विद्युत मंत्रालय
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कुल संस्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन का हिस्सा


2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म क्षमता, शुद्ध शून्य उत्सर्जन 2070 तक

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 2:35PM by PIB Delhi

सितंबर, 2025 में 500 गीगावॉट की उपलब्धि हासिल किए जाने के समय की संस्थापित उत्पादन क्षमता और 31 दिसंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार संस्थापित उत्पादन क्षमता का विवरण अनुबंध-1 में दिया गया है। इसमें जीवाश्म और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की प्रतिशत हिस्सेदारी दिखाई गई है। 31 दिसंबर, 2025 तक कुल संस्थापित उत्पादन क्षमता 5,13,730 मेगावॉट थी। इसमें 246,942 मेगावॉट (48.07 प्रतिशत) जीवाश्म और 2,66,788 मेगावॉट (51.93 प्रतिशत) गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से है।

भारत ने जून, 2025 में अपनी संस्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह पेरिस समझौते के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) में तय लक्ष्य से पांच वर्ष से भी अधिक समय पूर्व है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के प्रति देश की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

2025 में कुल 48,436 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। इसमें 37,945 मेगावॉट सौर और 6,347 मेगावॉट पवन ऊर्जा शामिल है। वर्ष 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि का विवरण अनुबंध-2 में दिया गया है।

भारत सरकार ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए जो कदम उठाए हैं उनका विवरण और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की रणनीति इस प्रकार हैः

1. देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के बढ़ावा और गति देने के लिए उठाए गए अनेक कदमों में अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित भी शामिल हैंः

क. 30 जून, 2025 तक (इसके बाद जून 2028 तक प्रति वर्ष 25 प्रतिशत की दर से छूट में क्रमिक कमी होगी) शुरू होने वाली परियोजनाओं, जून, 2028 तक शुरू होने वाली एक ही स्थान पर स्थित बीईएसएस परियोजनाओं, जून, 2028 तक निर्माण कार्य अवार्ड होने वाली हाइड्रो पीएसपी परियोजनाओं, दिसंबर, 2030 तक शुरू होने वाली हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं और दिसंबर, 2032 तक शुरू होने वाली अपतटीय पवन परियोजनाओं के वास्ते सौर और पवन ऊर्जा की अंतर-राज्यीय बिक्री के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क को 100 प्रतिशत माफ किया गया है।

ख. ग्रिड से जुड़ी हुई सौर, पवन, पवन-सौर हाइब्रिड तथा फर्म एवं डिस्पैचेबल नवीकरणीय ऊर्जा (एफडीआरई) परियोजनाओं से विद्युत की खरीद के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के मानक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

ग. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईआईए) द्वारा प्रति वर्ष 50 गीगावॉट की दर से नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत खरीद बोलियों के निर्गमन के लिए बोली ट्रैजेक्ट्री जारी किया है।

घ. बिना पूर्व मंजूरी के 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी गई है।

च. नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के अंतर्गत नई पारेषण लाइनें बिछाए जाने और नई उपस्टेशन क्षमता निर्माण को सहायता प्रदान की गई है।

छ. नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पारेषण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 2032 तक की योजना तैयार की गई है।

ज. बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए भूमि और पारेषण सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सौर  पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर विद्युत परियोजनाओं की स्थापना संबंधी योजना लागू की जा रही है।

झ. प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएमकुसुम), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, उच्च क्षमता वाले सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के अंतर्गत (जनजातीय एवं पीवीटीजी आबादी/गांवों के लिए) नई सौर ऊर्जा योजना, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन तथा अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (वीजीएफ) योजना जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं।

ट. भारत सरकार ने सितंबर, 2023 में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीएसएस) के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (वीजीएफ) योजना को स्वीकृति प्रदान की थी। इस योजना के अंतर्गत 3,760 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान के साथ 13.22 गीगावॉट-घंटा बीईएसएस क्षमता का कार्यान्वयन किया जा रहा है। बीईएसएस की बढ़ती मांग को देखते हुए विद्युत मंत्रालय ने जून, 2025 में 30 गीगावॉट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता के विकास के लिए एक और वीजीएफ योजना को स्वीकृति दी है। इसके तहत विद्युत प्रणाली विकास निधि (पीएसडीएफ) से 5,400 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

