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व्यवसाय करने में सुगमता: भारत में जारी नियामक परिवर्तन


केंद्रीय बजट वित्त वर्ष 2026–27: भारत के कारोबारी वातावरण को सुदृढ़ बनाना

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 5:36PM by PIB Delhi

मुख्‍य बिंदु

  • केंद्रीय बजट 2026–27 डिजिटलीकरण, कर-निश्चितता, निवेशकों की पहुँच और मुकदमेबाजी में कमी पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवसाय करने में सुगमता को विकास और प्रगति के प्रमुख स्तंभ के रूप में सुदृढ़ करता है।
  • सीमा शुल्‍क क्‍लीयरेंस और सीमा शुल्‍क एकीकृत प्रणाली हेतु एकल, परस्पर संबद्ध  डिजिटल विंडो द्वारा डिजिटल व्यापार सुविधा पर फोकस करता है
  • बाज़ार में तरलता और निवेशकों की पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से पोर्टफोलियो निवेश योजना के तहत पीआरओआई निवेश सीमाओं में वृद्धि की गई है।
  • कर-निश्चितता बढ़ाते हुए और विवादों में कमी लाते हुए मैट को 14% की कम दर पर अंतिम कर के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
  • जोखिम प्रबंधन प्रणालियों में विश्वसनीय आयातकों की पहचान की गई, जिससे भौतिक जांच में कमी आएगी और फैक्ट्री से सीधे जहाज तक क्‍लीयरेंस सक्षम होगी।

विकास और प्रतिस्पर्धा को सक्षम बनाना

A diagram of a company budget

व्यवसाय करने में सुगमता (ईओडीबी) भारत के आर्थिक सुधार एजेंडे का एक प्रमुख आधार बनकर उभरी है और इसकी विकास एवं प्रगति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में पुष्टि की गई । केंद्रीय बजट 2026–27 में डिजिटल व्यापार सुविधा, कर-निश्चितता, अनुपालन एवं मुकदमेबाजी में कमी, विश्वास-आधारित सीमा शुल्क प्रणालियों तथा निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था से संबंधित सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया है ये उपाय पिछले एक दशक में किए गए सतत नियामकीय एवं संस्थागत सुधारों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए, पारदर्शिता बढ़ाते हुए  और अनुपालन बोझ को कम करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों के विश्वास को मजबूती प्रदान करना है।

इन सुधारों का प्रभाव भारत में निवेश और उद्यम विस्तार में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। वर्ष 2014–25 के दौरान भारत ने 748.38 बिलियन  डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकृष्‍ट  किया, जो इससे पूर्व के 11 वर्षों की तुलना में 143% की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, सक्रिय पंजीकृत कंपनियों की संख्या 2020–21 में 1.55 लाख से बढ़कर 2025–26 में (3 फरवरी 2026 तक) 1.98 लाख हो गई, जो पिछले 5 वर्षों में ~27% की वृद्धि को इंगित करता है। विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप निरंतर व्यवसाय करने में सुगमता (ईओडीबी) से जुड़े सुधार वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ाव को मजबूत करने और उद्योग-प्रेरित विकास को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

बजट व्यवसाय करने में सुगमता पर ध्‍यान केंद्रित करता है

बजट कर निश्चितता बढ़ाने, अनुपालन के बोझ को कम करने और विश्वास-आधारित शासन को प्रोत्साहित करने हेतु किए गए उपायों के माध्यम से भारत के व्यवसाय करने में सुगमता (ईओडीबी) के एजेंडे को और मजबूत करता है। प्रमुख सुधारों में मैट का युक्तिकरण, विवाद निवारण प्रक्रियाओं का सरलीकरण तथा प्रक्रिया से संबंधित मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना शामिल हैं। इसके साथ ही, बजट ने डिजिटल एकीकरण और जोखिम-आधारित क्लीयरेंस के माध्यम से सीमा शुल्क और लॉजिस्टिक्स सुधारों को आगे बढ़ाया है, जिससे लेन-देन लागत में कमी आएगी और व्यावसायिक दक्षता में सुधार होगा।

