सहकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सहकारिता के अंतर्गत आरम्भ की गई योजनाओं/पहलों के लाभार्थी

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 6:25PM by PIB Delhi

() सहकारी फुटप्रिंट का विस्तार करने की राष्ट्रीय योजना के अधीन 32,802 नए बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी समितियां पंजीकृत की गई हैं, जबकि 15,793 मौजूदा समितियों को सशक्त किया गया है । व्यक्तिगत और सामुदायिक-स्तर के लाभों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:

  1. किसान: न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर फसल प्रापण की गारंटी के लिए ई-संयुक्ति और ई-समृद्धि पोर्टल पर 56 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हैं ।
  2. महिलाएं और एसएचजी: वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही, महिला सहकारी समितियों को ₹1,355.61 करोड़ की वित्तीय सहायता संवितरित की गई जिससे 41 लाख से अधिक महिला सदस्यों को लाभ हुआ ।
  3. व्यक्तियों को: सहारा रिफंड पोर्टल ने 39,28,648 व्‍यक्तिगत जमाकर्ताओं को ₹8,340.75 करोड़ सफलतापूर्वक संवितरित किए गए । इसके अतिरिक्‍त, हाल ही में लॉन्च किए गए "भारत टैक्सी" ऐप के प्‍लेटफॉर्म पर कुल 2.5 लाख चालक (सारथी) और 6.7 लाख ग्राहक पंजीकृत हैं ।
  4. प्राथमिक समितियां: कुल 52,018 पैक्स अब कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) -सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और 38,330 पैक्स को कृषि निविष्टियों की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) में उन्‍नत किया गया है ।

()             सहकारिता मंत्रालय ने दिनांक 6 जुलाई, 2021 को अपनी स्थापना के बाद से "सहकार से समृद्धि" की परिकल्पना को साकार करने और देश में प्राथमिक से लेकर शीर्ष स्तर की सहकारी समितियों में सहकारी आंदोलन को सशक्त और सघन करने तथा भविष्‍य में इस क्षेत्र को सशक्‍त करने के लिए अनेक पहलें की हैं । ऐसी पहलों की सूची संलग्नक के रूप में संलग्न है

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संलग्नक

सहकारिता मंत्रालय द्वारा की गई पहलें

सहकार से समृद्धि की परिकल्‍पना को साकार करने और देश में प्राथ‍मिक से लेकर शीर्ष स्‍तर की सहकारी समितियों में सहकारिता आंदोलन को सशक्‍त और सघन करने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने अनेक पहलें की हैं । इन पहलों की सूची और उनपर अब तक हुई प्रगति का ब्‍योरा निम्‍नानुसार है:

.   प्राथमिक सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से जीवंत और पारदर्शी बनाना

  1. प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) को बहुउद्देशीय, बहुआयामी तथा पारदर्शी संस्था बनाने के लिए आदर्श उपविधियां: सरकार ने राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों, राष्ट्रीय स्तर के परिसंघों, राज्य सहकारी बैंकों (StCBs), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs), आदि सहित सभी हितधारकों के परामर्श से पैक्स के लिए आदर्श उपविधियां तैयार कर सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को परिचालित किया है, जो पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक कार्यकलाप करने, शासन में सुधार लाने, अपने प्रचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने हेतु सक्षम बनाते हैं  l महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देते हुए पैक्स की सदस्यता को अधिक समावेशी एवं व्यापक बनाने के भी उपबंध किए गए हैं अब तक 32 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा आदर्श उपविधियां अपनाई गई हैं या उनकी मौजूदा उपविधियां, आदर्श  उपविधियों के अनुरूप हैं     
  2. कंप्‍यूटरीकरण द्वारा पैक्स का सशक्‍तीकरण:  पैक्स को सशक्‍त करने के लिए 2925.39 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय से कार्यशील पैक्स के कंप्‍यूटरीकरण की परियोजना को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है जिसमें देश के सभी कार्यशील पैक्स को कॉमन ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्‍लानिंग) आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) के माध्यम से नाबार्ड के साथ लिंक किया जाना है । इस परियोजना के अधीन 31 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के कुल 79,630 पैक्‍स अनुमोदित किए गए हैं । कुल 61,025 पैक्स को ईआरपी पर ऑनबोर्ड कर लिया गया है और 30 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा हार्डवेयर का प्रापण किया गया है ।
  3. सभी पंचायतों को आच्‍छादित करने के लिए नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्‍थापना: भारत सरकार ने आगामी पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को आच्‍छादित करने के लक्ष्‍य से नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियां स्‍थापित करने की योजना को अनुमोदित किया है । यह पहल नाबार्ड, राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्‍ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी), और राज्‍य/संघ राज्‍यक्षेत्र की सरकारों द्वारा समर्थित है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, दिनांक 15.02.2023 को इस योजना के अनुमोदन के बाद से दिनांक 20.01.2026 तक कुल 32,802 नए पैक्‍स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को पंजीकृत किया गया और 15,793 डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्‍त किया गया है ।
  4. सभी पंचायतों को आच्‍छादित करने के लिए नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्‍थापना हेतु मार्गदर्शिका/मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन: योजना के प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्‍ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के समन्वय से दिनांक 19.09.2024 को एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (मार्गदर्शिका) जारी की है जिसमें सभी संबंधित हितधारकों के लिए लक्ष्य और समय-सीमा दर्शायी गई है ।
  5. सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना:          सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (AIF), कृषि विपणन अवसंरचना (AMI), कृषि यांत्रिकीकरण पर उपमिशन (SMAM), प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), आदि सहित भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से पैक्स स्तर पर अन्न भंडारण के लिए गोदामों, कस्टम हायरिंग केंद्रों, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों तथा अन्य कृषि-अवसंरचनाओं के निर्माण हेतु योजना अनुमोदित की है । । इससे खाद्यान्न की बर्बादी तथा परिवहन लागत में कमी आएगी, किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत प्राप्त हो सकेगी एवं पैक्स स्तर पर ही विभिन्न कृषि आवश्यकताएं पूरी हो सकेगीं। पायलट परियोजना के अधीन 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदाम का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है । इसके अलावा, पायलट परियोजना का विस्तार करते हुए देशभर में 500 से अधिक पैक्‍स को सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अधीन गोदामों के निर्माण हेतु चिह्नित किया गया है

       वर्तमान में राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, भारतीय राष्‍ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (NAFED) तथा भारतीय राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता सहकारी संघ मर्यादित (NCCF) ने 287 पैक्‍स में निर्मित गोदामों का किराया आश्वासन दिया है तथा 208 पैक्स में निर्माण कार्य आरंभ हो गया है, जिसमें से 109 पैक्‍स में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है (राजस्‍थान- 90, महाराष्‍ट्र- 15 और गुजरात- 4) ।

  1. सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की मार्गदर्शिका/मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन: इस योजना के सुचारु एवं एकरूप कार्यान्‍वयन के लिए एक व्यापक मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) – “मार्गदर्शिका” तैयार कर राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों  के साथ साझा की गई है । इस मार्गदर्शिका में योजना के अधीन विभिन्न समितियों का गठन, अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) में लिए गए निर्णय, योजना के अधीन अभिसरण की गई विभिन्न योजनाओं का परिचय एवं उनके लाभ, आवेदन प्रक्रिया, चरणबद्ध कार्यान्वयन हेतु परियोजना फ्लो-चार्ट, अनुमानित परिणाम और निर्धारित समय-सीमा, सहकारिता मंत्रालय और अन्य हितधारकों की भूमिकाएं व जिम्मेदारियां, गोदाम निर्माण हेतु भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्‍ल्‍यूडीआरए) के दिशानिर्देश, योजना के अधीन पैक्‍स के चयन के मानदंड शामिल हैं ।
  2. सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के संबंध में कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) योजना के अधीन किए गए संशोधन: सहकारी क्षेत्र में विश्‍व की सबसे बड़ी अन्‍न भंडारण योजना की द्वितीय अंतरमंत्रालयी बैठक (आईएमसी) बैठक, जो दिनांक 23.10.2024 को आयोजित हुई थी, में लिए गए निर्णयों के आधार पर कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा कृषि विपणन अवसंरचना योजना में निम्नलिखित संशोधन किए गए:
  • योजना की वित्तीय व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए मार्जिन धनराशि की आवश्यकता को 20% से घटाकर 10% किया गया ।
  • निर्माण लागत को संशोधित करके मैदानी क्षेत्रों में ₹3000–3500/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹7000/ मीट्रिक टन तथा पूर्वोत्तर राज्यों में ₹4000/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹8000/मीट्रिक टन किया गया।
  • सब्सिडी को 25% से बढ़ाकर 33.33% किया गया (मैदानी क्षेत्रों में ₹875/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2333/मीट्रिक टन तथा पूर्वोत्तर राज्‍यों में ₹1333.33/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2666/मीट्रिक टन किया गया)
  • पैक्‍स के लिए आंतरिक सड़क, तौल पुल, चाहरदीवारी, आदि सहायक अवसंरचना पर कुल अनुमत सब्सिडी का 1/3 अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया ।
  1. सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अधीन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा गोदामों की पहचान एवं किराया आश्वासन से संबंधित प्रगति: दिनांक 02.06.2025 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर भारतीय खाद्य निगम को पैक्स की पहचान करने, किराया आश्वासन प्रदान करने तथा इन गोदामों का वार्षिक किराये पर उपयोग सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है । इसमें हुई प्रगति निम्‍नानुसार है:
  • प्रथम चरण में, भारतीय खाद्य निगम ने 2500 मीट्रिक टन एवं उससे अधिक (पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 1671 मीट्रिक टन एवं उससे अधिक) की क्षमता के गोदामों को किराये पर लेने के लिए 216 संभावित स्थानों की पहचान की है ।
  • भारतीय खाद्य निगम द्वारा 18 राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के इन 216 संभावित स्थानों में लगभग 26.03 लाख मीट्रिक टन भंडारण आवश्यकता का आकलन किया गया है ।
  • राज्‍यों द्वारा 173 पैक्‍स/सहकारी समितियों की पहचान की गई है और वे अतिरिक्‍त पैक्‍स/ सहकारी समितियों की सक्रियतापूर्वक पहचान कर रहे हैं ।
  1. -सेवाओं तक बेहतर पहुंच के लिए कॉमन सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में पैक्‍स: पैक्स के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, आधार नामांकन/अद्यतन, स्वास्थ्य सेवाएं, पैन कार्ड तथा आईआरसीटीसी/बस/हवाई टिकट, आदि जैसी 300 से भी अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने के लिए उन्हें सक्षम बनाने हेतु सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है । अब तक 52,018 पैक्स ने ग्रामीण जनता को कॉमन सेवा केंद्र की सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है I
  2. पैक्स द्वारा नए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की स्‍थापना: 10,000 किसान उत्पादक संगठनों की स्‍थापना और संवर्धन की केंद्रीय क्षेत्रक योजना के अधीन कृषि और किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को सहकारी सोसाइटी अधिनियम के अधीन किसान उत्‍पादक संगठनों की स्‍थापना और संवर्धन के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक एजेंसी के रूप में नामित किया गया है । कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा एनसीडीसी को 746 किसान उत्‍पादक संगठनों की स्‍थापना और संवर्धन का लक्ष्य सौंपा गया तथा एनसीडीसी द्वारा सहकारी क्षेत्र में 746 किसान उत्‍पादक संगठनों का पंजीकरण किया गया है ।

तत्‍पश्‍चात, इस योजना के अधीन पैक्‍स के सशक्‍तीकरण के माध्‍यम से सहकारी क्षेत्र में  किसान उत्‍पादक संगठनों की स्‍थापना और संवर्धन के लिए सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एनसीडीसी को किसान उत्पादक संगठनों की स्‍थापना के अतिरिक्त लक्ष्य सौंपे गए और उसे 1117 किसान उत्‍पादक संगठनों का लक्ष्य दिया गया । एनसीडीसी ने पैक्‍स के सदस्यों के माध्यम से 1117 किसान उत्‍पादक संगठनों को पंजीकृत/ऑनबोर्ड कर इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया । यह किसानों को आवश्यक बाजार लिंकेज प्रदान करने और उनके उत्पादों का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने में सहायक होगा ।

