प्रधानमंत्री कार्यालय
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राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जवाब


प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में पिछले एक साल में हुई तेज प्रगति को स्पष्ट तौर पर बताया

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी का दूसरा क्वार्टर विकसित भारत के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण होगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर नागरिक महसूस करता है कि देश एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है और उसे पीछे मुड़े बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं के लिए यह अनंत अवसरों का समय है

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे कितनी भी चुनौतियां हों, हमारे पास 140 करोड़ समाधान हैं

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब पीछे नहीं रहेगा, वह अब आगे बढ़कर नेतृत्व करेगा

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 9:44PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। सदन को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में अपनी भावनाएं साझा करना उनका सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि पिछला साल विकसित भारत की यात्रा में तेजी से प्रगति का रहा है, जिसमें हर क्षेत्र और समाज के सभी वर्गों में बदलाव साफ दिख रहा है, क्योंकि देश बहुत तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ने इन विषयों को संवेदनशीलता और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ने मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग, गरीबों, गांवों, किसानों, महिलाओं, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृषि के बारे में विस्तार से बात की और संसद में भारत की प्रगति की आवाज को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि युवा कैसे भारत की ताकत को आगे बढ़ा रहे हैं और इस बात पर जोर दिया कि हर वर्ग की क्षमताओं को व्यक्त किया गया, साथ ही भारत के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास की मजबूत अभिव्यक्ति भी की गई, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है।

श्री मोदी ने आगे कहा कि 21वीं सदी की पहला क्वार्टर खत्म हो गया है और जिस तरह पिछली सदी का दूसरा क्वार्टर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक था, उसी तरह यह दूसरा क्वार्टर भी एक विकसित भारत बनाने में उतना ही शक्तिशाली और तेज गति वाला होगा। उन्होंने कहा कि हर नागरिक महसूस करता है कि देश एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां रुकने या पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं है, बस तेजी से आगे बढ़ना है, लक्ष्य हासिल करना है और उसे पाने के बाद ही चैन की सांस लेनी है, और इसी दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।

भारत के अभी अनुकूल परिस्थितियों के एक दुर्लभ संगम का गवाह बनने का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने इसे एक बहुत ही शुभ संयोग बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां दुनिया के सबसे अमीर देश बूढ़े हो रहे हैं, वहीं भारत एक साथ विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है और तेजी से युवा हो रहा है, जो एक ऐसा देश है जिसकी युवा आबादी बढ़ रही है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के प्रति दुनिया का आकर्षण काफी बढ़ा है और भारत की प्रतिभा को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि भारत के पास सपनों, दृढ़ संकल्प और क्षमता वाले युवा प्रतिभाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसे उन्होंने ताकत का दूसरा आशीर्वाद बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो वैश्विक चुनौतियों का समाधान दे रहा है और उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था में तेज ग्रोथ और कम महंगाई के अनोखे संयोजन की ओर इशारा किया, जो इसकी मजबूती को दिखाता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सरकार को सेवा करने का मौका मिला, तो भारत को 'कमजोर पांच' देशों में गिना जाता था और भले ही, आजादी के समय देश छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन यह 11वें स्थान पर खिसक गया था, लेकिन आज भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हर सेक्टर - विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल - में भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद की दुनिया में, जैसे-जैसे वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है, एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है और निष्पक्ष विश्लेषण से भारत की ओर एक साफ झुकाव दिख रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत कई देशों के लिए एक भरोसेमंद भागीदार और दोस्त बन गया है, जो दुनिया की भलाई में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बन गया है और बड़े देशों के साथ "भविष्य के लिए तैयार ट्रेड डील" कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में नौ महत्वपूर्ण ट्रेड समझौते किए गए हैं, जिसमें 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ "सभी समझौतों की जननी" भी शामिल है। उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को ऐसी स्थिति में छोड़ दिया था जहां कोई भी देश व्यापार समझौता करने को तैयार नहीं था, जबकि मौजूदा स्थिति इसके बिल्कुल उलट है जहां विकसित देश भारत के साथ पार्टनरशिप करने के लिए उत्सुक हैं।

गुजरात में अपने अनुभव को याद करते हुए, जहां वाइब्रेंट गुजरात समिट में जापान पार्टनर देश था, श्री मोदी ने कहा कि आज भारत एक राष्ट्र के तौर पर वैसी ही ताकत दिखा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह तभी संभव है जब आर्थिक शक्ति, नागरिकों की ऊर्जा और एक मजबूत विनिर्माण इकोसिस्टम हो। उन्होंने इन प्राथमिकताओं की अनदेखी करने के लिए वोट-बैंक की राजनीति की आलोचना की और कहा कि विपक्षी सरकारों में विजन, इच्छाशक्ति और विचारों की कमी थी, जिसके कारण देश को नुकसान हुआ।

