पंचायती राज मंत्रालय
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पंचायती राज संस्थाओं को दी गई शक्तियां

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 4:10PM by PIB Delhi

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के संदर्भ में पंचायत, 'स्थानीय सरकार" होने के कारण राज्य का विषय है। पंचायतों को, संविधान के प्रावधानों के अधीन, राज्यों के पंचायती राज अधिनियमों, जो राज्य दर राज्य भिन्न हो सकते हैं, के अंतर्गत स्थापित और संचालित किया जाता है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 243छ, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने के लिए तथा आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की ऐसी स्कीमों कों, जो पंचायतों को सौंपी जा सके, जिनमें संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषय भी शामिल है, के क्रियान्वयन के लिए, किसी भी राज्य के विधान मंडल को, निर्दिष्ट शर्तो के अधीन, उचित स्तर पर पंचायतों को शक्तियों और उत्तरदायित्वों के हस्तांतरण के लिए, कानून द्वारा, प्रावधानों को बनाने का अधिकार देता है। राज्य के विधानमंडल को, पंचायतों को शक्तियों और उत्तरदायित्वों के हस्तांतरण के लिए, ग्यारहवी अनुसूची में वर्णित 29 विषयों पर विचार करना होता है। इसलिए, पंचायती राज संस्थाओं को शक्तियों के विकेंद्रीकरण के लिए कदम उठाना संबंधित राज्यों द्वारा उन्हें सौंपी गई शक्तियों और संसाधनों, जो विभिन्न राज्यों में भिन्न होते हैं, की सीमा पर निर्भर करता है।

हालाँकि, पंचायती राज मंत्रालय समय-समय पर अध्ययनों, समीक्षा बैठकों, क्षेत्रों के दौरे, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों, आदि के माध्यम से, पंचायतों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा करता रहता है।

जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में स्थानीय सरकारों की भूमिका और अंतरण की प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए, मंत्रालय ने फरवरी, 2025 में "राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति-एक सांकेतिक साक्ष्य आधारित रैंकिंग, 2024" नामक शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट अंतरण सूचकांक को प्रस्तुत करती है, जोकि संविधान के भाग-9 के अंतर्गत आने वाले सभी राज्यों/ संघ राज्यों क्षेत्रों को चिन्हित किए गए छः आयामों, अर्थात् रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही के आधार पर उनको समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2013-14 से 2021-22 के बीच अंतरण सूचकांक का दायरा 39.9% से बढ़कर 43.9% हो गया है।  

देश भर में पंचायती राज संस्थाओं के स्थानीय स्वशासन ढांचे को मजबूत करने के लिए, इस मंत्रालय ने एक उपयोगकर्ता के अनुकूल वेब-आधारित पोर्टल ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in) लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य विकेंद्रीकृत योजना, प्रगति रिपोर्टिंग, वित्तीय प्रबंधन, कार्य-आधारित लेखांकन और सृजित संपत्तियों के विवरण में बेहतर पारदर्शिता लाना है। राज्यों द्वारा पंचायती राज संस्थाओ को केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि के ऑनलाइन हस्तांतरण और पंचायतों को विक्रेताओं/सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय पर भुगतान करने में सक्षम बनाने के लिए ई-ग्रामस्वराज पोर्टल को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के साथ भी एकीकृत किया गया है। पंचायतें अपनी वार्षिक पंचायत विकास योजनाएँ तैयार करके ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर अपलोड करती हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने पंचायत खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए ई-ग्रामस्वराज को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के साथ एकीकृत किया है।

मंत्रालय ने ई-पंचायतों हेतु मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ई-पंचायत) को लागू किया है, जो राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) योजना का एक केंद्रीय घटक है, जिसके तहत विभिन्न ई-गवर्नेस परियोजनाओं को पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में वित्त पोषित किया जाता है। संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को वित्तीय वर्ष 2022-23 से राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में लागू किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए अपनी शासन क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को सक्षम बनाना है ताकि ग्राम पंचायतें प्रभावी ढंग से काम कर सकें। योजना के तहत, यह मंत्रालय ग्राम पंचायतों के प्रभावी कामकाज जैसे कि ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण, कंप्यूटर और उत्तर पूर्व राज्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ग्राम पंचायत भवनों के साथ सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) की सह-स्थापना, के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु सीमित पैमाने पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रयासों को बढ़ावा देता है, जैसा कि राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने अपनी वार्षिक कार्य योजनाओं में प्रस्तावित किया और बाद में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा अनुमोदित किया गया। यह मंत्रालय, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, वार्षिक कार्य योजना में अनुमोदित राज्यों, जिला और ब्लॉक स्तर पर परियोजना प्रबंधन इकाइयों (पीएमयू) की स्थापना के लिए संशोधित आरजीएसए की योजना के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भी सहायता प्रदान कर रहा है और पंचायतों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण का समर्थन करने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के पंचायत संसाधन केंद्रों के रूप में संस्थागत तंत्र की स्थापना कर रहा है।

संशोधित आरजीएसए योजना के तहत, अभी तक 13,848 पंचायत भवनों और 65,345 कंप्यूटरों को सभी राज्यों/ संघ राज्यों क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया है।

पंचायत खातों के ऑनलाइन ऑडिट और उनके वित्तीय प्रबंधन के लिए एक ऑनलाइन एप्लिकेशन- 'ऑडिटऑनलाइन' विकसित किया गया है। ऑडिटऑनलाइन पोर्टल, जो अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया, केंद्रीय वित्त आयोग के धन के उपयोग की पारदर्शी ऑडिटिंग की सुविधा प्रदान करता है और पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करता है। इसी प्रकार, पंचायत निर्णय (NIRNAY) एक ऑनलाइन एप्लिकेशन है जिसका उद्देश्य पंचायतों द्वारा ग्राम सभाओं के संचालन में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन लाना है।

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 04 फरवरी 2026 को राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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