एनसीडीसी ने दिनांक 15.01.2026 की स्थिति के अनुसार इस योजना के अधीन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs)/क्‍लस्‍टर आधारित व्‍यवसाय संगठनों (CBBOs) को 245 करोड़ संवितरित किए हैं ।

  1. खुदरा पेट्रोल/डीज़ल आउटलेट के लिए पैक्स को प्राथमिकता: सरकार ने पैक्‍स को खुदरा पेट्रोल/डीज़ल आउटलेट के आबंटन के लिए कंबाइंड कैटेगरी 2 (सीसी-2) में शामिल करने की अनुमति प्रदान कर दी है । तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा साझा की गई सूचना के अनुसार, 28 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के 394 पैक्‍स ने खुदरा पेट्रोल/डीज़ल आउटलेट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है ।
  2. पैक्‍स को थोक उपभोक्‍ता पेट्रोल पंप को खुदरा आउटलेट में परिवर्तित करने हेतु अनुमति: मौजूदा थोक उपभोक्ता लाइसेंस प्राप्‍त पैक्स को तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा खुदरा आउटलेट में परिवर्तित होने के लिए एक बारगी विकल्प दिया गया है । तेल विपणन कंपनियों द्वारा साझा की गई सूचना के अनुसार 5 राज्यों के 115 थोक उपभोक्‍ता पेट्रोल पंप लाइसेंस प्राप्‍त पैक्‍स ने खुदरा आउटलेट में परिवर्तित होने की सहमति दी है जिसमें से 62 पैक्‍स को इस संबंध में तेल विपणन कंपनियों द्वारा अनुमति प्रदान की गई है ।
  3. पैक्‍स द्वारा अपने कार्यकलापों में विविधता लाने के लिए एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप की पात्रता: सरकार ने अब पैक्‍स को एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप हेतु आवेदन करने की अनुमति प्रदान कर दी है ।  इससे पैक्‍स को अपने आर्थिक कार्यकलाप को बढ़ाने और अपनी आय प्रवाह के विविधीकरण का एक विकल्‍प प्राप्‍त होगा ।
  4. ग्रामीण स्तर पर जेनेरिक औषधियों तक सुगम पहुंच हेतु प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में पैक्स: सरकार द्वारा पैक्‍स को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) के रूप में कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है, जिससे उन्‍हें आय के अतिरिक्‍त स्रोत प्राप्‍त होंगे और ग्रामीण जनता को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक औषधियों तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी । अब तक 4,192 पैक्‍स/सहकारी समितियों ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है जिसमें से 4,177 पैक्‍स को फार्मास्‍यूटिकल्‍स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्‍यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) द्वारा प्रारंभिक मंजूरी दी गई है और 814 पैक्‍स को फार्मास्‍यूटिकल्‍स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्‍यूरो ऑफ इंडिया से स्टोर कोड मिल गए हैं जो प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए तैयार हैं।
  5. प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) के रूप में पैक्‍स: देश में किसानों को उर्वरक और अन्‍य संबंधित सेवाएं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने हेतु पैक्‍स को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) चलाने के लिए सक्षम किया गया है । राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों द्वारा साझा की गई सूचना के अनुसार 27 नवंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार 38,190 पैक्‍स, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं
  6. पैक्‍स द्वारा ग्रामीण नल जलापूर्ति योजनाओं (पीडब्‍ल्‍यूएस) का प्रचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) कार्य:  पैक्‍स को ग्रामीण क्षेत्रों में नल जलापूर्ति योजनाओं के प्रचालन व रख-रखाव (ओ एंड एम) कार्य करने के लिए पात्र बनाया गया है । राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों से प्राप्‍त सूचना के अनुसार 10 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों द्वारा पंचायत/गांव के स्‍तर पर प्रचालन व रख-रखाव (ओ एंड एम) सेवाएं प्रदान करने हेतु 762 पैक्‍स चिह्नित/चयनित किए गए हैं ।
  7. पैक्‍स के स्‍तर पर PM-KUSUM का अभिसरण: पैक्‍स से जुड़े किसान सौर कृषि जल पंप अपना सकते हैं और अपने खेतों में फोटोवोल्‍टेइक मॉड्यूल इंस्‍टॉल करा सकते हैं ।
  8. प्रधानमंत्री सूर्य घर– मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी–एमबीवाई) का सहकारी समितियों के स्तर पर अभिसरण: यह पहल सहकारी समितियों की व्यापक जमीनी पहुंच का लाभ उठाते हुए स्वच्छ रूफटॉप सौर ऊर्जा को अपनाने के उद्देश्य से की गई है I इस पहल के केंद्रित कार्यान्वयन के लिए 100 नगरों का चयन किया गया है ।
  9. डोर-स्‍टेप वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंक मित्र सहकारी समितियों को माइक्रो-एटीएम: डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) का बैंक मित्र बनाया जा सकता है । उनके सुगम व्‍यवसाय, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड के सहयोग से इन बैंक मित्र सहकारी समितियों को डोर-स्‍टेप वित्तीय सेवाएंप्रदान करने के लिए माइक्रो-एटीएम दिए जा रहे हैं I इस पहल के सफल कार्यान्‍वयन के लिए दिनांक 19 सितंबर, 2024 को मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) लॉन्‍च की गई है और गुजरात राज्‍य में बैंक मित्र सहकारी सहकारी समितियों को 12,624 माइक्रो एटीम वितरित किए गए हैं ।
  10. दुग्‍ध सहकारी समितियों के सदस्‍यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड: जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) की पहुंच का विस्‍तार करने तथा डेयरी सहकारी समितियों के सदस्‍यों को आवश्‍यक लिक्विडिटी प्रदान करने और तुलनात्‍मक रूप से निम्‍नतर ब्‍याज दरों पर ऋण प्रदान करने तथा अन्‍य वित्तीय लेनदेनों में सक्षम बनाने हेतु सहकारी समितियों के सदस्‍यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड (KCCs) का वितरण किया जा रहा है । इस पहल के सफल कार्यान्‍वयन के लिए दिनांक 19 सितंबर, 2024 को मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) लॉन्‍च की गई है और गुजरात राज्‍य में 16,48,105 रुपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए हैं ।
  11. मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की स्‍थापना: मछुआरों को बाजार लिंकेज तथा प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान करने हेतु राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने प्रारंभिक चरण में 70 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों का पंजीकरण किया है । इसके अतिरिक्‍त मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने 280.65 करोड़ रुपये के अनुमोदित परिव्यय से एनसीडीसी को 1000 मौजूदा मात्स्यिकी सहकारी समितियों को मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों के रूप में परिवर्तित करने का कार्य सौंपा है । एनसीडीसी ने 1000 प्राथमिक मात्स्यिकी सहकारी समितियों को चिह्नित किया है जिन्‍हें 280.65 करोड़ रुपये के अनुमोदित परिव्‍यय से मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों के रूप में सशक्‍त किया जाएगा । चयनित समितियों के लिए क्‍लस्‍टर आधारित व्‍यवसाय संगठनों (CBBOs) द्वारा एक व्यवसाय योजना तैयार की जा रही है । एनसीडीसी ने योजना के अधीन FPOs/CBBOs को 105 करोड़ संवितरित किए हैं।
  12. श्‍वेत क्रांति 2.0: सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में अनाच्‍छादित क्षेत्रों में डेयरी किसानों को बाजार पहुंच प्रदान करके और संगठित क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों की हिस्सेदारी को बढ़ाकर डेयरी सहकारी समितियों के दुग्‍ध प्रापण को वर्तमान स्तर से 50% तक बढ़ानेके उद्देश्‍य से सहकारिता आधारित "श्‍वेत क्रांति 2.0" नामक एक पहल लॉन्‍च की है जिसका लक्ष्य सहकारी पहुंच का विस्तार करना, रोजगार सृजन करना और महिलाओं को सशक्त बनाना है । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री की उपस्थिति में दिनांक 19.09.2024 को श्‍वेत क्रांति 2.0 की मार्गदर्शिका(एसओपी) लॉन्च की गई । माननीय गृह और सहकारिता मंत्री ने माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री की उपस्थिति में दिनांक 25.12.2024 को 6,600 नवस्थापित सहकारी डेयरी समितियों (DCSs) का उद्घाटन किया । अब तक 31 राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में 21,768 सहकारी दुग्‍ध समितियां (DCSs) पंजीकृत हो गई हैं ।
  13. आत्‍मनिर्भरता अभियान: सहकारिता मंत्रालय ने आयात निर्भरता घटाने के लिए दलहन (तुअर, मसूर और उड़दके उत्पादन को प्रोत्साहित करने और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) के लक्ष्य को प्राप्‍त करने के लिए एथेनॉल के उत्पादन के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) के माध्यम से मक्के के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है । दोनों ने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के पंजीकरण के लिए क्रमशः e-samyukti और e-samridhi वेब पोर्टल का विकास किया है । दोनों ने तुअर, उड़द, मसूर और मक्का के पूर्व-पंजीकृत किसानों के 100% उपज को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) पर खरीद का आश्‍वासन दिया है । तथापि, बाजार मूल्‍य का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से अधिक होने पर किसानों को उच्‍चतर लाभ हेतु अपनी उपज को खुले बाजारों में बेचने की आजादी होगी । कुल 42,87,484 किसान लिए भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित के क्रमशः e-samyukti पोर्टल पर पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं । इसी प्रकार 13,90,862 किसानों ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित के e-samridhi पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है ।
  • सहकारी बैंकों का सशक्तीकरण
  1. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को व्यापार विस्तारण हेतु नई शाखाएं खोलने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंक (UCBs) अब आरबीआई की पूर्वानुमति के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या का 15% (अधिकतम 10 शाखाएं) नई शाखाएँ खोल सकेंगे ।
  2. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को अपने ग्राहकों को डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब डोर-स्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है I इन बैंकों के खाताधारक अब अपने घर पर ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं जैसे नकद निकासी, नकद जमा, केवाईसी, डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र, आदि का लाभ प्राप्त कर सकेंगे ।
  3. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को शामिल करने हेतु शेड्यूलिंग मानदंडों की अधिसूचना:  शहरी सहकारी बैंक जो व्‍यवसाय प्राधिकरण की पात्रता शर्तों का अनुपालन करते हैं तथा पिछले दो वर्षों से टियर- 3 के रूप में वर्गीकरण हेतु आवश्यक न्यूनतम जमा राशि बरकरार रखे हुए हैं, अब भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,1934 की अनुसूची-II में शामिल होने के लिए पात्र हैं एवं 'अनुसूचित' का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं ।
  4.  शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के साथ नियमित संवाद हेतु आरबीआई में एक नोडल अधिकारी नामित: सहकारिता क्षेत्र की गहन समन्वय और केंद्रित संवाद हेतु काफी समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नोडल अधिकारी अधिसूचित किया है ।
  5. शहरी सहकारी बैंकों के लिए पीएसएल लक्ष्य को 75% से घटाकर 60% करने से राहत: आरबीआई ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्य को 75% के पूर्व स्‍तर से घटाकर 60% कर शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को राहत दी है । इस छूट से शहरी सहकारी बैंकों पर अनुपालन दबावों में कमी आई है और उन्‍हें अपने ऋण पोर्टफोलियों के प्रबंधन में अधिक प्रचालनात्‍मक लचीलेपन की प्राप्ति हुई है ।
