पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

संसदीय प्रश्न: मौसम पूर्वानुमान में प्रगति

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 5:12PM by PIB Delhi

    

2024–25 के दौरान मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और महासागर अनुसंधान में हुई प्रगति की समीक्षा

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की विभिन्न गतिविधियों की प्रगति, जिसमें 2024-25 के दौरान मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और महासागर सेवाओं में हुई प्रगति शामिल है, की हाल ही में दिसंबर 2025 में आयोजित वार्षिक समीक्षा बैठक के दौरान समीक्षा की गई है। इसके अलावा, अगले वित्त आयोग चक्र के दौरान गतिविधियों को जारी रखने के लिए, अगस्त 2025 में एक स्वतंत्र समीक्षा समिति (IRC) द्वारा पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-2026) के दौरान विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के तहत सभी गतिविधियों/परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई थी।

आपदा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)-एमओईएस द्वारा चरम मौसम और जलवायु घटनाओं के लिए आपदा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार हेतु विभिन्न पहल की गईं। इस संबंध में प्रमुख उपलब्धियां नीचे सूचीबद्ध हैं:

स्वदेशी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियाँ विकसित की गईं, जो पूरे भारत में आपदा तैयारी को मजबूत करती हैं और सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार करती हैं। इन-हाउस विकसित 'डिसीजन सपोर्ट सिस्टम' (डीएसएस) "आत्मनिर्भर भारत" पहल के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक अत्याधुनिक 'सी-बैंड डॉपलर वेदर रडार' (डीडब्लूआर) चालू किया गया, जो डुअल पोलराइज्ड सॉलिड स्टेट पावर एम्पलीफायर पर आधारित है। यह रडार 250 किमी के दायरे में मानसून के दबाव और कम दबाव वाली प्रणालियों, भारी वर्षा, गरज के साथ तूफान, बिजली गिरने, स्क्वॉल, टर्बुलेंस और ओलावृष्टि जैसी विभिन्न गंभीर मौसम घटनाओं का पता लगाने में सक्षम है।

जिला स्तर पर प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियाँ प्रसारित की जा रही हैं, जिससे अधिकारियों को चक्रवात, भारी वर्षा, गरज के साथ तूफान, हीट वेव और शीत लहर के खिलाफ समय पर निवारक कार्रवाई करने में सशक्त बनाया जा रहा है।

"मौसमग्राम" (हर हर मौसम, हर घर मौसम) विकसित किया गया, जो एक अनूठा नागरिक-केंद्रित मंच है। यह गांव के स्तर तक स्थान-विशिष्ट और हाइपरलोकल मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। "मौसमग्राम" अगले 36 घंटों के लिए प्रति घंटा पूर्वानुमान, अगले पांच दिनों के लिए हर तीन घंटे का पूर्वानुमान और दस दिनों तक के लिए हर छह घंटे का पूर्वानुमान प्रदान करता है। उपयोगकर्ता पिन कोड या स्थान के नाम से खोज कर, या राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत का चयन करके आसानी से मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रणाली हाइपरलोकल पूर्वानुमानों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करती है, जिससे नागरिक अपने विशिष्ट स्थान के अनुसार सटीक और समय पर मौसम अपडेट प्राप्त कर सकते हैं।

पिछले दशकों की तुलना में हाल के दशकों में सभी प्रकार की गंभीर मौसम घटनाओं के लिए पूर्वानुमान की सटीकता में 40% का सुधार हुआ है। अखिल भारतीय औसत मानसून वर्षा के 'विस्तारित रेंज पूर्वानुमान' की सटीकता में 2015-2019 के मुकाबले 2020-2024 के दौरान पहले सप्ताह में 15%, दूसरे सप्ताह में 4% और तीसरे सप्ताह में 18% की वृद्धि हुई है। 2015-19 की तुलना में 2020-2024 के दौरान 24 घंटे के 'मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान' (क्यूपीएफ) में लगभग 22%, 7%, 15% और 67% का सुधार हुआ है।

