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प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 12:56PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आत्‍मनिर्भरता पर बल देते हुए एक संस्‍कृत सुभाषितम साझा किया।

"नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते ।

आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥"

सुभाषितम में कहा गया है कि सागर कभी पानी नहीं मांगता, फिर भी वह हमेशा भरा रहता है। ठीक उसी प्रकार, जब कोई व्यक्ति योग्य हो जाता है, तो धन उसे स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है।

श्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता वह दीपक है जो आत्मसम्मान और सामर्थ्‍य का मार्ग दिखाता है और इस बार का बजट भी हमारे युवा साथियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आत्मनिर्भरता वह दीपक है, जो आत्मसम्मान और सामर्थ्य का मार्ग दिखाता है। इस बार का बजट भी हमारे युवा साथियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

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पीके/केसी/एसकेजे/एम


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