श्री मोदी ने लोगों को सेवा करने का मौका देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी सरकार की ज्यादातर ऊर्जा पिछली गलतियों को सुधारने और भारत की वैश्विक छवि को फिर से बनाने में लगी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब नीति से चलता है, न कि तदर्थवाद से, और "सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन" के मंत्र ने देश को "रिफॉर्म एक्सप्रेस" पर ला दिया है। उन्होंने विनिर्माण को मजबूत करने, उद्यमियों को सशक्त बनाने और मूल्य वर्धन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संरचनात्मक, प्रक्रिया और नीतिगत सुधारों के बारे में विस्तार से बताया, और घोषणा की कि भारत अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

श्री मोदी ने बताया कि अब वैश्विक सीईओ फोरम भारतीय उद्यमियों को अपने बराबर मानते हैं। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी विदेश में इस बराबरी का अनुभव किया है और गर्व के साथ लौटे हैं। उन्होंने भारत के एमएसएमई नेटवर्क की ताकत पर जोर दिया, जो लंबे समय तक आर्थिक शक्ति देता है और बताया कि विमानों के कई कलपुर्जे भारत के छोटे एमएसएमई बनाते हैं, जिससे उन्हें दुनिया भर में भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों के नतीजे साफ दिख रहे हैं, क्योंकि बड़े देश भारत के साथ व्यापार संबंध बनाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते और अमेरिका के साथ हाल ही में हुए समझौते का जिक्र किया, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तारीफ हुई है। उन्होंने कहा कि ईयू समझौते ने दुनिया को वैश्विक स्थिरता में भरोसा दिलाया, और अमेरिकी समझौते ने गति की भावना को मजबूत किया, ये दोनों ही दुनिया के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा मौकों का सबसे ज्यादा फायदा भारत के युवाओं को मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब वह युवाओं की बात करते हैं, तो इसमें मध्यम वर्ग के युवा, शहरी युवा, ग्रामीण युवा, बेटे और बेटियां सभी शामिल हैं, और इसे टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को अपने युवाओं की ताकत पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि अब उनके लिए वैश्विक बाजार खुल गया है, जिससे हर जगह मौके मिल रहे हैं। श्री मोदी ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और उन्होंने उनसे हिम्मत के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया, क्योंकि देश उनका साथ दे रहा है और दुनिया उनके योगदान का इंतजार कर रही है। प्रधानमंत्री ने भारतीय पेशेवरों, जिनमें देखभाल करने वाले (केयरगिवर्स) भी शामिल हैं, की बढ़ती वैश्विक मांग का जिक्र किया, जिसमें कंपनियां पात्र प्रतिभाओं को भर्ती करने के लिए भारत में खास कार्यालय भी खोल रही हैं, जो दुनिया भर में भारतीय पेशेवरों के लिए खुल रहे बड़े मौकों को दिखाता है।

श्री मोदी ने कहा कि राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है, फिर भी उन्होंने खासकर उन लोगों से जिस स्तर की बहस देखी, वह और बेहतर होनी चाहिए थी जिन्होंने दशकों तक शासन किया है, लेकिन उन्होंने यह मौका गंवा दिया, जिससे यह सवाल उठता है कि देश उन पर कैसे भरोसा कर सकता है। उन्होंने एक सदस्य की बात पर हैरानी जताई जो खुद को गर्व से राजा कहता है और आर्थिक समानता की बात करता है, और सवाल किया कि क्या देश को ऐसे विरोधाभास ही देखने को मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करते हुए उनसे आत्मनिरीक्षण करने को कहा, क्योंकि उनके शासन ने सभी पैमानों पर गिरावट के नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जिससे लोगों का भविष्य अंधेरे में है, जबकि वे दूसरों को भाषण देते हैं। उन्होंने अवैध घुसपैठियों के बचाव की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे घुसपैठिए भारतीय युवाओं को उनके अधिकारों, रोजगार, आदिवासी जमीनों से वंचित करते हैं और बेटों और बेटियों की जान को खतरा पहुंचाते हैं, जबकि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बिना रोक-टोक जारी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों पर दबाव डालते हैं, वे भारत के युवाओं के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और ऐसे कामों को माफ नहीं किया जा सकता।