एमओईएस के अधीन भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इंकॉइस ) द्वारा प्रदान की जाने वाली समुद्र-आधारित प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं में सुनामी की प्रारंभिक चेतावनी, स्टॉर्म-सर्ज़ (तूफान के कारण समुद्र का स्तर बढ़ना) अलर्ट, ऊंची लहरों, समुद्री धाराओं और स्वेल सर्ज़ संबंधी परामर्श शामिल हैं। यह तटीय उपयोगकर्ता समुदायों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए खोज और बचाव सहायता, तेल रिसाव ट्रेजेक्टरी पूर्वानुमान, छोटे जहाजों के लिए परामर्श, समुद्री हीटवेव की जानकारी और विभिन्न अन्य समुद्री सेवाएं भी प्रदान करता है। इंकॉइस मछुआरों के लिए 'संभावित मत्स्य पालन क्षेत्र' (पीएफजेड) परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। ये सेवाएं सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपदा की तैयारी और प्रतिक्रिया में सहायता के लिए वास्तविक समय के अवलोकन, उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल, मशीन-लर्निंग-आधारित विश्लेषण और उन्नत प्रसार प्लेटफार्मों का उपयोग करके प्रदान की जाती हैं। इंकॉइस उन्नत तकनीकों को अपनाकर अपनी प्रारंभिक चेतावनी और परामर्श प्रणालियों को निरंतर बेहतर बना रहा है।

इंकॉइस कई प्रमुख पहलों के माध्यम से अपनी महासागर पूर्वानुमान और सुनामी प्रारंभिक चेतावनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। तटीय नियोजन और समुद्री संचालन के लिए बेहतर सहायता प्रदान करने हेतु मध्यम-अवधि के महासागर स्थिति पूर्वानुमानों को वर्तमान 10 दिनों से बढ़ाकर 45 दिन करने के प्रयास भी जारी हैं। उन्नत वास्तविक समय मॉडलिंग को सक्षम करने के लिए, इंकॉइस ने परिचालन महासागर पूर्वानुमान को समर्पित एक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणाली 'एचपीसी-तरंग' को चालू किया है।

आउटरीच पहल

 आउटरीच पहल 2024-25 के दौरान आयोजित प्रमुख आउटरीच गतिविधियाँ इस प्रकार हैं:

परिचालन योजना, नीति-निर्माण और आपदा प्रबंधन में सुधार के लिए मौसम और जलवायु सेवाओं के महत्व पर विभिन्न क्षेत्रों के साथ जुड़ने हेतु आईएमडी द्वारा 14-15 जनवरी, 2025 को भारत मंडपम में एक राष्ट्रीय स्तर की हितधारक बैठक आयोजित की गई।

सहयोग बढ़ाने, सूचना साझा करने और विविध दृष्टिकोणों से मूल्यवान इनपुट एकत्र करने के उद्देश्य से देश के प्रमुख शहरों में वर्ष के दौरान 21 राज्य-स्तरीय हितधारक कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

विभिन्न मौसम संबंधी प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए 14 जनवरी, 2024 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आईएमडी द्वारा एक भव्य प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण 'वॉकथ्रू'  था, जिसमें भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान से लेकर आईएमडी के जन्म और वर्तमान समय में चक्रवात "बिपारजॉय" के पूर्वानुमान में आईएमडी के प्रशंसित वैज्ञानिक दृष्टिकोण तक की यात्रा को प्रदर्शित किया गया।

26 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में आईएमडी के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक शानदार झांकी प्रदर्शित की गई। इस झांकी में 1875 से मौसम विज्ञान और समाज में आईएमडी के परिवर्तनकारी योगदान को भव्य रूप से दर्शाया गया।

वर्ष के दौरान हाइब्रिड मोड में एक लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला भी आयोजित की गई, जिसमें प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा 31 वैज्ञानिक व्याख्यान दिए गए।

राष्ट्रीय युवा दिवस, 12 जनवरी 2025 को 'रन फॉर मौसम - एवरी स्टेप काउंट्स फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंस' नामक एक दौड़ का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य जन जागरूकता बढ़ाना और विशेष रूप से युवाओं के बीच आईएमडी की गतिविधियों को लोकप्रिय बनाना था, ताकि जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करने और सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता मिल सके।

आईएमडी ने देश भर के युवा छात्रों के बीच मौसम और जलवायु विज्ञान के प्रति उत्साह और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मौसम विज्ञान ओलंपियाड भी आयोजित किया। इस प्रतियोगिता ने छात्रों को अपने ज्ञान का परीक्षण करने, चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भाग लेने और मौसम विज्ञान के बारे में अधिक सीखने का अवसर प्रदान किया।