  6. शहरी सहकारी बैंकों के लिए आवास ऋण सीमा 10% से बढ़ाकर 25% की गई: शहरी सहकारी बैंकों के सदस्‍यों के लिए आवास ऋण सीमा को उनकी कुल परिसंपत्ति का 10% से बढ़ाकर उनके ऋण एवं अग्रिम का 25% (3 करोड़ रुपये तक) कर दिया गया है ।
  7. महिला ऋण पुनर्भुगतान के लिए 2 लाख रुपये के लक्ष्य को हटाकर 12% (दुर्बल वर्ग) की उप-सीमा में राहत: दुर्बल वर्गों के लिए 12% की उप-सीमा के तहत महिला उधारकर्ताओं के लिए 2 लाख के लक्ष्य को हटाने से अब प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) का अनुपालन सरल हो गया है और शहरी सहकारी बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) के दायित्वों को पूरा करने में अधिक प्रचालन स्वतंत्रता ‍की प्राप्ति हुई है ।
  8. शहरी सहकारी संस्‍थानों को राहत देते हुए 50% ऋण सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ किया गया: शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए ऋण और अग्रिमों के 50% की सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ किया गया जिससे उन्हें उधारकर्ताओं की उच्च ऋण मांगों को पूरा करने, व्यवसाय वृद्धि में मदद करने और खुदरा और लघु और मध्‍यम उद्यम ऋण क्षेत्रों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने में सहायता मिलेगी ।
  9. स्‍वर्ण ऋण हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक सीमा हटाई गई: भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए 2 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा को हटाकर उन्‍हें वाणिज्यिक बैंकों के अनुरूप किया ।
  10. शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन (यूओ) के रूप में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव एंड क्रेडिट सोसाइटीज लि. (एनएएफसीयूबी) की स्‍थापना की गई जो लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्‍यक आईटी अवसंरचना और प्रचालनात्‍मक सहयोग प्रदान करना है । इसने डिजि लोन और डिजि पे जैसी विभिन्न सेवाएं लॉन्‍च की हैं ।
  11. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रतिभूति प्राप्तियों के ग्लाइड पथ को वित्तीय वर्ष 2025-26 से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक बढ़ाया गया: भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 24.02.2025 के परिपत्र के माध्‍यम से शहरी सहकारी बैंकों में पूंजी और तरलता के बेहतर प्रबंधन के लिए गैर-निष्पादित आस्तियों का परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के माध्यम से दो वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान किया है जिससे ये बैंक संकटग्रस्‍त परिसंपत्तियों के नुकसान को कम कर सकें ।
  12. सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का वन टाइम सेटलमेंट करने की अनुमति: सहकारी बैंक अब बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ करने सहित उधारकर्ताओं के साथ निपटान की प्रक्रिया भी प्रदान कर सकेंगे ।
  13. उच्चतर आवास ऋण सीमाएं- भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए व्यक्तिगत आवासन ऋण की सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया और उन्‍हें रियल एस्टेट को कुल एक्‍सपोज़र के 5% तक ऋण देने के लिए सक्षम किया ।
  14. सहकारी बैंकों में 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) के लिए लाइसेंस शुल्क घटाया गया: सहकारी बैंकों को 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) में ऑनबोर्ड करने के लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से लिंक करके घटा दिया गया है । सहकारी वित्तीय संस्थानों को उत्‍पादन-पूर्व चरण में अब यह सुविधा पहले तीन महीनों तक निःशुल्क प्राप्त होगी । इससे ऑनबोर्ड हुए बैंकों के सदस्यों को बायोमेट्रिक्‍स के माध्‍यम से अपने घर पर ही बैंकिंग की सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी ।  
  15. भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दिनांक 01.08.2025 को आधार समर्थित भुगतान प्रणाली (AePS) में सहकारी समितियों को ऑनबोर्ड होने के लिए एक नई संरचना की शुरूआत की है । अब केवल राज्‍य सहकारी बैंकों से प्रामाणिकरण उपयोगकर्ता एजेंसी (एयूए)/ईकेवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसी (केयूए) के रूप में ऑनबोर्ड होने की अपेक्षा है; जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को राज्‍य सहकारी बैंकों के माध्‍यम से उप- एयूए/केयूए के रूप में इसे उपयोग करने की अनुमति होगी ।
  16. ऋण प्रदाय में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों (UCBs), राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को CGTMSE योजना में सदस्य ऋण संस्थान (MLI) के रूप में अधिसूचित किया गया: सहकारी बैंक अब दिए गए ऋणों पर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ उठा सकेंगे । सहकारी क्षेत्र के उद्यमों को भी अब सहकारी बैंकों से समपार्श्विक- मुक्त (कोलेटरल-फ्री) ऋण मिल सकेगा । योजना के अधीन सदस्‍य ऋण संस्‍थानों (MLIs) के रूप में सहकारी बैंकों के पंजीकरण के लिए सीजीटीएमएसई ने 5% सकल एनपीए या उससे कम को 7% सकल एनपीए या उससे कम पर युक्तिसंगत किया है ।
  17. सहकारी बैंकों के निदेशक मंडल के कार्यकाल को उसके गठन के अनुरूप (अधिकतम 10 लगातार वर्ष) करने के लिये बैंककारी विनियमन अधिनियम में संशोधन किया गया है ।
  18. प्राथमिकता क्षेत्र दिशानिर्देशों के तहत कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ की गई: आरबीआई ने दिनांक 24.03.2025 के मास्टर निदेश द्वारा कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की सीमा को 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया है । इससे बैंक द्वारा कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) को अधिक ऋण सहायता प्रदान की जा सकेगी जिससे कृषि अवसंरचना सशक्‍त होगी और ग्रामीण ऋण प्रवाह को गति मिलेगी ।
  19. सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय): ग्रामीण सहकारी बैंकों को तकनीकी सेवाएं प्रदान करने और उनके सशक्‍तीकरण के लिए आरबीआई ने सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय) की स्थापना हेतु नाबार्ड को अनुमोदन प्रदान किया है । इसने ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए 13 सेवाएं लॉन्‍च की हैं ।
  20. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 07.10.2025 की अपनी अधिसूचना के माध्‍यम से ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने एकीकृत ऑम्‍बड्समैन योजना में शामिल किया है । इससे ग्रामीण सहकारी बैंकों के कार्यों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी ।
  21. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को स्‍वचालित माध्‍यम से नई शाखाएं (अधिकतम 10) खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है । पात्रता के अध्‍यधीन राज्‍य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक अब बिना विलंब के अपनी नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्‍यवसाय का विस्‍तार कर सकेंगे ।
  22. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 28.11.2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय मानदंडों में शिथिलता प्रदान की है । सकल एनपीए का 7% से कम होना और शुद्ध एनपीए का 3% से अधिक न होने एवं शुद्ध लाभ की शर्तों की पूर्वापेक्षाओं को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक अपने ग्राहकों को आसानी से आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकेंगे ।   
  23. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा व्‍यवसाय प्राधिकरण के लिए पात्रता शर्तें मानदंड (ईसीबीए) जारी किया है जो पूर्व के वित्तीय सुदृढ़ और सुप्रबंधित (एफएसडब्‍ल्‍यूएम) प्रावधानों को अधिक्रांत करेंगे । इन मानदंडों से विगत दो वर्षों में कोई शास्ति के न होने से संबंधित उपबंध को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक आसानी से नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्‍यवसाय का विस्‍तार कर सकेंगे ।
  24. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 07.01.2026 के पत्र के माध्‍यम से बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 20 के संदर्भ में स्‍पष्‍टीकरण जारी किया है जिसके कारण ग्रामीण सहकारी बैंकों के निदेशकगण और उनसे संबंधित सहकारी समितियां, विनिर्दिष्‍ट शर्तों के अध्‍यधीन अपने संबंधित राज्‍य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से ऋण लेने के लिए अब पात्र हो गए हैं ।  
  25. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 19.01.2026 की अधिसूचना के माध्‍यम से पीएसएल फ्रेमवर्क के ऑन-लेंडिंग प्रावधानों के अधीन राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को पात्र संस्‍था के रूप में शामिल किया है । अब बैंकों द्वारा एनसीडीसी को कृषि, आवासन, सामाजिक अवंसरचना, इत्‍यादि के लिए आगे सहकारी समितियों को ऑन-लेंडिंग हेतु दिया गया ऋण पीएसएल की श्रेणी के अधीन आएगा।
  26. भारतीय रिजर्व बैंक ने इफको जैसे विनिर्दिष्‍ट उधारकर्ताओं को बैंकों से अपनी कार्यशील पूंजी आवश्‍यकताओं का 50% से अधिक ऋण लेने की अनुमति प्रदान कर दी है ।
  27. कैबिनेट सचिव की अध्‍यक्षता में सचिवों की समिति ने भारत सरकार की विभिन्‍न योजनाओं के अधीन सहकारी बैंकों को प्रतिभागी संस्‍थान के रूप में शामिल करने की सिफारिश की है । पशुपालन और डेयरी विभाग जैसे विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों ने सहकारी बैंकों को शामिल करने के लिए अपनी योजना दिशानिर्देशों में भी संशोधन किए हैं । 
  28. बीमा व्‍यवसाय करने के लिए कॉरपोरेट एजेंटों के रूप में सहकारी बैंकों को ऑनबोर्ड करने हेतु सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों और सहकारी बैंकों से इफको संयुक्‍त उपक्रम कंपनी के एजेंट के रूप में जुड़ने का अनुरोध किया है । 
  29. साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम एवं प्रतिक्रिया की तत्‍काल रिपोर्टिंग के लिए सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों और सहकारी बैंकों से I4C और एनसीआरपी पोर्टलों पर ऑनबोर्ड होने का अनुरोध किया है । 600 से अधिक सहकारी बैंक I4C पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं ।
  30. राष्‍ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अधिदेश के अनुसरण में नाबार्ड के अधीन एक टास्‍क फोर्स का गठन किया गया है जो नीति निर्माण के लिए आवश्‍यक इनपुट्स प्रदान करेगा और ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही समस्‍याओं और चुनौतियों का समाधान करेगा ।
  31. मंत्रालय द्वारा नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज (NAFCUB) के अधीन शहरी सहकारी बैंकों एवं सहकारी ऋण समितियों के रूपांतरण तथा सुधारपर एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है । इस टास्क फोर्स द्वारा तीन रिपोर्टें प्रस्तुत की गई हैं ।
  32. मंत्रालय के अनुरोध पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) में सुधार, पुनर्गठन एवं नवाचार से संबंधित एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है ।
  33. मंत्रालय ने इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट (IRMA) के माध्‍यम से नेशनल कोऑपरेटिव एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक्स फेडरेशन लि. (NAFCARD) के लिए एक विस्‍तृत अध्‍ययन पूरा किया है जिसका परिणाम एक अनुमोदित कार्ययोजना है जो ऋण विस्‍तारण के लिए मार्गदर्शन, गैर-फार्म सेक्‍टर कार्यकलापों को प्रोत्‍साहन और सहकारी शासन का सशक्‍तीकरण प्रदान करती है ।
  34. मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) में नेशनल फेडरेशन ऑफ स्‍टेट कोऑपरेटिव बैंक्स (NAFSCOB) की भूमिका को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक अध्‍ययन पूरा किया है । यह सहकारी ऋण, डिजिटल एकीकरण, वित्तीय सेवाओं का विविधीकरण और संस्‍थागत सशक्‍तीकरण में सुधारों को दर्शाता है । शासन, राज्‍य-स्‍तरीय क्षमता निर्माण और समावेशी पहुंच पर जोर देते हुए यह रोडमैप, NAFSCOB की भूमिका को सहकारी बैंकिंग का नेतृत्‍व करने और भारत भर में संधारणीय ग्रामीण विकास को गति प्रदान करने के लिए स्‍थापित करता है ।

