ग्रामीण विकास मंत्रालय
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“आर्थिक सर्वेक्षण भारतीय कृषि और ग्रामीण भारत की मजबूती का लिखित प्रमाण देता है”: श्री शिवराज सिंह चौहान


कृषि क्षेत्र ने पांच वर्षों में 4.4 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर दर्ज की

बागवानी में उत्पादन 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक पहुंच गया

"ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे का ऐतिहासिक विस्तार हुआ है": श्री शिवराज सिंह चौहान

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 3:24PM by PIB Delhi

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वेक्षण के आंकड़े प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की ओर से कृषि और ग्रामीण विकास दोनों मोर्चों पर की गई अभूतपूर्व प्रगति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

कृषि में सतत और स्थिर वृद्धि

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विगत पांच वर्षों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों ने स्थिर कीमतों पर औसतन 4.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है जो वैश्विक औसत से अधिक है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 तक के दशक में कृषि क्षेत्र ने 4.45 प्रतिशत की दशकीय वृद्धि दर प्राप्त की है जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है।

उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भी कृषि क्षेत्र ने 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की जो इसकी मजबूती और सामर्थ्य को दर्शाती है।

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केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से चावल, गेहूं, मक्का और 'श्री अन्न' (बाजरा) सहित मोटे अनाजों के अपेक्षाकृत अच्छे उत्पादन के कारण हुई। आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है बल्कि कई फसलों की उपज में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

बागवानी कृषि विकास में उज्ज्वल क्षेत्र के रूप में उभरी

श्री चौहान ने कहा कि कृषि के सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि का सबसे उज्ज्वल क्षेत्र बनकर उभरा है। बागवानी उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन हो गया है।

इस अवधि के दौरान फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का उत्पादन 219.67 मिलियन टन और अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत अब विश्व में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है और वैश्विक प्याज उत्पादन में इसका योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। साथ ही, भारत सब्जियों, फलों और आलू का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और इन सभी श्रेणियों में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 12-13 प्रतिशत है।

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ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे का ऐतिहासिक विस्तार

श्री चौहान ने ग्रामीण विकास से संबंधित उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़कों, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी सहित ग्रामीण बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत पात्र बस्तियों में से 99.6 प्रतिशत से अधिक को अब हर मौसम में उपयोग योग्य सड़कों से जोड़ा जा चुका है।

उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों में लाखों किलोमीटर सड़कों और हजारों पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। पीएमजीएसवाई-चतुर्थ के अंतर्गत 10,000 किलोमीटर से अधिक की सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है जिससे जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के लगभग 3,270 ऐसे इलाकों में आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी जहां अभी तक संपर्क नहीं है।

आवास, डिजिटल सशक्तिकरण और आजीविका में परिवर्तन

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'सभी के लिए आवास' मिशन के अंतर्गत विगत 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.70 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 4.14 करोड़ मकानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिनमें से अधिकांश को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है।

डिजिटल और तकनीकी पहलों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि स्वमित्व (ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत तकनीक से गांवों का सर्वेक्षण और मानचित्रण) योजना के अंतर्गत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरे हो चुके हैं और 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए गए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 99.8 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं अब 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। 'लखपति दीदियों' की संख्या 25 लाख से अधिक हो गई है जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में बड़ी उपलब्धि है।

श्री चौहान के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि नीतिगत दिशा-निर्देशों में निरंतरता, संस्थागत सुधारों और लक्षित निवेशों ने कृषि क्षेत्र को मजबूत किया है और इससे ग्रामीण भारत में परिवर्तन आया है। उन्होंने यह भी कहा कि ये परिणाम समावेशी विकास, किसान कल्याण और सतत ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में गांवों की केंद्रीय भूमिका हो।

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पीके/केसी/केके/एचबी


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