जनजातीय कार्य मंत्रालय
अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए योजनाएं
प्रविष्टि तिथि:
05 FEB 2026 2:15PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा को बताया कि सरकार देश में अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों के विकास के लिए अनुसूचित जनजातियों की विकास कार्य योजना (डी ए पी एस टी)/जनजातीय उप योजना (टी एस पी) को एक रणनीति के तौर पर लागू कर रही है। डी ए पी एस टी के अंतर्गत, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अलावा, 41 केंद्रीय मंत्रालयों या विभागों को हर वर्ष अपने कुल योजना बजट का एक निश्चित प्रतिशत जनजातीय विकास के लिए आवंटित करना अनिवार्य है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति आबादी वाले और गैर अनुसूचित जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को पाटना है। ये आवंटन शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़कों, आवास, विद्युतीकरण, रोज़गार सृजन, कौशल विकास और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न जनजातीय विकास पहलों को क्रियान्वित करने में सहायक होते हैं। राज्य सरकारों को भी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जनजाति आबादी के अनुपात में जनजातीय उप-योजना (टी एस पी) फंड आवंटित करना आवश्यक है। अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बाध्य मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित योजनाओं और फंड का विवरण केंद्रीय बजट के व्यय प्रोफ़ाइल के स्टेटमेंट 10बी (https://www.indiabudget.gov.in/budget2025-26/doc/eb/stat10b.pdf) में दिया गया है।
इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय देश में अनुसूचित जनजातियों (एस टी) के कल्याण और विकास के लिए कई बड़ी योजनाएं एवं कार्यक्रम लागू कर रहा है, जैसे:
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ई एम आर एस): आदिवासी बच्चों को उनके अपने अनुकूलित वातावरण में नवोदय विद्यालय की गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ई एम आर एस) 2018-19 में शुरू किए गए थे। नई योजना के अंतर्गत, सरकार ने 440 ई एम आर एस स्थापित करने का फैसला किया। ऐसे प्रत्येक विकास खंड में एक ई एम आर एस स्थापित करने का लक्ष्य है जहाँ 50% से अधिक आबादी अनुसूचित जनजाति की है और कम से कम 2011 की जनगणना के अनुसार 20,000 आदिवासी लोग रहते हैं। शुरुआत में 288 ई एम आर एस स्कूलों को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान से फंड दिया गया था, जिन्हें नए मॉडल के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। इसके अनुसार, मंत्रालय ने देश भर में लगभग 3.5 लाख एस टी छात्रों को लाभान्वित करने हेतु कुल 728 ई एम आर एस स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
विगत तीन वर्षों के दौरान ई एम आर एस के अंतर्गत जारी की गई निधि
(रुपये लाख में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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2022-23
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2023-24
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2024-25*
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समग्र भारत में
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1,97,055.63
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2,30,494.85
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4,61,079.71
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*आरंभिक
अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप: यह योजना उन छात्रों पर लागू होती है जो 9 वीं – 10 वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। माता-पिता की सभी स्रोतों से सालाना आय 2.50 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है। दैनिक छात्रों को हर महीने 225/- रुपये और छात्रावास वाले छात्रों को हर महीने 525/- रुपये की छात्रवृत्ति साल में 10 महीने के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के माध्यम से दी जाती है। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत और राज्य की 25 होती है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी का अनुपात 90:10 है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों में 100% हिस्सा केंद्र सरकार वाहन करती है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत जारी किया गया फंड इस प्रकार है:
(करोड़ रुपये में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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वित्तीय वर्ष 2022-23
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वित्तीय वर्ष 2023-24
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वित्तीय वर्ष 2024-25*
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समग्र भारत में