आईएमडी मुख्यालय और अन्य उप-कार्यालयों में स्कूली छात्रों के लिए कई अंतर-स्कूली प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। आईएमडी  ने क्विज़, निबंध, पोस्टर मेकिंग जैसी विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए 'MyGov पोर्टल' के साथ भी सहयोग किया।

आउटरीच को बढ़ावा देने के लिए वर्ष के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं, जैसे कि (i) मौसम और युवा (ii) मौसम सेवाएं और महिलाएं (iii) 'मौसम जर्नल' की 75 वर्षों की उपलब्धियां (iv) 14वां एशिया-ओशिनिया मौसम उपग्रह उपयोगकर्ता सम्मेलन (v) iRAD 2025 (vi) 20वां आरएसएमसी नई दिल्ली अटैचमेंट प्रशिक्षण (vii) एनडब्लूपी के 30 वर्षों पर राष्ट्रीय सम्मेलन (viii) SDS-WAS पर WMO-RSG एशिया नोड की 10वीं बैठक और धूल एवं एरोसोल पर कार्यशाला आदि।

समुद्र से संबंधित खतरों के प्रति जागरूकता, तैयारी और प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए, इंकॉइस  तटीय राज्यों में नियमित रूप से क्षमता निर्माण गतिविधियां आयोजित करता है, जैसे कि जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण सत्र, और तटीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ सुनामी मॉक ड्रिल और 'सुनामी रेडी' कार्यान्वयन कार्यक्रम। इंकॉइस 'आईटीकोओशन'  के माध्यम से महासागर और जलवायु सेवाओं, रिमोट सेंसिंग, न्यूमेरिकल मॉडलिंग और संबंधित विषयों जैसे क्षेत्रों में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम और विशेष पाठ्यक्रम संचालित करता है। ये पहल जागरूकता बढ़ाने, तकनीकी क्षमता निर्माण और महासागर एवं जलवायु क्षेत्रों में गतिविधियों को मजबूत करने में मदद करती हैं।

पिछले वर्ष के दौरान, इंकॉइस ने कई प्रमुख आउटरीच और क्षमता निर्माण पहल कीं। पूर्वी तट के लिए चेन्नई में और पश्चिमी तट के लिए गोवा में दो विशाल समुद्री बहु-खतरा जागरूकता सम्मेलन आयोजित किए गए। इंकॉइस ने अपने परिसर में कई विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित करने के साथ-साथ क्षेत्र-स्तर पर 15 उपयोगकर्ता संवाद और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए। शैक्षिक भ्रमण के हिस्से के रूप में लगभग 5,000 छात्रों ने इंकॉइस प्रयोगशालाओं का दौरा किया। तटीय तैयारी को मजबूत करने के लिए, इंकॉइस ने अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान सुनामी मॉक अभ्यास आयोजित किए, और तटीय समुदायों में 'सुनामी रेडी' कार्यक्रम के कार्यान्वयन में सहायता जारी रखी।

वर्ष 2024-2025 के दौरान एमओईएस ने मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और महासागर अनुसंधान के विषयों में संरचित और परिणाम-उन्मुख आउटरीच एवं जागरूकता पहल कीं। इन पहलों को वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार, सामुदायिक तैयारी बढ़ाने और हितधारकों के बीच डेटा-आधारित जानकारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रालय के आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रम के तहत सेमिनार, संगोष्ठी, कार्यशाला, सम्मेलन और प्रशिक्षण के माध्यम से लागू किया गया।

मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सेवाओं पर लगभग 85 आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पर्यावरणीय स्थिरता, वायुमंडलीय विज्ञान और मौसम पूर्वानुमान पर चर्चा की गई। ये कार्यक्रम किसानों और कृषि पर केंद्रित थे, जिसमें बदलते जलवायु पैटर्न, मौसमी परिवर्तनशीलता और अनुकूलन प्रथाओं पर जागरूकता बढ़ाई गई। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सटीक और समय पर पूर्वानुमान, अलर्ट, कृषि-मौसम परामर्श और बिजली गिरने की चेतावनी आसानी से प्रदान करने के लिए 'मौसम', 'मेघदूत', 'दामिनी' और 'उमंग' जैसे महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप विकसित किए हैं। इन ऐप्स के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे सूचित निर्णय लेने, आपदा तैयारी और आजीविका आदि में सुधार हुआ।