.    सहकारी समितियों को आयकर अधिनियम में राहत

  1. एक करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक की आय वाली सहकारी समितियों के आयकर पर अधिभार को 12% से घटाकर 7% कर दिया गया है: इससे सहकारी समितियों पर आयकर का भार कम होगा और उनके पास अपने सदस्यों के हित के लिए कार्य करने हेतु अधिक पूंजी उपलब्‍ध होगी
  2. सहकारी समितियों के न्‍यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 18.5% से घटाकर 15% किया गया: इस उपबंध से अब सहकारी समितियों और कंपनियों के बीच इस संबंध में समरूपता हो गई है ।
  3. आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत नकद लेनदेन में राहत: आयकरअधिनियम की धारा 269ST के अधीन सहकारी समतियों द्वारा नकद लेनदेन में हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए सरकार ने एक स्‍पष्‍टीकरण जारी कर यह स्‍पष्‍ट किया है कि किसी सहकारी समिति द्वारा अपने वितरक के साथ किसी एक दिन में किए गए 2 लाख रुपये से कम के नकद लेनदेन को पृथक माना जाएगा और उस पर आयकर जुर्माना नहीं लगाया जाएगा ।
  4. नई विनिर्माण सहकारी समितियों के लिए कर में कटौती: सरकार ने निर्णय लिया है कि दिनांक 31 मार्च, 2024 तक विनिर्माण कार्य शुरू करने वाली नई सहकारी समितियों से अधिभार के साथ 30% तक की पूर्व दर की तुलना में 15% की सपाट निम्‍न कर-दर लगाई जाएगी । इससे विनिर्माण के क्षेत्र में नई सहकारी समितियों की स्‍थापना को प्रोत्‍साहन मिलेगा ।
  5. प्राथमिक कृषि क्रेडिट समिति (पैक्स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद जमा राशि एवं भुगतान की सीमा में वृद्धि: सरकार ने प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद जमा और एवं भुगतान की सीमा को प्रति सदस्‍य 20,000 रुपये से बढ़ा कर 2 लाख रुपये कर दिया है । यह उपबंध उनके कार्यकलापों को सुविधाजनक बनाएगा, उनके व्‍यवसाय को बढ़ाएगा और इन समितियों के सदस्‍यों को लाभान्वित करेगा ।
  6. प्राथमिक कृषि क्रेडिट समिति (पैक्स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (PCARDBs) द्वारा नकद ऋण की सीमा और नकद ऋण चुकौती की सीमा में वृद्धि:
    सरकार ने प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद में दिए जाने वाले नकद ऋण एवं उसकी नकद चुकौती की सीमा को प्रति सदस्य ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दिया है । यह प्रावधान उनके कार्यकलापों को सुगम बनाएगा, उनके व्यवसाय को बढ़ाएगा और समितियों के सदस्यों को लाभ पहुंचा यह उपबंध उनके कार्यकलापों को सुविधाजनक बनाएगा, उनके व्‍यवसाय को बढ़ाएगा और इन समितियों के सदस्‍यों को लाभान्वित करेगा।
  7. नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा में वृद्धि: सरकार ने बजट 2023-24 द्वारा सहकारी समितियों के लिए नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया है । इस प्रावधान से सहकारी समितियों के स्रोत पर कर कटौती में बचत होगी जिसका वे अपने सदस्‍यों के हितार्थ कार्यों में उपयोग कर सकेंगे ।
  8. सहकारी समितियों को निम्‍न या शून्‍य स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने में सक्षम करना: दिनांक 01.10.2024 से S.194Q को S. 197 के दायरे में लाया गया जो करदाताओं को धारा 194Q के अधीन स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) अनुपालन की अपेक्षा वाले लेनदेन के संबंध में निम्‍न/शून्‍य कटौती प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने में सक्षम बनाती हैं ।
  9. धारा S.206C(1H) के अधीन वस्‍तुओं के विक्रय पर टीसीएस को अप्रभावी बनाया गया: धारा 206C(1H) में एक समापन खंड जोड़ा गया है जिसने उक्‍त धारा के उपबंध को दिनांक 1 अप्रैल 2025 से अप्रभावी बना दिया है । 

घ.    सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार

  1. सहकारी चीनी मिलों को आयकर से राहत: सरकार ने एक स्‍पष्‍टीकरण जारी कर यह स्‍पष्‍ट किया है कि सहकारी चीनी मिलों को अप्रैल, 2016 से गन्‍ना किसानों को गन्‍ने के उच्‍च्‍तर मूल्‍य का भुगतान करने पर उचित एवं लाभकारी मूल्‍य या राज्‍य सलाह मूल्‍य तक कोई अतिरिक्त कर नहीं देना पड़ेगा ।
  2. सहकारी चीनी मिलों के आयकर से संबंधित दशकों पुराने लंबित समस्याओं का समाधान: सरकार ने अपने केंद्रीय बजट 2023-24 में यह प्रावधान किया है कि सहकारी चीनी समितियों को आकलन वर्ष 2016-17 से पूर्व की अवधि में गन्‍ना किसानों को किए गए भुगतानों को व्‍यय के रूप में दावा करने की अनुमति होगी जिससे उन्‍हें 46,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की राहत मिलेगी ।
  3. सहकारी चीनी मिलों के सशक्तीकरण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ऋण योजना: सरकार ने एथेनॉल संयंत्र या कोजेनरेशन संयंत्र स्‍थापित करने या कार्यशील पूंजी के लिए या फिर तीनों प्रयोजनों के लिए एनसीडीसी के माध्यम से एक योजना आरंभ की है । मंत्रालय ने इस योजना के अधीन एनसीडीसी को 1000 करोड़ रुपये (वित्तीय वर्ष 2022-23 में 500 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ रुपये) जारी किया और एनसीडीसी ने 56 सहकारी चीनी मिलों को 10,005 करोड़ रुपये के ऋण संवितरित किए हैं।
  4. एथेनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को प्राथमिकता: भारत सरकार द्वारा एथेनॉल ब्‍लेंडिंग कार्यक्रम (ईबीपी) के अधीन एथेनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को निजी कंपनियों के समरूप रखा गया है ।
  5. शीरा आधारित एथेनॉल संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल संयंत्रों मे परिवर्तित करके सहकारी चीनी मिलों को सशक्‍त करना: सहकारिता मंत्रालय ने नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्‍ट्रीज़ लि. (NFCSFL) के परामर्श से सहकारी चीनी मिलों (CSMs) के मौजूदा शीरा आधारित एथेनॉल संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल संयंत्रों में परिवर्तित करने की पहल की है सहकारी चीनी मिलें एथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित करके शीरा और शुगर सिरप से भी एथेनॉल का उत्पादन करती हैं हालाँकि, एथेनॉल के उत्पादन के लिए कच्चे माल, अर्थात शीरा और शुगर सिरप की उपलब्धता कई कारणों से सीमित हैं, जैसे शुगर सिरप के डायवर्जन पर सरकारी नीति, थेनॉल के उत्पादन के लिए B-heavy शीरा और गन्ना पेराई मौसम की अवधि तथा वर्षा पर निर्भर गन्ने की उपलब्धता, आदि । सीमित करने वाले इन कारकों के चलते एथेनॉल संयंत्र वाली सहकारी चीनी मिलें पूरे वर्ष अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पाती हैं भारत सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का को प्राथमिकता दी है, इसलिए यह सहकारी चीनी मिलों के लिए उचित है कि वे अपने मौजूदा एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों में बदलें जिससे वे मक्का को कच्चे माल के रूप में उपयोग करके एथेनॉल का उत्पादन कर सकें जहां एनसीडीसी ने इस उद्देश्य हेतु ऋण प्रदान करने पर सहमति दी है वहीं खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने विशेष रूप से सहकारी चीनी मिलों के लिए उनके ऋण पर 6% प्रति वर्ष या वास्तविक ब्याज का 50%, जो भी कम हो, की दर से 5 वर्षों की अवधि के लिए ब्याज अनुदान प्रदान करने की एक योजना शुरू की है इसके अतिरिक्त, तेल विपणन कंपनियां (OMCs) सहकारी चीनी मिलों को पहली प्राथमिकता देंगे जो एथेनॉल प्रापण में ब्याज अनुदान योजना से लाभान्वित होंगे और एकल फीडस्टॉक से बहु-फीडस्टॉक की ओर रूपांतरित हो सकेंगे
  6. शीरा पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% किया गया: सरकार ने शीरा पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% करने का निर्णय लिया है जिससे सहकारी चीनी मिलें डिस्टिलरियों को उच्‍चतर दरों पर शीरा की बिक्री करके अपने सदस्‍यों के लिए अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे ।
  7. बंद सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार: सहकारिता मंत्रालय के सुझाव पर इंडियन पोटाश लिमिटेड ने बंद सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार की पहल की है । दिनांक 08.03.2025 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने श्री बिलेश्वर खांड उद्योग खेदुत सहकारी मंडली लिमिटेड, कोडिनार और श्री तलाला तालुका सहकारी खांड उद्योग मंडली लिमिटेड, तलाला के पुनरुद्धार एवं आधुनिकीकरण हेतु "भूमि पूजन" किया । इसके अतिरिक्त, इंडियन पोटाश लिमिटेड श्री वलसाड सहकारी खांड उद्योग मंडली लिमिटेड, वलसाड के पुनरुद्धार के लिए भी कदम उठा रहा है । इन कदमों से उन क्षेत्रों के हजारों किसान लाभान्वित होंगे जहां पर ये सहकारी चीनी मिलें स्थित हैं

ङ.   तीन नई राष्‍ट्र-स्‍तरीय बहुराज्‍य सहकारी समितियां

  1. प्रमाणित बीजों के लिए नई राष्ट्रीय बहुराज्य सहकारी समिति: सरकार ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी बीज समिति, अर्थात् भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की स्थापना एक अंब्रेला संगठन के रूप में की है जो भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाकर प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों के माध्यम से दोनों पीढ़ियों के बीजों, अर्थात् बुनियादी (Foundation) और प्रमाणित (Certified) बीजों  का उत्पादन, परीक्षण, प्रमाणन, प्रापण, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग, लेबलिंग और पैकेजिंग पर फोकस करेगी । बीबीएसएसएल ने अपने बीज को भारत बीजब्रांड के अंतर्गत लॉन्च किया है। अब तक 33,077 पैक्‍स/सहकारी समितियां बीबीएसएसएल की सदस्य बन चुकी हैं
  2. जैविक कृषि के लिए नई राष्ट्रीय बहुराज्य ऑर्गेनिक सहकारी समिति: सरकार ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी ऑर्गेनिक समिति, अर्थात् राष्‍ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) की स्थापना एक अंब्रेला संगठन के रूप में की है जो जैविक उत्पादों का संग्रहण, प्रमाणीकरण, परीक्षण, प्रापण, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक सुविधाएं, विपणन हेतु संस्थागत सहयोग प्रदान करेगा तथा पैक्‍स/FPOs सहित अपने सदस्य सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान करने के साथ भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं और एजेंसियों की मदद से जैविक उत्पादों से संबंधित प्रोत्साहनात्मक और विकासात्मक कार्यकलापों को बढ़ावा देगा । अब तक 11,823 पैक्‍स/सहकारी समितियां एनसीओएल की सदस्य बन चुकी हैं । एनसीओएल ने अपने उत्पाद "भारत ऑर्गेनिक्स" ब्रांड नाम के तहत लॉन्च किए हैं । अब तक भारत ऑर्गेनिक्स ब्रांड के तहत 28 जैविक उत्पाद (अरहर दाल, भूरा चना, चना दाल, काबुली चना, मसूर मलका, मसूर टूटा, मसूर साबुत, मूंग धुली, मूंग टूटा, मूंग साबुत, राजमा चित्रा, उड़द दाल, उड़द गोटा, उड़द टूटा, उड़द साबुत, गेहूं का आटा, गुड़ के क्यूब, गुड़ का पाउडर, ब्राउन शुगर, खांडसारी शुगर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, मेथी, साबुत धनिया, एप्पल साइडर सिरका, गोवा के जैविक काजू, जैविक कश्‍मीरी बादाम, जैविक कश्‍मीरी अखरोट) दिल्ली-राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और बेंगलुरू में उपलब्ध हैं । भारत ऑर्गेनिक्स के सभी उत्पादों का मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में 245 से अधिक कीटनाशकों के लिए 100% बैच परीक्षण किया जाता है ।
  3. निर्यात को प्रोत्‍साहित करने के लिए नई राष्ट्रीय बहुराज्य सहकारी निर्यात समिति: सरकार ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी निर्यात समिति, अर्थात् राष्‍ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) की स्थापना एक अंब्रेला संगठन के रूप में की है जो देश की भौगोलिक सीमाओं से बाहर व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाकर भारतीय सहकारी उत्पादों/ सेवाओं की वैश्विक मांग को बढ़ाएगी और इन उत्पादों/सेवाओं हेतु सर्वश्रेष्ठ मूल्य प्राप्त करने के लिए भारतीय सहकारी क्षेत्र में उपलब्ध अधिशेष उत्पादों का निर्यात करेगी । यह सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित सभी प्रकार के वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देने हेतु प्रापण, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, प्रमाणन, अनुसंधान और विकास, आदि सहित विभिन्न कार्यकलापों के माध्यम से निर्यात को प्रोत्साहित करेगी । अब तक 13,890 पैक्‍स/सहकारी समितियां एनसीईएल की सदस्य बन चुकी हैं । एनसीईएल ने अब तक 29 देशों को लगभग 13.84 लाख मीट्रिक टन कृषि जिंसों जैसे चावल, गेहूं, मक्का, चीनी, प्याज, जीरा, आदि का निर्यात किया है जिसका कुल अनुमानित मूल्य ₹5,577.84 करोड़ है । वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान एनसीईएल द्वारा अपनी सदस्य सहकारी समितियों को 20% लाभांश प्रदान कया गया है ।
  4. बीज अनुसंधान केंद्र (बीएके) की स्थापना: माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दिनांक 6 अप्रैल 2025 को कलोल, गुजरात में एक अत्याधुनिक बीज अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखी । यह "बीज अनुसंधान केंद्र" किसानों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार और समावेशी विकास को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगा । इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) ने दिनांक 3 जून 2025 को इस केंद्र की स्थापना के लिए एक त्रिपक्षीय सेवा समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं
  5. केले के लिए टिश्‍यू कल्चर सुविधाएं स्थापित करने की पहल: केले की वर्षभर उपलब्धता, किफायत, स्वाद, पोषण मूल्य और औषधीय गुणों के कारण इसकी देश और विदेश, दोनों में उच्‍च मांग है और इसके निर्यात की भी अपार संभावनाएं हैं । भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्यों में केले के लिए टिश्‍यू कल्चर सुविधा (टीसीएफ) स्थापित करने का निर्णय लिया है । इन सुविधाओं के माध्यम से, बीबीएसएसएल ‘true to the type’ मातृ पौधों का अनुरक्षण करेगा, टिश्‍यू कल्चर से तैयार केले के पौधे/रोपण सामग्री का उत्पादन करेगा, और किसानों को 100% रोगमुक्त पौधे/रोपण सामग्री वितरित करेगा । इससे किसानों को उच्च गुणवत्ता की रोपण सामग्री की उपलब्धता और उनकी आय में संधारणीय वृद्धि सुनिश्चित होगी ।
  6. आलू के लिए टिश्‍यू कल्चर सुविधाएं स्थापित करने की पहल: भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) और बनस डेयरी के बीच गुजरात और आंध्र प्रदेश में आलू के टिश्‍यू कल्‍चर को प्रोत्‍साहित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया गया है ।
  7. पारंपरिक प्राकृतिक बीजों के संरक्षण और संवर्धन की पहल: रसायन-मुक्त भारतीय पारंपरिक प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की बढ़ती रुचि के चलते पारंपरिक प्राकृतिक बीजों की मांग में संभावित रूप से वृद्धि होगी । अतः, इन बीजों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और संवर्धन के लिए समन्वित प्रयास की आवश्यकता है । "भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल)" ने खाद्यान्न, सब्जियों, फलों, आदि के बीजों तक सीमित न रहते हुए देशी पौधों की किस्मों के प्राकृतिक बीजों की पहचान करने और उनके संरक्षण, संवर्धन, प्रजनन, उत्पादन, वितरण, प्रोत्‍साहन तथा इससे संबंधित सभी प्रकार के कार्यकलापों के लिए एक प्रणाली विकसित करने की पहल की है । प्राकृतिक देशी बीजों के प्रोत्‍साहन के क्षेत्र में कार्यरत राज्य सरकारों एवं तकनीकी संस्थानों से अनुरोध किया गया है कि वे इस महत्वपूर्ण कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने हेतु बीबीएसएसएल को हर संभव प्रशासनिक, संस्थागत और तकनीकी सहयोग प्रदान करें ।

