राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का फरवरी 2026 के लिए ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू हुआ
1,114 आवेदकों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों वाले 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्रों का चयन किया गया
एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने प्रशिक्षुओं से मानवीय मूल्यों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि करुणा एवं क्षमा भारतीय समाज की सदियों पुरानी परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की पहचान रही हैं
महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि इस इंटर्नशिप का उद्देश्य युवाओं को मानवाधिकारों का रक्षक एवं राजदूत बनने के लिए संवेदनशील बनाना है
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 8:17PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का वर्ष 2026 में पहला दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम (ओएसटीआई) शुरू हुआ। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने महासचिव श्री भरत लाल एवं वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया। पूरे देश के 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए 1,114 आवेदकों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्रों का इसमें चयन किया गया। दो सप्ताह का यह कार्यक्रम 13 फरवरी 2026 को समाप्त होगा।

न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ओएसटीआई, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आयोग के जनादेश के अनुरूप, देश में मानवाधिकारों का प्रचार-प्रसार करने के लिए महाविद्यालय/विश्वविद्यालय के छात्रों को मानवाधिकारों के संवर्धन एवं संरक्षण की व्यापक समझ प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। ऋग्वेद जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों के श्लोकों का हवाला देते हुए उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि करुणा एवं क्षमा भारतीय समाज की सदियों पुरानी परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की पहचान रही हैं।

उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने प्रशिक्षण के दौरान आयोग से मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं के ज्ञान का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उन्हें बेहतर पेशेवर बनने से पहले दूसरों के दुःख के प्रति सहानुभूति विकसित करके बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी।
इससे पहले, श्री भारत लाल, महासचिव, एनएचआरसी ने कहा कि इंटर्नशिप कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को मानवाधिकारों का रक्षक एवं राजदूत बनने के लिए संवेदनशील बनाना भी है। उन्होंने कहा कि चयनित प्रशिक्षुओं को ओएसटीआई कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित वक्ताओं से प्राप्त होने वाले मूल्य एवं ज्ञान को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मूल रूप से मानवाधिकार वास्तविक लोगों, उनके अनुभवों एवं रोजमर्रा के आचरण से जुड़े होते हैं। इसलिए प्रशिक्षुओं को कानूनों एवं निर्णयों से आगे बढ़कर क्रियाशील मूल्यों को देखना, शिकायतों को समझना, वास्तविकताओं से जुड़ना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि उल्लंघन कैसे होते हैं और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि जागरूकता फैलाकर उन्हें कैसे रोका जा सकता है।

श्रीमती सैडिंगपुई छकछुआक, संयुक्त सचिव, एनएचआरसी ने कार्यक्रम के सावधानीपूर्वक डिज़ाइन किए गए पाठ्यक्रम का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। इसमें तिहाड़ जेल, शेल्टर होम और पुलिस स्टेशन जैसी संस्थाओं के व्याख्यान एवं वर्चुअल दौरे शामिल हैं, जो मानवाधिकारों की वास्तविकताओं के बारे में सीधी जानकारी प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं को मानवाधिकारों की समझ को बढ़ावा देने एवं उनके आत्मविश्वास को मजबूती प्रदान करने के लिए विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं की भी जानकारी दी।

उद्घाटन सत्र में लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेंद्र सिंह, निदेशक, एनएचआरसी और प्रशिक्षण प्रभाग के कर्मचारी भी शामिल हुए।
***
पीके/केसी/एके
(रिलीज़ आईडी: 2222916)
आगंतुक पटल : 84
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English