प्रधानमंत्री ने आगे उन सदस्यों की आलोचना की जिनकी सरकारें भ्रष्टाचार और ज्यादतियों में फंसी हुई हैं, और कहा कि उनके महल नफरत के प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल दशकों तक केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहे हैं, फिर भी उनकी पहचान भ्रष्टाचार और नाकाम शासन की ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आज जब विधेयकों पर चर्चा होती है, तो गर्व से बात की जाती है, लेकिन पहले सौदों पर चर्चा से सिर्फ बोफोर्स जैसे घोटाले सामने आते थे, क्योंकि वे सरकारें सिर्फ अपनी जेबें भरने पर ध्यान देती थीं, नागरिकों की जिंदगी बेहतर बनाने पर नहीं।

श्री मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए इसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले "फोन बैंकिंग" का दौर था, जहां नेताओं के फोन कॉल से करोड़ों रुपये बांटे जाते थे, जबकि गरीबों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था और उन्हें बैंक तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। उन्होंने बताया कि 50% से ज्यादा आबादी ने कभी बैंक के दरवाजे नहीं देखे थे, जबकि उस समय के सत्ताधारी नेताओं ने अपने साथियों को अरबों रुपये दिलवाए, जो उस पैसे को अपनी निजी संपत्ति समझते थे। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार के राज में, और अब विपक्ष गठबंधन द्वारा शासित राज्यों में, बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी। श्री मोदी ने बताया कि जब वह पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो एक विदेशी नेता ने उन्हें सुधार करने से पहले भारत की बैंकिंग प्रणाली का अध्ययन करने की सलाह दी थी, जो उस समय की खराब हालत को दिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछली सरकारों ने एनपीए को पहाड़ों जितना जमा होने दिया और लगातार इस बात पर चर्चा होती रही कि एनपीए संकट से कैसे बचा जाए, जो बैंकिंग प्रणाली की अनदेखी और कुप्रबंधन को दिखाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि चुनौती बहुत बड़ी थी, लेकिन सरकार ने समझदारी से काम लिया और बैंकिंग प्रणाली के सभी हितधारकों को भरोसे में लिया। उन्होंने बताया कि सुधार जरूरी थे और उन्हें हिम्मत के साथ किया गया, जिससे एक पारदर्शी व्यवस्था बनी। उन्होंने कहा कि कई बैंकिंग सुधार किए गए और जो कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे, उन्हें मजबूत बैंकों के साथ मिला दिया गया। श्री मोदी ने याद किया कि एक बुद्धिजीवी ने एक बार लिखा था कि अगर मोदी सरकार यह कर पाती है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा सुधार होगाउन्होंने जोर देकर कहा कि यह काम सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही पूरा कर लिया गया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इसके परिणामस्वरूप, बैंक गहरी समस्याओं से आजाद हुए, उनकी हालत में लगातार सुधार हुआ, और अब वे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बैंकों के स्वस्थ होने से लेनदेन बढ़े, लोगों को फंड मिला और आम नागरिकों को पैसे मिले। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि लोन उन गरीब लोगों तक पहुंचे जिन्हें पहले बैंकों में प्रवेश नहीं मिलता था। उन्होंने मुद्रा योजना की सफलता पर प्रकाश डाला, जो युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने और सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि असली समर्थन देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के जरिए युवाओं को बिना गारंटी के 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन दिए गए, जिससे वे अपने व्यवसाय बढ़ा सके, जिसमें बड़ी संख्या में महिला लाभार्थी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण महिलाएं, स्वयं-सहायता समूहों के जरिए, अब बड़े सपने देख रही हैं और आजादी से खड़ी हैं, जिसमें 10 करोड़ महिलाओं को सीधे वित्तीय मदद मिली है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को काफी कर्ज दिए गए। श्री मोदी ने संतोष जताया कि 2014 से पहले जो एनपीए बहुत ज्यादा थे, वे अब एक प्रतिशत से भी कम हो गए हैं, जिससे बैंकों की सेहत मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि बैंक रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