च.    हकारी समितियों में क्षमता निर्माण

  1. सहकारी विश्‍वविद्यालय की स्थापना: सहकारिता मंत्रालय ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद (इरमा) को परिवर्तित करके सहकारी क्षेत्र में "त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (टीएसयू) नामक राष्ट्रीय स्तर के एक विश्‍वविद्यालय की स्थापना की है । इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में स्‍थापित एवं घोषित किया गया है ।

इस संबंध में, "त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 को लोकसभा में 26 मार्च 2025 तथा राज्यसभा में 1 अप्रैल 2025 को पारित किया गया था । तत्‍पश्चात, अधिनियम के प्रवृत्त होने और विश्‍वविद्यालय की स्थापना हेतु राजपत्र अधिसूचना दिनांक 4 अप्रैल, 2025 को जारी की गई जिसके अनुसार विश्‍वविद्यालय की स्थापना 6 अप्रैल, 2025 से प्रभावी मानी गई ।

चूंकि, इस विश्‍वविद्यालय की स्थापना एक तत्‍कालीन संस्थान को परिवर्तित करके की गई थी, अतः यह तत्काल प्रभाव से कार्यशील हो गया है । इसके अलावा, इस विश्‍वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति, कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी की नियुक्ति की जा चुकी है ।  विश्वविद्यालय के शासी बोर्ड और कार्यकारी परिषद का गठन भी कर दिया गया है और विश्वविद्यालय के परिनियम मंत्रालय द्वारा अधिसूचित कर दिए गए हैं । टीएसयू द्वारा यूनिवर्सिटी के अध्‍यादेश भी अधिसूचित कर दिए गए हैं ।

इसके अलावा, अतिरिक्त अवसंरचना निर्माण के लिए गुजरात सरकार द्वारा 50 वर्षों के पट्टे पर भूमि भी आबंटित कर दी गई है और दिनांक 5 जुलाई, 2025 को विश्‍वविद्यालय के नए भवन का शिलान्यास भी कर दिया गया है ।

  1. "त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (TSU) द्वारा नए पाठ्यक्रमों की शुरूआत और संबद्धता: "त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (टीएसयू) ने चालू शैक्षणिक वर्ष से तीन नए एमबीए कार्यक्रमों (कृषि व्‍यवसाय प्रबंधन, सहकारी प्रबंधन तथा सहकारी बैंकिंग और वित्त) की शुरूआत की है।

इस विश्‍वविद्यालय से संबद्धता के संबंध में वैकुंठ मेहता राष्‍ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्‍थान (वैमनीकॉम), पुणे सहित सात संस्‍थानों को संबद्ध किया गया है और वर्तमान में 25 से अधिक आवेदन विश्‍वविद्यालय द्वारा समीक्षाधीन हैं ।

  1. सहकारिता मंत्रालय ने एग्रीकल्‍चरल फाइनेंस कॉरपोरेशन (एएफसी) इंडिया लि. के माध्‍यम से नेशनल लेबर कोऑपरेटिव फेडरेशन (एनएलसीएफ) पर एक व्‍यापक राष्‍ट्र-स्‍तरीय अध्‍ययन पूरा किया है जिसके द्वारा एनएलसीएफ को बेहतर अवसंरचना, विविध सेवाओं और मजबूत प्रशिक्षण पहलों के साथ एक व्‍यवसाय-चालित इकाई के रूप में स्‍थापित करने की रणनीतिक सिफारिशें की है ।
  2. मंत्रालय ने अपने द्वारा किए गए उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए एक प्रभाव आकलन अध्ययन पूरा कर लिया है, जिससे लिनाक के माध्यम से सहकारी क्षेत्र की मजबूती और समावेशिता को और बढ़ाने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि उत्पन्न होगी ।
  3. सहकारिता मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) के दौरान भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) की विकास क्षमता का आकलन करने के लिए एक रणनीतिक अध्ययन शुरू करवाया है जिसे एग्रीकल्‍चरल फाइनेंस कॉरपोरेशन (एएफसी) इंडिया लि. द्वारा संचालित किया जाएगा । इस अध्ययन का लक्ष्‍य बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 24 का अनुपालन सुनिश्चित करना, सहकारी शिक्षा का आधुनिकीकरण करना, 25 वर्षीय विकास रोडमैप तैयार करना और एनसीयूआई के शासन, आउटरीच, प्रशिक्षण अवसंरचना और सहकारी क्षेत्र के देशव्‍यापी विकास में उसकी भूमिका को मज़बूत करना है ।
  4. सहकारिता मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) के दौरान नेशनल फेडरेशन ऑफ फिशर्स कोऑपरेटिव्‍स लिमिटेड (एफआईएसएचसीओपीएफईडी) के व्यवसाय विकास को बढ़ावा देने के लिए एएफसी इंडिया लि. के माध्यम से एक राष्ट्रीय अध्ययन शुरू किया है । इसका लक्ष्‍य विविधीकरण, शासन सुधार, डिजिटल पहुंच और सहकारी सशक्‍तीकरण के माध्यम से 25% की वृद्धि प्राप्‍त करना है । छह राज्यों और हितधारकों के विभिन्न स्तरों को कवर करते हुए यह अध्ययन मात्स्यिकी सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण और देश भर में उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए रणनीतिक योजनाएं तैयार करेगा ।
  5. भारत में सहकारिता पर विशेष मॉड्यूल: सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में एवं राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) के परामर्श से, राष्‍ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) ने सहकारिता पर एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है, जिसका लक्ष्‍य स्‍कूली छात्रों को सहकारी समितियों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका से अवगत कराना है, ताकि उन्‍हें सहकारिता क्षेत्र को करियर के एक विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके । यह विशेष पाठ्यक्रम एनसीईआरटी स्‍कूलों के माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए शुरू किया जाएगा ।
  6. विद्यालयों में सहकारिता: सहकारिता मंत्रालय के निर्देश पर एनसीसीटी के प्रयासों से एनसीईआरटी ने कक्षा 6 के पाठ्यक्रम में सहकारिता पर एक अध्याय शामिल किया है, जिससे छात्रों को संक्षिप्‍त में सहकारी आंदोलन की मूलभूत जानकारी प्राप्त होगी ।

सहकारिता मंत्रालय के निदेश पर एनसीसीटी ने कक्षा VI से X तक के छात्रों के लिए सहकारिता पर एनईपी संरेखित, आयु अनुकूल, ग्रेड विशिष्‍ट विशेष मॉड्यूल तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

  1. वित्त का सशक्‍तीकरण: सहकारिता मंत्रालय द्वारा एनसीसीटी हेतु एक नया ऑब्जेक्ट शीर्ष 'सहायता अनुदान सामान्‍य खोला गया है जो जिससे एनसीसीटी, सहकारिता को सशक्‍त करने के अपने मिशन को पूरा करने के लिए सहकारी प्रशिक्षण एवं शिक्षा संबंधी महत्‍वपूर्ण कार्यों को निरंतरतापूर्वक कर सकेगा । पूर्व में प्रशिक्षण प्रयोजन हेतु प्रशिक्षण और विकास फंड (टीडीएफ), जो मूलतः भवन मरम्मत एवं अवसंरचना विकास के लिए है, से अधिकांश निधि ली जाती थी चूंकि, यह लंबे समय तक व्यवहार्य नहीं था अतः, नए शीर्ष के खोले जाने से टीडीएफ पर दबाव कम होगा और वह अपने मूल उद्देश्य में प्रयुक्त होने के लिए उपलब्‍ध रहेगा ।
  2. एनसीसीटी के प्रत्येक संस्थान के लिए भवन अवसंरचना विकास कार्यों की समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु भवन उप-समिति का गठन किया गया है ।
  3. प्रशिक्षण विकास फंड/भवन फंड का उपयोग: विभिन्न संस्थानों को उनके प्रशिक्षण विकास फंड/भवन फंड का उपयोग भवन अवसंरचना की मरम्मत/नवीनीकरण तथा अचल संपत्तियों (कार्यालय उपस्‍करों, आदि) की खरीद हेतु स्वीकृत किया गया ।
  4. वैकुंठ मेहता राष्‍ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्‍थान (वैमनीकॉम), पुणे के मौजूदा अवसंरचना में एक नया तीन मंजिला अंतरराष्ट्रीय छात्रावास भवन शामिल किया गया है, जिसमें प्रतिभागियों के लिए 50 ट्विन-शेयरिंग कमरे एवं 3 वीआईपी सुइट्स हैं । छात्रावास में रसोईघर, भोजन कक्ष, वाचनालय, 50 सीटों की कक्षा, चर्चा कक्ष, व्यायामशाला तथा कार्यालय कक्ष भी हैं । यह भवन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त ₹30 करोड़ की पूंजी अनुदान से निर्मित किया गया है।
  5. नए पाठ्यक्रम: वैमनीकॉम द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025 के लिए एआईसीटीई, नई दिल्ली से संबद्ध पीजीडीएम- सहकारिता के एक नए कार्यक्रम की शुरूआत की है जिसमें 30 विद्यार्थियों की प्रवेश क्षमता है ।
  6. पायलट परियोजना पैक्स  हेतु समग्र प्रशिक्षण: पैक्स  के सदस्यों, निदेशक मंडल, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों/सचिवों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चार राज्‍यों के चार जिलों, अर्थात ऊना (हिमाचल प्रदेश), जोधपुर (राजस्‍थान), संबलपुर (ओडिशा) और थेनी (तमिलनाडु) में एक पायलट परियोजना चलाई गई । इस प्रशिक्षण में सहकारी समितियों की अवधारणाएं एवं लाभ, उपर्युक्‍त वर्णित सहकारी कार्मिकों की श्रेणियों की भूमिकाएं एवं उत्तरदायित्‍व, आदर्श उपविधियां के साथ व्‍यवसाय विविधीकरण के अवसर, इत्‍यादि जैसे विषय शामिल किए गए ।   इस परियोजना के अधीन 4 राज्‍यों में 284 पैक्‍स से संबंधित कुल 85,219 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया । इन प्रशिक्षणों के फोटो और सामग्री को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डालकर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया ।
  7. सीएससी पोर्टल पर पैक्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम: एनसीसीटी ने सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के सहयोग से सीएससी पोर्टल पर ऑनबोर्ड हुए पैक्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य 30,000 पैक्स के सचिवों/कंप्यूटर ऑपरेटरों को सीएससी पोर्टल की 300 सेवाओं के माध्यम से प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के व्यावसायिक कार्यकलापों में विविधता लाने के लिए प्रशिक्षित करना था । इसके तहत कुल 648 कार्यक्रम संचालित किए गए और 25 राज्‍यों के 564 जिलों से आए 30210 पैक्‍स प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया ।