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357.29
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308.60
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163.69
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*प्रारम्भिक
अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप: इस योजना का उद्देश्य 10 वीं की पढ़ाई कर रहे या 12 वीं की पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जनजाति के छात्रों को वित्तीय मदद देना है ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। इसके लिए ऐसे छात्र पात्र हैं जिनके माता-पिता की सभी स्रोतों से सालाना आय 2.50 लाख रुपये से अधिक नहीं है। शिक्षण संस्थानों द्वारा ली जाने वाली आवश्यक फीस का रीइम्बर्समेंट संबंधित राज्य की शुल्क निर्धारण समिति द्वारा तय सीमा के अनुसार किया जाता है और पढ़ाई के पाठ्यक्रम के आधार पर हर महीने 230 रुपये से 1200 रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जाती है। यह योजना राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा लागू की जाती है। धन का योगदान केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी का अनुपात 90:10 है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों में 100% हिस्सा केंद्र सरकार वाहन करती है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए 10 वीं के बाद छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत जारी किया गया फंड इस प्रकार है:
(करोड़ रुपये में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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वित्तीय वर्ष 2022-23
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वित्तीय वर्ष 2023-24
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वित्तीय वर्ष 2024-25*
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समग्र भारत में
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1964.63
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2668.69
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2598.34
|
*प्रारम्भिक
धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डी ए जे जी यू ए) का शुभारंभ किया था। इस अभियान में 17 मंत्रालयों द्वारा लागू किए गए 25 प्रयास शामिल हैं और इसका लक्ष्य 63,843 गांवों में बुनियादी ढांचा से जुड़ी की कमियों को पूरा करना, छात्रावास, आंगनवाड़ी सुविधाओं और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी सामाजिक अवसंरचना प्रदान करना और 549 जिलों और 2,911 खंडों में 30 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 5 करोड़ से अधिक आदिवासियों को लाभ पहुंचाने के लिए आजीविका के अवसर प्रदान करने हेतु वन धन विकास केंद्र स्थापित करना है। इस अभियान का कुल बजट 79,156 करोड़ रुपये है (इसमें केंद्र का हिस्सा: ₹56,333 करोड़ और राज्य का हिस्सा: ₹22,823 करोड़)।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पी एम जनमन ): केंद्र सरकार ने 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पी वी टी जी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पी एम जनमन) शुरू किया है। इस मिशन का लक्ष्य 3 साल में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार संपर्क, जिन घरों में बिजली नहीं पहुंची है उनका विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। इन उद्देश्यों को 9 मंत्रालयों द्वारा लागू किए गए छात्रावास और मोबाइल मेडिकल यूनिट (एम एम यू) सहित 11 हस्तक्षेपों के माध्यम से पूरा करने की योजना है। पी एम जनमन का कुल बजट ₹24,104 करोड़ है (इसमें केंद्र की हिस्सेदारी: ₹15336 करोड़ और राज्य की: ₹8768 करोड़)।
पी एम जनमन योजना के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों के दौरान के राज्य सरकारों को जारी की गई धनराशि इस प्रकार है:
(करोड़ रुपये में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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वित्तीय वर्ष 2022-23
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वित्तीय वर्ष 2023-24
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वित्तीय वर्ष 2024-25*
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समग्र भारत में
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--
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100
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99.68
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*प्रारम्भिक
संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को ऊपर उठाने और आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए, अनुसूचित जनजाति आबादी वाले राज्यों को अनुदान जारी किया जाता है। यह एक क्षेत्र विशेष कार्यक्रम है और राज्यों को 100% अनुदान प्रदान किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की गतिविधियों में अंतर को पाटने के लिए अनुसूचित जनजाति आबादी के लिए अनुभव की गई जरूरतों के आधार पर राज्य सरकारों को फंड जारी किया जाता है।
