जनजातीय कार्य मंत्रालय
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व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावे

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 2:18PM by PIB Delhi

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा को सूचित किया कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 और उसके अंतर्गत बने नियमों के प्रावधानों के अनुसार, राज्य सरकारें अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए उत्तरदायी हैं और ये प्रावधान 20 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में लागू हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) की निगरानी करता है।

राज्यों द्वारा प्रदान दी गई और एमपीआर के अंतर्गत 31.12.2025 तक संकलित नवीनतम जानकारी के अनुसार, कुल 44,33,940 (85.40%) दावों का निपटारा (निर्णय) किया गया है, जिसमें 42,56,845 व्यक्तिगत एवं 1,77,095 सामुदायिक दावे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों के दौरान, यानी 01.01.2023 से 01.01.2026 तक, कुल 4,43,247 दावों का निपटारा किया गया है, जिनमें 4,10,135 व्यक्तिगत और 33,112 सामुदायिक दावे शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान निपटाए गए दावों, दायर किए गए दावों, वितरित किए गए स्वामित्वों और अस्वीकृत किए गए दावों का राज्यवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक कुल 18,90,360 (36.41%) दावे खारिज किए गए हैं, जिनमें 18,36,594 व्यक्तिगत और 53,766 सामुदायिक दावे शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 1,60,715 दावे खारिज किए गए हैं।

ओडिशा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, दावों को अस्वीकार करने के मुख्य कारणों में दावा की गई भूमि पर 13 दिसंबर 2005 से पहले कब्जा नहीं होना, एक ही भूमि पर दो दावे दायर करना, गैर-वन भूमि पर दावे करना, साक्ष्यों का अभाव, ओटीएफडी द्वारा तीन पीढ़ियों के निवास को साबित नहीं कर पाना आदि शामिल हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने दावों पर अपील के संबंध में कोई जानकारी प्रदान नहीं की है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने विभिन्न समीक्षा बैठकों और पत्रों के माध्यम से राज्यों से आग्रह किया है कि वे समयबद्ध तरीके से वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत दावों पर विचार करें और अगर दावों के निपटारे में कोई अड़चन हो तो जिलों के साथ मिलकर उसे सुलझाएं। इसके अलावा, एफआरए के व्यापक कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने दो साल के लिए राज्य और जिला/उपमंडल स्तर पर समर्पित एफआरए प्रकोष्ठों की स्थापना करके जिलों को सहायता प्रदान की है। इसके अलावा, जनवरी 2025 में एक राष्ट्रीय डीसी/डीएम सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 87 जिलों (महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा सहित) के डीसी/डीएम और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। जिलावार एफआरए के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई और प्रतिभागी डीसी/डीएम से सभी लंबित एफआरए दावों का निपटारा करने का अनुरोध किया गया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय एफआरए के कानून संबंधी मामलों की निगरानी एवं प्रशासन के लिए नोडल मंत्रालय है, उसने अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का प्रयोग करते हुए समय-समय पर विभिन्न पहलुओं पर दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन जारी किए हैं, ताकि राज्य स्तर पर वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के प्रावधानों की समान व्याख्या और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय सभी राज्य सरकारों से अनुरोध कर रहा है कि वे एफआरए में शामिल प्रावधानों का पालन करें और सुनिश्चित करें कि सभी योग्य दावा करने वालों को उनके हक वाले अधिकार प्राप्त हों। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने विभिन्न समीक्षा बैठकों और पत्रों के माध्यम से राज्यों से अनुरोध किया है कि वे राज्य स्तरीय निगरानी समिति (एसएलएमसी) की बैठकें, जिसका अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे, कम से कम तीन महीने में एक बार आयोजित करें, ताकि वनाधिकारों के मान्यता, सत्यापन एवं अंतरण की प्रक्रिया की निगरानी की जा सके तथा क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं पर विचार किया जा सके और उन्हें सुलझाया जा सके।

इसके अलावा, एफआरए की धारा 4(5) में निहित प्रावधानों के माध्यम से बेदखली से सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान है और साथ ही पीड़ितों द्वारा एसडीएलसी एवं डीएलसी (धारा 6(2) और 6(4)) को याचिका देने का प्रावधान भी है। राज्य सरकारों को सलाह दी जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा संवैधानिक प्रावधानों और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाए गए विभिन्न कानूनों के अनुसार किया जाए।

अनुलग्नक

लोकसभा के गैर-तारांकित प्रश्न संख्या 949 के भाग (क) और (ख) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक, जिसका उत्तर दिनांक 05.02.2026 को “व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों” के संबंध में दिया जाना है:

पिछले तीन वर्षों (01.01.2023 से 01.01.2026) के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दायर किए गए दावों, वितरित किए गए स्वामित्वों, अस्वीकृत एवं निपटाए गए दावों का राज्यवार विवरण:

(कुछ राज्यों ने इस अवधि के दौरान एफआरए की प्रगति में नकारात्मक रिपोर्ट दी थी, लेकिन उन्होंने स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है और आंकड़ों को ठीक किया है।)

 

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पीके/केसी/एके/डीए

 


(रिलीज़ आईडी: 2224057) आगंतुक पटल : 59
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