हाल ही में सचिव, सहकारिता मंत्रालय ने एक बैठक ली थी जिसमें यह निर्णय लिया गया कि पहले से ऑनबोर्ड हुए 9007 पैक्‍स को सक्रिय करने के लिए एनसीसीटी के सहयोग से सीएससी एक अन्‍य प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने के साथ-साथ 15,548 पैक्‍स को सीएससी पोर्टल पर ऑनबोर्ड कराने के लिए भी प्रशिक्षण कराएगा । यह पहल सीएससी के साथ विचार-विमर्श के चरण पर है, पैक्‍स की पहचान की जा रही है तथा सीएससी के परामर्श से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अन्‍य तौर-तरीकों पर कार्रवाई की जा रही है ।

  1. नवस्‍थापित बहुद्देशीय सहकारी समितियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम: जुलाई 2025 माह में सहकारिता मंत्रालय के निदेशानुसार एनसीसीटी ने नवस्‍थापित एम-पैक्‍स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया है । दिनांक 20.06.2025 तक देशभर में कुल 22,283 बहुद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियां (एमपीसीएस) स्‍थापित हुई हैं (एनसीडी पोर्टल के अनुसार) और सभी को प्रशिक्षण के अंतर्गत लाया जाएगा।

दिनांक 31.12.2025 की स्थिति के अनुसार कुल 222 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया गया है जिनमें 10,038 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है ।

  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)/रिस्‍ट्रक्‍चर्ड वेदर-बेस्‍ड क्रॉप इंश्‍योरेंस स्‍कीम (आरडब्‍ल्‍यूबीसीआईएस) के अधीन क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम: राष्‍ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) तथा कृषि और किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार के फसल बीमा प्रभाग के बीच दिनांक 20.01.2025 को एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है । इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)/रिस्‍ट्रक्‍चर्ड वेदर-बेस्‍ड क्रॉप इंश्‍योरेंस स्‍कीम (आरडब्‍ल्‍यूबीसीआईएस) की योजनाओं के अधीन क्षमता निर्माण एवं ज्ञान प्रबंधन संरचना की व्‍यापक रूपरेखा तैयार करना है । तदनुसार, एनसीसीटी द्वारा 200 प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने और पैक्स के 10,000  प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को प्रस्तुत किया है जो वर्तमान में उनके पास विचाराधीन है । कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय ने एनसीसीटी के प्रस्‍ताव को अनुमोदित कर दिया है जिसे चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जाएगा ।
  2. शैक्षणिक जर्नल का प्रकाशनआरआईसीएम, चंडीगढ़ द्वारा 'सहकारिता अनुसंधानएक बहुविषयक सामाज विज्ञान जर्नल शीर्षक से एक द्विवार्षिक समकक्ष-समीक्षित जर्नल का प्रकाशन सहकारिता एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और ज्ञान प्रसार को बढ़ावा देने के लिए किया गया है ।

इस जर्नल का प्रथम संस्‍करण अप्रैल, 2025 में जारी किया गया । जर्नल का द्वितीय संस्‍करण दिसंबर, 2025 में जारी होगा ।

  1. पीजीडीएम-एबीएम कार्यक्रम का पुन:प्रारंभआरआईसीएम, चंडीगढ़ द्वारा एआईसीटीई से विधिवत अनुमोदित स्‍नातकोत्तर प्रबंध डिप्लोमाकृषि व्‍यवसाय प्रबंधन (पीजीडीएम-एबीएम) कार्यक्रम को पुनः प्रारंभ करने की पहल की गई है । पीजीडीएम-एबीएम कार्यक्रम के प्रथम बैच आरंभ करने की प्रक्रिया जैसे विज्ञापन, दाखिला, आदि दिसंबर, 2025 में आरंभ हो गई है ।
  2. हाल ही में आयोजित एक बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि एनसीसीटी के सहयोग से फार्मास्‍यूटिकल्‍स एंड मेडिकल ब्‍यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई); स्‍टोर कोड वाले पैक्‍स के माध्‍यम से 300 नए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) को प्रचालनरत करने के लिए प्रशिक्षण परियोजना का कार्य करेगा । एनसीसीटी के स्‍तर पर इस विषय पर आगे की कार्रवाई आरंभ की गई है ।

.   ‘सुगम व्‍यवसाय के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग

  1. केंद्रीय पंजीयक के कार्यालय का कंप्‍यूटरीकरण : बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए डिजिटल परितंत्र के निर्माण हेतु केंद्रीय पंजीयक के कार्यालय को कंप्‍यूटरीकृत किया गया है जो समयबद्ध रीति से आवेदनों और सेवा अनुरोधों की प्रोसेसिंग में सहायक है।
  2. राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यलयों के कंप्‍यूटरीकरण की योजना: केंद्रीय सरकार ने दिनांक 06 अक्टूबर 2023 को वर्ष 2023-24 से तीन वर्षों के लिए 94.59 करोड़ के बजटीय परिव्‍यय से राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक के कार्यालयों के कंप्‍यूटरीकरण की एक केंद्रीय प्रायोजित परियोजना अनुमोदित की है । यह मंत्रालय की "आईटी इंटरवेंशंस के माध्यम से सहकारी समितियों के सशक्तीकरण" की अंब्रेला योजना का हिस्सा है । इस परियोजना का लक्ष्‍य सहकारी समितियों के लिए सुगम व्‍यवसाय में वृद्धि करना और सभी राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों तथा आरसीएस कार्यालयों के बीच पारदर्शी, कागज़रहित और डिजिटल परितंत्र का सृजन करना है । परियोजना के अधीन राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को हार्डवेयर की प्रापण, सॉफ्टवेयर के विकास, रखरखाव एवं उन्नयन, आदि के लिए सहायता अनुदान प्रदान की जा रही है । इस योजना के अधीन विकसित किया जाने वाला सॉफ्टवेयर संबंधित राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के सहकारिता अधिनियमों के अनुरूप होगा । वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 (20 जनवरी 2026 तक) के दौरान कुल 35 राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं तथा राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्से के रूप ₹26.82 करोड़ की राशि जारी की गई है ।
  3. कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) का कंप्‍यूटरीकरण: दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा 13 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में फैले कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,867 इकाइयों के कंप्‍यूटरीकरण की परियोजना को अनुमोदित किया गया है । नाबार्ड इस परियोजना की कार्यान्‍वयन एजेंसी है । अब तक 10 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों से प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं जिन्‍हें स्‍वीकृत किया गया है । इसके अलावा, हार्डवेयर के प्रापण, डिजिटलीकरण और सपोर्ट सिस्‍टम स्‍थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24, वित्तीय वर्ष 2024-25 और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्‍से के रूप में 10.11 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं ।

.   राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा उठाए गए कदम

  1. ऋण संवितरण में वृद्धि: एनसीडीसी द्वारा वित्तीय सहायता का संवितरण वित्तीय वर्ष 2020-21 में ₹24,733.20 करोड़ से लगभग चार गुना बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹95,182.84 करोड़ हो गया है। एनसीडीसी ने इन चार वर्षों के दौरान संवितरण में 40% से अधिक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) हासिल की है । वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एनसीडीसी ने 1,40,082 करोड़ रुपये स्‍वीकृत किए और दिनांक 15.01.2026 की स्थिति के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपये का संवितरण किया है ।
  2. फ्लोटिंग ब्याज दर की शुरुआत: एनसीडीसी ने वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फ्लोटिंग ब्याज दर की शुरुआत की है । इससे सावधि ऋण की ब्याज दर में लगभग 2% की कमी आई है। फ्लोटिंग ब्याज दर का मतलब है कि यह ब्याज दर बाजार के हालात और अन्य वित्तीय कारकों के आधार पर बदलती रहती है, जिससे उधार लेने वालों को कम ब्याज दर का लाभ मिलता है
  3. डिफरेंशियल दर अपनाना: एनसीडीसी ने डिफरेंशियल दर प्रणाली को अपनाया है जिसके तहत विभिन्न ऋण उधारकर्ताओं के लिए अलग-अलग ब्याज दर प्रदान की जाती है । यह प्रणाली उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और क्षमता को ध्यान में रखते हुए ऋण दर को अनुकूलित करती है जिससे उधारकर्ताओं को अपनी स्थिति के अनुसार बेहतर दरों पर वित्तीय सहायता प्राप्त होती है
  4. सूक्ष्‍म और लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्‍ट (सीजीटीएमएसई), एफपीओ के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसएफपीओ) एवं पशुपालन और डेयरी के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्‍ट (सीजीएफटी-एएचडी) के तहत पंजीकरण: इस कदम से सहकारी समितियों को एनसीडीसी से संपार्श्विक मुक्त (कोलेटरल फ्री) ऋण प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  5. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और एनसीडीसी के बीच समझौता ज्ञापन: एनसीडीसी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच वित्तपोषण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित हुआ है । इस समझौता के तहत दोनों संस्थान मिलकर डेयरी क्षेत्र में छोटे उत्पादकों को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे जिससे किसानों की आय में वृद्धि और डेयरी समितियों का सशक्‍तीकरण होगा ।
  6. एनसीडीसी द्वारा अन्य ऋणदाताओं की बड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन: एनसीडीसी ने अन्य ऋणदाताओं, जिनके पास अपेक्षित विशेषज्ञता नहीं है, की बड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू किया है। जैसे कि, एनसीडीसी ने गुजरात राज्य सहकारी बैंक के लिए तीन डेयरी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया, जिसमें परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा और मूल्यांकन किया गया
  7. भौगोलिक पहुंच का विस्‍तारण: एनसीडीसी ने अपनी भौगोलिक पहुंच का विस्‍तारण करते हुए विजयवाडा (आंध्र प्रदेश) में एक नया क्षेत्रीय कार्यालय और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा नागालैंड में 9 नए उप-कार्यालय खोले
  8. युवा पेशेवरों की नियुक्ति: एनसीडीसी ने विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले युवा पेशेवरों (यंग प्रोफेशनल्स) को नियुक्त किया । इसमें 11 सीए/सीएमए/इंटर, 30 एमबीए सहित अन्य युवा पेशेवर शामिल हैं । यह कदम निगम की कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए उठाया गया है ।
  9. सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (भारत का पहला सहकारिता आधारित मोबिलिटी प्लेटफॉर्म): सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड एक नवोन्‍मेषी, सहकारिता-आधारित मोबिलिटी समाधान है जिसे चालकों को सशक्त बनाने और जनता को किफायती, विश्‍वसनीय परिवहन सुविधा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है । सहकारिता, पारदर्शिता और साझा स्वामित्व के सिद्धांतों पर आधारित सहकार टैक्सी, पारंपरिक राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का एक जन-केंद्रित विकल्प है । इस परियोजना को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी)  व सात अन्य  संगठनों-  इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), भारतीय राष्‍ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड), आणंद मिल्‍क यूनियन लिमिटेड (अमूल), कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको), राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्‍ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) और राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा प्रवर्तित किया गया है । इस परियोजना को भारत टैक्सी” नाम दिया गया है । सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के पूर्ण  होने पर भारत टैक्सी” को फरवरी 2026 में लॉन्च किया जाएगा
  10. एनसीडीसी को सहायता अनुदान: कैबिनेट ने दिनांक 31.07.2025 को आयोजित अपनी बैठक में एनसीडीसी को ₹2000 करोड़ का अनुदान अनुमोदित किया है । सरकार से 4 वर्षों में प्राप्त ₹2000 करोड़ के आधार पर एनसीडीसी, बाजार से ₹20,000 करोड़ जुटाने में सक्षम होगा । इस निधि का उपयोग एनसीडीसी द्वारा डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, चीनी, वस्‍त्र, खाद्य प्रसंस्‍करण, भंडारण और शीत श्रृंखला, श्रमिक सहकारी समितियों, महिला सहकारी समितियों, आदि जैसे सहकारी क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक और कार्यशील पूंजी ऋण देने के लिए किया जाएगा इस योजना के अधीन एनसीडीसी प्रतिस्‍पर्धी दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है । दिनांक 16.01.2026 तक मंत्रालय ने इस योजना के अधीन एनसीडीसी को 375 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं । एनसीडीसी ने उक्‍त योजना के अधीन 5700 करोड़ रुपये से भी अधिक का संवितरण किया है ।
  11. सहकारी प्रशिक्षु (कोआपरेटिव इंटर्न):  ग्रामीण सहकारी बैंकों (राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों) में 385 प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की जा रही है ।  इस योजना का लक्ष्‍य सहकारी संगठनों की समग्र क्षमता का विकास करना तथा जमीनी स्तर पर डिजिटल और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देना है ।  चयनित सहकारी प्रशिक्षु को मासिक ₹25,000 पारिश्रमिक दिया जा रहा है जिसकी प्रतिपूर्ति सहकारी शिक्षा कोष (सीईएफ) से होती है । एनसीडीसी इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी कर रहा है। दिनांक 31.12.2025 की स्थिति के अनुसार 232 प्रशिक्षु ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है ।

