संस्कृति मंत्रालय
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
प्रविष्टि तिथि:
05 FEB 2026 3:19PM by PIB Delhi
केंद्र सरकार ने पूरे देश में लोक कला एवं संस्कृति के विभिन्न रूपों की रक्षा, संवर्धन और संरक्षण के लिए सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) स्थापित किए हैं, जिनके मुख्यालय पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में हैं। ये जेडसीसी अपने सदस्य राज्यों में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
ये जेडसीसी लुप्तप्राय कला रूपों, लोककथाओं, मौखिक परंपराओं और प्रथाओं का ऑडियो, वीडियो और लिखित सामग्री के रूप में दस्तावेजीकरण भी करते हैं। दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण की प्रक्रियाएँ निरंतर जारी हैं।
जेडसीसी द्वारा संचालित गुरु-शिष्य परंपरा योजना ऐसी ही एक पहल है, जिसमें पारंपरिक गुरु, युवा शिष्यों को प्रशिक्षित करते हैं ताकि सांस्कृतिक ज्ञान की निरंतरता सुनिश्चित हो सके, जिससे कलाकारों, शोधकर्ताओं और परंपराओं के सामुदायिक वाहकों को सहायता मिलती है।
जेडसीसी द्वारा कई लोक कला रूपों/मौखिक परंपराओं की पहचान की गई है, जैसे कि: लोरी और कायन गायन, दांडी, अंगीगर, प्रधानी, भदम और शैतान नृत्य, बुर्रा कथा, वीरनाट्यम, बुट्टा बोम्मलु, दप्पू, तप्पेटा गोलू, कोलनालु, गरागालु, विलासिनी नाट्यम, पुलिवेशालु, पगती वेशालु, डोल्लू और पूजा कुनिथा, वीरगासे, यक्षगान, कराडी माजलु, लम्बानी कुनिथा, नंदी ध्वजा कुनिथा, कराडी गोम्बे, उम्माथाटा, सुग्गी कुनिथा, सोमन कुनिथा, कनियारकली, कोलकली, कुम्माट्टी काली, थुंबी थुल्लल, मारगम काली, कथकली, ओप्पना, तिरुवथिराकली, थेय्यम, पदयानी, पूथन और थिरा, मुदियेतु, अर्जुन निरथियम, चकयार कुथु, ओट्टन थुल्लल, पुलिकाली, करगट्टम, ओयिलट्टम, परायट्टम (थप्पट्टम), पुलियाट्टम, पुरविअट्टम, कावड़ी अट्टम, देवराट्टम, जुमला मेलम, कनियान कूथु, कालियाट्टम, थुडुम्बट्टम, कोलकलियाट्टम, बोम्मालट्टम, थोलपावैकुथु, थेरुकुथु, चेक्काबजाना, बोनालु, पोथिराजू, चिरुथलबजाना, ओग्गु कथा, चिंदु यक्षगान, कालियाअट्टम, गराडी नृत्य, करगट्टम, निकोबारी नृत्य, रांची के ओरांव, मुंडा और खरिया सामुदायिक नृत्य, लावा नृत्य, कोलकाली, परिचाकली, डफुमुत्तु, ओप्पाना।
इन कला रूपों के संरक्षण के लिए कोई अलग से धनराशि आवंटित नहीं की जाती है। हालाँकि, पिछले पाँच वर्षों के दौरान लोक कला और संस्कृति के विभिन्न रूपों की सुरक्षा, प्रचार और संरक्षण के लिए ज़ेडसीसी को जारी की गई अनुदान सहायता इस प्रकार है:
(रुपये लाख में)
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क्रम संख्या
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वर्ष
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जारी राशि
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1.
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2020-21
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4721.88
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2.
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2021-22
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6838.08
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3.
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2022-23
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6572.07
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4.
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2023-24
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11967.59
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5.
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2024-25
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11121.66
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(जेडसीसी युवाओं को भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करके उन्हें सक्रिय रूप से शामिल कर रहे हैं। इनमें गुरु-शिष्य परंपरा योजना शामिल है, जो युवा शिक्षार्थियों को पारंपरिक कला रूपों में उस्ताद कलाकारों द्वारा संरचित मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे स्वदेशी कलाओं में नामांकन और सतत प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलता है।
इसके अलावा, जेडसीसी द्वारा आयोजित शिल्पग्राम महोत्सव जीवंत सांस्कृतिक गांवों का निर्माण करते हैं, जिनमें शिल्प, लोक कला और प्रदर्शनों का प्रदर्शन किया जाता है, और युवा प्रतिभागियों तथा दर्शकों को पारंपरिक प्रथाओं का गहन अनुभव प्रदान किया जाता है। साथ ही, जेडसीसी देश भर के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि भारत की विविध कला रूपों में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
जेडसीसी नियमित रूप से युवा-केंद्रित उत्सव, कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं भी आयोजित करते हैं जिनमें लोक नृत्य, संगीत, चित्रकला और संबंधित विषयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे अंतःक्रियात्मक घटक शामिल होते हैं। इन सतत प्रयासों के माध्यम से, जेडसीसी नामांकन, कौशल विकास और जागरूकता गतिविधियों में युवा पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी देख रहे हैं, साथ ही साथ युवाओं में सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा दे रहे हैं और कलात्मक प्रतिभा का पोषण कर रहे हैं।)
जेडसीसी लुप्त हो रही कला विधाओं और मौखिक परंपराओं का सक्रिय रूप से दस्तावेजीकरण कर रहे हैं और विरासत सामग्री को डिजिटल प्रारूपों में परिवर्तित कर रहे हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पुराने अभिलेख डिजिटल रूप से सुलभ नहीं हैं। इसके अलावा, दस्तावेजीकरण की गुणवत्ता, व्यापकता और सटीकता में सुधार के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और विषय विशेषज्ञों के साथ सहयोग किया जा रहा है। ये सभी पहलें सतत हैं, जो दर्शाती हैं कि दस्तावेजीकरण, डिजिटल अभिलेखन और पारंपरिक ज्ञान के प्रसारण में पहचानी गई कमियों को केंद्रों द्वारा निरंतर और दीर्घकालिक अभिलेखन और ज्ञान-प्रसारण प्रयासों के माध्यम से धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है।
जेडसीसी राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत सतत प्रशिक्षण, लुप्तप्राय कला विधाओं का दस्तावेजीकरण, पारंपरिक कलाकारों को समर्थन, युवा प्रोत्साहन और नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे दीर्घकालिक उपायों को लागू कर रहे हैं ताकि अपूरणीय सांस्कृतिक क्षति को रोका जा सके।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय अपने क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संगठन) के माध्यम से राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सवों (आरएसएम) का आयोजन करता है, ताकि हमारे अद्भुत देश की परंपरा, संस्कृति, विरासत और समृद्ध विविधता की भावना का जश्न मनाया जा सके। इस महोत्सव का व्यापक उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, प्रचार और प्रसार करना, युवा पीढ़ी को हमारी परंपराओं से जोड़ना और विविधता में एकता के माध्यम से राष्ट्र और विश्व के सामने हमारी सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन करना है। मंत्रालय ने वर्ष 2015 से अपने सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से 14 आरएसएम और 4 क्षेत्रीय स्तर के आरएसएम आयोजित किए हैं। इन आरएसएम/क्षेत्रीय आरएसएम में कुल 12543 कलाकारों ने भाग लिया है। इन कलाकारों को अपनी आजीविका चलाने में सक्षम बनाने के लिए मानदेय, यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता, स्थानीय परिवहन, आवास आदि का भुगतान किया गया।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज यह जानकारी राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एमकेएस/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2224093)
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