एफ. संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत 31.06.2025 तक पिछले तीन वर्षों के दौरान जारी किया गया धन:
(लाख रुपये में)
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राज्य
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2022-23
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2023-24
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2024-25*
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कुल जारी किया गया
|
कुल जारी किया गया
|
कुल जारी किया गया
|
|
समग्र भारत में
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97649.20
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117210.00
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117057.00
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*प्रारम्भिक
अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान सहायता: अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान सहायता की योजना के अंतर्गत मंत्रालय, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराता है, जिसमें आवासीय स्कूल, गैर-आवासीय स्कूल, छात्रावास, मोबाइल डिस्पेंसरी, दस या उससे ज़्यादा बिस्तर वाले अस्पताल, आजीविका आदि शामिल हैं।
पिछले तीन वर्षों के दौरान जारी किया गया फंड
(लाख रुपये में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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2022-23
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2023-24
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2024-25*
|
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समग्र भारत में
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10925
|
12083.7
|
17500
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*प्रारम्भिक
नेशनल शेड्यूल्ड ट्राइब्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एन एस टी एफ डी सी): जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक सर्वोच्च संगठन है जिसे विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए स्थापित किया गया है। यह आजीविका पैदा करने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करता है। एन एस टी एफ डी सी थारू जनजाति सहित पात्र अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए सस्ते दर पर ऋण देता है। एन एस टी एफ डी सी की योजनाएं पूरे देश में, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य भी शामिल है, लागू की जाती हैं। एन एस टी एफ डी सी की प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
• सावधि ऋण योजना: एन एस टी एफ डी सी प्रति इकाई 50.00 लाख रुपये तक की लागत वाली व्यवहार्य परियोजनाओं के लिए सावधि ऋण प्रदान करता है। इस योजना के अंतर्गत परियोजना की लागत का 90% तक वित्तीय सहायता दिया जाता है और शेष राशि छूट/प्रमोटर योगदान/मार्जिन मनी के रूप में पूरी की जाती है।
• आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना (ए एम एस वाई): अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए यह एक विशेष योजना है। इस योजना के अंतर्गत, एन एस टी एफ डी सी ₹2 लाख तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए 90% तक लोन देती है।
• स्वयं सहायता समूहों के लिए माइक्रो क्रेडिट योजना (एम सी एफ): यह अनुसूचित जनजाति सदस्यों की छोटी ऋण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्वयं सहायता समूहों के लिए एक विशेष योजना है। इस योजना के अंतर्गत प्रति सदस्य ₹50,000/- तक और प्रति स्वयं सहायता समूह (एस एच जी) अधिकतम ₹5 लाख तक का ऋण दिया जाता है।
• आदिवासी शिक्षा ऋण योजना (ए एस आर वाई): यह एक शिक्षा ऋण योजना है जो अनुसूचित जनजाति के छात्रों को भारत में पी एच डी सहित तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा हासिल करने के खर्च को पूरा करने में मदद करती है। इस योजना के अंतर्गत, कॉर्पोरेशन प्रति योग्य परिवार ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता देती है। छात्र शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज सब्सिडी के लिए पत्र होते हैं, यानी पाठ्यक्रम की अवधि के साथ-साथ पाठ्यक्रम पूरा होने के एक साल बाद या नौकरी मिलने के छह महीने बाद, जो भी पहले हो तक जारी रहता है।
(रुपये लाख में)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
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|
जारी किया गया धन
|
जारी किया गया धन
|
जारी किया गया धन
|
|
समग्र भारत में
|
29929.00
|
35165.42
|
37327.70
|
*प्रारम्भिक