.   राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) का निर्माण

  1. प्रामाणिक और अद्यतित डेटा संग्रहण हेतु नया राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस: देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित कार्यक्रमों/ योजनाओं हेतु नीति निर्माण और कार्यान्‍वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए राज्‍य सरकारों के सहयोग से देश में सहकारी समितियों का एक डेटाबेस विकसित किया गया है।  इस डेटाबेस में अब तक 30 विभिन्न क्षेत्रकों की लगभग 8.4 लाख सहकारी समितियों के डेटा शामिल हैं, जिनसे लगभग 32 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं
  2. सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क: सरकार ने सहकारी समितियों की राज्य-वार और क्षेत्र-वार मूल्यांकन और रैंकिंग करने के लिए दिनांक 24 जनवरी 2025 को सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया । रैंकिंग फ्रेमवर्क राज्य के आरसीएस को प्रमुख मापदंडों, जैसे ऑडिट अनुपालन, प्रचालन कार्यकलापों, वित्तीय प्रदर्शन, अवसंरचना और बुनियादी पहचान सूचना के आधार पर सहकारी समितियों के प्रदर्शन का आकलन करने में सक्षम बनाता है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल के माध्‍यम से राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों द्वारा प्रारंभ में 12 प्रमुख क्षेत्रों, अर्थात् पैक्स, डेयरी, मत्स्य पालन, शहरी सहकारी बैंक, आवासन, क्रेडिट और थ्रिफ्ट, खादी एवं ग्राम उद्योग, कृषि प्रसंस्‍करण/औद्योगिक, हस्‍तशिल्‍प, हथकरघा, वस्‍त्र और बुनकर, बहुद्देशीय और चीनी  की सहकारी समितियों की राज्‍य, जिला और ब्‍लॉक स्‍तर पर रैंकिंग जेनरेट कर सकते हैं । इस रैंकिंग प्रणाली का लक्ष्‍य सहकारी समितियों के बीच पारदर्शिता, विश्‍वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्‍साहित कर अंततः उनके विकास को बढ़ावा देना है ।
  3. राज्‍य के आरसीएस पोर्टल को एपीआई के माध्यम से एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण में राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को सुविधा प्रदान करना: सहकारिता मंत्रालय ने राज्य की सहकारी समितियों के संपूर्ण डेटा को एनसीडी पोर्टल से संबंधित आरसीएस पोर्टल पर प्राप्‍त करने हेतु एक मानक एपीआई का विकास किया है और इस मानक एपीआई विनिर्देश दस्‍तावेज तथा डाटाबेस स्‍कीमा को राज्‍यों के साथ दिनांक 27.05.2025 को साझा किया है । तदुपरांत, मंत्रालय ने आरसीएस पोर्टलों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट ड्रिवन डेटा पुशिंग के लिए पुश  APIs (एंड प्‍वॉइंट APIs) पर दिनांक 22.09.2025 को एक दस्‍तावेज साझा किया है जिससे रियल टाइम अद्यतन और नया पंजीकरण डाटा सुनिश्चित हो सके । इस प्रक्रिया को और भी स्‍पष्‍ट करने के लिए दिनांक 14.11.2025 को सभी राज्‍यों/संघ राज्यक्षेत्रों को एक परामर्शी सहित समग्र चेक-लिस्‍ट जारी की गई । एकीकरण योजना के अनुसार, राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने स्‍तर पर रिवर्स/पुल एपीआई का विकास सुनिश्चित करें और एनसीडी पोर्टल के साथ सफल एकीकरण के लिए चेकलिस्‍ट के अनुसार आरसीएस कंप्‍यूटरीकरण को पूरा करें । दिनांक 20.01.2026 की स्थिति के अनुसार राजस्‍थान, छत्तीसगढ़, बिहार और मिजोरम ने एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण पूर्ण कर लिया है । इस दो-तरफा एकीकरण से विभिन्‍न प्‍लेटफॉर्म्‍स पर सहकारी डेटा का सिंक्रोनाइजेशन सुनिश्चित होगा ।

. नीति और आउटरीच

  1. राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी): सहकारिता मंत्रालय की सहकार से समृद्धिके अधिदेश को पूरा करने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति तैयार करने की परिकल्‍पना की गई है । यह सहकारी क्षेत्र के व्‍यवस्थित और सर्वांगीण विकास का रोडमैप प्रदान करता है । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्‍ट्रीय सहकारिता नीति का अनावरण किया गया । इसमें 6 रणनीतिक स्‍तंभ, 16 उद्देश्‍य और 83 सिफारिशें हैं । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्‍यक्षता में सहकारिता नीति पर राष्‍ट्रीय संचालन समिति’ का गठन किया गया है । इसके अलावा सचिव, सहकारिता मंत्रालय की अध्‍यक्षता में राष्‍ट्र-स्‍तरीय नीति कार्यान्‍वयन और निगरानी समिति’ का गठन किया गया है ।
  2. भारत में अंतर्राष्‍ट्रीय सहकारिता वर्ष– 2025: आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और संधारणीय विकास में सहकारी समितियों की भूमिका पर प्रकाश डालने के उद्देश्‍य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को "अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (आईवाईसी 2025)" घोषित किया गया है । सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के सभी हितधारकों के सहयोग से एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है जिसमें पारदर्शिता, नीति सुधारों और पैक्‍स के माध्यम से ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण पर बल दिया गया है । यह कार्य योजना दिनांक 24 जनवरी 2025 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्च की गई थी । समन्वित योजना और कार्यान्वयन के लिए मंत्रालय ने आईवाईसी -राष्ट्रीय सहकारी समिति, आईवाईसी -राष्ट्रीय कार्य-निष्‍पादन समिति, और आईवाईसी -राज्य शीर्ष समितियों का गठन किया है ।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने, प्रचालनात्‍मक दक्षता में सुधार, सहकारिता में सहकार को बढ़ावा, सहकारी समितियों में युवाओं और महिलाओं को जोड़ने और आदर्श उपविधियों के माध्‍यम से सहकारी शासन के सशक्‍तीकरण के उद्देश्‍य से वर्ष भर कार्यक्रमों की व्‍यापक श्रृंखला का आयोजन किया गया । इन कार्यक्रमों में विभिन्‍न कार्यशालाएं, वृक्षारोपण अभियान, क्षमता निर्माण सत्रों, प्रदर्शनियां, खेलकूद कार्यक्रमों, वॉकाथॉन और जागरूकता अभियानों के आयोजन शामिल हैं । इन कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्‍न स्‍तरों पर किया गया जिसमें सहकारी समितियों के व्‍यक्तिगत स्‍तर, जिला स्‍तर, राज्‍य स्‍तर और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इनका आयोजन शामिल है ।    

       आईवाईसी -2025 के दौरान व्यापक जागरूकता और प्रचार-प्रसार अभियान भी चलाए गए और भारतीय रेलवे की -टिकटों, सहकारी उत्पादों के पैकेजिंग, आधिकारिक वेबसाइटों और सरकारी पत्राचार में आईवाईसी के लोगो के माध्यम से राष्ट्रव्‍यापी दृश्‍यता सुनिश्चित की गई । राष्‍ट्र-स्‍तरीय प्रमुख पहलों में दिनांक 30 जून, 2025 को राज्य सहकारिता मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन और दिनांक 6 जुलाई, 2025 को सहकारिता मंत्रालय के चौथे स्थापना दिवस के अवसर पर आणंद, गुजरात में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन शामिल है

  1. मंत्रालय की मीडिया आउटरीच का सशक्‍तीकरण: विगत चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के बारे में जन सहभागिता और जागरूकता वर्धन के लिए अपनी डिजिटल और मीडिया पहुंच को उल्‍लेखनीय रूप से सशक्‍त किया है । पारंपरिक और डिजिटल, दोनों ही माध्यमों का लाभ उठाते हुए मंत्रालय ने पीआईबी के सहयोग से प्रेस विज्ञप्तियां और प्रमुख समाचार पत्रों में लेखों का लगातार प्रकाशन किया है और साथ ही सोशल मीडिया पर भी अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है । माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित सभी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाता है । प्रेस विज्ञप्तियां, समाचार अपडेट और उपलब्धियां नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर, व्यापक समावेशन हेतु बहुभाषी पहुंच के साथ साझा की जाती हैं

       ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, लिंक्डइन और व्हाट्सएप सहित सभी प्लेटफॉर्म पर मंत्रालय के आज कुल फॉलोअर्स/सब्सक्राइबर 6 लाख से अधिक हैं और यूट्यूब पर कुल वीडियो व्यूअरशिप 1.4 करोड़ से अधिक है । गौरतलब है कि यूट्यूब और वेबसाइट एंगेजमेंट एवं ट्रैफ़िक पर सहकारिता मंत्रालय सभी मंत्रालयों में शीर्ष 10 स्‍थान पर आता है जो इसके बढ़ते डिजिटल प्रभाव को दर्शाता है ।

इसके अतिरिक्‍त, मंत्रालय अपनी पहलों के पोस्‍ट्स और सामग्रियों को राज्‍य सरकारों, सहकारी समितियों के पंजीयकों (आरसीएस) और राष्‍ट्रीय सहकारी परिसंघों के सोशल मीडिया हैंडलों के माध्‍यम से प्रसारित करने के लिए उन्‍हें सक्रियतापूर्वक प्रोत्‍साहित कर रहा है जिससे सहकारी परितंत्र में व्‍यापक एवं अधिक समन्वित संप्रेषण आउटरीच सुनिश्चित हो सके । मंत्रालय और इसके हितधारकों का आईवाईसी कार्यकलापों और मीडिया आउटरीच कार्यकलापों के डेटा संग्रह के लिए दिनांक 24.12.2025 को एक समर्पित पोर्टल भी लॉन्‍च किया गया है ।