ठ. नवीकरणीय ऊर्जा की खपत को बढ़ावा देने के लिए नवीकरणीय खरीद दायित्व (आरपीओ) के पश्चात नवीकरणीय खपत दायित्व (आरसीओ) की ट्रैजेक्ट्री को 2029-30 तक अधिसूचित किया गया है। नवीकरणीय खपत दायित्व ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत सभी नामित उपभोक्ताओं पर लागू है। इसका अनुपालन नहीं करने की स्थिति में दंड का प्रावधान होगा। आरसीओ में विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से निर्धारित मात्रा में ऊर्जा खपत का प्रावधान भी शामिल है।

ड. ‘अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए कार्यनीति’ जारी की गई है।

ढ. भारत सरकार सौर फोटोवोल्टेक (पीवी) मॉड्यूल के घरेलू उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रयासरत है। वह इस उद्देश्य से उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू कर रही है।

त. कुल 12,973.5 मेगावॉट की पनबिजली परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा कुल 4274 मेगावॉट की पनबिजली परियोजनाएं योजना निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं और उन्हें 2031-32 तक पूरा कर लिए जाने का लक्ष्य है।

थ. विद्युत मंत्रालय ने नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण तथा ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पंप भंडारण परियोजनाओं (पीएसपी) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आवश्यक कदम उठाए हैं। वर्तमान में देश में कुल 11,870 मेगावॉट क्षमता वाली 10 पंप भंडारण परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

2. इसके अलावा दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नाभिकीय ऊर्जा में अपार संभावनाएं हैं। यह 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण है। यह बेस लोड पॉवर का एक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल स्रोत है। नाभिकीय ऊर्जा के जीवन चक्र में होने वाला उत्सर्जन पनबिजली और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के लगभग समतुल्य है। भारत सरकार ने 2047 तक 100 गीगावॉट नाभिकीय विद्युत क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। नाभिकीय बिजली के माध्यम से भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैंः

क. एक समर्पित नाभिकीय ऊर्जा मिशन को 20,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य 2033 तक कम-से-कम पांच स्वदेश में डिजाइन किए गए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित करना तथा उन्नत नाभिकीय प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है।

ख. भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम 2025 लागू किया गया है। इसका मकसद स्वदेशी संसाधनों के आधार पर भारत की नाभिकीय ऊर्जा क्षमता का अधिकतम उपयोग सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित करना है।

ग. भारत की प्रमाणित प्रेसराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) प्रौद्योगिकी पर आधारित 220 मेगावॉट क्षमता वाले भारत स्मॉल रिएक्टर (बीएसआर) को औद्योगिक केंद्रों में तैनाती के लिए उन्नत किया जा रहा है जिससे अकार्बनीकरण में सहायता मिलेगी। इसके अलावा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों का भी विकास कर रहा है।

घ. यूरेनियम की नई खोजों से भारत की ईंधन सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। इनमें से एक महत्वपूर्ण खोज से जादूगोड़ा खदान की समयावधि 50 वर्षों से अधिक बढ़ जाएगी। प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में प्राप्त उपलब्धियों समेत क्लोज्ड फ्यूल साइकिल में हुई प्रगति सतत ईंधन आपूर्ति को और मजबूती प्रदान करेगी।

च. क्षमता वृद्धि को गति देने के लिए न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) और नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) ने मौजूदा वैधानिक ढांचे के अंतर्गत नाभिकीय संयंत्रों के विकास के लिए ‘अश्विनी’ नामक एक संयुक्त उपक्रम का गठन किया है।

3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत के अकार्बनीकरण के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के अवसर भी पैदा करेगा। इस मिशन के अंतर्गत 2030 तक कम-से-कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) प्रति वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता संस्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लक्ष्य की दिशा में इस उपलब्धि का भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन रोडमैप पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और सुलभता को अपरिहार्य प्राथमिकताओं के रूप में ध्यान में रखते हुए 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की दिशा में अर्थव्यवस्था के ऊर्जा परिवर्तन के साथ-साथ विकास और प्रगति सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

सितंबर 2025 और दिसंबर 2025 में देश की संस्थापित ऊर्जा क्षमता का विवरण, जिसमें नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोत का हिस्सा प्रतिशत में दिखाया गया है-

अनुलग्नक देखने के लिए यहां क्लिक करें।

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (आरईएस):

यह जानकारी विद्युत मंत्रालय में राज्यमंत्री श्री श्रीपद नाइक ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एसके


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