प्रधानमंत्री ने आगे पीएसयू का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय उन्हें ऐसी संस्थाओं के रूप में देखा जाता था जो फेल होने, ढहने या बंद होने वाली थीं। उन्होंने कहा कि इस सोच को वास्तविकता के आधार पर सफलतापूर्वक बदला गया। श्री मोदी ने उन लोगों की आलोचना की जो पीएसयू के बारे में नकारात्मकता फैलाते हैं और उनके कामों की तुलना शहरी नक्सलियों से की जो पीएसयू गेट के बाहर मजदूरों को गुमराह करते थे। उन्होंने बताया कि एलआईसी, एसबीआई और एचएएल जैसी संस्थाओं को पिछली सरकारों में ठीक से मैनेज नहीं किया जाता था, लेकिन उनकी सरकार ने हिम्मत दिखाई और लगातार सुधार लागू किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एलआईसी ने अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दिया है, और जो पीएसयू विपक्ष के शासन में बंद होने की कगार पर थे, वे अब लाभ कमा रहे हैं। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पीएसयू अब मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रहे हैं, रिकॉर्ड रोजगार पैदा कर रहे हैं और देश और विदेश में बड़े ऑर्डर हासिल करके विश्व स्तर पर विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएसयू अब कई देशों के विकास यात्रा में हिस्सा ले रहे हैं, जो इस महत्वपूर्ण 25 साल की अवधि में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति को दिखाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर देश के किसानों को भी धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले 10 करोड़ छोटे किसानों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मानना ​​था कि व्यवस्था चलाने के लिए कुछ बड़े किसानों को संभालना ही काफी है और छोटे किसानों को नजरअंदाज किया गया। श्री मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने छोटे किसानों का दर्द समझा और जमीनी हकीकत को समझते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की। उन्होंने कहा कि कम समय में ही 4 लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे उन्हें नई ताकत मिली है और वे बड़े सपने देख पा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि किसान भारत की उम्मीदों के मुताबिक नतीजे देंगे।

प्रधानमंत्री ने क्रियान्वयन को लेकर हो रही आलोचनाओं पर बात की और कहा कि कुछ सदस्य पहले से ही शिकायतें करने का मन बना चुके थे, जिससे उनका गठबंधन सामने आ गया। उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए साफ किया कि वह सिर्फ सच बता रहे हैं। श्री मोदी ने बताया कि विपक्ष की एक वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री ने खुद माना था कि उन्हें योजना आयोग के साथ काम करने में दिक्कत हो रही थी, जिसने पहाड़ी इलाकों के लिए अलग योजनाएं बनाने से मना कर दिया था। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि काम करने के गलत तरीके को जानने के बावजूद कोई सुधार के कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने बताया कि योजना आयोग दशकों तक ठीक से काम नहीं करता रहा, जिससे 2014 तक लोग परेशान रहे। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने योजना आयोग को खत्म कर दिया और नीति आयोग बनाया, जो अब बहुत तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स (आकांक्षी जिलों) की सफलता पर जोर दिया, जिसे वैश्विक संस्थाएं विकासशील देशों के लिए एक विकास मॉडल के तौर पर देख रही हैं। उन्होंने कहा कि जो जिले कभी पिछड़े और नजरअंदाज किए जाते थे, अब उनमें बदलाव देखने को मिल रहा है। श्री मोदी ने ऐसे जिलों में अधिकारियों को सजा के तौर पर भेजने की पुरानी संस्कृति की आलोचना की, जिससे हालात और खराब हो गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इसे बदलकर युवा, काबिल अधिकारियों को तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया और ठोस कदम उठाए। उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर का उदाहरण दिया, जो कभी एक आकांक्षी जिला था, लेकिन अब बस्तर ओलंपिक्स के लिए पूरे देश में जाना जाता है और विकास उन गांवों तक पहुंच गया है जहां पहली बार बसें देखी जा रही हैं, जिन्हें त्योहारों की तरह मनाया जा रहा है। श्री मोदी ने कहा कि यह बदलाव देश की नई दिशा को दिखाता है, जो पिछले समय की अनदेखी से बिल्कुल अलग है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आकांक्षी जिला इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि सही मायने में क्रियान्वयन का क्या मतलब होता हैउन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, लेकिन उन्होंने खास तौर पर इसका उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता क्रियान्वयन से आए बदलाव को देख नहीं पाते, वे पुराने योजना आयोग के जीप और खच्चर वाले मॉडल में ही फंसे हुए हैं, उन्हें इसके अलावा कुछ नहीं पता। श्री मोदी ने याद दिलाया कि उनके जन्म से पहले ही सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बनाने का सपना देखा था, शिलान्यास श्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था, लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद ही इसका उद्घाटन हुआ, जो पिछली सरकारों की लागू करने में नाकामी को दिखाता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें गुजरात के किसानों के लिए सरदार सरोवर बांध के निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए तीन दिन का उपवास रखना पड़ा था, उन्होंने खुद को जोखिम में डालकर केंद्र सरकार को काम करने के लिए मजबूर किया और आखिरकार इस परियोजना में तेजी आई। उन्होंने गर्व जताया कि आज नर्मदा का शुद्ध पानी कच्छ के खावड़ा तक पहुंचता है, जहां बीएसएफ के जवान तैनात हैं।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वे बिना काम किए, सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए परियोजनाओं की घोषणा करते हैं, दीये जलाते हैं और पत्थर रखते हैं, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस काम की संस्कृति को बदलने के लिए, उन्होंने प्रगति (PRAGATI) नाम का एक तकनीक प्लेटफॉर्म बनाया है, जो रुकी हुई परियोजनाओं की समीक्षा करता है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश, शायद ऊना के लिए संसद में घोषित एक ट्रेन का उदाहरण दिया, जिसका उनके आने तक ड्राइंग भी तैयार नहीं हुआ था, फिर भी चुनावी फायदे के लिए उसकी घोषणा कर दी गई थी। श्री मोदी ने समझाया कि प्रगति के जरिए, उन्होंने जांच की कि परियोजनाएं क्यों अटकी हुई थीं, कौन से विभाग जिम्मेदार थे, राज्यों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा और कुप्रबंधन के कारण लागत 900 करोड़ से बढ़कर 90,000 करोड़ कैसे हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर महीने इन परियोजनाओं की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करके, ऐसी बैठकों के 50 एपिसोड पूरे करके और राज्यों को शामिल करके, उन्होंने प्रगति सुनिश्चित की। उन्होंने गर्व से कहा कि प्रधानमंत्री स्तर पर इस विस्तृत निगरानी के कारण, ₹85 लाख करोड़ की परियोजनाओं को शुरू किया गया और उनमें तेजी लाई गई, जिससे पता चलता है कि असल में क्रियान्वयन का क्या मतलब होता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत रेलवे, सड़कें, सिंचाई और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर सभी पर ध्यान दिया गया।

