विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
भारत जेनएआई का बड़ा भाषा मॉडल इसी महीने सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में टेक्स्ट मॉडल विकसित करेगा: डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत भारतीय भाषाओं में वाणी और दृष्टि क्षमताओं से युक्त पहला स्वदेशी एआई मॉडल विकसित कर रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री ने कहा- भारत के एआई मिशन में एआई कंप्यूटिंग, नवाचार केंद्र और निजी वित्तपोषण की केंद्रीय भूमिका
प्रविष्टि तिथि:
05 FEB 2026 7:36PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय; परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को बताया कि भारत जेनएआई पहल के तहत पाठ-आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल इस महीने के भीतर संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त सभी 22 भारतीय भाषाओं में तैयार हो जाएंगे, जबकि 15 भाषाओं के लिए वाणी और दृष्टि क्षमताएं पहले ही विकसित की जा चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल भारत का पहला सरकारी स्वामित्व वाला संप्रभु व्यापक भाषा मॉडल है, जिसे विशेष रूप से भारतीय भाषाओं और सामाजिक संदर्भ को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जनरल एआई, मार्च 2024 में शुरू किए गए इंडिया एआई मिशन का परिणाम है और इसे एक राष्ट्रीय आधारभूत मॉडल के रूप में परिकल्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस पहल की प्रमुख विशेषता इसका संप्रभु स्वरूप और भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता पर केंद्रित दृष्टिकोण है, जबकि अन्य देशों में विकसित समान मॉडल प्रायः भाषाई रूप से अधिक समरूप समाजों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को सूचित किया कि भारत जेनएआई के तीन प्रमुख घटक पाठ, भाषण एवं दृष्टि हैं और साथ ही कृषि, आयुर्वेद व कानूनी प्रणाली जैसे समर्पित डोमेन अनुप्रयोग भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में पाठ मॉडल इस महीने तक तैयार होने की उम्मीद है, जबकि वाणी तथा दृश्य मॉडल वर्तमान में 15 भाषाओं में उपलब्ध हैं और आगे इनका विस्तार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम एक गतिशील प्रक्रिया के रूप में संरचित है, जिसमें अधिक डाटा उपलब्ध होने पर अनुसूचित भाषाओं से आगे बोलियों और क्षेत्रीय विविधताओं को शामिल करने की संभावना है।
इस पहल को सहयोग देने वाली संस्थागत संरचना के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जेनएआई कंसोर्टियम का नेतृत्व आईआईटी बॉम्बे कर रहा है, जिसमें आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मंडी और आईआईटी इंदौर सहित कई अन्य संस्थान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह कंसोर्टियम-आधारित दृष्टिकोण किसी एक क्षेत्र या संस्थान के प्रयास के बजाय एकीकृत “संपूर्ण विज्ञान” और “संपूर्ण राष्ट्र” ढांचे को दर्शाता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को सहायता देने वाले व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के तहत 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से चार केंद्र आईआईटी इंदौर, आईआईटी कानपुर, आईआईटी धनबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु को उद्योग जगत एवं अनुसंधान के बीच निकट सह-स्थान को बढ़ावा देने तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के मार्ग को सुगम बनाने के लिए उन्नत किया गया है।
पूर्वोत्तर के संस्थानों को शामिल किए जाने से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार की प्रक्रिया अभी जारी है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की भाषाएं पहले से ही भारत जेनएआई के अंतर्गत शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं का हिस्सा हैं तथा पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के साथ संस्थागत भागीदारी भी और व्यापक होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कंप्यूटेशनल संसाधनों, विशेषकर ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) की उपलब्धता को लेकर उठी चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि उन्नत एआई विकास के लिए कंप्यूट क्षमता केंद्रीय महत्व रखती है। उन्होंने बताया कि इंडिया एआई मिशन में पात्र उपयोगकर्ताओं को रियायती दरों पर साझा कम्प्यूटेशनल संसाधनों तक पहुंच प्रदान करने के लिए एक समर्पित कंप्यूटिंग स्तंभ स्थापित किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि मिशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जैसे-जैसे आवश्यकताएं बढ़ेंगी, वैसे-वैसे वैकल्पिक स्रोतों के माध्यम से भी संसाधनों तक पहुंच सक्षम की जा सकेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है और उन्होंने हाल ही में शुरू की गई 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार निधि का उल्लेख किया। इसका उद्देश्य कार्यान्वयन के करीब पहुंच चुकी परियोजनाओं को सहायता प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि इस निधि ढांचे में एआई से संबंधित बुनियादी ढांचे और कम्प्यूटिंग आवश्यकताओं को भी शामिल किया जाएगा।
भारत जेनएआई मॉडल की पहुंच और मूल्य निर्धारण के संबंध में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ढांचा वर्तमान में विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्लेटफार्म संप्रभु होने के बावजूद बंद नहीं होगा और विभिन्न श्रेणियों के उपयोगकर्ताओं के लिए डेटा साझाकरण, सुरक्षा उपाय तथा मूल्य निर्धारण, जिसमें संभावित छूट भी शामिल हैं, तय करने के लिए तंत्र विकसित किए जा रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने उत्तर का समापन करते हुए कहा कि भारत जन-विज्ञान परियोजना को केवल एक बार की पहल के रूप में नहीं, बल्कि एक सतत विकासशील राष्ट्रीय क्षमता के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में समावेशिता, भाषाई प्रामाणिकता और क्रमिक विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि यह पहल तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखते हुए भारत की सामाजिक व भाषाई वास्तविकताओं से जुड़ी रहे।



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पीके/केसी/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2224210)
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