  1. मासिक प्रकाशन के माध्‍यम से सहकारी जागरुकता को प्रोत्साहन: सहकारी क्षेत्र में आउटरीच, जागरूकता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता मंत्रालय अप्रैल 2023 से दो मासिक पत्रिकाएं—सहकार उदय (इफको के माध्यम से) और सहकार जागरण (एनसीयूआई के माध्यम से) प्रकाशित कर रहा है । हिंदी, अंग्रेजी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित ये पत्रिकाएं मंत्रालय की प्रमुख नीतियों, योजनाओं, पहलों और सफलता की कहानियों और व्यापक सहकारी आंदोलन की सूचनाएं प्रसारित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करती हैं । सहकार उदय की मासिक लगभग 3 लाख प्रतियां प्रकाशित हो रही हैं जबकि, सहकार जागरण की मासिक परिचालन लगभग 2.75 लाख प्रतियां हैं । ये प्रकाशन समयबद्ध, प्रासंगिक और प्रेरणादायक सामग्री प्रदान करके जमीनी स्तर पर सहकारी सदस्यों को सूचित और सशक्त बनाने में मदद करते हैं ।

.    बहुराज्‍य सहकारी समितियां

  1. बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023: बहुराज्‍य सहकारी समितियों में शासन सशक्‍त करने, पारदर्शिता व उत्तरदायित्‍व बढ़ाने, निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार करने और 97वें संविधान संशोधन के उपबंधों को अंतर्विष्‍ट करने के लिए बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन किया गया है ।
  2. सहकारी ऑम्‍बड्समैन: बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन के पश्‍चात् सहकारी ऑम्‍बड्समैन को उक्‍त अधिनियम की धारा 85क द्वारा दिनांक 05.03.2024 के राजपत्र अधिसूचना के माध्‍यम से नियुक्‍त किया गया है । ऑम्‍बड्समैन कार्यालय पूर्णरूपेण कार्यशील है और बहुराज्‍य सहकारी समितियों के सदस्‍यों की जमाराशियों, कार्यरत बहुराज्‍य सहकारी समितियों के न्‍यायोचित लाभ या संबंधित सदस्‍यों के व्‍यक्तिगत अधिकारों को प्रभावित करने वाले किन्‍हीं अन्‍य मुद्दों से संबंधित शिकायतों या अपीलों पर कार्य करता है ।
  3. सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (सीईए): बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन के पश्‍चात् सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण को शासन सशक्‍तीकरण और उत्तरदायित्‍व के लिए स्‍थापित किया गया है जिसे सभी बहुराज्‍य सहकारी समितियों में स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष निर्वाचन कराने हेतु अधिदेश प्राप्‍त है I दिनांक 31.12.2025 तक 222 से अधिक बहुराज्य सहकारी समितियों में सफलतापूर्वक निर्वाचन करवाए गए हैं  I
  4. जेम पोर्टल पर सहकारी समितियों को 'क्रेता' के रूप में शामिल करना: सरकार ने सहकारी समितियों को जेम पर क्रेताके रूप में पंजीकृत होने की अनुमति प्रदान कर दी है जिससे वे किफायती खरीद एवं अधिक पारदर्शिता के साथ लगभग 102.5 लाख वेंडरों से माल और सेवाओं का प्रापण कर सकेंगे । जेम पोर्टल पर क्रेताके रूप में अब तक 727 सहकारी समितियां ऑनबोर्ड हो चुकी हैं ।
  5. सहारा समूह की समितियों के निवेशकों को रिफंड: सहारा समूह की सहकारी समितियों के वैध जमाकर्ताओं को पारदर्शी रीति से भुगतान करने हेतु एक पोर्टल का शुभारंभ किया गया है । उनकी जमाराशि और दावों के साक्ष्‍य की प्रस्‍तुति एवं उचित पहचान के पश्‍चात् संवितरण का कार्य आरंभ हो चुका है । अब तक 39,28,648 आवेदकों को 8340.75 करोड़ रुपये का संवितरण किया गया है ।

.   अन्‍य पहलें

  1. स्विगी इंस्टामार्ट के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहकारी उत्पादों की बाजार पहुंच को बढ़ाना: सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने और ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्‍पना को साकार करने के लिए सहकारी उत्पादों के डिजिटल और बाजार एकीकरण को बढ़ाने, नीतिगत चर्चाओं को सुविधाजनक बनाने और उपभोक्ता जुड़ाव को गति देने हेतु सहयोग के लिए दिनांक 25.04.2025 को स्विगी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है । इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय और स्विगी के बीच, विशेष रूप से डेयरी और ऑर्गेनिक क्षेत्रों में सहकारी उत्पादों के डिजिटल एकीकरण और बाजार पहुंच को बढ़ाने और डिजिटल मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स एवं उपभोक्ता तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहकारी समितियों की क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना है । समझौता ज्ञापन के कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित शामिल हैं:
  • सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से स्विगी, भारत में सहकारी आंदोलन/संगठनों/उत्पादों के लिए जागरूकता अभियान चलाना ।
  • सहकारी समितियों के लिए स्विगी द्वारा अपनी इंस्‍टामार्ट प्‍लेटमॉर्म के माध्‍यम से प्राथमिकता पर एक्‍सेस प्रदान करने हेतु सहकारी डेयरी उत्पादों और सहायता की ऑनबोर्डिंग को प्रोत्‍साहन प्रदान करना ।
  • सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से स्विगी द्वारा सहकारी ब्रांडों को मार्केटिंग, प्रचार-प्रसार, उपभोक्ता प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में समर्थन प्रदान करना ।
  • स्विगी अपने प्लेटफॉर्म पर एक अलग सहकारी श्रेणी बनाएगा, जिसमें सहकारी संगठनों द्वारा प्रोत्साहित ब्रांड के उत्पादों, जैसे कि ऑर्गेनिक, डेयरी, श्रीअन्‍न (मिलेट्स), हस्तशिल्प, आदि पर फोकस किया जाएगा ।
  • यह पहल डिजिटल पहुंच बढ़ाएगी, सहकारी समितियों के लिए संधारणीय विकास के अवसर सृजित करेगी, डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं का प्रभाव अधिकतम करेगी और आपसी सहमत परियोजनाओं के माध्यम से सहकारी समितियों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगी ।
  1. सहकारिता मंत्रालय जन शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निवारण के लिए प्रतिबद्ध है । वर्ष 2024-2025 के दौरान सहकारिता मंत्रालय ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पोर्टल के माध्यम से प्राप्त 33,821 से अधिक शिकायतों का निपटान किया है, जिसकी न्‍यूनतम औसत निपटान अवधि केवल 2 दिन रही है ।
  2. बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 के अधिनियमन के पश्‍चात् सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी शिक्षा निधि (सीईएफ) खाते को भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) से सहकारिता मंत्रालय सफलतापूर्वक हस्‍तांतरित किया है और इसके प्रबंधन और उपयोग के लिए एक समर्पित संरचना स्‍थापित की है ।
  3. डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता: श्‍वेत क्रांति 2.0 में जोड़ा गया एक महत्वपूर्ण उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता को बढ़ावा देना है । इस उद्देश्य को प्राप्त करने की रणनीति में जलवायु-दक्ष तरीकों, संसाधनों का कुशल उपयोग और कम उत्सर्जन एवं आय सृजन करने वाले परितंत्र के निर्माण के लिए नवीकरणीय समाधानों द्वारा डेयरी मूल्य श्रृंखला में संधारणीयता और चक्रीयता को एकीकृत करना होगा । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता पर दिनांक 03.03.2025 को एक कार्यशाला का उद्घाटन किया गया था । डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता की कार्रवाई "कचरे से कंचन (Gold out of Garbage)" की परिकल्पना द्वारा मार्गदर्शित है ।
  4. डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता के अंतर्गत दिनांक 31.12.2025 को सहकारी निविष्टियां और सेवा प्रदाय बहुराज्‍य लिमिटेड नामक एक बहुराज्‍य सहकारी समिति को पंजीकृत किया गया है । इस समिति का लक्ष्‍य किफायती, गुणवत्तापूर्ण निविष्टियों और अनिवार्य सहयोग सेवाओं की समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करके डेयरी पशुओं की उत्‍पादकता में वृद्धि और डेयरी किसानों की लाभप्रदता में सुधार करना है ।
  5. डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता के अंतर्गत दिनांक 31.12.2025 को गोमाय सहकारी समिति बहुराज्‍य लिमिटेड नामक एक बहुराज्‍य सहकारी समिति को पंजीकृत किया गया है । इस समिति का लक्ष्‍य नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍यों और जैविक उर्वरक के संधारणीय उपयोग का समर्थन करते हुए ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के अवसर उत्‍पन्‍न करने हेतु खाद प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्‍साहित करना है ।
  6. डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता के अंतर्गत मृत मवेशियों और भैंसों की खाल, हड्डियों और सींगों के प्रबंधन के लिए एक नई बहुराज्‍य सहकारी समिति स्‍थापित करने का विचार है ।
  7. सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एसपीसीडीएफ) की स्थापना: माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2025 को ₹200 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी के साथ सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एसपीसीडीएफ) नामक एक नई बहुराज्य सहकारी समिति का शुभारंभ किया गया । एसपीसीडीएफ से 20 राज्यों (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, तेलंगाना) के 20,000 से अधिक गांवों के 20 लाख से अधिक डेयरी किसान एक संगठित सहकारी संरचना के प्रत्यक्ष सदस्य बन सकेंगे । एसपीसीडीएफ के माध्यम से किसानों को आश्‍वस्‍त दुग्ध प्रापण, बेहतर पशु चिकित्सा देखभाल, मवेशियों के पोषण में वृद्धि और आधुनिक डेयरी प्रथाओं का लाभ प्राप्त होगा । मजबूत शीत श्रृंखला अवसंरचना, शीतालन केंद्रों और कुशल प्रसंस्करण सुविधाओं में निवेश से गुणवत्ता मानक सशक्‍त होंगे जो सुरक्षित, स्वच्छ डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग में सहायक होगा ।
  8. दुग्‍ध उत्‍पादक संगठनों (एमपीओ) के लिए सहकारी दुग्‍ध उत्‍पादक संगठन बहुराज्‍य लिमिटेड: दिनांक 31.12.2025 को सहकारी दुग्‍ध उत्‍पादक संगठन बहुराज्‍य लिमिटेड के नाम से एक नई बहुराज्‍य सहकारी समिति का पंजीकरण किया गया है । इस समिति का लक्ष्‍य सहकारी समितियों के अधीन 9 राज्‍यों (आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, पंजाब, राजस्‍थान, उत्तर प्रदेश और  पश्चिम बंगाल) के मौजूदा दुग्‍ध संग्रहण बिंदुओं को बहुद्देशीय ग्राम सहकारी समितियों (लगभग 20,000 वीसीएस) के रूप में एकीकृत करना है  ।
  9. केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए पीईएसबी चयन प्रक्रिया में सहकारी परिसंघों की भागीदारी सक्षम बनाना: मंत्रालय की पहल पर राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तरीय परिसंघों के आवेदकों को, लागू विहित पात्रता शर्तों को पूरा करने के अध्‍यधीन, पीईएसबी द्वारा विज्ञापित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के बोर्ड-स्‍तरीय पदों पर प्राइवेट श्रेणी के अधीन आवेदन करने की अब अनुमति है जो उन्‍हें अन्‍य व्‍यावसायिक इकाइयों के आवेदकों के समरूप बराबरी का दर्जा देता है ।
  10. सहकारी समितियों के संवर्धन के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सहकार: कैबिनेट के अनुमोदन से सहकारिता मंत्रालय, भारत गणराज्‍य की सरकार और सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम विकास (MoSMED), जांबिया गणराज्‍य की सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित हुआ है ।  सहकारिता मंत्रालय, भारत गणराज्‍य की सरकार और मंगोलिया सरकार के बीच सहकारी सिद्धांतों के संवर्धन और संबं‍धित देशों की सहकारी समितियों में सहयोग हे‍तु एक अन्‍य समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित हुआ है । इन व्‍यवस्‍थाओं का आशय मैत्रीपूर्ण और परस्‍पर लाभकारी संबंधों को बढ़ावा देना और सहकारी  समितियों के बीच व्‍यापार गठबंधन विकसित करने के लिए आवश्‍यक सुविधाएं और प्रणालियां प्रदान करना है ।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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