A diagram of a budget

व्यापार और निवेश सुविधा

  • कार्गो क्लीयरेंस से संबंधित अनुमोदनों के लिए एकल और परस्पर संबद्ध डिजिटल विंडो
  • जिन वस्तुओं पर कोई अनुपालन आवश्यकता नहीं है, उनके लिए आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूर्ण करने और शुल्क का भुगतान करने के तुरंत बाद कस्‍टम द्वारा तत्काल क्लीयरेंस प्रदान किया जाएगा।
  • सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (सीआईएस) को सभी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और विस्‍तार योग्‍य प्लेटफॉर्म के रूप में दो वर्षों में लागू किया जाएगा।
  • जोखिम मूल्यांकन हेतु उन्नत इमेजिंग और एआई प्रौद्योगिकी के साथ नॉन-इंट्रूसिव स्कैनिंग के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सभी प्रमुख बंदरगाहों पर प्रत्येक कंटेनर को स्‍कैन करना है।
  • भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) को पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी उपकरणों  में निवेश की अनुमति दी जाएगी  इस योजना के अंतर्गत एक पीआरओआई के लिए निवेश सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% करने तथा व्यक्तिगत पीआरओआई का समग्र निवेश वर्तमान 10% से बढ़ाकर 24% करने का भी प्रस्ताव है।

वैश्विक व्यापार और निवेश को आकर्षित करना

  • अनुमानित कराधान के आधार पर कर का भुगतान करने वाले सभी अनिवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से छूट प्रदान की जाएगी।
  • मैट को उन शून्य कर कंपनियों को कर दायरे में लाने के लिए लागू किया गया था, जो लेखा बहियों में  पर्याप्त लाभ अर्जित करने और आकर्षक लाभांश का भुगतान करने के बावजूद, आयकर कानून के तहत प्रदान की गई विभिन्न कर रियायतों और प्रोत्साहनों के कारण कोई कर नहीं चुकाती थीं।
  • सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में कर
  • नई व्यवस्था में उपलब्ध मैट-क्रेडिट का उपयोग करके समायोजन कर देयताओं के ¼ की सीमा तक की अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है।
  • अंतिम कर दर को 15% से घटाकर 14% करते हुए मैट को अंतिम कर बनाने का प्रस्ताव

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना

  • सामान्‍य आदेश के माध्यम से एकीकृत आकलन और दंड कार्यवाहियाँ, जिसमें अपील के दौरान दंड पर कोई ब्‍याज देयता नहीं होगी और पूर्व-भुगतान आवश्यकता को 20% से घटाकर 10% किया गया है, जिसकी गणना मुख्‍य कर मांग पर होगी।
  • पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी करदाताओं को अपने रिटर्न अपडेट कर सकने की अनुमति दी जाएगी, इसके लिए संबंधित वर्ष की लागू दर पर अतिरिक्त 10% कर दर लागू होगी।
  • कम कर की सूचना देने के मामलों में दंड और अभियोजन से सुरक्षा हेतु एक फ्रेमवर्क को गलत सूचना देने के संबंध में लागू करने का प्रस्‍ताव किया गया है। इसके तहत करदाता को देय कर और ब्‍याज के अलावा अतिरिक्‍त आयकर के रूप में कर राशि के 100 प्रतिशत का भुगतान करना होगा। 
  • लेखा बही खातों और दस्‍तावेजों को प्रस्‍तुत न करने तथा वस्‍तु रूप में भुगतान के मामले में टीडीएस का भुगतान न करना अब अपराध की श्रेणी से बाहर होगा। इसके अतिरिक्त, छोटे अपराधों के लिए अब केवल जुर्माना लगाया जाएगा।
  • कुछ तकनीकी चूकों के लिए जुर्माने को शुल्क में बदलने का प्रस्ताव है।
  • अन्‍य अभियोजनों को अपराध के अनुसार अनुपात में श्रेणीबद्ध किया जाएगा। जिसमें अधिकतम 2 वर्षों तक का साधारण कारावास होगा और अदालतों के पास कारावास को जुर्माने में बदलने का अधिकार होगा। 
  • 20 लाख रुपये से कम की गैर-अचल विदेशी संपत्ति के लिए 1 अक्टूबर 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव से अभियोजन से छूट।

विश्वास-आधारित प्रणालियाँ

  • टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक ऑपरेटरों (एईओ) के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया।

इसका क्या आशय है?