इसके अतिरिक्त, तटीय क्षेत्रों के विभिन्न संस्थानों में 14 आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो महासागर और तटीय राज्यों के लिए समुद्री परामर्श और अलर्ट पर केंद्रित थे। साथ ही, पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर 95 स्थानों पर तटीय स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाकर समुद्री स्वास्थ्य पर देशव्यापी जागरूकता बढ़ाने के लिए "स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर" नामक एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया है, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों, छात्रों और जनता ने भागीदारी की। इसके अलावा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मछुआरा समुदाय, नौसेना और तटरक्षक बल आदि को संभावित मत्स्य पालन क्षेत्रों और महासागर की स्थिति के पूर्वानुमान के बारे में जानकारी और अलर्ट आसानी से प्रसारित करने के लिए 'समुद्र', 'सागर वाणी' और 'थूंडिल' (क्षेत्रीय भाषाओं में ऐप) जैसे मोबाइल ऐप विकसित किए हैं। ये ऐप मछलियों की उपलब्धता, लहरों, हवाओं, चक्रवातों और सुनामी के बारे में समय पर जानकारी प्रदान कर सुरक्षा, दक्षता और तटीय आजीविका में सुधार करते हैं।

वार्षिक रिपोर्ट 2025 में रेखांकित भविष्य की योजनाएं

एमओईएस द्वारा भारत को "वेदर रेडी और जलवायु-स्मार्ट" राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना "मिशन मौसम" शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि, सिंचाई, शिपिंग, जल संसाधन प्रबंधन, स्वास्थ्य, विमानन, परिवहन क्षेत्र, आपदा प्रबंधन, अपतटीय तेल प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा आदि जैसे विभिन्न मौसम और जलवायु संवेदनशील क्षेत्रों को सहायता प्रदान करना है। यह जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने तथा उष्णकटिबंधीय चक्रवात, भीषण गरज के साथ तूफान, धूल भरी आंधी, भारी बारिश और बर्फबारी, शीत और हीट वेव जैसी गंभीर मौसम की घटनाओं के प्रति समुदायों की सहनशीलता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

परिचालन समुद्री सूचना और सलाहकार सेवाओं, जैसे कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, बहु-खतरा सेवाओं, महासागर स्थिति पूर्वानुमान, समुद्री सुरक्षा सेवाओं, आपदा-संबंधित सेवाओं, तटीय जल गुणवत्ता सेवाओं, जलवायु सेवाओं और डेटा एवं मूल्यवर्धित उत्पाद सेवाओं को बनाए रखना और उनमें सुधार करना।

निरंतर डेटा प्राप्त करने के लिए अपतटीय और भारतीय तटीय समुद्र से समुद्री मौसम संबंधी और समुद्र विज्ञान संबंधी डेटा के अधिग्रहण हेतु महासागर अवलोकन नेटवर्क की एक विस्तृत श्रृंखला को बनाए रखना।

परिचालन पूर्वानुमानों और अन्य सेवाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले महासागर मॉडल कॉन्फ़िगरेशन में सुधार के लिए आवश्यक डेटा एकत्र करने हेतु खुले महासागर और तटीय जल में समर्पित वैज्ञानिक क्षेत्र अभियान चलाना।

एक एकीकृत महासागर पूर्वानुमान प्रणाली स्थापित करने और भौतिक समुद्र विज्ञान एवं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र मापदंडों के महासागर विश्लेषण और पुनर्गणना उत्पाद तैयार करने के लिए महासागर मॉडलिंग, डेटा आत्मसात  और एआई/एमएल विधियों में केंद्रित अनुसंधान और विकास करना।

 विभिन्न परिचालन और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिए आईटी, संचार और वेब सेवाओं का डिजाइन, योजना, कार्यान्वयन और रखरखाव करना।

सभी तटीय राज्यों तक सेवाओं का विस्तार करने के लिए क्षेत्रीय केंद्र और आवश्यक प्रयोगशाला सुविधाएं स्थापित करना।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दी गई।

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पीके/केसी/एसके/एसएस    


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