श्री मोदी ने जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह परियोजना तीन दशकों तक, यानी दो पीढ़ियों तक रुकी रही, लेकिन उनकी सरकार ने इसे पूरा किया। उन्होंने उस वायरल वीडियो का उल्लेख किया जिसमें वंदे भारत ट्रेन बर्फ से ढके नजारों के बीच से गुजर रही थी, और लोग कह रहे थे कि यह विदेश जैसा लग रहा है, लेकिन यह भारत था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह क्रियान्वयन की शक्ति है।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने असम का उल्लेख किया और अरुणाचल और असम को जोड़ने वाले बोगीबील पुल का उदाहरण देते हुए विपक्ष की आलोचना की, जो सालों से रुका हुआ था। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने प्रगति के तहत इसकी समीक्षा की और इसे पूरा किया, जिससे असम और पूरे पूर्वोत्तर को बहुत फायदा हुआ।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार न सिर्फ परियोजनाओं को समय पर पूरा करती है, बल्कि अक्सर तय समय से पहले ही पूरा कर देती है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 तक कुछ सोलर लक्ष्य हासिल करने का वादा किया था, लेकिन उन्हें 2025 तक ही पूरा कर लिया गया। इसी तरह, इथेनॉल के लक्ष्य भी दो से तीन साल पहले ही हासिल कर लिए गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उनकी सरकार के लागू करने की ताकत को दिखाता है, जो वादों से आगे बढ़कर समय से पहले नतीजे देती है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि चुनौतियों और समाधानों के प्रति उनकी पार्टी का नजरिया विपक्ष से बिल्कुल अलग है और इसे आसमान और जमीन जितना बड़ा फर्क बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना ​​है कि 140 करोड़ नागरिक चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम हैं और लोगों पर यही भरोसा लोकतंत्र की असली ताकत है। इसके उलट, उन्होंने बताया कि विपक्ष नागरिकों को ही समस्या मानता है। अतीत का एक उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह एक ऐसी सोच को दिखाता है जहां नागरिकों को समस्या के तौर पर देखा जाता था, जबकि उनकी सरकार का मानना ​​है कि भारत के लोगों में ही 140 करोड़ समाधान मौजूद हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार के लिए नागरिक सहायक पूंजी हैं, भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता और संचालक हैं, और उन्हें समस्या नहीं माना जा सकता।