राज्य सरकारों को भी राज्य में अनुसूचित जनजाति की 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी के अनुपात में, कुल योजना आवंटन के संबंध में टी एस पी फंड अलग से रखना होता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा टी एस पी के लिए किए गए आवंटन और खर्च का विवरण https://statetsp.tribal.gov.in पर उपलब्ध है।
इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय देश में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास के लिए विभिन्न योजनाएं/कार्यक्रम लागू कर रहा है। इन योजनाओं और पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान मंत्रालय द्वारा किए गए राज्य-वार फंड आवंटन का विवरण यहाँ दिया गया है।
(सी): जनजातीय कार्य मंत्रालय "अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (एफ आर ए)" को लागू करता है, जिसे अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के साथ वन भूमि और संसाधनों पर उनके अधिकारों को लंबे समय तक मान्यता न मिलने के कारण हुए ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
एफ आर ए व्यक्तिगत या सामूहिक कब्जे वाली जंगल की ज़मीन पर रहने या आजीविका के लिए खुद खेती करने का अधिकार, मालिकाना हक, लघु वन उत्पादों को इकट्ठा करने, इस्तेमाल करने और बेचने का अधिकार सहित 13 अलग-अलग उपयोग अधिकारों को मान्यता देता है। पानी के स्रोतों और उनके उत्पादों के इस्तेमाल का अधिकार, पशुधन को चराने के लिए चारागाह (स्थायी या घुमंतू दोनों) और पारंपरिक मौसमी संसाधनों तक पहुंच, और साथ ही जंगल पर निर्भर समुदाय की ग्राम सभा को किसी भी सामुदायिक जंगल संसाधन की रक्षा, फिर से बनाने, संरक्षित करने या उसका प्रबंधन करने का अधिकार और ज़िम्मेदारी देना, जिसे वे पारंपरिक रूप से स्थायी उपयोग के लिए बचाते आ रहे हैं। इसके अलावा, एफ आर ए आदिवासी आबादी के किसी भी विस्थापन से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय प्रदान करता है, लेकिन साथ ही ज़मीनी स्तर पर जंगल के अधिकारों को पहचानने और देने की प्रक्रिया में लोकतांत्रिक संस्थानों को शामिल करने की भी कोशिश करता है।
"अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006" के आन्तर्गत 31.05.2025 तक प्राप्त दावों का विवरण, मालिकाना हकों का वितरण, और जिस वन भूमि के लिए मालिकाना हक वितरित किए गए हैं, उसका दायरा (व्यक्तिगत और सामुदायिक):
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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31.05.2025 तक प्राप्त दावों की संख्या
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31.05.2025 तक दिए गए टाइटल
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व्यक्तिगत
|
समुदाय
|
कुल
|
व्यक्तिगत
|
समुदाय
|
कुल
|
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समग्र भारत में
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49,11,495
|
2,11,609
|
51,23,104
|
23,89,670
|
1,21,705
|
25,11,375
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*प्रारम्भिक
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
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वन भूमि का क्षेत्रफल जिसके लिए टाइटल बांटे गए (एकड़ में)
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समग्र भारत में
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व्यक्तिगत
|
समुदाय
|
कुल
|
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5075083.5
|
18198863.9
|
23273947.4
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*प्रारम्भिक
जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने अपनी दो एजेंसियों - भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (ट्राइफेड) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एन एस टी एफ डी सी) के माध्यम से पूरे भारत में आदिवासी समुदायों के लोगों के उद्यमियों और व्यवसाय को सहायता देने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय ट्राइफेड के माध्यम से 'प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पी एम जे वी एम)' योजना लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य जनजातीय उद्यमिता पहलों को मज़बूत करना और प्राकृतिक संसाधनों, कृषि/लघु वन उत्पादों/गैर-कृषि उत्पादों का ज़्यादा कुशल, न्यायसंगत, स्व-प्रबंधित, बेहतर इस्तेमाल करके आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक वन धन विकास केंद्र (वी डी वी के) की स्थापना के लिए राज्य सरकारों को 15.00 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो लघु वन उत्पादों / गैर लघु वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन गतिविधियों के केंद्र हैं। 2019-20 में कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक, 12.33 लाख सदस्यों को जोड़कर 4125 वन धन विकास केंद्र स्थापित करने के लिए 612.13 करोड़ रुपये की राशि मंज़ूर की गई है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पी एम – जनमन) पहल के अंतर्गत 45,924 सदस्यों को जोड़कर 539 वी डी वी के स्थापित करने के लिए 22.98 करोड़ रुपये की राशि मंज़ूर की गई है। इसका राज्य-वार विवरण दिया गया है।