स्थगित शुल्क भुगतान एक ऐसा तंत्र है जो शुल्क भुगतान और सीमा शुल्क क्लीयरेंस को अलग करता है। यह ‘पहले क्लीयर करें – बाद में भुगतान करें’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसका उद्देश्य घाट से गोदाम तक निर्बाध परिवहन सुनिश्चित करना है, ताकि समय पर उत्पादन सुगम बनाया जा सके।

शुल्क स्थगन अवधि में वृद्धि का अर्थ है कि आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क या आयात शुल्क का भुगतान तुरंत करने के बजाय बाद में करने के लिए अधिक समय प्रदान करना।

 

 

  • पात्र विनिर्माताओं-आयातकों को भी समान शुल्क स्थगन सुविधा उपलब्‍ध कराने का प्रस्‍ताव किया गया है। इससे उन्हें समय के साथ पूर्ण-स्तरीय टियर 3- एईओ के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
  • अधिक निश्चितता और बेहतर व्यावसायिक योजना के लिए, सीमा शुल्क पर बाध्यकारी अग्रिम निर्णय की वैधता अवधि को वर्तमान 3 वर्षों से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया।
  • कार्गो क्लीयरेंस में एईओ मान्यता के आधार पर वरीयता का प्रावधान किया गया ।
  • जोखिम प्रबंधन प्रणालियों में विश्वसनीय आयातकों  की पहचान की गई, जिससे जांच की  आवश्यकता न्यूनतम हो, जबकि इलेक्ट्रॉनिक रूप से सील किए गए निर्यात कार्गो को फैक्‍ट्री परिसर से पोत तक निकासी मिल सके
  • अनुपालन रहित वस्तुओं के लिए, विश्वसनीय आयातक द्वारा फाइलिंग करने पर सीमा शुल्क को स्वचालित रूप से क्लीयरेंस के लिए सूचना भेजी जाएगी, जिससे आगमन पर तत्काल रिलीज़ संभव होगा। 
  • सीमा शुल्क गोदाम ढाँचे को ऑपरेटर-केंद्रित प्रणाली में परिवर्तित किया जाएगा, जिसमें स्व-घोषणाएँ, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम-आधारित ऑडिट शामिल होंगे, जिससे विलंब होने और अनुपालन लागतों में कमी आएगी।

क्‍लीयरेंस से लेकर अनुपालन तक के सुधार

कई वर्षों से, भारत सुगम और दक्ष व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए संरचनात्मक, नियामक और डिजिटल सुधारों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। मौजूदा उपाय और उनके प्रभाव, जैसा कि आर्थिक समीक्षा 2025–26 में भी रेखांकित किया गया है, सरकार और राज्य प्रशासन द्वारा छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने, व्यवसाय से संबंधित अनुमोदनों को आसान बनाने, अनुपालन का बोझ कम करने, और नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए निरंतर और समन्वित रूप से किए गए प्रयास को दिखाता है।

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गैर-अपराधीकरण और विश्वास-आधारित विनियमन

विश्वास-आधारित नियामक ढाँचे को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने महत्वपूर्ण गैर-अपराधीकरण सुधार किए हैं। जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2023 ने 42 अधिनियमों में 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया है, जिससे छोटे और तकनीकी अपराधों के लिए आपराधिक दायित्व कम हुआ। इन प्रयासों को जारी रखते हुए, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025, जिसमें कुल 355 प्रावधान शामिल हैं, व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए गैर-अपराधीकरण हेतु 288 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्‍ताव करता है और जीवन की सुगमता बढ़ाने के लिए 67 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव करता है। यह अनुपालन सरल बनाने और नियामक दक्षता बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

इन गैर-अपराधीकरण सुधारों के अतिरिक्त, सरकार ने नियामक ढाँचे को और युक्तिसंगत बनाने, अनुपालन बोझ कम करने और विभिन्न क्षेत्रों एवं राज्यों में विश्वास-आधारित शासन को सुदृढ़ करने के लिए कई पूरक उपाय भी किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, भारतीय वन अधिनियम, 1927, और जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के आपराधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है और छोटे अपराधों को युक्तिसंगत बनाया गया है, ताकि जीवन और व्यवसाय की सुगमता के लिए विश्वास-आधारित शासन को और सुदृढ़ किया जा सके।
  • जनवरी 2025 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों को आसान बनाने और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाने के लिए अनुपालन में कमी और विनियमन में ढील देने से संबंधित कार्यबल का गठन किया गया इसने 5 प्रमुख क्षेत्रों में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें  भूमि उपयोग,भवन और निर्माण, श्रम, उपयोगिताएँ और अनुमतियाँ, व्यापक प्राथमिकताएँ  शामिल हैं  और ये क्षेत्र नियामक इंटरैक्शन का बड़ा हिस्सा हैं। मार्च 2025 से, कार्यबल की तीन दौर की यात्राएँ हो चुकी हैं, सशक्त अंतर-एजेंसी समन्वय,  राज्यों के साथ चरणबद्ध समस्या समाधान और रीयल-टाइम आधार पर सीखना जिनकी विशेषताएँ रही हैं।

