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ईपीएफओ ने भविष्य निधि के लिए आयकर व्यवस्था के युक्तिकरण का स्वागत किया

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 2:13PM by PIB Delhi

मान्यता प्राप्त भविष्य निधियां आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची XI द्वारा शासित होती है। वर्तमान में, आयकर प्रावधानों और कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 17 के अंतर्गत छूट की पात्रता में भिन्नता है। इसके अतिरिक्‍त, आयकर प्रावधानों और ईपीएफओ के अंतर्गत अधिसूचित निवेश का स्वरूप भी भिन्न है। दोनों अधिनियमों में नियोक्ता के अंशदान की सीमाएं एक समान नहीं हैं। इन भिन्नताओं से भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा मिलता है।

केंद्रीय बजट (2026-2027) ने मान्यता प्राप्त भविष्य निधि को नियंत्रित करने वाले आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के साथ संयोजित किया है।

छूट

आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत मान्यता केवल उन्हीं भविष्य निधियों को प्राप्त होगी जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 17 के अंतर्गत छूट प्राप्त की है।

निवेश

निवेश संबंधी नियम लागू ईपीएफ ढांचे और अधीनस्थ कानूनों के तहत विनियमित होते रहेंगे। सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को 50 प्रतिशत तक सीमित करने वाली कठोर वैधानिक सीमा को हटा दिया गया है।

नियोक्ता का योगदान

नियोक्ता का अंशदान 7.5 लाख रुपये की अधिकतम मौद्रिक सीमा के अंतर्गत होगा। इस मौद्रिक सीमा के पार होने पर अंशदान पर अनुलाभ के रूप में कर लगाया जाएगा।

केंद्रीय बजट (2026-2027) में आयकर व्यवस्था के युक्तिकरण से भविष्य निधि अधिनियम के साथ तालमेल और सामंजस्य स्थापित करके इसके हितधारकों के हितों की पूर्ति में अत्‍यधिक मदद मिलेगी। अब यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ईपीएफ छूट कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 द्वारा शासित है। निवेश मानदंड अब ईपीएफ निवेश मानदंडों के अनुरूप कर दिए गए हैं और नियोक्ता के अंशदान की सीमा आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित मौद्रिक सीमा के अनुरूप है।

अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है: सीबीडीटी द्वारा वित्त विधेयक और बजट पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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पीके/केसी/एसकेजे/एम

 


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