समग्र भारत में जारी किए गए पी एम जे वी एम वी डी वी का विवरण
(लाख रुपये में)
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
जारी किए गए वी डी वी के की संख्या
|
लाभार्थियों की कुल संख्या
|
जारी किया गया धन
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|
समग्र भारत में
|
4125
|
1233328
|
61212.7
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समग्र भारत के लिए जारी किए पी एम जनमन वी डी वी के
(लाख रुपये में)
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प्रदेश/केंद्र शासित प्रदेश
|
जारी किए वी डी वी
|
लाभार्थी
|
जारी किया गया धन
|
|
समग्र भारत में
|
539
|
45,924
|
2298.05
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ट्राइफेड, आदिवासी कारीगरों और अपूर्तिकर्ताओं के लिए उत्पादन और बिक्री के बीच के संपर्क उपलब्ध कराता है, जिससे धातुओं से बनी वस्तुओं, वस्त्र, ज्वेलरी, पेंटिंग, बेंत और बांस, टेराकोटा और मिट्टी के बर्तन, साथ ही ऑर्गेनिक और नेचुरल फूड प्रोडक्ट्स जैसी अलग-अलग श्रेणियों में आदिवासी उत्पादों के विपणन में आसानी होती है। इन उत्पादों का विपणन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म के ज़रिए की जाती है। इसके अलावा, ट्राइफेड आदिवासी कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, संभावित खरीदारों से जुड़ने और अपने उद्यमिता के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए एक मंच देने हेतु फेस्टिवल, प्रदर्शनी और व्यापार मेलों का आयोजन करता है और उनमें हिस्सा लेता है।
(e) और (f): मंत्रालय ने डी ए पी एस टी के अंतर्गत अलग-अलग मंत्रालयों/विभागों के पास उपलब्ध धन को मिलाकर अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए दो मिशन - प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पी एम जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किए हैं।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन, समन्वय और निगरानी को सुनिश्चित करने के लिए राज्य, जिला और खंड स्तर पर समितियाँ बनाई गई हैं। राज्य स्तर पर, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय शीर्ष समिति (एस अल ए सी) का गठन किया गया है। जिला स्तर पर, जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला-स्तरीय समिति और ब्लॉक स्तर पर, विभिन्न विभागों के अधिकारियों वाली ब्लॉक-स्तरीय कार्यान्वयन टीमें (बी अल आई टी) हस्तक्षेपों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए स्थापित की गई हैं।
इन सभी प्रयासों के साथ-साथ जनजातीय कार्य मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ समीक्षा बैठकें भी करता है। संबंधित मंत्रालयों और विभागों में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाते हैं।
जनजातीय कल्याण योजनाओं के प्रदर्शन और उनके प्रभाव का आकलन करने के लिए कई मूल्यांकन और निगरानी अभ्यास किए गए हैं। नीति आयोग (डी एम ई ओ) ने के पी एम जी एडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान पैकेज 9 के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजनाओं का एक व्यापक मूल्यांकन अध्ययन किया, जिसमें वनबंधु कल्याण योजना के अंतर्गत सात योजनाएं शामिल हैं।
1. प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप
2. पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप
3. आदिवासी अनुसंधान संस्थानों को सहायता
4. विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (पी वी टी जी) का विकास
5. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पी एम – जनमन )
6. प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना – पी एम ए ए जी वाई (पहले इसे ट्राइबल सब-स्कीम के लिए विशेष केंद्रीय सहायता - के नाम से जाना जाता था)। पी एम ए ए जी वाई को अब नया रूप दिया गया है और इसे डी ए जे जी यू ए में शामिल किया गया है।
7. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक लागत
इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र की 8 योजनाओं का मूल्यांकन करवाया है, जो इस प्रकार हैं:
1. एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ई एम आर एस)
2. अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप और छात्रवृत्ति
3. विदेश में पढ़ाई के लिए अनुसूचित जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति
4. अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को सहायता
5. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पी एम जे वी एम)
6. जनजातीय अनुसंधान सूचना, शिक्षा, संचार और कार्यक्रम (टी आर आई – ई सी ई)
7. निगरानी, मूल्यांकन, सर्वेक्षण और सामाजिक लेखापरीक्षा (एम ई एस एस ए)
8. अनुसूचित जनजातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड
***
पीके/केसी/डीटी
(रिलीज़ आईडी: 2224279)
आगंतुक पटल : 26