 

राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस)

एनएसडब्ल्यूएस एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार अनुमोदनों के लिए  पहचान और आवेदन करने की प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन करता है। यह व्यवसाय अनुमोदनों को सरल बनाने से संबंधित एक प्रमुख सुधार पहल के रूप में उभरा है, जो अनुमोदन में लगने वाले समय को कम करने, दस्तावेज़ भंडारण सुरक्षित करने और एकल डिजिटल गेटवे के माध्यम से प्रश्नों का त्‍वरित प्रबंधन सुनिश्चित करता है।  यह  32 केंद्रीय विभागों और 32 राज्य सरकारों  की अनुमोदन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है, और इसके माध्यम से 698 केंद्रीय और 7435 राज्य अनुमोदनों तक पहुँच संभव है। अपनी स्थापना के बाद से, एनएसडब्ल्यूएस ने 8,29,750 से अधिक अनुमोदन प्रदान किए हैं। 

सरकार ने अन्य एकल-खिड़की डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भी लॉन्च किए हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाते हैं, लागत कम करते हैं और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं

अन्य एकल-खिड़की डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

 

 

परिवेश (प्रो एक्टिव एंड रिस्पॉन्सिव फैसिलिटेशन बाय इंटरएक्टिव, वर्चुअस एंड एनवायरनमेंटल सिंगल-विंडो हब)3.0

पर्यावरणीय अनुमोदनों और अनुमोदन के बाद अनुपालन निगरानी के लिए।

 

यह पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और कार्यकुशलता को बेहतर बनाने के लिए बेसलाइन डेटा, पुनःवनिकी भूमि बैंक, अंतर-मंत्रालयी डैशबोर्ड और एआई-सक्षम सहायता को एकीकृत करता है।

 

 

 

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल 

यह ग्राम पंचायत की पूरी प्रोफ़ाइल के साथ एक एकल खिड़की प्रदान करता है, जिसमें संपंच/सचिव का विवरण, जनसांख्यिकी, वित्त, संपत्तियाँ, साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के माध्यम से की गई गतिविधियाँ शामिल हैं।

एकीकृत रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करते हुए, यह विकेंद्रीकृत योजना को सुदृढ़ करता है और विकास निधियों के उपयोग की प्रभावशीलता में सुधार करता है।

 

राज्य के नेतृत्व में सुधार नवाचार

अनुपालन के बोझ कम करने के अभ्यास के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने नियामक अनुपालन पोर्टल पर अपलोड किए गए डेटा के आधार पर बोझिल अनुपालनों की बड़े पैमाने पर स्‍वयं पहचान की। नवंबर 2025 तक, 47,000 से ज़्यादा अनुपालन कम किए जा चुके  हैं, जिनमें 16,108 अनुपालन को आसान बनाया गया, 22,287 को डिजिटाइज़ किया गया, 4,458 को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया, और 4,270 अप्रासंगिक अनुपालन हटा दिए गए।

अनेक राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सामान्य सुधार ढाँचों से परे जाकर नवाचारी सुधार किए हैं, जो उनके विशिष्ट प्रशासनिक, आर्थिक और भौगोलिक संदर्भों के अनुरूप बनाए गए हैं।

आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड ने भूमि के उचित उपयोग के लिए, कुछ चयनित श्रेणियों के लिए भूमि रूपांतरण की आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया है, जिससे प्रक्रियागत विलंब में कमी आई है।.

