जल शक्ति मंत्रालय
जल जीवन मिशन का प्रभाव
प्रविष्टि तिथि:
02 FEB 2026 4:14PM by PIB Delhi
भारत सरकार, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से जल जीवन मिशन (जेजेएम) को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण घरों को कार्यात्मक नल जल कनेक्शन (55 लीटर प्रति दिन, बीआईएस: 10500 मानक) प्रदान करना है। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, अगस्त 2019 में कनेक्शनों की संख्या 3.24 करोड़ (16.71%) थी जो कि 29 जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 15.79 करोड़ (81.57%) से अधिक हो चुकी है, जिससे ग्रामीण भारत के अधिकांश हिस्से को जल आपूर्ति प्राप्त हो रही है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 31.12.2024 तक आईएमआईएस पोर्टल पर अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 189 जिलों और 2,50,021 गांवों को "हर घर जल" के रूप में पंजीकृत किया गया है।
जल जीवन मिशन नल का पानी उपलब्ध कराकर ग्रामीण जीवन में परिवर्तन ला रहा है। वैश्विक संस्थाओं द्वारा किए गए आकलनों में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनुमान लगाया है कि मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति से महिलाओं के प्रतिदिन 55 करोड़ घंटे बचेंगे जो पहले केवल पानी लाने में खर्च होते थे और इससे डायरिया जैसी बीमारियों से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर का सुझाव है कि सुरक्षित जल की उपलब्धता से पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके अलावा, आईआईएम बैंगलोर और आईएलओ के शोध में महत्वपूर्ण रोजगार सृजन का अनुमान लगाया गया है जिसमें जेजेएम के कार्यान्वयन चरणों में लाखों व्यक्ति प्रति वर्ष का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान है। ये आंकड़े जेजेएम के गहन स्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक लाभों को दर्शाते हैं।
सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए परिचालन दिशा-निर्देशों में गांव में जल आपूर्ति प्रबंधन की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/पानी समिति/उपयोगकर्ता समूह आदि के गठन का प्रावधान है। इस समिति में सामान्यतः 10 से 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 25 प्रतिशत निर्वाचित पंचायत सदस्य, 50 प्रतिशत महिलाएं एवं शेष 25 प्रतिशत में कमजोर वर्ग (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति) के सदस्य अपनी जनसंख्या के अनुपात में शामिल होते हैं। इसके अलावा, जल शक्ति अभियान (जेएसए) के अंतर्गत एक विशेष पहल जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी): कैच द रेन (सीटीआर) अभियान 06 सितंबर, 2024 को शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य सामुदायिक सहयोग से संचालित जल संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देना है और कम लागत वाली, वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं के माध्यम से जल प्रबंधन को बढ़ावा देना है, जिसमें स्थानीय समुदायों, उद्योगों एवं अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण के लिए वार्षिक निधि का 2 प्रतिशत तक उपयोग करते हैं, जिसमें प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ बनाना, फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से सामुदायिक परीक्षण एवं प्रशिक्षण शामिल हैं जिसके अंतर्गत 24.80 लाख महिलाओं को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। 28 जनवरी, 2026 तक, देश में 2,868 परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं जिनमें से 1,704 को एनएबीएल से मान्यता मिली हुई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, जेजेएम डैशबोर्ड का "सिटीजन कॉर्नर" ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परिणामों तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है और शिकायतों का निवारण करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे स्थानीय जल आपूर्ति में सामुदायिक विश्वास को बढ़ावा मिलता है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) में तेजी लाने के लिए, इसके कार्यान्वयन में व्यापक स्तर पर योजना निर्माण, नियमित समीक्षा एवं तकनीकी सहायता के लिए क्षेत्रीय दौरा शामिल है। केंद्रीय बजट 2025-26 में वित्त मंत्री ने मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है।
यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एके
(रिलीज़ आईडी: 2222226)
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