श्री मोदी ने कहा कि लोगों का अपमान करना विपक्ष की आदत और संस्कृति बन गई है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने हाल ही में भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया और चुनाव के बाद इस्तेमाल किए गए शब्द शर्मनाक थे। उन्होंने कहा कि लोकसभा में भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो पाई, जिसे उन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक पद का गंभीर अपमान बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब एक गरीब, आदिवासी परिवार की महिला सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचती है, तो उसका अपमान करना न केवल उसका अपमान है, बल्कि आदिवासी समुदाय, महिलाओं, संविधान और खुद देश का भी अपमान है।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा की उस दर्दनाक घटना का भी उल्लेख किया, जहां असम के एक सदस्य के अध्यक्ष रहते हुए कागज फेंके गए और लोग मेजों पर चढ़ गए। उन्होंने पूछा कि क्या यह पूर्वोत्तर और उसके नागरिकों का अपमान नहीं था? उन्होंने कहा कि जब आंध्र प्रदेश के एक दलित परिवार का बेटा अध्यक्ष पद पर था, तो उसका भी अपमान किया गया, जो हाशिए पर पड़े समुदायों के प्रति विपक्ष की नफरत को दिखाता है। श्री मोदी ने कहा कि ऐसा लगता है कि विपक्ष असम के लोगों से नफरत करता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि असम के लोगों ने उन्हें धोखा दिया है। उन्होंने भारत रत्न भूपेन हजारिका के प्रति अपार सम्मान का उल्लेख किया, जिनकी आवाज और अभिव्यक्ति ने देश को एकजुट किया और बताया कि उनकी सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। उन्होंने विपक्ष की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने इसका विरोध किया, इसे असम का, देश भर के कला प्रेमियों का और हजारिका की विरासत का अपमान बताया।

श्री मोदी ने उस घटना की भी निंदा की, जिसमें एक विपक्षी नेता ने एक सिख सांसद को "गद्दार" कहा और कहा कि अहंकार अपनी चरम सीमा पर पहुच गया है। उन्होंने बताया कि कई नेताओं ने विपक्ष छोड़ा है, लेकिन इस सिख सांसद को छोड़कर किसी को भी गद्दार नहीं कहा गया, जिसे उन्होंने सिखों, गुरुओं का अपमान और सिख समुदाय के प्रति विपक्ष के गहरे पूर्वाग्रह की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी नागरिक को गद्दार कहना अस्वीकार्य है, खासकर ऐसे परिवार के सदस्य को जिसने देश के लिए बलिदान दिया हो।

प्रधानमंत्री ने इसकी तुलना सदानंदन मास्टर की गरिमा से की, जिन्होंने राजनीतिक बदले की भावना के कारण अपने दोनों पैर खो दिए, लेकिन विनम्रता और बिना किसी कड़वाहट के देश की सेवा करना जारी रखा। उन्होंने उस पल का वर्णन किया जब सदानंदन जी ने अपने पहले भाषण के दौरान सदन में अपना कृत्रिम अंग रखा था, जिसे उन्होंने देश के लिए बहुत दर्दनाक लेकिन प्रेरणादायक बताया। श्री मोदी ने समाज द्वारा सम्मानित एक युवा शिक्षक के खिलाफ ऐसी हिंसा के लिए विपक्षी गठबंधन की निंदा की। उन्होंने क्रूर हमले के बावजूद सेवा का अपना संकल्प जारी रखने और नीति निर्माण में योगदान देने के लिए सदानंदन मास्टर की प्रशंसा की और इसे गर्व की बात बताया। उन्होंने यह कहते हुए बात समाप्त की कि ऐसे व्यक्ति बलिदान और सेवा की भावना का प्रतीक हैं और उन्हीं जैसे अनगिनत कार्यकर्ताओं के समर्पण से ही देश को भारत की प्रगति के लिए जीने और काम करने की प्रेरणा मिलती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना, उन्होंने देश के लिए जीना सीख लिया है और एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि युवाओं के लिए मजबूत जमीन तैयार हो सके। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि विपक्ष को कोई पछतावा नहीं है और वे तो यह भी दावा करते हैं कि प्रधानमंत्री राज्यसभा में रोए थे, जो दिखाता है कि वे किस तरह के मूल्यों और सोच के साथ बड़े हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 से, चाहे विपक्ष में हों या 2004 से सत्ता में, और 2014 में संसद में आने के बाद से, 25 सालों में एक भी सत्र ऐसा नहीं गुज़रा जब विपक्ष ने उन्हें गाली न दी हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया, पूर्वोत्तर में शांति और विकास लाया, पाकिस्तानी आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया, ऑपरेशन सिंदूर चलाया, देश को माओवादी आतंक से आजाद कराने के लिए साहसिक कदम उठाए और तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षर की गई अन्यायपूर्ण सिंधु जल संधि को रोक दिया। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष की असली समस्या यह है कि वे यह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि वह इस पद तक कैसे पहुंचे और उनकी लगातार मौजूदगी से उनकी निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मानना ​​है कि लोकतंत्र और संविधान का कोई मतलब नहीं है, वे मानते हैं कि प्रधानमंत्री की कुर्सी उनके परिवार की विरासत है, और कोई और उस पर बैठ नहीं सकता।