असम, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, पुडुचेरी और त्रिपुरा ने मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों के लिए नेगेटिव लिस्ट लागू की है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर निषिद्ध न होने पर सभी गतिविधियों की अनुमति प्राप्त हैं

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में, भूमि उपयोग परिवर्तन की ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत ने कुछ ही महीनों में सैकड़ों आवेदन निपटाने में मदद की, अतिरिक्त पर्यटन क्षमता को बढ़ावा दिया, और घरेलू एवं उद्यमी ऋण प्रवाह में सुधार किया।

हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने भवन और विकास मानकों के क्षेत्र में, भवन नियमावली को उदार बनाया और सेटबैक, एफएआर, पार्किंग और भूखंड  के  आकार से संबंधित मानकों को सरल बनाया, जिससे भूमि का उच्चतम उपयोग संभव हुआ और परियोजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ। 

  • छत्तीसगढ़, मिज़ोरम, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने तीसरे पक्ष द्वारा भवन योजना अनुमोदन लागू किए हैं, जबकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु और उत्तराखंड ने पर्यावरणीय अनुमोदनों के लिए स्व-प्रमाणीकरण और तीसरे पक्ष प्रमाणीकरण को सक्षम किया है। असम, ओडिशा, तेलंगाना और त्रिपुरा में अग्नि सुरक्षा मानकों को मान्यता प्राप्त तीसरे पक्ष के माध्यम से सुव्यवस्थित किया गया है।

बिहार, गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने श्रम क्षेत्र में, उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की व्यापक श्रेणी में महिलाओं के कार्य करने पर से प्रतिबंध हटा दिए हैं

  • छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने पुराने प्रावधानों को रद्द करते हुए  वारिस कानूनों में संशोधन करते हुए, और छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए  जन विश्वास अधिनियम के समान राज्य स्तर के अधिनियम लागू किए हैं। 
  • त्रिपुरा में भूमि, भवन नियम, श्रम, उपयोगिताएँ और व्यापक अधिनियमों में समग्र सुधारों ने स्पष्ट परिणाम दिए हैं। राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025 के बाद, प्रतिबद्ध निवेशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कार्यान्वयन की दिशा में बढ़ा, जो संगठित विनियमन शिथिलीकरण, संस्थागत समन्वय और उद्योग सहभागिता के सतत प्रयासों के प्रभाव को दर्शाता है।  

 

व्यवसाय सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) और जिला सुधार

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पारदर्शिता बढ़ाने, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सेवा प्रदान करने में सुधार लाने के लिए सरकार 2015 से व्यवसाय सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) लागू कर रही है। अब तक  बीआरएपी के 7 संस्करण पूर्ण हो चुके हैं, और 11 नवंबर 2025 को आठवां संस्करण, बीआरएपी 2026, औपचारिक रूप से शुरु किया गया। सुधारों को स्थानीय स्तर तक और गहराई से लागू करने के लिए, डीपीआईआईटी ने भी जिला स्‍तर पर व्यवसाय करने में सुगमता को मजबूती प्रदान करने के लिए व्यवसाय सुधार कार्य योजना (डी-बीआरएपी) शुरू की है आर्थिक समीक्षा 2025-26 में बीआरएपी के तहत राज्यों की कुछ विशिष्ट उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है।   

बीआरएपी के अंतर्गत राज्‍यों की उपलब्धियाँ  

 

 

केरल

  • व्यवसाय पंजीकरण को सुव्यवस्थित किया गया
  • भूमि और कर प्रक्रियाओं को डिजिटाइज किया गया
  • पर्यावरणीय अनुमोदनों को सरल बनाया गया और उन्नत नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना, कार्बन-न्यूट्रल ग्राम पंचायतें, और जलाशयों का पुनर्जीवन

 

 

तमिलनाडु

  • एकल-खिड़की प्रणाली  शुरु की गई
  • भूमि सुधारों के साथ अनुमोदनों को डिजिटाइज किया गया,जबकि सोलर पार्क, डीकार्बोनाइजेशन योजनाओं को बढ़ावा दिया गया
  • औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की गई

 

 

आंध्र प्रदेश

  • एकल-खिड़की औद्योगिक अनुमोदन लागू किए गए
  • ऑनलाइन भूमि पंजीकरण
  • ई-पर्यावरणीय अनुमोदन
  • ऑनलाइन कंसेंट प्रबंधन और निगरानी प्रणाली का विस्तार किया गया, जिससे कंपनियाँ स्वीकृति के लिए आवेदन कर सकें और अनुमोदनों की डिजिटल ट्रैकिंग कर सकें  

 

