सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
वंचित समुदायों की सामाजिक-आर्थिक लामबंदी
प्रविष्टि तिथि:
04 FEB 2026 4:43PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने देश में वंचित समुदायों के लिए शिक्षा, रोजगार के अवसरों और स्थायी आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख शिक्षा और कौशल विकास योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन किया है।
नीति आयोग के विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) का मूल्यांकन किया है, जिसमें योजना के तीनों घटकों, आदर्श ग्राम, अनुदान सहायता और छात्रावासों को शामिल किया गया है। मूल्यांकन में कई राज्यों में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और परिणामों का आकलन किया गया और पाया गया कि पीएम-एजेएवाई राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इस योजना ने अनुसूचित जाति समुदायों के बुनियादी ढांचे, शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार लाने में योगदान दिया है। मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, पीएम-एजेएवाई के छात्रावास घटक तक पहुंच से विशेष रूप से लड़कियों के लिए, लंबी दूरी की यात्रा और असुरक्षित यात्रा जैसी चुनौतियों का समाधान होने से उच्च माध्यमिक और कॉलेज शिक्षा दर में वृद्धि हुई है।
दिसंबर 2025 तक, पीएम-एजेएवाई योजना के तहत 74,749 लाभार्थियों के लिए कुल 911 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। स्वीकृत, निर्मित छात्रावासों और लाभार्थियों का राज्यवार विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है ।
लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठा) के प्रभाव का आकलन राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) द्वारा किए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के माध्यम से किया गया है । मूल्यांकन से पता चला है कि छात्रों की कक्षा में उपस्थिति में सुधार हुआ है, स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई है, उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ा है, शैक्षिक आकांक्षाएं बढ़ी हैं और अनुसूचित जाति के छात्रों में जाति और लिंग के आधार पर अंतर कम हुआ है। तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में देश के छह भौगोलिक क्षेत्रों के 41 जिलों को शामिल किया गया था।
दिसंबर 2025 तक के मूल्यांकन के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान देशभर में 15,816 लाभार्थी थे , जिनमें से 4,135 छात्र (26 प्रतिशत) श्रेष्ठा कार्यक्रम के मोड-I के अंतर्गत और 11,681 छात्र (74 प्रतिशत) मोड-II के अंतर्गत शामिल थे । यद्यपि मूल्यांकन में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार परिणाम संकेतक नहीं दिए गए हैं, फिर भी मोड-I के अंतर्गत निजी आवासीय विद्यालयों की संख्या और मोड-II के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों/संगठनों द्वारा संचालित विद्यालय एवं छात्रावास परियोजनाओं की संख्या, लाभार्थियों के विवरण सहित, क्रमशः अनुलग्नक-II और अनुलग्नक-III में दी गई है।
प्रधानमंत्री दक्षता और कौशल संपन्न हितग्राही योजना (पीएम-दक्ष) के प्रभाव का भी आकलन किया गया है। मूल्यांकन के निष्कर्षों से पता चला है कि यह योजना अत्यंत प्रासंगिक और प्रभावी है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने प्रशिक्षण को अपने करियर लक्ष्यों, स्थानीय श्रम बाजार की आवश्यकताओं और निर्धारित शिक्षण परिणामों की प्राप्ति के अनुरूप पाया है। मूल्यांकन में विशेष रूप से महिलाओं और वंचित समूहों के बीच आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक मान्यता में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण गैर-भौतिक लाभों पर प्रकाश डाला गया है। सतत विकास के परिणाम भी सकारात्मक हैं, क्योंकि अधिकांश लाभार्थी अर्जित कौशल का उपयोग जारी रखते हैं, दीर्घकालिक आय वृद्धि की आशा करते हैं, विकास में पुनर्निवेश करते हैं और स्वतंत्र रूप से सुधारों को बनाए रखने की क्षमता प्रदर्शित करते हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2223671)
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