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि देश ने विपक्ष को दशकों तक मौके दिए, लोगों ने उन पर अपना भविष्य भी दांव पर लगा दिया, लेकिन उन्होंने गरीबी हटाने के नारों से देश को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि हर विपक्षी प्रधानमंत्री ने लाल किले से गरीबी हटाने की बात की, फिर भी किसी ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उनके नारे खोखले ही रहे। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने गरीबों को सशक्त बनाने का रास्ता चुना, भारत के गरीबों को सरकारी योजनाओं को समझने और अपनाने के लिए सलाम किया और अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के उनके प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने सरकार की नीयत पर गरीबों के भरोसे का जश्न मनाया और कहा कि 25 करोड़ परिवारों ने गरीबी को हराया और निराशा से बाहर निकले और प्रगति में भागीदार बने। उन्होंने इन 25 करोड़ नागरिकों को सलाम किया जिन्होंने उम्मीद पाई और देश के साथ चलने के लिए खड़े हुए।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 से पहले, रेलवे क्रॉसिंग पर सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती थी, स्कूल बसों के टकराने की दुखद घटनाएं होती थीं और बच्चों की जान चली जाती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिना गार्ड वाली रेलवे क्रॉसिंग की समस्या को हल करना कोई असंभव काम नहीं था, फिर भी किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जब तक कि उनकी सरकार ने उन सभी को बंद नहीं कर दिया, जिससे अनगिनत जानें बच गईं।

श्री मोदी ने आगे बताया कि 2014 से पहले, 18,000 गांवों ने कभी बिजली नहीं देखी थी, कभी बल्ब या रोशनी के बारे में नहीं सुना था। 2014 में जिम्मेदारी मिलने के बाद, उनकी सरकार उन गांवों में रोशनी लेकर आई।

प्रधानमंत्री ने आगे याद दिलाया कि पहले बार-बार सीमाओं पर कमी की खबरें चर्चा में आती थीं-गोला-बारूद नहीं, बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं, सैनिक बिना सही जूतों के बर्फ में खड़े रहते थे। श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने सैनिकों के लिए देश का खजाना खोल दिया और उन्हें जो कुछ भी चाहिए था, वह सब देने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री एक बार संसद में एन्सेफेलाइटिस की वजह से मरने वाले अनगिनत बच्चों के बारे में बात करते हुए रो पड़े थे, यह एक ऐसा संकट था जिसे पिछली सरकारों ने कभी हल करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने आगे कहा कि ट्रेकोमा, एक ऐसी बीमारी जिसने वैज्ञानिक तरक्की के बावजूद लोगों की आंखों की रोशनी छीन ली थी, उसे भी नज़रअंदाज किया गया। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार ने देश को एन्सेफेलाइटिस से आजाद कराया और ट्रेकोमा से आंखों को बचाया, जो समाज के लिए संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और जीने और बलिदान देने के संकल्प को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह समर्पण, लोगों के लिए यह लगातार मेहनत, उनके विरोधियों को परेशान करती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारें रिमोट कंट्रोल से चलती थीं, लेकिन उनकी सरकार भी रिमोट से चलती है - लेकिन वह रिमोट भारत के 140 करोड़ नागरिक, उनके सपने, उनकी आकांक्षाएं और युवाओं का संकल्प है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता सुख का रास्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है और मुद्रा योजना का उदाहरण दिया जिसने स्वरोजगार के जरिए लाखों लोगों को सशक्त बनाया। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने कभी स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा नहीं दिया, उन्हें कुछ सौ स्टार्टअप्स के बारे में ही पता था, जबकि उनकी सरकार ने 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि सफलता लोगों का दिल जीत लेती है। श्री मोदी ने उन दिनों को याद किया जब बीएसएनएल का मज़ाक उड़ाया जाता था, लेकिन उनकी सरकार में एक स्वदेशी 4जी स्टैक स्थापित किया गया और भारत ने दुनिया में सबसे तेज गति से 5जी लॉन्च किया, जिससे संचार तकनीक और नवाचार को प्रोत्साहन मिला।

