिनमें बड़े बदलाव प्राय: वैश्विक वित्तीय परिवर्तनों से सम्बद्ध होते हैं। आंकड़े अस्थिरता दर्शाते हैं, जिसमें छह माह में निवल बहिर्वाह और तीन माह में पर्याप्त निवल अंतर्वाह देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष-दर-तारीख के लिए मामूली निवल शेष रहा। इन अवधियों के दौरान, अंतर्वाह का तेजी से वापसी, यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भारत के प्रति मध्यम अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, यद्यपि उनके अल्पकालिक आवंटन भारतीय शेयरों के अब भी उच्च-मूल्यनिर्धारण और वैश्विक अनिश्चितता से प्रभावित होते हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी 2026 तक बढ़कर 701.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गए, जो मार्च 2025 के अंत में 668.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर थे। पर्याप्तता के संदर्भ में, 11 माह से अधिक के वस्तु आयात को अनुरक्षित करने और सितंबर 2025 के अंत तक बकाया विदेशी ऋण के लगभग 94 प्रतिशत तक के भुगतान के लिए पर्याप्त है, जो सहज नकदी बफर प्रदान करता है।
विनिमय दर
एक अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगभग 5.4 प्रतिशत नीचे गिरा। आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि घरेलू निवेश सृजित करने की आर्थिक क्षमता विदेशी पूंजी को बनाए रखना, एफडीआई को आकर्षित करने तथा नवाचार, उत्पादकता और गुणवत्ता में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में बनाए रखने से रुपये की स्थिति निर्धारित होती है।
विदेशी ऋण
सितंबर 2025 के अंत में भारत का विदेशी ऋण 746 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो मार्च 2025 के अंत के 736.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जबकि विदेशी ऋण से जीडीपी का अनुपात 19.2 प्रतिशत है। इससे आगे भारत के कुल ऋण में विदेशी ऋण की साझेदारी 5 प्रतिशत से भी कम है, जो विदेशी क्षेत्र के जोखिमों को कम करता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, दिसंबर 2024 के अंत तक, वैश्विक विदेशी ऋण में भारत की साझेदारी केवल 0.69 प्रतिशत है, जो वैश्विक ऋणग्रस्तता में इसके अपेक्षाकृत छोटे योगदान को रेखांकित करता है।
सारांश
आर्थिक सर्वेक्षण प्रेरित करता है कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए समग्र प्रयास से विनिर्माण लागत में कमी लाने की आवश्यकता है। निहित बाहरी सततता और मजबूत मुद्रा स्थिति प्राप्त करने के लिए निर्यात क्षमता विनिर्माण अनुशासन समर्थित उत्पादकता-आधारित औद्योगिक नीति सहित मूल्य आधारित इनपुट में सावधानीपर्वूक प्रबंधन और उच्च मूल्य सेवा की वृद्धि के द्वारा प्राप्त की जा सकती है।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई - 28
(रिलीज़ आईडी: 2219919)
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