व्यवसाय करने में सुगमता में सहायता करने वाले संरचनात्मक सुधार

ईओडीबी में सहायता करने वाले संरचनात्मक सुधारों का ध्यान नियामक सरलीकरण, संस्थागत समेकन और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन पर रहा है, जो वित्तीय बाजारों, कराधान, श्रम, बैंकिंग और पर्यावरणीय नियमन जैसे क्षेत्रों में लागू किए गए हैं। बीमा, प्रतिभूतियों, जीएसटी, श्रम संहिताओं और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग में सुधार के साथ क्षेत्रीय नियामकों द्वारा हाल ही में किए गए उपायों  का उद्देश्य अनुपालन का बोझ कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और वित्तीय पहुँच सुधारना है। ये सुधार नियामक निश्चितता को सुदृढ़ करते हैं, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं और एक अधिक कुशल और लचीले व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं

नियामक उपाय

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अपने नियामक ढाँचे का बड़े पैमाने पर पुनर्गठन किया है, जिसके तहत विनियमित संस्थाओं की विभिन्न श्रेणियों के लिए 9,000 से अधिक सर्कुलर और दिशा-निर्देशों को 238 फंक्शन-स्पेसिफिक मास्टर डायरेक्शन्स में समेकित किया गया है। इस पहल के तहत 9,446 सर्कुलर रद्द किए जा रहे हैं, 3,809 सर्कुलर को मास्टर सर्कुलर में समाहित किया गया है, और 5,673 सर्कुलर अप्रचलित माने गए हैं। इस पहल से नियामक स्पष्टता बढ़ती है, अनुपालन बोझ कम होता है और ईओडीबी को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।

सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन)

सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम, 2025 ने बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956, और बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999, के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन किया है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके, बीमे की पहुँच बढ़ाई जा सके, बीमा क्षेत्र के विकास और वृद्धि में तेज़ी लाई जा सके और ईओडीबी को बढ़ाया जा सके। इन प्रावधानों की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि बीमा कंपनियों में 100% तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी गई है, जिससे और अधिक विदेशी निवेशकों के लिए भारत में प्रवेश के द्वार खुले। यह ईओडीबी को इस प्रकार बढ़ावा देता है: 

  • बीमा मध्यस्थों के लिए एक बार पंजीकरण की सुविधा प्रदान करना,
  • बीमा कंपनियों के लिए चुकता इक्विटी पूंजी के शेयरों के हस्तांतरण के लिए आईआरडीएआई अनुमोदन की सीमा को वर्तमान 1% से बढ़ाकर 5% करना,
  • विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए नेट ओन्ड फंड की आवश्यकता को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करना, ताकि अधिक पुनर्बीमाकर्ताओं के प्रवेश को सुविधाजनक बनाया जा सके और देश में बड़ी पुनर्बीमा क्षमता का निर्माण हो सके। 

भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) संशोधन नियम, 2025 को भी 30 दिसंबर 2025 को अधिसूचित किया गया, ताकि बीमा कंपनियों और मध्यस्थों के लिए शर्तों को तर्कसंगत बनाकर व्यवसाय करना सरल बनाया जा सके

क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल (सीएएम)

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2025 में एमएसएमई के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर सीएएम  लॉन्च किया। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच, 3.96 लाख से अधिक एमएसएमई  ऋण आवेदन, जिनकी कुल राशि 52,300 करोड़ रुपये से अधिक थी, डिजिटल क्रेडिट अंडरराइटिंग कार्यक्रमों के तहत स्वीकृत किए गए। यह मॉडल निम्नलिखित तरीकों से ईओडीबी को सुधारता है:

  • डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापित डेटा का उपयोग कर स्वचालित ऋण मूल्यांकन सक्षम करना,
  • सभी आवेदनों के लिए वस्तुनिष्ठ निर्णय का उपयोग करना तथा बैंक के मौजूदा एमएसएमई उधारकर्ताओं और बैंक के नए एमएसएमई उधारकर्ताओं दोनों के लिए मॉडल-आधारित सीमा आकलन करना,
  • क्रेडिट गारंटी योजनाओं को एकीकृत करना

श्रम सुधार

29 केंद्रीय श्रम कानूनों के चार श्रम संहिताओं में समेकन ने अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, अनुमोदन समय सीमाओं को कम करते हुए और विशेष रूप से एमएसएमई के लिए संचालन में अधिक लचीलापन प्रदान करते हुए व्‍यवसाय करने में सुगमता को काफी हद तक बढ़ाया है।