श्री मोदी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि चोरी उनका खानदानी पेशा है, यहां तक ​​कि उन्होंने एक गुजराती—महात्मा गांधी का सरनेम भी चुरा लिया। उन्होंने कहा कि भारत के लोग इतने समझदार हैं कि वे ऐसे धोखे को करारा जवाब देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार एक विकसित भारत का सपना देखती है, जो अब लोगों की ऊर्जा से एक राष्ट्रीय संकल्प बन गया है। उन्होंने कुछ सदस्यों की निराशा पर हैरानी जताई जो 2047 के विजन पर सवाल उठा रहे थे और उन्हें याद दिलाया कि स्वतंत्रता सेनानियों ने यह जाने बिना बलिदान दिया कि आजादी उनके जीवनकाल में मिलेगी या नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे विजन और बलिदान के बिना भारत को कभी आजादी नहीं मिलती।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे संदेह करने वालों ने यह कहते हुए डिजिटल इंडिया, फिनटेक और यूपीआई का मजाक उड़ाया था कि गरीब लोग कभी भी मोबाइल फोन पर लेन-देन नहीं कर पाएंगे। तीन साल के अंदर, भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया और उन्होंने कहा कि असली जवाब लोगों के हाथों में मोबाइल फोन में है, भाषणों में नहीं। उन्होंने बताया कि विपक्ष के समय में, "भारत ने मौका गंवा दिया" यह मुहावरा आम था, जो छूटे हुए अवसरों का प्रतीक था। आज, उन्होंने घोषणा की, भारत कोई मौका नहीं गंवा रहा है, बल्कि अब वह आगे बढ़कर नेतृत्व करेगा।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एक उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए वर्तमान को उज्ज्वल बनाने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है। उन्होंने समझाया कि उनकी सरकार पांच-वर्षीय चक्रों में योजनाएं बनाती है, वार्षिक बजट तैयार करती है, और चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि 2047 तक एक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए दिशा तय करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन राष्ट्र शाश्वत है और उनका मिशन युवाओं को एक समृद्ध भारत सौंपना है। उन्होंने कहा कि जब वह आज बच्चों को देखते हैं, तो वह उन्हें एक मजबूत भारत सौंपने का सपना देखते हैं ताकि उनके काम में संतोष मिल सके।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत हर क्षेत्र– अंतरिक्ष, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, महासागर, जमीन, आसमान और बाहरी अंतरिक्ष – में नई ऊर्जा और उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई मिशन में की गई पहलों का उल्लेख किया, जिनके बारे में अब दुनिया मानती है कि भारत इनमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं पर ध्यान दे रहा है, जो भू-राजनीतिक हथियार बन गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश को कभी भी दूसरों के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अनगिनत परियोजनाएं विदेशी निवेश आकर्षित कर रही हैं क्योंकि अब दुनिया भारत की जमीन में अपना भविष्य देखती है, भारत की प्रतिभा पर भरोसा करती है और अपने उज्ज्वल भविष्य को भारत के आशाजनक रास्ते से जोड़ती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां कुछ लोग यह समझने में नाकाम रहते हैं कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की बात क्यों करता है, वहीं दुनिया समझती है कि भारत ने सही दिशा चुनी है और वैश्विक स्तर पर चर्चाएं "भारत ने मौका गंवा दिया" से बदलकर "हमें भारत पहुंचने में देर नहीं करनी चाहिए" हो गई हैं।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाला समय भारत, खासकर युवाओं के लिए, अवसरों से भरा है, और इन संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने नागरिकों को आमंत्रित किया और सांसदों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों को गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करें और साथ ही, जोर दिया कि अवसरों की निरंतरता बिना किसी समझौते वाले मानकों पर निर्भर करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन नवाचार, शोध और मटीरियल अपग्रेड के जरिए गुणवत्ता में लगातार सुधार होना चाहिए, ताकि भारत को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता के लिए पहचाना जाए। उन्होंने नागरिकों से बिना किसी समझौते वाली गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उनका साथ देने की अपील की और घोषणा की कि दुनिया "मेड इन इंडिया, मेड इन भारत" की तारीफ करेगी।

प्रधानमंत्री ने विपक्षी साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में उन्होंने उन्हें पांच-छह बार बोलने से रोकने की कोशिश की थी, क्योंकि वे जानते थे कि एक बार जब वह बोलना शुरू करते हैं, तो रुकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अनुभव से यह सीख मिल गई है कि ऐसी कोशिशों से कोई फायदा नहीं होता और उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझ आगे भी बनी रहेगी। श्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में योगदान देने वाले सभी सांसदों को भी दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि साझा किए गए बहुमूल्य विचार देश की प्रगति में मदद करेंगे। उन्होंने अंत में माननीय राष्ट्रपति को अभिभाषण के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।

 

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पीके / केसी/ एमपी

 


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