आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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SBM-U 2.0 के तहत सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर जोर


फूल और संवाद के ज़रिये नागरिकों को स्वच्छ आदत अपनाने के लिए किया जा रहा है प्रेरित

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 3:33PM by PIB Delhi

 

अगर कचरा फैलाने से रोकने की शुरुआत जुर्माने से नहीं, बल्कि मुस्कान और गुलाब से हो तो? हरिद्वार नगर निगम ने स्वच्छता के लिए ठीक यही मानवीय रास्ता चुना है—जहाँ संदेश सख्ती से नहीं, संवेदनशीलता से दिया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के तहतस्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत पहल के अंतर्गत हरिद्वार नगर निगम ने शहर में खुले में कचरा फेंकने की समस्या से निपटने के लिए एक अनूठा और प्रेरणादायक अभियान शुरू किया है। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी चिन्हित Garbage Vulnerable Points पर स्वयं मौजूद रह कर लोगों से सीधे संवाद कर उन्हें कचरा न फेंकने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

शहर में खुले में कचरा फेंकने की समस्या को रोकने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा एक अनोखा “रोकें और समझाएं” अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत नगर निगम क्षेत्र में चिन्हित सभी Garbage Vulnerable Points पर विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी स्वयं इन Garbage Vulnerable Points पर मौजूद रहते हैं और सुबह के समय वहां कचरा फेंकने आने वाले नागरिकों से सीधे संवाद करते हैं, दंडित या जुर्माना लगाने के बजाय संवेदनशील और रोचक तरीके से समझाया जाता है। ऐसे व्यक्ति को प्रतीकात्मक रूप से एक गुलाब का फूल भेंट किया जाता है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि स्वच्छता भय से नहीं, बल्कि समझ और जिम्मेदारी से आती है। यह सकारात्मक पहल नागरिकों को अपनी आदतों पर पुनर्विचार करने और स्वच्छ व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

हालाँकि शहर में पहले से ही घर-घर कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था मौजूद है और प्रतिदिन लगभग 180 मीट्रिक टन कचरे का संग्रहण एवं निस्तारण किया जा रहा है। नगर निगम ने कई ऐसे स्थानों को साफ कर उन्हें सुंदर रूप देकर सेल्फी पॉइंट  में बदला है, लेकिन निरंतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए नागरिकों की सहभागिता को अनिवार्य माना जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक कचरा-संवेदनशील बिंदु पर नियमित सफाई कराए जाने के साथ ही नागरिकों को यह जानकारी दी जा रही है कि वे गीला और सूखा कचरा अपने घरों में अलग-अलग कर डस्टबिन में एकत्रित करें और नगर निगम की कचरा गाड़ी को ही सौंपें। कचरा संग्रहण से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान हेतु शिकायत नंबर भी साझा किए गए हैं, ताकि आमजन को सुविधा मिल सके।

यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि स्वच्छ भारत मिशन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है। जब नागरिक स्वच्छ आदत  को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं, तभी स्वच्छ भारत  का सपना साकार होता है। हरिद्वार की यह पहल संवाद, संवेदनशीलता और सहभागिता के माध्यम से एक स्वच्छ, सुंदर और जागरूक

शहर की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रही है। यह पहल साबित करती है कि स्वच्छता केवल नियम नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से हरिद्वार की दिशा में एक मजबूत और प्रेरक कदम बढ़ा रहा है।

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SK


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