  • संहिताओं ने फैक्ट्री के निर्माण या विस्तार के लिए अनुमति देने की समय सीमा 30 दिन निर्धारित की है और कुल अनुमोदन अवधि को 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया है।
  • इन संहिताओं ने 50 से कम कर्मचारियों वाले ठेकेदारों को लाइसेंसिंग से मुक्त करते हुए और इलेक्ट्रॉनिक एकल पंजीकरण, एकल रिटर्न, और पूरे भारत के लिए पांच वर्षों के लिए वैध एकल लाइसेंस लागू करते हुए, जिसमें स्वीकृति मान्‍य मानी जाएगी के साथ संविदा श्रमिकों के नियमों को सरल बनाया है  
  • इन संहिताओं ने छह मौजूदा बोर्डों को एकल राष्ट्रीय त्रिपक्षीय बोर्ड  से बदल दिया, अपराधों के लिए ग्रेडेड मौद्रिक जुर्माने की अनुमति दी, आपराधिक दंडों  को नागरिक दंड में बदला और कानूनी कार्रवाई से पहले अनुपालन के लिए 30 दिन की नोटिस अवधि को अनिवार्य कर दिया
  • उन्होंने बर्खास्‍तगी, छंटनी, बंद और स्टैंडिंग ऑर्डर्स के लिए सीमा 300 कर्मचारियों तक बढ़ा दी, जिससे  बिना पूर्व अनुमोदन वाले प्रतिष्‍ठानों को अधिक संचालन लचीलापन मिला।

जीएसटी 2.0

सितंबर 2025 में लागू किए गए जीएसटी सुधारों ने कर स्लैब को सरल बनाकर, मुख्य क्षेत्रों में दरों को कम करके,कर के बोझ को घटाते हुए और मूल्य प्रतिस्पर्धा बेहतर बनाते हुए व्‍यवसाय में सुगमता को सुदृढ़ किया है। सरलीकृत दो-दर संरचना की दिशा में इस कदम ने अनुपालन और लेन-देन की लागत कम की, जबकि दरों को युक्तिसंगत  बनाए जाने ने उत्पादों और सेवाओं की सुलभता बढ़ाई और उद्यमिता को समर्थन दिया।

इसका प्रभाव कर आधार के विस्तार में देखा जा सकता है, क्योंकि पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 में लगभग 60 लाख से बढ़कर नवंबर 2025 तक 1.5 करोड़ से अधिक हो गई, जो अधिक औपचारिककरण को दर्शाती है इसके अलावा, कपड़ा और उर्वरक जैसे श्रम-गहन और कृषि-इनपुट सेक्टरों में उल्‍टे शुल्‍क ढाँचे में संशोधन से लागत और कार्यशील पूंजी पर दबाव कम हुआ, जिससे व्यवसाय संचालन और आसान हुआ

निष्‍कर्ष  

नियामक सरलीकरण, डिजिटलीकरण, और भरोसेमंद शासन के सम्मिलन के साथ भारत का व्‍यवसाय करने में सुगमता से संबंधित ढाँचा लगातार विकसित हो रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्ताव कर, श्रम, वित्त और नियमन में जारी सुधारों के साथ, व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ को कम करने और पूर्वानुमान बढ़ाने के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का संकेत देते हैं। निवेश प्रवाह, उद्यम विकास  और औपचारिककरण में मजबूत रुझान पिछले दशक में निर्मित व्यापक सुधार गति को दर्शाते हैं। ये सभी कदम मिलकर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती प्रदान करते हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं।

संदर्भ  

वित्‍त मंत्रालय

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf

https://www.indiabudget.gov.in/doc/budget_speech.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2206011&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2216047&reg=6&lang=1

https://incometaxindia.gov.in/tutorials/10.mat-and-amt.pdf

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2201280&reg=3&lang=2

https://www.nsws.gov.in/

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संसद

https://sansad.in/getFile/annex/270/AU381_Ff7hlQ.pdf?source=pqars

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU2676_JjlKis.pdf?source=pqals&utm_

पीआईबी मुख्‍यालय  

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2025/dec/doc2025125719501.pdf

केंद्रीय अप्रत्‍यक्ष कर एवं सीमा शुल्‍क बोर्ड

https://www.aeoindia.gov.in/SourceCode/Website/pdf/faq_on_deferred_duty_payment.pdf

पीआईबी शोध

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