गृह मंत्रालय
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नशीली दवाओं का खतरा

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 3:57PM by PIB Delhi

भारत को 2029 तक ड्रग्स-मुक्त बनाने के लिए, सरकार ने सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से 2026-2029 के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार करने का अनुरोध किया है, जिसमें इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक समय-सीमा वाली समीक्षा प्रणाली को शामिल किया जाए और ड्रग नेटवर्क को स्रोत से लेकर वितरण तक पूरी तरह खत्म करने और ड्रग्स के दुरुपयोग से निपटने के लिए पूरे सरकारी दृष्टिकोण का पालन किया जाए।

विभिन्न ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 (नवम्‍बर तक) के दौरान जब्त की गई ड्रग्स की मात्रा और उनका मूल्य इस प्रकार है:

                   वर्ष

मात्रा (किलोग्राम में)

मूल्‍य (करोड़ में)

2021

16,09,612

25,241

2022

12,53,662

19,922

2023

13,89,725

17,179

2024

13,30,600

27,525

2025 (नवम्‍बर तक)

11,85,994

16,927

 

ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों में सज़ा की दर बढ़ाने और डिजिटल पेमेंट को ट्रैक करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: -

  • ई-साक्ष्य पोर्टल को आपराधिक मामलों में सबूत रिकॉर्ड करने और प्रबंध करने में पुलिस की मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पोर्टल न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बनाए गए नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप है। यह पुलिस अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन से सीधे अपराध स्थल को रिकॉर्ड करने की अनुमति देता है, जिसमें तलाशी और ज़ब्ती की गतिविधियाँ शामिल हैं। ई-साक्ष्य राज्यों में जाँच में एकरूपता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे सज़ा की दर बढ़ने की उम्मीद है।
  • क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) का उद्देश्य जाँच, डेटा एनालिटिक्स, अनुसंधान, नीति निर्माण और शिकायतों की ट्रैकिंग, पूर्ववर्ती सत्यापन के लिए अनुरोध आदि के उद्देश्य से सभी पुलिस स्टेशनों को एक सामान्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के तहत आपस में जोड़ना है।
  • भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (एनएटीजीआरआईडी) पेश किया गया है, जो वित्तीय रिकॉर्ड (टैक्स, बैंक खाते, एफआईयू से संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट) तक अधिकृत पहुँच की अनुमति देता है, जिससे जाँच अधिकारियों को पैसे के प्रवाह का पता लगाने में मदद मिलती है।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्‍द्र (I4सी) द्वारा डिज़ाइन और संचालित सहयोग पोर्टल, बिनान्‍स जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) सेवा प्रदाताओं के प्लेटफॉर्म से संबंधित प्रवर्तन कार्यों के समन्वय और निष्पादन के लिए एक व्यापक मंच के रूप में विकसित किया गया है। यह पोर्टल सेवा प्रदाताओं द्वारा सुरक्षित डेटा प्रकटीकरण की सुविधा प्रदान करता है, संपत्ति फ्रीज और ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है, जब्त की गई संपत्तियों को नामित पीड़ित या आधिकारिक वॉलेट में स्थानांतरित करने में सहायता करता है, और अदालत या सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के संचार और पावती के लिए एक सुरक्षित चैनल प्रदान करता है।
  • एफआईयू का फाइनेक्‍स पोर्टल: संदिग्ध लेनदेन रिकॉर्ड (एसटीआर) वित्तीय संस्थानों द्वारा दायर की गई रिपोर्ट हैं जो उन लेनदेन को चिह्नित करने के लिए होती हैं जो नशीली दवाओं की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण, या अन्य अवैध गतिविधियों से संबंधित हो सकते हैं।
  • नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गांधीनगर ने एनसीबी के साथ एक समझौत ज्ञापन किया है ताकि एडवांस्ड फोरेंसिक और साइबर-फोरेंसिक सपोर्ट, न्यू साइकोएक्टिव सब्सटेंस (एनपीएस) पर रिसर्च, ड्रग प्रोफाइलिंग, एआई- और ड्रोन-बेस्ड फोरेंसिक, साथ ही स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग, कैपेसिटी बिल्डिंग और इंटर्नशिप प्रोग्राम के ज़रिए भारत की नारकोटिक्स, जिसमें डार्कनेट-इनेबल्ड ट्रैफिकिंग भी शामिल है, के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत किया जा सके।
  • एनसीबी और राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आरआरयू) ने नारकोटिक्स कंट्रोल और साइबर-इनेबल्ड ड्रग अपराधों से संबंधित रिसर्च, ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और कैपेसिटी बिल्डिंग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन किया है।

यह बात गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कही।

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पीके/केसी/केपी/डीए


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