विधि एवं न्याय मंत्रालय
केंद्रीय सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (एफटीएससी) में बुनियादी ढांचे का समर्थन करने, डिजिटल केस प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने और निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश में फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (एफटीएससी)
प्रविष्टि तिथि:
06 FEB 2026 1:35PM by PIB Delhi
केंद्रीय सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (एफटीएससी) में बुनियादी ढांचे का समर्थन करने, डिजिटल केस प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने और निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
1.न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए (सीएसएस) राज्यों के प्रयासों को केंद्रीय प्रायोजित योजना पूरक बनाती है, जिसमें जिला और अधीनस्थ अदालतों सहित एफटीएससी के लिए कोर्ट हॉल, आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष बनाए जाते हैं। योजना की शुरुआत से उत्तर प्रदेश राज्य को कुल 1,756.41 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई है (31.12.2025 तक), जिसमें से वित्तीय वर्ष 2014-15 से 1,205.11 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। 31.12.2025 तक, उत्तर प्रदेश राज्य में 2,923 कोर्ट हॉल हैं।
2. भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति के साथ निकट समन्वय में संबंधित उच्च न्यायालयों के माध्यम से ई-कोर्ट परियोजना चरण-तीन को लागू कर रही है। डिजिटल केस प्रबंधन को मजबूत करने के लिए, सभी कोर्ट परिसरों में केस इंफॉर्मेशन सॉफ्टवेयर (सीआईएस) 4.0 लागू किया गया है; राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी)मामले की जानकारी का सार्वजनिक उपयोग प्रदान करता है; वादी-पक्ष और वकीलों के लिए ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप तथा न्यायिक अधिकारियों के लिए जस्टआईएस मोबाइल ऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक केस प्रबंधन उपकरण कार्यरत हैं, जिनके क्रमशः 3,54,86,435 और 22,090 डाउनलोड 31.12.2025 तक हो चुके हैं; डिजिटल कोर्ट्स 2.1 को पेपरलेस कोर्ट्स सक्षम करने के लिए विकसित किया गया है और यह पायलट कार्यान्वयन के अधीन है। इसके अतिरिक्त, न्यायिक अनुसंधान और विश्लेषण का समर्थन करने के लिए एआई-आधारित उपकरण 'लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट (लेगआरएए)' विकसित किया गया है।
3. एफटीएससी के क्रियान्वन को मजबूत करने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। कानून एवं न्याय मंत्री महोदय ने पीओसीएसओ अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत समयबद्ध कार्रवाई और समय-सीमाओं का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता के संबंध में माननीय मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के माननीय मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखा है। इसके अतिरिक्त, एफटीएससी के प्रदर्शन को अंतर-राज्य क्षेत्रीय परिषद की बैठकों में नियमित एजेंडा आइटम बनाया जाता है ताकि अंतर-सरकारी समन्वय में सुधार हो और न्याय वितरण को त्वरित किया जा सके।
यह जानकारी कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में दी।
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पीके /केसी/ एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2224419)
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